उसकी साड़ी का पल्लू जब हवा में लहराता, तो मोहन के दिल में जैसे कोई तूफ़ान उठ खड़ा होता। रीना, नई पड़ोसन, मोहक मुस्कान और गठीले बदन की मालकिन, मोहन के घर के ठीक सामने वाले फ्लैट में आई थी। पहले दिन से ही उसकी चाल-ढाल, उसकी आँखें, उसकी हर अदा मोहन के होश उड़ाने लगी थी।
कुछ ही दिनों में छोटी-मोटी बातों से उनकी जान-पहचान हो गई। कभी सुबह दूध लेते हुए, कभी शाम को टहलते हुए। रीना की आवाज़ में एक मीठी खनक थी जो मोहन को भीतर तक गुदगुदा जाती थी। एक दिन रीना के घर की पानी की टंकी में कुछ दिक्कत आ गई। उसने मोहन से मदद मांगी। मोहन तुरंत पहुंच गया। टंकी ठीक करते हुए उसका हाथ गलती से रीना की कमर से छू गया। बिजली का एक जोरदार करंट दोनों के बदन में दौड़ा। रीना की साँसें तेज़ हो गईं, और मोहन ने देखा उसकी आँखों में एक अजीब सी चमक थी। उसी दिन से **नई पड़ोसन से बढ़ा नजदीकियां** का एहसास दोनों को होने लगा था।
शाम को रीना ने मोहन को चाय पर बुलाया। मोहन जानता था कि आज कुछ अलग होने वाला है। वह जैसे ही उसके घर में घुसा, मोगरे की धीमी खुशबू और रीना के बदन की महक ने उसे मदहोश कर दिया। रीना ने एक हल्की सी साड़ी पहन रखी थी, जो उसके बदन से चिपक कर उसके हर उभार को उजागर कर रही थी। चाय पीते हुए उनकी बातें कब गहरी होती गईं, उन्हें पता ही नहीं चला। रीना की बातों में अब एक खुराफाती अंदाज़ था, और मोहन की आँखों में हवस की चमक साफ़ झलक रही थी।
“मोहन, आज मुझे बहुत अकेला महसूस हो रहा है,” रीना ने अपनी उँगलियों से चाय का कप थामते हुए कहा, उसकी आवाज़ में एक कसक थी। मोहन ने अपना कप एक तरफ रखा और धीरे से रीना का हाथ अपने हाथ में ले लिया। उसकी उँगलियों का स्पर्श पाकर रीना का बदन सिहर उठा। “तुम अकेली कहाँ हो, रीना,” मोहन ने उसकी आँखों में देखते हुए कहा, उसकी आवाज़ अब कामुक हो चुकी थी। रीना ने धीरे से अपने हाथ से मोहन के हाथ को जकड़ लिया और फिर उसे खींचकर अपने करीब कर लिया। यह पल था, जब **नई पड़ोसन से बढ़ा नजदीकियां** अपने चरम पर पहुंचने वाली थी।
मोहन बिना कुछ कहे रीना के और करीब खिसक आया। उसने धीरे से रीना के गालों को सहलाया और फिर उसके रसीले होंठों पर अपने होंठ रख दिए। रीना ने जवाब में अपनी आँखें मूँद लीं और अपनी बाँहें मोहन की गर्दन में डाल दीं। वह चुंबन गहरा होता गया, दोनों की ज़ुबानें एक-दूसरे का स्वाद चख रही थीं, उनकी साँसें एक हो रही थीं। मोहन ने रीना को अपनी बाँहों में भर लिया और उसे बिस्तर की तरफ ले गया।
बिस्तर पर गिरते ही उनके कपड़े उतरने लगे। पहले रीना की साड़ी गिरी, फिर उसका ब्लाउज। मोहन ने रीना के सुडौल स्तन देखे और उन पर टूट पड़ा। वह उन्हें चूसने लगा, हल्के से काट रहा था, रीना के मुँह से दर्द और आनंद से सनी चीखें निकल रही थीं। रीना ने भी मोहन की टी-शर्ट फाड़ दी और उसके मजबूत सीने को सहलाने लगी। मोहन ने रीना की पैंटी हटाई और उसके गुलाबी अधरों को देखा। उसकी उँगलियाँ उन पर खेलने लगीं, रीना तड़प उठी। “मोहन… अब नहीं रुका जाता,” उसने फुसफुसाते हुए कहा।
मोहन ने अपना कपड़े हटाए और रीना के ऊपर आ गया। उसने धीरे से अपने औज़ार को रीना के गर्म प्रवेश द्वार पर रखा। रीना ने अपनी टाँगें फैलाईं और उसे भीतर आने का निमंत्रण दिया। एक गहरी साँस लेकर मोहन ने खुद को रीना के भीतर धकेल दिया। रीना की चीख उसके होंठों में दब गई, वह दर्द और चरम आनंद का एक अजीब मिश्रण था। पहली बार का संभोग गहरा और उत्तेजक था। मोहन धीरे-धीरे गति बढ़ाने लगा। उनके बदन एक-दूसरे से टकरा रहे थे, त्वचा से त्वचा रगड़ खा रही थी, पसीने की बूंदें उनके शरीर पर चमक रही थीं। कमरे में सिर्फ उनके जिस्मों की धमक और कामुक आहें गूँज रही थीं।
मोहन की हर धक्के से रीना के भीतर एक लहर उठती थी। वह अपनी कमर उठाकर मोहन का साथ दे रही थी। उनका हर धक्का एक-दूसरे को और करीब ला रहा था, उनकी आत्माएं भी जैसे एक हो रही थीं। कुछ ही देर में दोनों के बदन ने अपना सारा रस निचोड़ दिया। एक तीव्र हच के साथ, मोहन रीना के भीतर ढल गया, और रीना भी एक गहरी चीख के साथ अपने चरम पर पहुंच गई। दोनों हाँफते हुए एक-दूसरे से चिपके रहे। उनके बदन शांत पड़ गए थे, लेकिन दिल अभी भी तेज़ धड़क रहे थे। यह सिर्फ एक रात नहीं थी, यह उनके बीच एक नए, जुनूनी रिश्ते की शुरुआत थी, जिसकी **नई पड़ोसन से बढ़ा नजदीकियां** अब उनकी हसरतों की सीमाएँ पार कर चुकी थी। रीना ने मोहन को कसकर गले लगाया और उसके माथे पर एक गहरा चुंबन दिया। “तुमने मेरी प्यास बुझा दी, मोहन,” उसने धीमे से कहा। मोहन ने उसे अपनी बाँहों में कस लिया, और दोनों एक-दूसरे की बाहों में गहरी नींद में सो गए, सुबह की किरणें कब उनके बिस्तर पर पड़ेंगी, उन्हें कोई खबर नहीं थी।
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