🔞 18+ Adult Content: Strictly for Adults Only. Free Desi Romance & Erotic Novels.

मजेदार किस्सा: हाय मेरी शुकू शू

Text Size:
प्रेम गुरु की कलम से … मैं जानता हूँ कोई भी युवती हो या फिर औरत पहली बार गांड मरवाने में बड़े नखरे करती है तथा कभी भी आसानी से गांड मरवाने के लिए इतनी जल्दी तैयार नहीं होती। तथा फिर बुंदेलखंड की औरतें तो गांड मरवाने के लिए बड़ी मुश्किल से राज़ी होती हैं। खैर….. मैंने अपनी अंगुली पर थूक लगाया तथा शुकू की गांड के छेद पर लगा दिया। वह तो उछल ही पड़ी। ध्यान देने वाली बात है कि, ……..इसी कहानी से पिछले हफ्ते मुझे भोपाल से आगरा होते भरतपुर लौटना था। मेरी सीट का नंबर ए-14 था। ध्यान देने वाली बात है कि, खिड़की के साथ वाली सीट का नंबर 13 था। यह 13 का आंकड़ा मुझे बड़ा चुभता है। आप तो जानते ही हैं 13 तारीख को मेरी मिक्की हमें छोड़ कर इस दुनिया से चली गई थी। मैं अभी उस नंबर को देख ही रहा था कि इतने में एक 18-19 साल की युवती भागती हुई सी आई तथा उस 13 नंबर वाली सीट पर आकर बैठ गई। ध्यान देने वाली बात है कि, उसके बदन से आती पसीने तथा जवानी की मादक महक से मैं तो अन्दर तक सराबोर हो गया। उसे झांसी तक जाना था। उसने कानों में सोने की छोटी छोटी बालियाँ तथा सर पर काली टोपी पहन रखी थी। मुँह में चुइंगम चबाती हुई तो यह मेरी सिमरन या मिक्की जैसी ही लग रही थी। (आपको “काली टोपी लाल रुमाल” वाली सिमरन तथा “तीन चुम्बन” वाली मिक्की याद है ना) कद लगभग 5’ 2″ होगा। रंग थोड़ा सांवला था पर गोल मटोल चेहरा अगर थोड़ा गोरा होता या आँखें बिल्लोरी होती तो यह सिमरन ही लगती। जीन-पेंट तथा टी-शर्ट पहने छोटे छोटे बालों की पीछे लटकती चोटी तो बरबस मुझे उस पर मर मिटने को ही कह रही थी। उसने शायद जल्दबाजी में गाड़ी पकड़ी थी गर्मी भी थी तथा दौड़कर आने से उसे पसीने भी आ रहे थे इसलिए उसने अपनी टी शर्ट के बटन खोल दिए तथा उसे आगे से पकड़ कर रुमाल से हवा सी करने लगी। अन्दर गुलाबी रंग की ब्रा में कसे उसके मोटे मोटे गोल उरोज देख कर तो मुझे लगने लगा मैं बेहोश ही हो जाऊँगा। असल में, उसकी तेज साँसों के साथ उसके उठते गिरते मोटे मोटे उरोज तो ऐसे लग रहे थे जैसे बारजे (छज्जे) से सुबह की मीठी गुनगुनी धुप उतर रही हो। यकीन मानिए, सबसे कमाल की बात तो उसके भरे हुए गुदाज़ नितम्ब थे। इस उम्र में इतने कसे तथा मांसल नितम्ब तथा वक्ष तो बुंदेलखंड की औरतों के या फिर खजुराहो की मूर्तियों के होते हैं। झाँसी तक का सफ़र बड़े इत्मीनान से कट गया। रास्ते में उसने मुझसे कोई ज्यादा बातचीत नहीं की वो तो बस अपने लैपटॉप में ही उलझी रही। सच कहूं तो, उसकी पतली पतली लम्बी अंगुलियाँ देख कर तो मेरा मन बरबस करने लगा कि अगर यह अपने हाथों में मेरा लंड पकड़ कर ऐसी ही अपनी अँगुलियों से सहलाए तो मैं निहाल ही हो जाऊं। वह झाँसी स्टेशन पर उतर गई। जाते समय उसके मोटे मोटे नितम्बों को लचकता देख कर मैं तो बस ठंडी आहें भरता ही रह गया। मैं अपने प्यारे लाल को शांत करने के लिए बाथरूम जाने ही वाला था कि एक 25-26 साल का शख्स उस सीट पर आकर बैठा गया। उसने नमस्ते किया। यकीन मानिए, फिर बातों बातों में उसने बताया कि वह भी झांसी का रहने वाला है तथा आगरा किसी साक्षात्कार (इंटरव्यू) के