उसकी गुलाबी साड़ी में ढका बदन मेरे बेडरूम की खिड़की से दिख रहा था, और मेरी रातें हसीन हो चुकी थीं। मैं रवि था, और पिछले हफ्ते ही मेरे पड़ोस में माया आकर बसी थी। पहली नज़र में ही उसकी साँवली रंगत, उसकी भरी हुई कमर और उसके लहराते बाल मेरे दिल में एक अजीब सी हलचल पैदा कर गए थे। मैंने कई बार उसे बालकनी में सूखते कपड़े डालते देखा था, और हर बार मेरे लंड में एक कसक उठती थी।
शुरुआत में तो बस हाय-हैलो तक ही बात थी, लेकिन एक शाम जब उसके घर की पानी की मोटर ख़राब हो गई, तो उसने मुझसे मदद मांगी। मैं ख़ुशी-ख़ुशी गया। जब मैं मोटर ठीक कर रहा था, वो मेरे पास ही खड़ी थी, उसके पसीने से भीगी हुई सलवार कमीज़ उसके बदन से चिपकी हुई थी, और उसकी छातियों का उतार-चढ़ाव मेरी आँखों में कैद हो रहा था। उस दिन **नई पड़ोसन से बढ़ा नजदीकियां** का एहसास मुझे पहली बार हुआ। मैंने उसे एक बार उसकी नज़रों से बचने की कोशिश की, लेकिन जब हमारी आँखें मिलीं, तो मैंने उसकी आँखों में भी वही नशा देखा जो मेरी आँखों में था।
उस रात जब मैं अपने घर लौटा, तो उसकी यादों ने मुझे पूरी रात सोने नहीं दिया। अगले कुछ दिन हम बेवजह मिलने लगे – कभी दूध के बहाने, कभी सब्ज़ियां लेने जाते हुए। हर मुलाक़ात में हमारे बीच की झिझक कम होती जा रही थी। एक दोपहर तेज़ बारिश शुरू हो गई। मैं अपनी बालकनी में खड़ा था, तभी माया को देखा। वह अपने घर की बालकनी में थी, बारिश की बूंदें उसके चेहरे और खुले बालों पर पड़ रही थीं। उसने मेरी तरफ़ देखा और एक मदहोश कर देने वाली मुस्कान दी।
“बारिश का मज़ा ले रही हो?” मैंने आवाज़ दी।
“हाँ, बड़ा सुकून मिलता है,” उसने कहा, उसकी आवाज़ भीगी हुई थी।
“चाय पीकर और मज़ा आएगा,” मैंने कहा।
वह कुछ देर सोचती रही और फिर बोली, “तुम्हारे घर आ जाऊँ?”
मेरे दिल की धड़कन तेज़ हो गई। “ज़रूर!” मैंने लगभग चीख़कर कहा।
कुछ ही देर में वह मेरे दरवाज़े पर थी। उसने एक पतली सी कॉटन की साड़ी पहनी थी, जो बारिश में थोड़ी पारदर्शी हो चुकी थी। मैं उसकी भीगी हुई देह को देखकर खुद को रोक नहीं पाया। जैसे ही वह अंदर आई, मैंने दरवाज़ा बंद कर दिया। उसके होंठ पहले से ही गुलाब की पंखुड़ियों की तरह दिख रहे थे, और मैं खुद को रोक नहीं पाया। मैंने उसे अपनी बाहों में भर लिया, और हमारे होंठ एक-दूसरे से चिपक गए। यह एक भूखा, प्यासा चुंबन था, जिसमें सालों की प्यास थी। उसके नरम होंठों का स्वाद मेरे लिए स्वर्ग था।
मेरे हाथ उसकी कमर पर चले गए, और फिर धीरे-धीरे ऊपर उठकर उसकी साड़ी को ऊपर सरकाने लगे। उसकी भीगी हुई साड़ी मेरे हाथों में सिमट गई, और मैंने उसे एक झटके में उसके बदन से अलग कर दिया। अब वह सिर्फ पेटीकोट और ब्लाउज में थी, जिसके भीतर से उसके उभरते स्तन साफ़ दिख रहे थे। मैंने उसे अपनी बाहों में उठाया और सीधा बेडरूम में ले गया।
