नई पड़ोसन से बढ़ा नजदीकियां: दहकती रात और अतृप्त वासना

उसकी साड़ी के पल्लू से झाँकता बदन, मेरे अंदर एक अनकही प्यास जगा गया। जब से निशा, मेरी नई पड़ोसन, हमारे बगल वाले घर में आई थी, मेरे दिन और रात बस उसी के ख्यालों में कटते थे। उसकी चाल में वो मदहोशी थी, उसकी आँखों में वो निमंत्रण जो किसी भी मर्द को बेचैन कर दे। मैं राहुल, एक आम सा आदमी, अपनी बालकनी में खड़ा उसे रोज़ चोरी-चोरी देखता, उसके हर हाव-भाव में खोया रहता।

एक शाम अचानक लाइट चली गई। पूरा मोहल्ला अँधेरे में डूब गया। मैं टॉर्च लेने अंदर जा रहा था कि दरवाज़े पर हल्की दस्तक हुई। सामने निशा खड़ी थी, डरी हुई सी। “राहुल जी, मेरे घर में पानी नहीं आ रहा और मैं इतनी घबरा गई हूँ। क्या आप थोड़ा देख देंगे?” उसकी आवाज़ में एक मासूमियत थी, जो मेरे अंदर के शैतान को और ज़्यादा उत्तेजित कर रही थी। “ज़रूर निशा जी, आइए अंदर।” मैंने उसे अपने घर बुलाया। अँधेरे में भी उसका जिस्म मेरे करीब आकर एक अजीब सी सिहरन दे रहा था। उसके शरीर से आती धीमी, मादक ख़ुशबू ने मुझे पूरी तरह घेर लिया था।

किचन में पानी का वॉल्व चेक करने के बहाने हम दोनों एक-दूसरे के बेहद क़रीब आ गए। टॉर्च की धीमी रोशनी उसके चेहरे पर पड़ रही थी, और मैंने देखा कि उसकी आँखों में भी वही तड़प थी, जो मेरी आँखों में थी। “निशा जी, मुझे लगता है वॉल्व… अह…” मेरे शब्द लड़खड़ाने लगे। उसने धीरे से अपना हाथ मेरे हाथ पर रख दिया। उसकी त्वचा की गर्मी मेरे अंदर एक आग सी लगा गई। “क्या हुआ राहुल जी?” उसकी आवाज़ अब और ज़्यादा शरारती लग रही थी।

मैंने बिना कुछ कहे उसे अपनी बाँहों में भर लिया। उसका नरम, गरम जिस्म मेरे शरीर से सट गया। उस पल लगा जैसे सदियों की प्यास बुझने वाली थी। उसके होंठ मेरे होंठों पर ऐसे टूट पड़े, जैसे कोई भूखा भेड़िया अपने शिकार पर टूटता है। एक मीठी, ज़हरीली शराब की तरह उसका हर चुंबन मेरे दिमाग पर चढ़ रहा था। उसकी साँसें तेज़ हो गईं और मेरे हाथों ने उसके कमरबंद को ढूँढ लिया। धीमी रोशनी और बढ़ती हुई धड़कनों के बीच, **नई पड़ोसन से बढ़ा नजदीकियां** अब एक ऐसे मोड़ पर आ पहुँची थी जहाँ से पीछे मुड़ना नामुमकिन था।

उसकी साड़ी सरककर ज़मीन पर गिरी और उसका सुडौल बदन चाँदनी में नहाया हुआ मेरे सामने था। उसके स्तन कठोर और उभरे हुए थे, जैसे मुझे निमंत्रण दे रहे हों। मैंने अपने होंठों से उसके गले को चूमा, फिर धीरे-धीरे नीचे उतरते हुए उसकी छाती पर आ टिका। उसने एक गहरी आह भरी और अपने हाथों से मेरे बालों को सहलाने लगी। मेरे कपड़े भी ज़मीन पर आ चुके थे, और अब हम दोनों एक-दूसरे की गरमाहट में लिपटे हुए थे।

मैंने उसे अपनी बाँहों में उठाकर बिस्तर पर लिटा दिया। उसके हर अंग को छूना, चूमना एक दिव्य अनुभव था। उसके पैरों से लेकर जाँघों तक, मेरी उंगलियाँ और होंठ एक खोज पर निकले थे। उसने अपनी आँखें बंद कर ली थीं और उसके मुँह से सिसकियाँ निकल रही थीं। मैं उसके ऊपर झुक गया, हमारी त्वचा एक-दूसरे से रगड़ खा रही थी। हम दोनों एक-दूसरे में ऐसे समा गए, जैसे दो लहरें समंदर में घुल जाती हैं। उसकी चीख़, मेरा कराहना, अँधेरे कमरे में सिर्फ़ हमारी वासना की आवाज़ें गूँज रही थीं। हर धक्के के साथ **नई पड़ोसन से बढ़ा नजदीकियां** अपने चरम पर पहुँच रही थी। पसीना, साँसें और एक-दूसरे में खो जाने की चाहत ने हमें एक कर दिया था।

जब भोर की पहली किरणें खिड़की से झाँकीं और कमरे को हल्का किया, तब हम दोनों एक-दूसरे की बाँहों में बेसुध पड़े थे। रात भर की तड़प और वासना की आग अब शांत हो चुकी थी, लेकिन एक नया रिश्ता जन्म ले चुका था। निशा ने अपनी आँखें खोलीं और मेरी आँखों में देखकर मुस्कुराई। उस मुस्कान में संतोष था, वादा था और आने वाली और भी मदहोश रातों का संकेत था। मैंने भी मुस्कुराते हुए उसे अपने सीने से और कस लिया। **नई पड़ोसन से बढ़ा नजदीकियां** सिर्फ़ एक रात का किस्सा नहीं था, बल्कि एक ऐसी शुरुआत थी जो ज़िंदगी भर की यादें देने वाली थी।

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