लिए जा रहा है। थोड़ी देर में वो खुल गया तथा उसने बताया कि वो सेक्सी कहानियों का बड़ा शौक़ीन है। उसने भी अपनी 18 साल की साली की चुदाई की है तथा वो इस किस्से को कहानी के रूप में लिख कर प्रकाशित करवाना चाहता है पर उसे नहीं पता कि कैसे लिखे तथा कैसे उसे प्रकाशित करवाया जाए। मैं झांसी तथा बुन्देलखंड के बारे में थोड़ा जानने को उत्सुक था। कारण आप जानते ही हैं। उस लौंडिया को देखकर मेरी उत्सुकता बढ़ गई थी। उसने बताया कि वैसे तो बुन्देलखंड तथा झाँसी महारानी लक्ष्मी बाई के लिए प्रसिद्ध है लेकिन बुन्देलखंड यहाँ की एतिहासिक धरोहरों का केंद्र भी है। यहाँ आपको लड़कियों की ज्यादा लम्बाई तो नहीं मिलेगी पर उनके नितम्ब तथा वक्ष तो आँखों को ठंडक तथा ताजगी देने वाले होते हैं। रंग तो इतना गोरा नहीं होता, थोड़ा सांवला होता है पर नैन नक्श काफी कटीले होते हैं। असल में, इसलिए तो इन्हें काला जादू कहा जाता है। आपने खजुराहो की मूतियाँ के रूप में इनका नमूना तो जरुर देखा होगा। कहते हैं एशिया में सबसे सुंदर औरतें या तो अफगान में होती हैं या फिर बंगाल तथा बुंदेलखंड की। आपको बता दूं कि, चुदाई की बड़ी शौक़ीन होती हैं तथा छोटी उम्र में ही चुदना चालू कर देती हैं। पहले तो अक्सर लड़कियों की शादी 15-16 साल में हो जाती थी पर आजकल 18 में कर देते हैं। यहाँ के लड़के भी कद-काठी में तो छोटे होते हैं पर होते गठीले तथा चुस्त हैं। चुदाई ठीक से करते हैं। चूंकि लड़कियों की शादी जल्दी हो जाती है तो 5-7 साल की चुदाई में 3-4 बच्चे पैदा करके वो ढीली पड़ने लगती हैं तो मर्द दूसरी औरतों के पीछे तथा औरतें मर्दों के पीछे लगी ही रहती हैं। जीजा-साली तथा देवर-आंटी में अकसर शारीरिक सम्बन्ध बन जाते हैं इसे आमतौर पर इतना बुरा नहीं माना जाता। हालांकि मैंने अपना असली परिचय नहीं दिया पर उसे यह आश्वासन जरुर दिया कि तुम मुझे अपना किस्सा बता दो मैं उसे कहानी के रूप में लिख कर प्रकाशित करवा दूंगा। उसने जो बताया आप भी सुन लें : मेरा नाम दीपक राय कुशवाहा है। अपने माँ बाप तथा इकलौती पत्नी ज्योति के साथ झाँसी में रहता हूँ। झांसी के एक साधारण परिवार का रहने वाला हूँ इसलिए जो भी ही बोलूँगा सच बोलूँगा तथा लंड चूत तथा चुदाई के सिवा कुछ नहीं बोलूँगा। उम्र 25 साल है। मेरा क़द 5’ 6″ है, गठीला बदन तथा लंड 6″ के आस पास है। मैं दूसरे लोगों की तरह 8-10 इंच के लंड की डींग नहीं मारूंगा। मेरी शादी दो साल पहले ज्योति के साथ हुई है। सालियों के मामले में मैं बड़ा भाग्यशाली हूँ। 3 तो असली हैं बाकी 6-7 आस पड़ोस की भी हैं। मेरी पत्नी से छोटी शुकू शू (18) है उस से छोटी पुष्पा (16) तथा फिर रचना (14) वाह…। क्या सही अनुपात तथा उचित दूरी पर इतनी सुंदर फूलों की क्यारियाँ लगाई हैं। सच कहूं तो, लोग परमात्मा का धन्यवाद करते हैं मैं अपनी सास तथा ससुर का करता हूँ जिन्होंने इतनी मेहनत करके इतने सुंदर फूल बूटे लगाए हैं जिनकी खुशबू से सारा घर तथा आस पड़ोस महकता है। खैर अब मुद्दे की बात पर आता हूँ। असल में, मैं अपनी 3 सालियों की चर्चा कर रहा था। शुकू शू मेरी पत्नी से 2 साल छोटी है। असल में, उसके चूतड़ काफी मस्त तथा कटाव भरे हैं। उसकी मांसल जांघें तथा गोल गोल मुलायम भरे हुए चूतड़ देख