आज फिर सूनी दुपहरी थी, और मीना भाभी का खुला पल्लू रवि की आँखों को बेचैन कर रहा था। घर में सब सो रहे थे या बाहर गए थे, और इस खामोशी में रवि की साँसें तेज होती जा रही थीं। भाभी आँगन में बैठी कुछ दाल बीन रही थीं, उनके बदन से आती हलकी खुशबू रवि को अपनी ओर खींच रही थी। वह कब से इस पल का इंतज़ार कर रहा था, जब वह और उसकी भाभी अकेले हों, जब उनके बीच की अनकही चाहत ज़ुबान पर आ सके।
भाभी का पल्लू बार-बार उनके भरे-पूरे सीने से सरक जाता, और रवि की नज़रें उन पर टिक जातीं। उनकी गोरी गर्दन पर पड़े पसीने की बूँदें, साड़ी में लिपटी उनकी कमर की पतली रेखा, सब कुछ रवि को एक अजीब-सी आग में जला रहा था। “भाभी, मुझे पानी मिलेगा?” रवि ने जानबूझकर धीमी, थरथराती आवाज़ में पूछा। मीना ने पलकें उठाईं, उनकी गहरी आँखों में एक अजीब-सी चमक थी जिसे रवि ने पहले कभी महसूस नहीं किया था। वह जानती थी रवि की आँखों में क्या था, और कहीं न कहीं, उसके अंदर भी वही आग सुलग रही थी।
मीना उठीं, उनके नितम्बों का कसाव साफ़ दिख रहा था, जो रवि को दीवाना बना रहा था। वह रसोई की ओर बढ़ीं, और रवि उनके पीछे-पीछे चला गया। रसोई की ठंडी ज़मीन पर पैर रखते ही मीना को एक सिहरन हुई। रवि ने पीछे से आकर मीना की कमर पर हाथ रख दिया। मीना एकदम से ठिठक गईं, एक गहरी साँस ली। “रवि, क्या कर रहे हो? कोई आ जाएगा।” उनकी आवाज़ में डर कम, उत्तेजना ज़्यादा थी।
“कोई नहीं आएगा भाभी,” रवि ने उनकी गर्दन पर अपना होंठ रख दिया। मीना की साँसें तेज़ हो गईं, उनके पूरे बदन में एक मीठी-सी कसक दौड़ गई। रवि के होंठों ने उनकी गर्दन को चूमना शुरू किया, धीरे-धीरे नीचे उतरते हुए उनकी पीठ पर खुली हुई ज़िप पर पहुँच गए। मीना का बदन ढीला पड़ गया, उनके हाथों से गिलास छूटने को था। रवि ने उनके ब्लाउज की ज़िप खोली, और मीना के चिकने कंधे हवा में नंगे हो गए।
भाभी ने धीरे से घूमकर रवि की आँखों में देखा। उन आँखों में न जाने कितनी प्यास थी, कितनी तड़प। रवि ने उन्हें अपनी बाहों में भर लिया, और उनके सूखे, प्यासे होंठों पर अपने होंठ रख दिए। यह कोई साधारण चुम्बन नहीं था, यह प्यासे की प्यास बुझाने जैसा था, जिसमें मीना ने भी पूरी शिद्दत से साथ दिया। उनके होंठ एक-दूसरे से चिपक गए, उनकी ज़ुबानें एक-दूसरे में उलझ गईं। रवि के हाथों ने मीना के भरे हुए सीने को कसकर दबा लिया, उन्हें महसूस करते हुए एक गहरी आह भरी। मीना ने भी अपनी हथेलियाँ रवि के सिर पर रख दीं और उनके बालों को सहलाने लगीं।
