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आज की कहानी: होली वाले दिन मेरी आंटी सेक्स स्टोरी

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यकीन मानिए, मेरी आंटी सेक्स स्टोरी होली वाले रोज की है. मैं पड़ोस के भाई आंटी के साथ होली खेलने गया तो भाई शराब पी रहे थे. भी को रंग लगा कर मैं आंटी को रंग लगाने लगा तथा … मैं इंदौर की एक कॉलोनी में रहता हूं तथा ये आंटी सेक्स स्टोरी होली की मस्ती में पड़ोस की आंटी की चुदाई की है. मेरे घर के पड़ोस में एक जोड़ा रहता था, मैं उन्हें साहिल आंटी कहकर बुलाता था. मेरी उम्र 21 साल है … जबकि मेरे पड़ोसी साहिल आंटी की उम्र मुझसे कुछ साल ज्यादा है. राम साहिल की उम्र 28 साल है तथा दिव्या आंटी की उम्र 25 साल है. साहिल किसी आफिस में काम करते थे. वो सुबह जाते, तो शाम को ही वापस आते थे. आंटी हाई सोसाइटी की लड़कियों की तरह थीं. वो सब तरह के कपड़े पहनती थीं. मतलब वो कभी जीन्स टॉप या सलवार सूट पहन लेतीं, तो कभी साड़ी ब्लाउज भी पहन लेती थीं. परन्तु जब वे घर पर फ्री रहती थीं, तो अधिकतर लोअर टी-शर्ट पहनती थीं. आंटी एकदम सेक्सी माल थीं, मैं उन्हें चोदना चाहता था. आंटी के बड़े बड़े चुचे, गदरायी हुई कमर तथा बाहर निकलती हुई गांड मेरे लंड को अकड़ने पर मजबूर कर देती थी. उनकी कातिल जवानी की क्या कहूँ, हाय ऐसी मदमत जवानी थी कि पहली नजर में ही किसी भी बुड्डे का लंड खड़ा कर दे. उन्हीं दिनों होली का त्यौहार आया. होली के रोज आंटी ने बड़े गले का ब्लाउज़ तथा जालीदार साड़ी पहनी थी. उसमें वो काफी सेक्सी माल लग रही थीं. सुबह 10 बजे में उनके घर गया, तो साहिल सोफे पर बैठे दारू पी रहे थे. मैं उनके पास गया तथा उन्हें हैप्पी होली बोल कर मैंने उनके गालों पर रंग लगा दिया. साहिल ने भी मुझे गुलाल लगाया तथा होली की बधाई दी. फिर मैंने साहिल से आंटी का पूछा, तो उन्होंने नशे में लड़खड़ाती आवाज में आंख मारते हुए बोला- तेरी आंटी किचन में हैं, जा जरा ढंग से पोत देना. मैंने भी हंस कर बोला- ठीक है … मैं अभी आंटी को रंग लगा कर आता हूं. मैं हाथ में रंग लेकर किचन की तरफ चल दिया. आंटी किचन में बर्तन जमा रही थीं. मैं दबे पांव उनके पीछे गया तथा जाकर उनके पीछे चिपक गया. मेरा लंड उनकी गांड से टकराने से बिल्कुल कड़क हो गया था, जो आंटी ने भी महसूस कर लिया था. मैं ‘हैप्पी होली’ बोलकर उन्हें रंग लगाने लगा. इतने में उन्होंने मुझे धक्का दिया तथा बाहर को भाग गईं. मैं भी आंटी के पीछे पीछे बाहर आ गया. आंटी बोल रही थीं कि प्लीज मुझे रंग मत लगाओ … मुझे होली खेलना पसंद नहीं है. पर मैंने बोला- आंटी मैं तो आज आपके साथ होली मना कर ही रहूंगा. ये सुनकर आंटी फिर से भागने लगीं तथा मैं भी आंटी के पीछे भागने लगा. इधर साहिल दारू पीकर लगभग टुन्न ही हो गए थे तथा वहीं सोफे पर पसर कर सो गए थे. आंटी हॉल में भाग रही थीं, फिर जैसे तैसे मैंने उन्हें पकड़ ही लिया. परन्तु आंटी हंसते हुए मुझसे छूटने के लिए छटपटा रही थीं. इसी आपाधापी तथा हड़बड़ी