कर तो मेरे लिए अपने आप पर संयम रखना बड़ा कठिन हो जाता था। चोली तथा लहंगे में लिपटा उसका गुदाज़ बदन देख कर तो मेरे तन बदन में आग सी लग जाती थी तथा मेरा मन करता कि उसे अभी दबोच लूं तथा उसकी कहर ढाती जवानी के रस की एक एक बूँद पी जाऊं। आपको बता दूं कि, बोबे तो बस दूध के भरे थन हैं जैसे। किसी ने सच कहा है बीवी तथा मोबाइल में एक समानता है कि “थोड़े रोज बाद लगता है कि अगर थोड़ा रुक जाते तो अच्छा मॉडल मिल जाता” खैर मैं इस मामले में थोड़ा भाग्यशाली रहा हूँ। पर शुकू शू की कसी हुई जवानी ने मेरा जीना हराम कर दिया था। मैं किसी तरह उसे चोदना चाहता था। पर मेरी पत्नी इस मामले में बड़ी शक्की है। आप शुकू शू नाम सुन कर चोंक गए होंगे। उसका नाम तो शकुंतला शाहू है पर मैं उसे प्रेम से शुकू शू बुलाता हूँ। सच कहूं तो, मेरी शादी के समय तो वो बिलकुल सूखी मरियल सी लगती थी इसीलिए मैंने उसका नाम शुकू शू रख दिया था। पर इन दो सालों में तो जैसे झांसी की सारी जवानी ही इस पर चढ़ आई है। उसके अंग-अंग में से जवानी छलक रही है। सच ही है जब डाली फ़लों से लद जाती है तो स्वयमेव ही झुकने लग जाती है। मेरा मन करता था कि इन फ़लों का रस चूस लूं। उसके चूतड़ों की गोलाईयां तथा दरार इतनी मस्त तथा लचकदार हैं मानो मेरे लण्ड को अन्दर समाने के लिये आमन्त्रित ही करती रहती थी। जब वो अपने कसे हुए वक्ष को तान कर चलती है तो ऐसे लगता है बेतुआ नदी अपने पूरे उफान पर है। ओह… चलो मैं पूरी बात बताता हूँ : मेरी पत्नी के पहला बच्चा होने वाला था। वो मुझे अपनी चूत नहीं मारने देती थी। मैं हाथों में लंड लिए मुठ मारने को विवश था। पर मुझे तो जैसे भगवान ने छप्पर फाड़ कर सालियाँ दे दी हैं। बेचारी शुकू शु कहाँ बचती। जी हाँ ! मैं शकुंतला की ही बात कर रहा हूँ। जिसे मैं प्रेम से शुकू शु कहा करता हूँ। वो भी मुझे कई बार मज़ाक में दीपक कुशवाहा की जगह कुशू कुशू या दीपक राय की जगह डिब्बे राम या दीपक राग कह कर बुलाती है पर सबके सामने नहीं। अकेले में तो वो इतनी चुलबुली हो जाती है कि जी करता है उसे पकड़ कर उल्टा करूं तथा अपना लंड एक ही झटके में उसकी मटकती गांड में ठोक दूं। वो अपनी तनीषा की देखभाल के लिए हमारे यहाँ आई हुई थी। वैसे तो दो कमरों का मकान है पर हम तीनों ही एक कमरे में सोते थे। शकुंतला साथ में छोटी चारपाई डाल लेती थी। रोज में तो वह लहंगा चुनरी या कभी कभी साड़ी पहनती थी पर रात को सोते समय झीना सा गाउन पहनकर सोती थी। सोते समय कभी कभी उसका गाउन ऊपर हो जाता तो उसकी मखमली जांघें दिखाई दे जाती थी तथा फिर मेरा लंड तो आहें भरने लग जाता था। उसने अपनी थोड़ी पर छोटा सा गोदना गुदवा लिया था उसे देख कर पुरानी फिल्म मधुमती वाली वैजयन्ती माला की बरबस याद आ जाती है। उसके सुगठित, उन्नत, गोल-गोल लुभावने उरोजों के बीच की घाटी, मटकते गुदाज़ नितम्ब, रसीले तथा तराशे हुये होंठ, उसकी कमनीय आँखों में दहकता लावा देख कर कई बार तो मुझे इतनी उतेजना होती कि मुझे बाथरूम में जाकर उसके नाम की मुठ लगानी पड़ती। जी में तो आता कि सोई हुई इस सलोनी कबूतरी को रगड़ दूं पर ऐसा कहाँ संभव था। साथ में ज्योति तथा माँ बापू भी रहते थे। सुबह जब ज्योति उठ कर हवा जल (टॉयलेट) करने चली जाती तो शुकू शू हमारे सेज