रवि ने मीना को गोद में उठा लिया और उन्हें बेडरूम की ओर ले गया। दरवाजे को अंदर से बंद करते ही, उनके **देवर भाभी का छुप-छुप कर रोमांस** और भी गहरा हो गया। रवि ने मीना को बिस्तर पर लिटाया, उनके शरीर से कपड़े एक-एक करके उतारने लगा। ब्लाउज, पेटीकोट, साड़ी, सब कुछ बिस्तर के कोने में जा गिरा, और मीना का गोरा, सुडौल शरीर रवि के सामने नंगा पड़ा था, साँसों की गर्मी से दहकता हुआ। रवि की नज़रें मीना के गुलाबी निप्पल्स पर टिकीं, जो उसके स्पर्श के लिए छटपटा रहे थे। रवि ने झुककर उन निप्पल्स को अपने मुँह में भर लिया, उन्हें चूसने और काटने लगा। मीना के मुँह से सिसकियाँ निकल गईं, “आह्ह्ह… रवि… और… चूसो…”
रवि धीरे-धीरे मीना के बदन पर नीचे उतरता गया। उनके पेट को चूमा, नाभि को गुदगुदाया, और फिर उनकी जाँघों के बीच पहुँच गया। मीना की आँखें बंद थीं, वह बस इस सुख को महसूस करना चाहती थीं। रवि ने उनकी पैंटी हटाई, और मीना की योनि का गुलाब उनकी आँखों के सामने था, रस से भरा हुआ, पूरी तरह से गीला। रवि ने अपनी ज़ुबान से उस गुलाबी गुलाब को सहलाना शुरू किया, फिर उसे अपने मुँह में भर लिया और चूमने लगा। मीना उछल पड़ी, उनका शरीर ऐंठने लगा। “रवि… मार डालोगे… बस करो…”
लेकिन रवि रुका नहीं, वह लगातार मीना को चरम सुख की ओर ले जा रहा था। जब मीना का शरीर एक तेज़ सिहरन के साथ काँपा, और वह चरम सुख में भीग गईं, तब रवि उनके ऊपर आया। उसने अपने पैंट को उतारा, और उसका कठोर, उत्तेजित लिंग मीना की आँखों के सामने था। मीना ने उसे प्यार से सहलाया। रवि ने मीना की टाँगें फैलाईं, और अपने लिंग को मीना की गीली, गरम योनि के मुँह पर रखा। एक गहरी साँस लेकर, उसने एक धक्का दिया, और उसका पूरा लिंग मीना के अंदर समा गया।
मीना के मुँह से एक चीख़ निकल गई, जो तुरंत एक आह में बदल गई। “आह्ह्ह… रवि… बहुत गहरा…” रवि ने धीरे-धीरे धक्के देने शुरू किए, पहले धीमे, फिर तेज़। बिस्तर चरमराहट की आवाज़ करने लगा, और मीना की सिसकियाँ और आहें कमरे में गूँजने लगीं। रवि उनके सीने को चूस रहा था, उनके होंठों पर अपने होंठ रखे हुए था, और मीना भी उतनी ही शिद्दत से उसका साथ दे रही थीं। उनकी जाँघें रवि की कमर को घेरे हुए थीं, और वे एक-दूसरे में पूरी तरह से खो चुके थे।
जैसे-जैसे रवि के धक्के तेज़ होते गए, मीना की तड़प बढ़ती गई। उनके शरीर पसीने से भीग चुके थे, लेकिन उनकी आँखों में संतुष्टि और वासना की चमक थी। कुछ ही पल में, रवि का शरीर तना, और वह मीना के अंदर ही अपने प्रेम का अमृत उड़ेलने लगा। मीना भी एक बार फिर चरम पर पहुँच चुकी थीं, उनका शरीर काँप रहा था। दोनों एक-दूसरे की बाहों में ढीले पड़ गए, साँसें तेज़ थीं, और उनके बीच की दूरी अब ख़त्म हो चुकी थी। यह उनके **देवर भाभी का छुप-छुप कर रोमांस** का एक नया अध्याय था, एक ऐसा पल जो हमेशा उनकी यादों में रहेगा। यह तो बस शुरुआत थी, उनके देवर भाभी का छुप-छुप कर रोमांस का यह सिलसिला अब थमने वाला नहीं था।
Leave a Reply