उसकी पसीने से भीगी साड़ी में लिपटी देह ने रोहन के मन में आग लगा दी थी, जब पूजा भाभी छत पर सो रही थी। जेठ की तपती गर्मी थी और घर के बाकी सब सदस्य गहरी नींद में थे, लेकिन रोहन की आँखों में नींद कहाँ? उसकी आँखों के सामने तो बस पूजा भाभी का कामुक चेहरा नाच रहा था।
देर रात का सन्नाटा था, केवल दूर कहीं से किसी कुत्ते के भौंकने की आवाज आ रही थी। रोहन दबे पांव छत पर आया। पूर्णिमा की चाँदनी में नहाया हुआ पूजा भाभी का बदन उसे किसी अप्सरा सा लग रहा था। उसकी साड़ी का पल्लू छाती से सरक कर नीचे खिसक चुका था, और उसके भरे हुए वक्ष पूरी तरह से दिख रहे थे, उठते-गिरते सांसों के साथ। रोहन का दिल ज़ोर-ज़ोर से धड़कने लगा। यह देवर भाभी का छुप-छुप कर रोमांस उनके बीच काफी समय से सुलग रहा था, पर कभी किसी ने इसे शब्दों में बयान नहीं किया था।
पूजा भाभी ने हल्की सी करवट ली, उनकी नींद में हल्की सी आह निकली। रोहन वहीं जम सा गया। क्या वह जाग रही है? या वह सिर्फ़ सपना देख रही है? रोहन का हाथ अनायास ही पूजा भाभी के नंगे पेट की ओर बढ़ गया। उसकी उंगलियों ने जैसे ही उनकी गरम त्वचा को छुआ, पूजा भाभी सिहर उठीं। उनकी आँखें खुलीं, और उन्होंने सामने रोहन को खड़ा पाया। उनकी आँखों में डर नहीं, बल्कि एक अजीब सी चमक थी, जो रोहन के अंदर की आग को और भड़का गई।
“तुम यहाँ…?” पूजा भाभी की आवाज़ फुसफुसाहट में बदल गई।
रोहन ने जवाब नहीं दिया, बल्कि घुटनों के बल उनके पास बैठ गया। उसने धीरे से उनका पल्लू उठाया और उनके उभरे हुए वक्षों को अपने हाथों में भर लिया। “भाभी…” उसकी आवाज़ कामुकता से भरी थी।
पूजा भाभी ने एक गहरी साँस ली, “रोहन, कोई देख लेगा।” उनके होंठ तो ना कह रहे थे, पर उनकी आँखें हाँ कर रही थीं, उनका बदन रोहन की छूअन से उत्तेजित हो रहा था।
“कोई नहीं देखेगा,” रोहन ने उनके कान में फुसफुसाया, और उनके गुलाबी होंठों को अपने होंठों से दबा लिया। यह चुंबन गहरा और भावुक था, जिसमें वर्षों की दबी हुई वासना उजागर हो रही थी। पूजा भाभी ने भी पूरी तरह से समर्पण कर दिया, उनके हाथ रोहन की गर्दन में लिपट गए। उनकी जीभें एक-दूसरे से खेल रही थीं, और उनके जिस्म की आग उन्हें जला रही थी।
रोहन ने उन्हें अपनी बाहों में उठाया और धीरे से सीढ़ियों से नीचे उनके कमरे में ले आया। कमरे की धीमी रोशनी में, उसने धीरे-धीरे उनकी साड़ी खोली, एक-एक गांठ को खोलते हुए। पूजा भाभी के बदन से साड़ी जब पूरी तरह उतर गई, तो उनका गोरा बदन रोहन के सामने था, जो उसकी आँखों में लालच भर रहा था। उनके बदन पर पसीने की बूंदें चमक रही थीं।
रोहन ने अपने कपड़े उतारे। अब दोनों एक-दूसरे के सामने नग्न खड़े थे, उनकी आँखें एक-दूसरे की वासना को निमंत्रण दे रही थीं। रोहन ने उन्हें बिस्तर पर धकेल दिया और उनके ऊपर आ गया। उनके होंठों को फिर से चूमते हुए, रोहन के हाथ उनके वक्षों पर फैल गए, उन्हें सहलाते हुए, चूमते हुए। पूजा भाभी की आहें पूरे कमरे में गूँज उठीं। यह देवर भाभी का छुप-छुप कर रोमांस अब अपने चरम पर पहुँच रहा था।
रोहन के हाथ धीरे-धीरे नीचे सरके, उनके पेट पर, फिर उनकी जांघों पर। पूजा भाभी का बदन काँप रहा था, उनकी आँखें बंद थीं, और वे केवल रोहन की छूअन महसूस कर रही थीं। रोहन ने उनके अंदर प्रवेश किया, और पूजा भाभी की तेज़ चीख उसके मुँह में ही दब गई। दोनों के शरीर एक लय में चलने लगे, उनकी साँसें तेज़ हो गईं, और पसीने की बूँदें एक-दूसरे से मिल गईं।
वे एक-दूसरे में पूरी तरह से खो चुके थे, हर शर्म, हर झिझक को पीछे छोड़ते हुए। उनके जिस्मों का मिलन एक तूफ़ान की तरह था, जो उन्हें दूर कहीं ले जा रहा था। जब वे थक कर चूर हुए, तो एक-दूसरे की बाहों में ढीले पड़ गए। पूजा भाभी ने रोहन के सीने पर सिर रख कर एक गहरी साँस ली।
“रोहन…” उनकी आवाज़ प्रेम और संतोष से भरी थी।
रोहन ने उनके माथे पर एक चुंबन दिया। उन्हें पता था कि यह सिर्फ़ एक शुरुआत है, और उनके इस देवर भाभी के छुप-छुप कर रोमांस का सिलसिला अब कभी ख़त्म नहीं होगा। उनके दिल और बदन अब एक दूसरे से बंध चुके थे, उस रात की चाँदनी की तरह जो सुबह तक धीरे-धीरे धुंधली हो जाएगी, पर उसकी यादें हमेशा ताज़ा रहेंगी।
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