पर आ जाती तथा मेरी तथा अपने चूतड़ करके सो जाया करती। ध्यान देने वाली बात है कि, उसके मोटे मोटे नितम्ब देख कर मेरा लौड़ा खड़ा हो जाता तथा मैं नींद का बहाना करके अपना लंड गाउन के ऊपर से ही उसके चूतड़ों की दरार से लगा देता। ध्यान देने वाली बात है कि, वो थोड़ा कसमसाती तथा फिर मेरी ओर सरक आती। कई बार वो पेट के बल लेट जाती थी तो उसके उभरे हुए गोल गोल चूतड़ों को देखकर मेरा लंड तो आसमान ही छूने लगता था। जी में आता था अभी इसकी मटकती गांड मार लूं। आपको बता दूं कि, मैं ज्योति की भी गांड मारना चाहता था पर वो पट्ठी तो मुझे उस छेद में अपना लंड क्या अंगुली भी नहीं डालने देती। पता नहीं ये बुंदेलखंड की औरतें भी गांड मरवाने में इतनी कंजूसी क्यों करती हैं। आपको बता दूं कि, कई बार तो शुकू अपनी एक टांग मेरी कमर के ऊपर या टांगों के बीच भी डाल दिया करती थी। पहले तो मैंने ध्यान नहीं दिया पर अब मुझे लगने लगा था कि वो ऐसा जानबूझ कर करती है। आज सुबह जब वो सोई थी तो मैंने धीरे से अपना खड़ा लंड उसकी गांड पर लगा दिया तो वो थोड़ा सा मेरी ओर सरक आई। ध्यान देने वाली बात है कि, मैंने पहले तो उसकी कमर पर हाथ रखा तथा फिर धीरे से अपना हाथ उसके मोटे मोटे स्तनों पर रख दिया। वो कुछ नहीं बोली। अब मैंने धीरे से उसके गाउन के ऊपर से ही उसके स्तन दबाना तथा सहलाना शुरू कर दिया। इतने में ही ज्योति अन्दर आ गई तो शुकू आगे सरक गई तथा गहरी नींद में सोने का बेहतरीन नाटक करने लगी जैसे कुछ हुआ ही नहीं हो। अब तो जैसे मेरे हाथों में कारूँ का खज़ाना ही लग गया था। बस मौके की तलाश तथा इंतज़ार था। तथा फिर जैसे भगवान् ने मेरी सुन ली। असल में, माँ तथा बापू दोनों गाँव चले गए क्योंकि वहां दादाजी की टांग टूट गई थी। मैंने आज ऑफिस से छुट्टी कर ली थी। ज्योति के लिए कुछ दवाइयां लेनी थी सो मैं जब बाज़ार जाने लगा तो शुकू को साथ ले लिया। मैंने रास्ते में उसे पूछा “शुकू अब तो घर वाले तुम्हारी भी शादी करने वाले होंगे ?” “अरे ना बाबा ना… मुझे अभी शादी नहीं करनी ?” “क्यों ?” “शादी के नाम से ही मुझे डर लगता है ?” “कैसा डर ?” “डरना तो पड़ता ही है। आपको बता दूं कि, पता नहीं पहली रात…?” कहते कहते वो शरमा गई। अनजाने में वो बोल तो गई पर बाद में उसे ध्यान आया कि वो क्या बोल गई है। वो तो किसी नाज़ुक कलि की तरह लाज से लाल ही हो गई तथा उसने दुपट्टे को मुँह पर लगा लिया। “हाय … मेरी शुकू शु… प्लीज बताओ ना पहली रात में किस चीज का डर लगता है ?” “नहीं मुझे लाज आती है ?” “चलो पहले से सब सीख लो फिर ना तो लाज आएगी तथा ना ही डर लगेगा ?” “क्या मतलब ?” “अरे बाबा मैं सिखा दूंगा तुम चिंता क्यों करती हो ? तथा फिर सिखाने की फीस भी नहीं लूँगा ? यह तो मुफ्त का सौदा है !” “तनीषा आपकी जान ले लेगी ?” “अरे मेरी भोली शुकू शू तुम्हारी तनीषा मेरी जान तो पहले ही ले चुकी है बस तुम अगर हाँ कर दो फिर देखो तुम्हारा डर कैसे दूर भगाता हूँ ?” “धत… मुझे ऐसी बातों से लाज आती है… अब घर चलो !” “आईईलाआआ …” दोस्तों ! अब तो बस रास्ता साफ़ ही था। ध्यान देने वाली बात है कि, हमने रास्ते में प्रोग्राम बनाया कि रात में ज्योति को दूध के साथ नींद की गोली दे देंगे तथा हम दोनों साथ वाले कमरे में सारी रात धमा