में मेरा हाथ आंटी के एक मम्मे पर चला गया. मौके का फायदा उठाते हुए मैंने भी आंटी के दूध को जोर से मसल दिया, जिससे आंटी की आह निकल गयी. वो मेरी तरफ मस्त निगाहों से देखने लगीं. मैंने भी धर पूछा- आनंद आया? आंटी मुस्कुरा दीं. वे मुझसे छूट कर फिर से भागने को हुईं, तो मैंने उनकी साड़ी का पल्लू पकड़ लिया. फिर इसी छटपटाहट में आंटी की साड़ी खुल गयी तथा वो नीचे गिर गईं. अब आंटी सिर्फ ब्लाउज़ ओर पेटीकोट में ही रह गयी थीं. मैंने आंटी को पकड़ा, तो उन्होंने खुद को मुझसे छुड़ा लिया तथा वो सिर्फ ब्लाउज पेटीकोट में ही अपने बेडरूम की तरफ भागने लगीं. मैं भी उनके पीछे पीछे बेडरूम में चला गया. वे दरवाजा लगा ही रही थीं, परन्तु मैंने धक्के से दरवाजा खोल दिया. फिर कमरे में भी आंटी मुझसे बचने के लिए दौड़भाग कर रही थीं. परन्तु मैंने उन्हें पकड़ कर बेड पर पटक ही दिया. अब मैं हवस से भर चुका था तथा मेरे सामने आंटी ब्लाउज़ तथा पेटीकोट में बेड पर चित पड़ी हुई थीं. इस वक्त उनकी जवानी मुझे वासना के सागर में गोते लगाने को मजबूर कर रही थी. मैं आंटी के पास गया तथा जब तक वो उठतीं, मैं उनके ऊपर चढ़ गया. आंटी हंसते हुए बार बार बोले जा रही थीं- आदि नहीं करो … प्लीज़ रहने दो. रंग मत लगाओ. लेकिन मैं कहां मानने वाला था. मैंने पहले तो अच्छे से आंटी के गालों पर रंग लगाया तथा उसके बाद उनके हाथों पर अपने हाथ रगड़ते हुए हाथों में रंग मलने के साथ साथ उनके मक्खन बदन को सहलाने का सुख लेने लगा. मेरा लंड एकदम तन चुका था तथा आंटी के नीचे गड़ा जा रहा था. अब तक आंटी ने भी अपने आपको ढीला छोड़ दिया था. परन्तु वो आने वाले हमले से अनजान भी नहीं थीं. मैंने भी मस्ती मस्ती में आंटी के ब्लाउज़ के ऊपर अपने हाथ रख दिए तथा अन्दर हाथ डाल कर रंग लगाने के बहाने आंटी के बोबे दबाने लगा. इससे आंटी को काफी ग़ुस्सा आ गया, क्योंकि मुझे लगा कि ये मेरे अधिकार क्षेत्र से बाहर का मामला बन गया था. आंटी ने मुझे तुरंत हटने के लिए कहा. परन्तु मैंने उनकी एक न सुनी तथा उनके होंठों पर अपने हाथ रख दिए. आंटी मुझे धक्का देते हुए कह रही थीं- यार समझा करो, तुम्हारे साहिल हैं. अब मैंने उनकी मन की इच्छा को समझ लिया तथा इस बार अपनी पकड़ मजबूत बना ली थी … जिससे आंटी खुद को छुड़ा नहीं पाईं. मैंने कहा- साहिल, दारू के नशे में औंधे हो गए हैं … कोई चिंता करने की जरूरत नहीं है. आंटी ने हॉल में सोफे की तरफ नजर दौड़ाई तो देखा कि उधर साहिल दारू के नशे में टुन होकर सोए पड़े थे. यह देख कर आंटी ने अपना बदन ढीला छोड़ दिया. मुझे भी साहिल का इतना डर नहीं रह गया था. फिर मैंने आंटी का ब्लाउज़ खींच कर फाड़ दिया तथा ब्रा के ऊपर से ही उनके मम्मे दबाने लगा. मैं उन्हें लगातार किस किए जा रहा था. इस बीच एक बात सामने आ गई थी कि आंटी अब एकदम शांत हो गई थीं, वो मुझे हटाने का प्रयास नहीं कर रही थीं. ये महसूस करते ही मैंने उनके होंठों से अपने हाथ को हटा लिया. मैं समझ चुका था कि आंटी चिल्लाएंगी नहीं. मतलब आंटी भी गर्म हो चुकी