“रवि… यह…” वह फुसफुसाई, उसकी साँसें तेज़ थीं।
“हाँ माया… यही होना था,” मैंने कहा और उसे बिस्तर पर लिटा दिया।
मेरे होंठ उसके गले से होते हुए उसकी भरी हुई छातियों पर आ गए। मैंने उसके ब्लाउज के बटन खोले और उसे भी उतार दिया। उसके भरे हुए, कोमल स्तन मेरे सामने थे। मैंने एक स्तन को अपने मुँह में भर लिया और उसे चूसने लगा, जैसे कोई बच्चा माँ का दूध पीता है। उसके मुँह से दर्द और pleasure की सिसकारियां निकलीं। मेरे हाथ उसके पेटीकोट के कमरबंद पर चले गए, और मैंने उसे एक ही झटके में नीचे खींच दिया। अब माया मेरे सामने पूर्णतः नग्न थी, उसकी कसी हुई योनि मेरे सामने एक अनमोल खज़ाने की तरह दिख रही थी। उसकी हल्की सी झाँटें और गुलाबी योनि मेरे लंड को पागल कर रही थीं।
मैंने अपने कपड़े उतार दिए। मेरे तने हुए लिंग को देखकर माया की आँखें चौड़ी हो गईं, लेकिन उसकी आँखों में कोई डर नहीं था, सिर्फ़ बेताबी थी। मैंने खुद को उसके ऊपर गिरा दिया, हमारे नग्न बदन एक-दूसरे से रगड़ खाने लगे। उसकी गर्म योनि मेरे लंड को महसूस कर रही थी, और मैं और इंतज़ार नहीं कर सकता था। मैंने अपने लिंग को उसकी योनि के द्वार पर रखा, और एक झटके में अंदर धकेल दिया।
“आहहह!” माया की चीख़ निकली, जो तुरंत मेरे होंठों में दब गई।
हम दोनों की साँसें तेज़ थीं। मेरे लंड का हर इंच उसकी योनि की गहराइयों में समा चुका था। हमने धीरे-धीरे अपनी कमरें हिलाना शुरू किया। शुरुआत में धीमी, फिर तेज़, और तेज़। हमारे बदन एक-दूसरे से चिपक रहे थे, पसीना बह रहा था। मेरे लंड की हर thrust उसे एक नई दुनिया में ले जा रही थी। **नई पड़ोसन से बढ़ा नजदीकियां** अब चरम पर थी। उसकी चीखें, उसकी सिसकारियां, उसके हाथ जो मेरी पीठ पर निशान बना रहे थे, सब मिलकर एक मदहोशी का माहौल बना रहे थे। मैं और वो एक-दूसरे में खो चुके थे।
कई मिनटों तक हमारी वासना की आग धधकती रही। मेरे लंड की हर धडकन उसकी योनि की दीवारों को रगड़ रही थी, और मैं महसूस कर सकता था कि वो भी उतनी ही बेक़ाबू थी। अंत में, एक ज़ोरदार चीख़ के साथ, माया का बदन काँप उठा। मेरे लंड ने भी अपने प्रेम रस को उसकी गर्म योनि की गहराइयों में उगल दिया। हम दोनों हाँफते हुए एक-दूसरे से चिपके रहे, हमारे बदन एक-दूसरे में खोए हुए थे। उस पल, मुझे लगा कि मेरी ज़िन्दगी में कभी इतना सुकून नहीं मिला था। हमारी **नई पड़ोसन से बढ़ा नजदीकियां** सिर्फ शारीरिक नहीं, बल्कि रूहानी भी हो चुकी थी। हम दोनों जानते थे कि यह सिर्फ़ शुरुआत थी।
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