चौकड़ी मचाएंगे। किसी को कानों-कान खबर नहीं होगी। सच कहूं तो, रात को लगभग 10:30 बजे शुकू डार्लिंग ज्योति के लिए दूध लेकर आ गई। जब ज्योति के खर्राटे बजने लगे तो हमने आँखों ही आँखों में इशारा किया तथा चुपके से दबे पाँव साथ वाले कमरे में आ गए। मैंने कस कर उसे बाहों में भर लिया तथा जोर जोर से चूमने लगा। मैंने उसके नर्म नाज़ुक होंठों को अपने मुँह में भर लिया तथा चूसने लगा। उसने भी मुझे कस कर अपनी बाहों में भर लिया। उसकी साँसें तेज़ होने लगी। यकीन मानिए, अब मैंने अपनी जीभ उसके मुँह में डाल दी। वो उसे चूसने लगी। कभी मैं उसके होंठों को चूसता चूमता तथा कभी उसके गालों को। वो पूरा साथ देने लगी। फिर मैंने उसके स्तन भी दबाने चालू कर दिए। शुकू अब सीत्कार करने लगी तथा घूम कर अपने चूतड़ मेरी ओर कर दिए। आपको बता दूं कि, मैंने कस कर उसे भींच लिया तथा अपने लंड को उसकी गांड से सटा दिया। यकीन मानिए, मैंने पायजामा पहन रखा था सो उस दोनों गुम्बदों के बीच आराम से सेट हो गया। अपना लंड सेट करने के बाद एक हाथ नीचे उसकी चूत की ओर बढ़ाया। जैसे ही मैंने उसकी चूत पर हाथ लगाया तो उसने अपनी जांघें भींच ली तथा जोर की किलकारी मारी। मैंने पतले तथा झीने गाउन के ऊपर से ही अपनी ऊँगली से उसकी चूत की फांकों को टटोला तथा थोड़ी सी अंगुली अन्दर कर दी। उसके गीलेपन का अहसास होते ही मेरे लंड ने एक जोर का ठुमका लगाया। शुकू तो सीत्कार पर सीत्कार करने लगी। पता नहीं उसे क्या सूझा वो झट से मेरी पकड़ से छुट कर नीचे बैठ गई तथा एक झटके में मेरे पायजामे को नीचे सरका दिया। ध्यान देने वाली बात है कि, मेरा फनफनाता हुआ लंड अब ठीक उसके मुँह के सामने आ गया। यकीन मानिए, उसने झट से उसे मुँह में भर लिया तथा चूसने लगी। मेरे लिए तो यह स्वर्ग जैसे आनंद के समान था। ज्योति ने कभी मेरा लंड इतने अच्छी तरह से नहीं चूसा था। असल में, वो तो बस ऊपर ऊपर से ही कभी कभी चुम्मा ले लिया करती है या फिर उसके टोपे को जीभ से सहला देती है। आपको बता दूं कि, आह… इस अनोखे आनन्द का तो कहना ही क्या था। शुकू जब अपनी जीभ को गोल गोल घुमाती तथा चुस्की लगाती तो मैं उसका सर अपने हाथों में पकड़ कर एक हल्का सा धक्का लगा देता तो मेरा लंड उसके कंठ तक चला जाता। असल में, वो तो किसी कुल्फी की तरह उसे चूसे ही जा रही थी। कभी पूरा मुँह में ले लेती तथा कभी उसे बाहर निकाल कर चाटती। कभी मेरे अण्डों को पकड़ कर मसलती तथा उनकी गोलियां भी मुँह में भर कर चूस लेती। पता नहीं कहाँ से ट्रेनिंग ली थी उसने। मैं कामुक सीत्कारें किये जा रहा था। मुझे लगने लगा मैं उसके मुँह में ही झड़ जाऊँगा। ध्यान देने वाली बात है कि, वह तो उसे छोड़ने का नाम ही नहीं ले रही थी। अब मैंने भी सोच लिया कि अपने अमृत को पहली बार उसके मुँह में ही निकालूँगा। मैंने उसका सर जोर से पकड़ लिया। तथा धीरे धीरे लयबद्ध तरीके से धक्के लगाने लगा जैसे वो उसका मुँह न होकर चूत ही हो। “याआ… हाय… ईईईई … मेरी शुकू शू तथा जोर से चूसो मेरी ज़ान मज़ा आ रहा है… हाई…। ध्यान देने वाली बात है कि, ” मेरी मीठी सीत्कारें सुनकर उसका जोश दुगना हो गया तथा वो पूरा लंड मुँह में लेकर जोर जोर से चूसने लगी। अब मैं कितनी देर ठहरता। मेरी पिचकारी फूट पड़ी तथा सारा वीर्य