थीं, तो उन्होंने भी विरोध करना छोड़ दिया था. यह देख कर मैंने भी अपनी पकड़ ढीली की तथा आंटी की ब्रा को निकाल दिया. आंटी के 34 साइज के नंगे देखकर मैं तो जैसे दीवाना हो गया तथा उनके दोनों दूध को मुँह में लेकर बारी बारी से बेतहाशा चूसने लगा. आंटी भी मेरे सर को दबाए हुए अपने मम्मों को चुसवाने का आनंद लेने लगीं. एक मिनट बाद मैं आंटी के ऊपर से हटा तथा नीचे खड़ा हो गया. मैंने एक पल की भी देर नहीं की … झट से अपने पूरे कपड़े निकाल दिए. उसके तुरंत बाद मैंने आंटी का पेटीकोट भी खींचते हुए निकाल दिया. अब सिर्फ आंटी पेंटी में रह गई थीं तथा मैं अंडशौर्ययर में था. मैं आंटी के पास गया तथा नीचे आकर मैंने पहले तो पेंटी के ऊपर से ही आंटी की चूत पर अपना हाथ रखकर चूत सहलाई. आंटी की चूत पूरी तरह से गीली हो चुकी थी. फिर मैंने आंटी की पेंटी निकाल दी. क्या मक्खन चूत थी आंटी की … एकदम गुलाब की पंखुड़ियों की तरह मुलायम. एकदम चिकनी तथा बिल्कुल साफ चूत देख कर मेरी बांछें खिल गईं. आंटी ने भी मुझे इशारा करते हुए अपनी चुत पर हाथ फेरा. मैं समझ गया तथा आंटी की चुत पर टूट पड़ा. मैंने आंटी की चूत को चाटना शुरू कर दिया. करीब 10 मिनट तक चूत चाटने से आंटी अपने चरम पर आ गयी थीं. वो मेरा सर दबाए हुए अपनी गांड उठा कर चुत चुसाई का आनंद ले रही थीं. कुछ ही पलों में आंटी ने एकदम से अकड़ते हुए आवाज की तथा वो गांड उठा कर मेरे मुँह में ही झड़ गईं. मैंने भी सारा रस चाट लिया. आंटी की चूत के रस का अजीब सा स्वाद था. मुझे आनंद आ गया. फिर मैं खड़ा हुआ तथा मैंने अपना अंडशौर्ययर निकाल दिया. आंटी के सामने 8 इंच लंबा तथा 3 इंच मोटा लंड सामने झटके मार रहा था. आंटी मेरा लंड देख कर डर गईं तथा बोलीं- हाय राम … आदि कितना बड़ा लंड है तेरा, तेरे साहिल से दोगुना लम्बा तथा बड़ा मोटा है यार. ये तो मेरी चूत फाड़ ही डालेगा. मैंने लंड हिलाते हुए कहा- आज तो तेरी चूत का भोसड़ा बना दूंगा मेरी जानेमन. मैंने आंटी को लंड चूसने का इशारा किया तो उन्होंने मेरे लंड को पकड़ा तथा धीरे धीरे सहलाने लगीं. पहले तो उन्होंने मेरे लंड के टोपे को अपने मुँह में लिया तथा उस पर अपनी जीभ फिराने लगीं. मुझे भाबी के मुँह से अपना लंड चुसाने में बड़ा आनंद आ रहा था. कुछ ही देर में आंटी मेरा पूरा लंड अन्दर लेने की कोशिश करने लगी थीं. परन्तु पूरा लंड अन्दर जा ही नहीं पा रहा था. करीब 10 मिनट तक लगातार लंड चुसाने के बाद मैं भी झड़ने वाला था, तो मैंने आंटी के मुँह को पकड़ कर मेरा लंड अन्दर घुसेड़ना चालू कर दिया. मेरा लंड आंटी के हलक तक चला गया था. फिर कुछ ही पलों में कोई 8-10 झटकों में मैंने आंटी का मुँह अपने वीर्य से भर दिया. आंटी मेरा सारा रस पी गईं तथा बेड पर लेट गईं. फिर मैं भी आंटी के पास जाकर लेट गया तथा उनके बदन से खेलने लगा. मैं कभी उनके कभी चुचे दबाता, कभी चूसता. कभी निप्पल को हल्के से काट लेता, तो उनकी सिसकारी निकल जाती. वो भी मेरे मुरझाये लंड को सहला रही थीं. उन्होंने मेरे लंड को फिर से चूसना चालू कर