दोपहर का सूरज आग बरसा रहा था, और प्रिया भाभी का दिल उससे भी ज़्यादा तपने लगा था। घर में सन्नाटा था, जेठ जी काम पर गए थे और सास-ससुर किसी रिश्तेदार के यहाँ। प्रिया गर्मी से बेहाल, हल्के गुलाबी रंग की सूती साड़ी में रसोई में कुछ काम निपटा रही थी, जब अचानक दरवाज़े पर हल्की सी आहट हुई।
“भाभी, पानी मिलेगा?” रोहन की आवाज़ ने प्रिया को चौंका दिया। उसका देवर, रोहन, अपने बेडरूम से निकला था, शरीर पर सिर्फ़ एक लूज़ टी-शर्ट और नीचे घुटनों तक का बरमूडा। उसके शरीर की बनावट, उसकी आँखों में अक्सर दिखने वाली शरारत भरी चमक, प्रिया को हमेशा से बेचैन करती थी।
प्रिया ने पानी का गिलास बढ़ाया। जब रोहन ने गिलास पकड़ा, तो उसका हाथ अनजाने में प्रिया की उंगलियों से छू गया। एक हल्की सी सिहरन प्रिया के पूरे बदन में दौड़ गई। रोहन की नज़रों में एक पल के लिए ऐसी ललक दिखी, जिसे प्रिया ने नज़रअंदाज़ करने की कोशिश की, पर कर न पाई।
“भाभी, इतनी गर्मी में भी आप काम कर रही हैं? थोड़ा आराम कर लो।” रोहन ने गिलास खाली करते हुए कहा। उसकी आवाज़ में एक अजीब सी गर्माहट थी।
प्रिया ने मुस्कुराने की कोशिश की, “बस थोड़ा सा बचा है, देवर जी।”
“देवर जी…” रोहन ने हल्का सा झुकाव महसूस किया। “आज घर में कोई नहीं है। क्या भाभी भी इतनी अकेली महसूस करती हैं, जितनी मैं?”
प्रिया का दिल धक-धक करने लगा। रोहन की आँखें अब उसकी साड़ी से ढकी हुई छाती पर, फिर उसके होंठों पर और फिर वापस उसकी आँखों में ठहर गईं। उस पल प्रिया ने जाना, उनकी नज़रों में सिर्फ़ हवस नहीं, बल्कि एक गहरी प्यास थी। एक ऐसी प्यास जो सालों से छुप-छुप कर पनप रही थी।
रोहन ने एक कदम आगे बढ़ाया और प्रिया के सामने आकर खड़ा हो गया। उसने अपना हाथ धीरे से प्रिया के कमर पर रख दिया, और एक बिजली का झटका प्रिया के तन-बदन में दौड़ गया। प्रिया ने कांपते हुए कहा, “देवर जी, ये क्या कर रहे हो?”