उसके मुँह में ही निकल गया। वो तो उसे गटागट पीती ही चली गई। अंतिम बूँद को चूस तथा चाट कर वो अपने होंठों पर जीभ फिराती हुई उठ खड़ी हुई। मैंने उसे एक बार फिर अपनी बाहों में भर कर चूम लिए। “वाह… मेरी शुकू शू आज तो तुमने मुझे उपकृत ही कर दिया मेरी जान !” मैंने उसके होंठों को चूमते हुए कहा। “मुझे भी बड़ा मज़ा आया … काफी स्वादिष्ट था। मैंने कई बार अम्मा को बापू का चूसते देखा है। वो भी बड़े मज़े से सारा रस पी जाती है। ध्यान देने वाली बात है कि, ” “अरे मेरी रानी मेरी शुकू शू तुम ज्योति को भी तो यह सब सिखाओ ना ?” मैंने कहा। ध्यान देने वाली बात है कि, “अरे बाप रे ! अगर तनीषा जग गई तो… हाय राम…” वो बाहर भागने लगी तो मैंने उसे फिर से दबोच लिया। वो कसमसा कर रह गई। “ओहो मेरी डिब्बे राम जी थोड़ा सब्र करो। पहले तनीषा को तो देख आने दो वो कहीं जग तो नहीं गई ?” “जरा जल्दी करो !” “अच्छा जी !” शुकू दबे पाँव अन्दर वाले कमरे में ज्योति को देखने चली गई तथा मैं बाथरूम में चला गया। मैंने अपना कुरता तथा पजामा निकाल फेंका तथा अपने लंड को ठीक से धोया। कोई 10 मिनट बाद जब मैं नंग धडंग होकर बाहर वाले कमरे में आया तो शुकू मेरा इंतजार ही कर रही थी। मैंने दौड़ कर उसे बाहों में भरना चाहा। इस आपाधापी में वो लुढ़क कर बेड पर गिर पड़ी तथा मैं उसके ऊपर आ गया। मैंने उसके गालों तथा होंठों को चूमना चालू कर दिया। मैंने उसका गाउन उतार दिया। उसने ब्रा तथा पेंटी नहीं पहनी थी। उसके गोल गोल संतरे ठीक मेरी आँखों के सामने थे। मैं तो उन पर टूट ही पड़ा। मैंने एक बोबे के चूचक को अपने मुँह में भर लिया तथा चूसने लगा। दूसरे हाथ से उसके दूसरे बोबे को मसलना तथा दबाना चालू कर दिया। शुकू ने मेरा लंड पकड़ लिया तथा उसे सहलाने लगी। 2-3 मिनट मसलने तथा सहलाने से वो दुबारा खड़ा होकर उसे सलामी देने लगा। अब मैंने उसके पेट को चूमा तथा फिर नीचे सहस्त्र धारा की ओर प्रस्थान किया। ध्यान देने वाली बात है कि, छोटे छोटे काले घुंघराले झांटों से लकदक चूत तो कमाल की थी। मोटे मोटे सांवले होंठ तथा अन्दर थोड़ी बादामी रंग की कलिकाएँ। मुझे बड़ा आश्चर्य हुआ कि उसकी चूत के अन्दर वाले होंठ थोड़े सांवले क्यों हैं। कुंवारी लड़कियों की चूत के अन्दर के होंठ तो गुलाबी होते है। शुकू ने मुझे बाद में बताया था कि वो रोज़ अपनी चूत में अंगुली करती है तथा अपनी फांकों तथा कलिकाओं को भी मसलती तथा रगड़ती है इसलिए वो थोड़े सांवले हो गए हैं। चलो कोई बात नहीं मुझे रंग से क्या लेना था। स्वाद तथा मज़ा दोनों तो आ ही जायेगे। मैंने अपनी लपलपाती जीभ उसकी चूत के होंठो पर लगा दी। शुकू ने मेरा सर अपने हाथों में पकड़ लिया तथा अपनी चूत की ओर दबा सा दिया। मैंने अपनी जीभ से उसकी कलिकाओं को टटोला तो उसकी हर्ष मिश्रित चीत्कार सी निकल गई। अब मैंने अपने हाथों से उसकी फांकों को चौड़ा किया। अन्दर से गुलाबी रंगत लिए चूत पूरी गीली थी। मैंने झट से उस पर अपनी जीभ फिराई तथा फिर दाने को टटोला। वो तो उत्तेजना के मारे अपने पैर ही पटकने लगी। मैंने तो उसकी रसभरी फांकों को मुँह में भर लिया तथा जोर जोर से चूसने लगा। उसका दाना तो लाल अनारदाने जैसा हो गया था अब। मैंने जीभ की नोक बना कर उसे चुभलाया तो वो कामुक सीत्कार