दिया तथा कुछ ही पलों में मेरा लंड वापस खड़ा कर दिया. अब मैंने आंटी को नीचे लेटाया तथा खुद उनके ऊपर आकर अपना लंड आंटी की चूत पर सैट कर दिया. आंटी से रहा नहीं जा रहा था, तो आंटी गांड उठा उठा कर लंड को अन्दर लेने की कोशिश कर रही थीं. तभी मैंने एक झटका लगा दिया, तो मेरे लंड का टोपा अन्दर घुस गया. अभी सुपारा ही घुसा था कि आंटी की कराह निकल गयी- उई माँ आदि … मेरी फट गई … उम्म्ह… अहह… हय… याह… मुझे दर्द हो रहा है आदि … आह धीरे करो प्लीज. मैं भी समझ गया कि साहिल का लंड छोटा होने के कारण आंटी की चूत खुली हुई नहीं है. फिर मैंने आंटी के चुचों को चुसकना चालू कर दिया. आंटी कुछ सामन्य सी हुईं, तभी मैंने एक तेज झटका दे दिया. इस बार मेरे लंड का साढ़े पांच इंच हिस्सा आंटी की चूत में घुस गया था. आंटी की जोरदार चीख निकली तथा उनकी आंखों से आंसू निकल गए. दर्द से आंटी छटपटा रही थीं तथा गाली देने लगी थीं. वे बोलीं- हाय कमीने फाड़ दी मेरी चूत … हरामजादे हट जा. वो मुझे धक्का दे रही थीं, परन्तु मैंने एक उन पर अपनी पकड़ मजबूत करके एक झटका तथा दे मारा. इस बार मेरा पूरा लंड अन्दर घुस गया था. आंटी बेहोश जैसी होने लगी थीं. एक पल बाद उनकी सांसें लौटीं, तो आंटी जोर जोर से दर्द के मारे कराहने लगी थीं. मैंने अपने लंड को वही पर रोक कर आंटी को किस करना शुरू कर दिया. मैं कभी उनके मम्मे सहलाता … कभी चूसता. कभी होंठों पर किस करता, तो कभी गले पर किस करता. करीब 10 मिनट बाद आंटी को आराम हुआ, तो उन्होंने अपनी गांड उठाकर चुदाई चालू करने का इशारा कर दिया. बस मैंने धीरे धीरे धक्के देने शुरू कर दिए. मेरे हर धक्के के साथ आंटी की आह निकल जाती. फिर कुछ देर बाद मस्ती में वे भी मुझे जोर जोर से बोले जा रही थीं- आहहहहह आदि … यस फक मी हार्ड. फाड़ दो मेरी चूत … आह आह काफी आनंद आ रहा है आदि. वो चुदाई में आनंद लेते हुए बड़बड़ाए जा रही थीं. मैं भी जोश जोश में उन्हें गाली दे रहा था- ले मेरी रांड आंटी ले … भैन की लौड़ी ले पूरा अन्दर तक ले … साली जाने कब से तुझे चोदना चाहता था. आज मिली है तेरी मक्खन सी चुत … आह ले … आज तो तेरी चूत का भोसड़ा बना दूंगा … तथा जब मन होगा, तब तुझे चोदूंगा. आंटी भी मुझे जोश दिलाते हुए चुद रही थीं. पूरे कमरे में हमारी चुदाई की आवाज गूंज रही थी. फच फच की आवाज आ रही थी. कोई 20 मिनट तक हमारी चुदाई चली. इस दौरान आंटी 2 बार झड़ गयी थीं. फिर 8-10 झटकों के बाद मैं भी आंटी की चूत में ही झड़ गया. इसके बाद आंटी ने मुझे चूमा तथा हम दोनों अलग हो गए. आंटी मेरे लंड से बड़ी खुश हो गई थीं. उन्होंने कहा- अब तो तेरे लंड पर मेरी ही मनमानी चलेगी. मैंने हंस कर आंटी के दूध दबा दिए. बस फिर तो मेरी निकल पड़ी. साहिल ऑफिस के लिए निकलते तथा मैं आंटी के ऊपर चढ़ जाता. एक घंटे आंटी की चुत की सेवा करने के बाद मैं अपने दूसरे कामों में लग जाता. दोस्तो, ये थी मेरी आंटी सेक्स स्टोरी, आपको कैसी लगी … कमेंट करके जरूर बताएं. 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