“जो मेरा दिल कह रहा है, भाभी,” रोहन ने फुसफुसाते हुए कहा। उसकी आवाज़ में वो जादू था जो प्रिया को मदहोश कर रहा था। उसके होंठ प्रिया के कान के पास आए और उसने धीरे से उसके गाल पर एक नरम चुम्बन दिया। प्रिया ने अपनी आँखें बंद कर लीं, उसके शरीर ने विरोध करना छोड़ दिया था। आज उनका ये **देवर भाभी का छुप-छुप कर रोमांस** अपनी चरम सीमा पर पहुँच रहा था।
रोहन ने प्रिया को धीरे से अपनी बाहों में भर लिया। उसके मख़मली होंठ प्रिया के होंठों से टकराए। यह सिर्फ़ एक चुम्बन नहीं था, यह सदियों की प्यास बुझाने का एहसास था। प्रिया ने भी अपने हाथों से रोहन की गर्दन को कस कर पकड़ लिया, और खुद को उस पल में पूरी तरह सौंप दिया। उनकी साँसें एक-दूसरे में घुल-मिल गईं, और कमरे का माहौल और भी कामुक हो गया।
रोहन के हाथ अब प्रिया की कमर से होते हुए उसकी पीठ पर जा पहुँचे, और उसने धीरे से उसके ब्लाउज़ की डोरी खोली। ब्लाउज़ ज़मीन पर गिर गया, और प्रिया की गुलाबी ब्रा में क़ैद उसका भरा हुआ सीना अब रोहन की आँखों के सामने था। रोहन ने धीरे से ब्रा को भी हटा दिया, और प्रिया के आँचल से ढके हुए पर्वतों ने आज खुली हवा में साँस ली। रोहन ने अपने होंठों से उन कोमल छातियों को छूना शुरू किया, और प्रिया के मुँह से दर्द भरी आह निकल गई।
प्रिया की उत्तेजना अब बेकाबू हो रही थी। उसने रोहन की टी-शर्ट उतार दी, और अपने हाथों से उसकी मजबूत पीठ को सहलाने लगी। दोनों अब एक-दूसरे से लिपटकर बेडरूम की तरफ बढ़ने लगे। बिस्तर पर पहुँचते ही रोहन ने प्रिया को धीरे से लिटा दिया। साड़ी का पल्लू कब सरक गया, पता ही नहीं चला। रोहन की नज़रें प्रिया के खुले बदन पर थीं, जो गुलाबी रंग की साड़ी के भीतर से झाँकता हुआ और भी मोहक लग रहा था।
रोहन ने अपनी बरमूडा उतारी, और फिर प्रिया की साड़ी को धीरे से हटा दिया। प्रिया अब सिर्फ़ अपनी पेटीकोट में थी, जो रोहन ने एक झटके में उतार दिया। प्रिया का गोरा, सुडौल शरीर अब रोहन के सामने पूरी तरह से नग्न था। रोहन ने एक गहरी साँस ली और प्रिया के ऊपर आ गया।
उनके जिस्म एक-दूसरे में ऐसे समा गए, जैसे वो सदियों से एक होने का इंतज़ार कर रहे हों। रोहन ने प्रिया की जांघों को फैलाया और धीरे से उसके भीतर प्रवेश किया। प्रिया की एक चीख निकली, पर वो तुरंत एक कामुक आह में बदल गई। कमरे की दीवारों को उनका ये **देवर भाभी का छुप-छुप कर रोमांस** आज एक नया इतिहास रचता दिख रहा था।
दोनों एक-दूसरे में खोए हुए थे। हर एक धक्के के साथ प्रिया की आहें और रोहन के भारी साँसों की आवाज़ें पूरे कमरे में गूँज रही थीं। पसीने से भीगे उनके शरीर एक-दूसरे से चिपक रहे थे, और हर स्पर्श में एक नया रोमांच था। प्रिया ने अपनी टांगें रोहन की कमर पर कस लीं, और खुद को पूरी तरह उसके हवाले कर दिया। उसकी आँखें बंद थीं, और उसके होंठों पर एक संतोष भरी मुस्कान थी।
“आहहह… रोहन…” प्रिया के मुँह से सिसकियाँ निकल रही थीं। रोहन ने अपनी गति और तेज़ की, और प्रिया भी अब पूरी तरह से उसमें घुल-मिल चुकी थी। एक तीखी आह के साथ, दोनों ने एक-दूसरे की बाहों में अपनी मंजिल पा ली। उनके शरीर शांत हुए, पर दिल अभी भी धड़क रहे थे।
रोहन ने प्रिया को कस कर गले लगा लिया। प्रिया ने अपने सिर रोहन के कंधे पर रख दिया और उसके माथे पर एक गहरा चुंबन दिया। दोपहर का सूरज अब भी बाहर आग बरसा रहा था, पर अंदर प्रिया और रोहन के बीच एक नए रिश्ते की गर्माहट पैदा हो चुकी थी। यह सिर्फ़ एक दोपहर का राज़ नहीं, बल्कि एक ऐसे गहरे और छुप-छुप कर चलने वाले रिश्ते की शुरुआत थी, जिसकी प्यास अब और भी बढ़ चुकी थी।
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