करती हुई बोली “आह … कुशू अब तथा ना तड़फाओ अब अन्दर डाल दो … उईईई… जिज्जूऊऊऊ…… ?” “हाई मेरी शुकू शू डालता हूँ। ” “उईई… मोरी … अम्माआआ… ईईईईईईइ” “शुकू तुम्हारी चूत का रस तो काफी मजेदार है !” “ऊईईई… माआआ………” उसका बदन जोर से अकड़ा तथा चूत से काम रस फिर से टपकने लगा। शायद वो झड़ गई थी। उसकी साँसें तेज़ हो गई थी तथा आँखें बंद। अब मैंने अपने लंड को उसकी चूत की फांकों पर लगा दिया। उसने अपनी जांघें चौड़ी कर ली। यकीन मानिए, मैंने उसके सर के नीचे एक हाथ लगाया तथा और एक हाथ से अपने लंड को पकड़ कर उसकी चूत के छेद पर सेट करके एक धक्का लगा दिया। ध्यान देने वाली बात है कि, मेरा लंड गच्च से 3 इंच तक अन्दर समां गया। उसके मुँह से मीठी सीत्कार निकल गई। “उईईई… माआआ………” वह कसमसाने लगी। मुझे लगा इस तरह तो मेरा बाहर निकल जाएगा। मैंने उसे बाहों में भर कर कस लिया तथा एक धक्का फिर लगा दिया। लंड महाराज पूरे के पूरे अन्दर प्आर्यनष्ट हो गए। मैंने एक काम तथा किया उसके मुँह पर हाथ रख दिया नहीं तो उसकी चीख ज्योति को सुनाई देती या नहीं देती पड़ोसियों को जरुर सुन जाती। उसकी घुटी घुटी सी चीख निकल ही गई। “गूं……… उंउंउंउंउंउंउं………” वो कसमसाती रही पर मैं नहीं रुका। मैंने उसे बाहों में जकड़े रखा। वो हाथ पैर पटकने लगी तथा मेरी पकड़ से छूटने का कोशिश करती रही। ध्यान देने वाली बात है कि, मैंने उसे समझाया “बस मेरी शुकू अब अन्दर चला गया है। अब चिंता मत करो… अब तुम्हें भी मज़ा आएगा। ” “उईइ मा… मैं तो दर्द के मारे मर जाउंगी ओह… जिज्जू बाहर निकाल लो… मुझे दर्द हो रहा है…। आपको बता दूं कि, ” “बस मेरी जान ये दर्द तो दो पलों का है फिर देखना तुम खुद कहोगी तथा जोर से करो !” उसने आँखें खोल कर मेरी ओर देखा। मैं मुस्कुरा रहा था। शायद उसका दर्द अब कम हो गया था। उसकी चूत ने अब जल छोड़ दिया था तथा गीली होने के कारण लंड को अन्दर बाहर होने में कोई समस्या नहीं थी। आपको बता दूं कि, उसकी चूत ने जब संकोचन करना चालू कर दिया तो मेरे लंड ने भी अन्दर ठुमके लगाने चालू कर दिए। अब तो उसकी चूत से मीठा फिच्च फिच्च का मधुर संगीत बजने लगा था तथा वो अपने चूतड़ उछाल उछाल कर मेरा साथ देने लगी। असल में, “क्यों मेरी शुकू अब मज़ा आ रहा है या नहीं ?” “ओह… मेरे कुशू कुशू जिज्जू मैं तो इस समय स्वर्ग में हूँ बस ऐसे ही चोदते रहो… आःह्ह… तथा जोर से करो… रुको मत… उईईइ…” “शुकू मैंने कहा था ना काफी मज़ा आएगा ?” “ओह… हाँ… अबे डिब्बे राम ! जरा जल्दी जल्दी धक्के लगाओ ना ? अईई…?” उसकी चूत ने मेरे लंड को जैसे अन्दर भींच ही लिया। ध्यान देने वाली बात है कि, उसकी मखमली गीली दीवारों में फसा लंड तो ठुमके लगा लगा कर ऐसे नाच रहा था जैसे सावन में कोई मोर नाच रहा हो। हमें कोई 10-15 मिनट तो हो ही गए थे। सच कहूं तो, मैं उसे अब घोड़ी बना कर एक बार चोदना चाहता था। पिछले 3-4 महीने से ज्योति ने मुझे काफी तरसाया था। बस किसी तरह जल निकालने वाली बात होती थी। वह तो बस टाँगें चौड़ी करके पसर जाती थी तथा मैं 5-10 मिनट धक्के लगा कर जल निकाल देता था। तथा अब पिछले 2-3 महीनों से तो उसने चूत चोदने की तो छोड़ो चूत पर हाथ भी नहीं धरने दिया था। मैंने उसे चौपाया हो जाने को कहा तो झट से डॉगी स्टाइल में