आज फिर सूनी दुपहरी थी और पूजा भाभी की साड़ी का पल्लू उनकी कमर से सरककर, उनके भरे हुए वक्षों पर बार-बार आकर टिक रहा था। रोहन की आँखें उन्हीं वक्रों पर जमी थीं, प्यासी, अधीर। जब से बड़े भैया शहर गए थे, घर में एक अजीब सी खामोशी पसर गई थी, और उसी खामोशी में परवान चढ़ रहा था देवर भाभी का छुप-छुप कर रोमांस।
पूजा भाभी किचन में कुछ बना रही थीं, उनकी पीठ रोहन की तरफ थी। उनकी चाल में, उनके उठने-बैठने में एक अनकहा आमंत्रण था जिसे रोहन अपनी नस-नस में महसूस कर रहा था। उसकी जवानी की आग अब बस बेकाबू हो रही थी। उसने सोचा, “आज नहीं तो कब?” और धीरे से उनके करीब चला गया।
“भाभी, कुछ मदद करूँ?” रोहन की आवाज़ में एक भारीपन था जो उसने बड़ी मुश्किल से छिपाया।
पूजा भाभी ज़रा सी चौंकी, फिर मुस्कुराईं। “अरे रोहन, तुम यहाँ? नहीं, सब हो गया है।” उनकी आवाज़ में भी एक हल्की सी कंपकंपी थी। उन्होंने मुड़कर देखा और उनकी नज़रें रोहन की आँखों से जा मिलीं। उस एक पल में, दोनों ने एक-दूसरे की आँखों में एक ही प्यास देखी, एक ही बेताबी।
रोहन ने बिना कुछ कहे, उनकी कलाई पकड़ ली। पूजा भाभी का बदन थरथराया, लेकिन उन्होंने हाथ छुड़ाया नहीं। रोहन ने धीरे से उन्हें अपनी ओर खींचा। किचन की हल्की रौशनी में उनके चेहरे और भी करीब आ गए। पूजा भाभी की साँसें तेज़ हो गईं, उनकी आँखों में एक अजीब सा डर और उतनी ही अजीब सी उत्सुकता थी।
“रोहन, कोई देख लेगा,” उन्होंने फुसफुसाते हुए कहा, लेकिन उनका हाथ रोहन की छाती पर आकर टिक गया था।
“कोई नहीं है भाभी, बस हम दो हैं,” रोहन ने उनके कान के पास आकर कहा, और उनकी गर्दन पर एक गर्म साँस छोड़ दी। पूजा भाभी की आँखें मुंद गईं। रोहन ने अपनी उंगलियों से उनकी साड़ी का पल्लू सरकाया और उनकी कमर पर हाथ फेर दिया। एक सिहरन पूजा के पूरे बदन में दौड़ गई।
रोहन ने उन्हें और करीब खींच लिया। अब उनके बदन एक-दूसरे से चिपक चुके थे। रोहन का मजबूत सीना पूजा के कोमल वक्षों से दब रहा था। रोहन ने झुककर उनके रसीले होंठों को अपने होंठों में भर लिया। पूजा ने पहले तो हल्का सा प्रतिरोध किया, फिर उनकी बाहें रोहन की गर्दन के इर्द-गिर्द कस गईं और वो भी इस मीठे पाप में डूब गईं। उनके होंठ एक-दूसरे को चूसने लगे, एक गहरी, वासना भरी चुम्बन में लिपट गए।
रोहन ने धीरे-धीरे उन्हें बेडरूम की ओर धकेला। बिस्तर पर पहुँचते ही, उन्होंने एक-दूसरे को बिना किसी देरी के ढीला छोड़ दिया। रोहन ने तेज़ी से पूजा की साड़ी खोली, जो उनके जिस्म से फिसलकर ज़मीन पर गिर गई। फिर उनकी चोली और पेटीकोट भी उतार दिए। पूजा के भरे हुए बदन को देखकर रोहन की आँखें चमक उठीं। उन्होंने कभी इतने करीब से पूजा को नहीं देखा था। पूजा ने भी शरमाते हुए रोहन के कपड़े उतार दिए। अब दोनों एक-दूसरे के सामने नग्न थे, उनकी वासना अब चरम पर थी।
रोहन ने पूजा को बिस्तर पर लिटाया और उनके ऊपर आ गया। उनके होंठ फिर मिले, और इस बार चुम्बन गहरा और वासना भरा था। रोहन के हाथों ने पूजा के पूरे बदन को टटोलना शुरू किया, उनके वक्षों को सहलाया, उनकी पतली कमर को दबाया, उनकी जांघों पर हाथ फेरा। पूजा आहें भरने लगीं, उनकी साँसें अनियंत्रित हो चुकी थीं। उन्होंने अपनी टांगें उठाईं और रोहन को अपनी ओर खींच लिया।
रोहन ने एक पल भी इंतज़ार नहीं किया। उसने खुद को पूजा के बीच स्थापित किया और एक ही झटके में उनके अंदर उतर गया। पूजा के मुँह से एक तीखी चीख निकली, जो तुरंत रोहन के होंठों में दब गई। दोनों के बदन एक-दूसरे में पिरोए हुए थे, एक आग में जल रहे थे। रोहन ने अपनी गति बढ़ा दी, और पूजा भी तालमेल बिठाने लगीं। बिस्तर की चरमराहट और उनकी वासना भरी आवाज़ें उस सूने घर में गूंज रही थीं। यह था उनका देवर भाभी का छुप-छुप कर रोमांस, जिसकी लपटें अब तक उनकी आत्मा को जला रही थीं।
कुछ देर तक यही मीठा युद्ध चलता रहा। हर धक्के के साथ, उनकी वासना और गहरी होती जा रही थी। अंत में, एक तीव्र झटके के साथ, दोनों एक साथ चरम सुख को प्राप्त हुए। उनके बदन ढीले पड़ गए, साँसें तेज़ थीं, और उनके चेहरे पर एक अजीब सी शांति और तृप्ति थी। वे देर तक एक-दूसरे से लिपटे रहे, इस क्षण की गर्माहट में डूबे हुए, और जानते थे कि यह तो बस शुरुआत थी, उनके बेकाबू जवानी के मीठे खेल की।
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