दोपहर की ढलती धूप, और मीरा का अकेला मन आज किसी तूफ़ान की आहट महसूस कर रहा था। पति दफ्तर गए थे, और घर की खामोशी में उसकी धड़कनें बेतहाशा दौड़ रही थीं। उसने अपनी हलकी नीली साड़ी के पल्लू को थोड़ा और सरकाया, आइने में अपनी आँखों में सुलगती ज्वाला को देखा। आज रोहन आने वाला था, और उनके बीच का अनकहा रिश्ता, जो कुछ हफ़्तों पहले ही अंकुरित हुआ था, आज अपनी पूरी गरमाहट के साथ दहकने वाला था। उसके होंठों पर एक शरारती मुस्कान फैल गई – **शादीशुदा औरत का परपुरुष से गरमा गरम प्यार** का स्वाद कितना मीठा और कितना ख़तरनाक हो सकता है, यह वो आज पूरी शिद्दत से महसूस करने वाली थी।
घंटी बजी और मीरा का दिल जैसे हलक में आ गया। उसने दरवाज़ा खोला। सामने रोहन खड़ा था, उसकी आँखों में वही बेताब भूख थी जो मीरा अपनी आँखों में महसूस कर रही थी। “अंदर आओ,” मीरा ने फुसफुसाते हुए कहा, उसकी आवाज़ में एक अनजानी सी कँपकँपी थी। जैसे ही दरवाज़ा बंद हुआ, रोहन ने उसे अपनी बाहों में खींच लिया। उनके शरीर का पहला स्पर्श बिजली की तरह दौड़ा। मीरा की साड़ी का पल्लू उसके कंधे से फिसल गया, और रोहन ने अपने होंठ मीरा के नर्म होंठों पर रख दिए। यह कोई आम चुंबन नहीं था; यह प्यास था, वर्षों का इंतज़ार था, एक अनियंत्रित ललक थी। मीरा की आँखें बंद हो गईं, और उसने खुद को रोहन के मज़बूत आलिंगन में पूरी तरह से छोड़ दिया।
रोहन के हाथ मीरा की कमर पर थे, कसकर उसे अपनी तरफ़ खींचते हुए। मीरा की उंगलियाँ उसके बालों में उलझ गईं, और वो और गहराई से उसे चूमने लगी। उनकी साँसें तेज़ हो चुकी थीं, और दिल ज़ोर-ज़ोर से धड़क रहे थे। रोहन ने उसे अपनी बाहों में उठाया और सीधा बेडरूम की तरफ़ चल पड़ा। बिस्तर पर हल्के से लिटाकर उसने मीरा के चेहरे से बिखरते बालों को हटाया। “आज तक मैंने कभी ऐसा महसूस नहीं किया, मीरा,” रोहन ने धीमी, भारी आवाज़ में कहा। मीरा ने सिर्फ़ अपनी आँखें खोलीं और उसे देखा, उसकी आँखों में वही इच्छा थी।
धीरे-धीरे, उनके कपड़े एक-एक करके हटते गए, जैसे वर्जित प्रेम की हर परत हट रही हो। मीरा ने अपनी साड़ी खोली, फिर उसका ब्लाउज़ ज़मीन पर गिरा। रोहन ने अपने कमीज़ के बटन खोले, और फिर उसकी जीन्स भी फिसल गई। उनके नग्न शरीर एक-दूसरे से टकराए। त्वचा से त्वचा का स्पर्श इतना उत्तेजक था कि मीरा की साँस अटकने लगी। रोहन ने मीरा को अपने नीचे दबाया, उसके पूरे बदन पर अपने होंठों से निशान बनाते हुए। मीरा की चीख़ें उसके होंठों से दबी रह गईं, पर उसकी आवाज़ रोहन के कानों में मधुघंटियों की तरह बज रही थी।
उनकी उत्तेजना चरम पर थी। रोहन ने धीरे से अपने आप को मीरा में उतारा, और मीरा की देह ने उसे खुशी से स्वीकार कर लिया। यह क्षण, यह **शादीशुदा औरत का परपुरुष से गरमा गरम प्यार**, हर सीमा को तोड़ रहा था। उनके शरीर एक लय में ढल गए, एक-दूसरे में खोकर। बिस्तर की चरमराती आवाज़ और उनके होंठों से निकलती मदहोश कर देने वाली आहें कमरे की खामोशी को चीर रही थीं। हर धक्के के साथ, हर स्पर्श के साथ, वे एक-दूसरे में और गहराई से समाते जा रहे थे। मीरा ने अपनी आँखें खोलीं और रोहन की आँखों में देखा – उसमें वासना थी, प्यार था, और एक अजीब सी तसल्ली थी। वह रोहन की बाहों में पूरी तरह से पिघल चुकी थी, उसे इस पल की कभी न ख़त्म होने वाली लालसा थी।
जब उनकी साँसें थमीं, और शरीर पसीने में लथपथ एक-दूसरे से चिपके थे, तो कमरे में एक सुकून भरी खामोशी छा गई। मीरा ने रोहन की छाती पर अपना सिर रख लिया, उसकी उंगलियाँ उसकी पीठ पर सहला रही थीं। यह सिर्फ़ जिस्मानी मिलन नहीं था; यह आत्माओं का मिलन था, एक ऐसी भूख का शांत होना था जो वर्षों से दबी हुई थी। रोहन ने मीरा के माथे को चूमा। “फिर कब?” उसने धीरे से पूछा। मीरा ने ऊपर देखा और मुस्कुराई, उसकी आँखों में वही शरारत भरी चमक थी। “जब तक यह आग जलती रहेगी,” उसने फुसफुसाया। और फिर, एक और गहरा चुंबन, इस वादे के साथ कि यह **शादीशुदा औरत का परपुरुष से गरमा गरम प्यार** अभी खत्म नहीं हुआ था, बल्कि अभी तो इसकी शुरुआत भर थी।
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