हो गई तथा अपने चूतड़ ऊपर उठा दिए। गोल गोल दो छोटे छोटे तरबूजों जैसे चूतड़ों के बीच की खाई तो कमाल की थी। गांड के छेद का रंग गहरे बादामी सा था। चूत के फांकें सूज कर मोटी मोटी हो गई थी तथा उस से रस चू रहा था। मैंने उसके चूतड़ों को चौड़ा किया तथा अपना लंड फिर से उसकी चूत में डाल दिया। ध्यान देने वाली बात है कि, लंड गीला होने के कारण एक ही झटके में अन्दर समां गया। मैंने उसकी कमर पकड़ कर अब धक्के लगाने शुरू कर दिए। असल में, उसने अपना सर नीचा करके सिरहाने से लगा लिया तथा सीत्कार पर सीत्कार करने लगी। ध्यान देने वाली बात है कि, अब मेरा ध्यान उसकी गांड के छेद पर गया। वो भी थोड़ा गीला सा हो चला था। कभी खुलता कभी बंद होता। वाह… क्या मस्त गांड है साली की। एक बार तो मन में आया कि अपना लंड गांड में डाल दूं पर बाद में मैं रुक गया। यकीन मानिए, मैं जानता हूँ कोई भी युवती हो या फिर औरत पहली बार गांड मरवाने में बड़े नखरे करती हैं तथा कभी भी आसानी से गांड मरवाने के लिए इतनी जल्दी तैयार नहीं होती। तथा फिर बुंदेलखंड की औरतें तो गांड मरवाने के लिए बड़ी मुश्किल से राज़ी होती हैं। खैर….. मैंने अपनी अंगुली पर थूक लगाया तथा शुकू की गांड के छेद पर लगा दिया। वह तो उछल ही पड़ी। “ओह… क्या करते हो जिज्जू ?’ “क्यों क्या हुआ?” “नहीं… नहीं… इसे अभी मत छेड़ो… ?” मुझे कुछ आस बंधी कि शायद बाद में मान जायेगी। अब मैंने फिर से उसकी कमर पकड़ ली तथा दनादन धक्के लगाने चालू कर दिए। हम दोनों को ही इतनी कसरत के बाद पसीने आने लगे थे। कोई 20-25 मिनट तो हो ही गए थे। मैंने उसे जब बताया कि मैं झड़ने वाला हूँ तो वो बोली कोई बात नहीं अन्दर ही निकाल दो मैं “मेरी सहेली” (गर्भ निरोधक गोली) खा लूंगी। मैं तो धन्य ही हो गया। मैंने उसे कस कर पकड़ लिया तथा फिर जैसे ही 3-4 आखरी धक्के लगाये मेरा लावा फूट पड़ा। शुकू शू भी उस वीर्य के गर्म फव्वारे से नहा ही उठी। उसकी चूत आज धन्य तथा तृप्त हो गई। मेरा लौड़ा तो धन्य होना ही था। जब मेरी अंतिम बूँद निकल गई तो मैं उस से अलग हो गया। फिर हम दोनों बाथरूम में चले गए तथा साफ़ सफाई करने के बाद बाहर आये तो वो बोली “चलो अब गर्म गर्म दूध पी लो एक राउंड तथा खेलेंगे ?” इतना कहकर उसने मेरी ओर आँख मार दी। मैंने उसे एक बार फिर अपनी बाहों में जकड़ लिया तथा जोर से भींच दिया। उसकी तो चीख ही निकल गई। ध्यान देने वाली बात है कि, फिर उस रात मैंने उसे दो बार तथा चोदा। सुबह 4 बजे हम अन्दर वाले कमरे में जाकर अपनी अपनी जगह सो गए। बस दोस्त ! इतनी ही कहानी है उस रात की। दोस्तों ! दीपक तथा शुकू शू की चुदाई की यह कथा आपको कैसी लगी मुझे जरुर लिखें। अगर आप दीपक कुशवाहा को भी मेल करेंगे तो उसे भी काफी ख़ुशी होगी। उसका मेल आई डी है : [email protected] दीपक ने मुझे बाद में बताया था कि उसने दूसरे रोज शुकू शू की गांड भी मारी थी। उसने मुझे भी झांसी आने का न्योता दिया है। मैं भी एक बार उस सलोनी हसीना की चूत तथा गांड का मज़ा लेने को बेकरार हो गया हूँ। चलो जब भी समय मिला मैं जरुर जाऊँगा तथा आपको भी बताऊंगा कि क्या हुआ। पर आप मेल पर संपर्क जरुर बनाए रखें। आपका प्रेम गुरु [email protected] ; [email protected] What did you think of this story