Tag: नई पड़ोसन से बढ़ा नजदीकियां
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नई पड़ोसन की देह में उतरता जुनून: रातों का अनकहा सच
रवि की आँखें उस दिन पहली बार प्रिया पर पड़ीं, और मानो पूरे मोहल्ले की हवा में एक अनकही सिहरन दौड़ गई। नई-नई पड़ोसन, प्रिया, जब अपने घर का सामान जमा रही थी, उसकी साड़ी का पल्लू बार-बार सरक जाता, और रवि की नज़रें उसकी गोरी, सुडौल कमर और उठते-गिरते वक्षों पर ठहर जातीं। एक…
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नई पड़ोसन से बढ़ा नजदीकियां: बंद दरवाज़ों की मदहोशी
उसकी गुलाबी साड़ी में ढका बदन मेरे बेडरूम की खिड़की से दिख रहा था, और मेरी रातें हसीन हो चुकी थीं। मैं रवि था, और पिछले हफ्ते ही मेरे पड़ोस में माया आकर बसी थी। पहली नज़र में ही उसकी साँवली रंगत, उसकी भरी हुई कमर और उसके लहराते बाल मेरे दिल में एक अजीब…
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नई पड़ोसन से बढ़ा नजदीकियां: रात की हदों से पार
जैसे ही प्रिया ने अपनी बालकनी से अपने भीगे बालों को झटकते हुए राहुल की ओर देखा, राहुल का दिल एक पल के लिए धड़कना भूल गया। उसकी गहरी, काली आँखें राहुल पर ठहर गईं और एक मंद मुस्कान उसके होंठों पर तैर गई। राहुल को लगा जैसे उसके बदन में एक सिहरन सी दौड़…
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नई पड़ोसन की कामुकता: जब बढ़ी नजदीकियां बेकाबू हो गईं
उसकी आँखों में एक ऐसी आग थी जो मेरी सारी हदों को जला सकती थी। जब से प्रिया मेरे पड़ोस में आई थी, मेरे मन में एक अजीब सी हलचल शुरू हो गई थी। हर सुबह जब मैं उसे अपनी बालकनी से देखता, वह एक अलग ही नशा बिखेरती थी। उसका भरा हुआ बदन, उसकी…
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नई पड़ोसन से बढ़ा नजदीकियां: बिस्तर पर खुली सारी हदें
उसकी साड़ी के पल्लू से झाँकता बदन, मेरे मन में एक तूफ़ान सा ले आया था। मैं समीर, अपने फ्लैट की बालकनी में खड़ा अपनी नई पड़ोसन, राधिका, को अपनी आँखों से निहार रहा था जो अभी-अभी बगल वाले फ्लैट में शिफ्ट हुई थी। उसकी हर अदा में एक अजीब सी कशिश थी, एक ऐसी…
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नई पड़ोसन से बढ़ा नजदीकियां: मेरी रातों की मदहोश मलिका
उसकी खिड़की से आती धीमी रोशनी और कभी-कभी दिखती उसकी साड़ी के पल्लू की झलक, मेरे रातों की नींद हराम कर चुकी थी। माया, हमारी नई पड़ोसन, जब से इस कॉलोनी में आई थी, रवि की दुनिया ही बदल गई थी। हर सुबह बालकनी में खड़ी चाय पीती, उसकी कमर की हल्की सी हलचल, या…
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नई पड़ोसन से बढ़ा नजदीकियां: कामुक रातों का आगाज़
जब से प्रिया मेरे सामने वाले फ्लैट में आई थी, मेरी रातों की नींद और दिन का चैन दोनों उड़ गए थे। उसकी हर चाल, हर अदा, एक कशिश पैदा करती थी जो मुझे उसकी ओर खींचती थी। गुलाबी होठों पर हमेशा एक शरारती मुस्कान, आँखों में गहरा काजल और साड़ी में लिपटा उसका सुडौल…
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नई पड़ोसन से बढ़ा नजदीकियां: छत से बिस्तर तक का सफर
उसकी गीली साड़ी का पल्लू जब हवा में लहराकर मेरे बालकनी के करीब आया, तो मेरे दिल की धड़कनें बेकाबू हो उठीं। यह प्रिया थी, मेरी नई पड़ोसन, जो अक्सर दोपहर में छत पर अपने बाल सुखाती या कपड़े डालती नजर आती थी। उसकी भरी-पूरी काया, पतली कमर और गोल, उठे हुए वक्ष, मुझे हर…
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नई पड़ोसन की मचलती जवानी: एक बेपनाह रात की दास्तान
उसकी साड़ी का पल्लू जब हवा में लहराता, तो मोहन के दिल में जैसे कोई तूफ़ान उठ खड़ा होता। रीना, नई पड़ोसन, मोहक मुस्कान और गठीले बदन की मालकिन, मोहन के घर के ठीक सामने वाले फ्लैट में आई थी। पहले दिन से ही उसकी चाल-ढाल, उसकी आँखें, उसकी हर अदा मोहन के होश उड़ाने…