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रोमांचक कहानी: बहन के साथ चूत चुदाई का मजा-2

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बहन के साथ चूत चुदाई का मजा-1 का अगला भाग: मैंने एक जीन्स का पैंट और टी-शर्ट खरीदा और तनीषा ने एक गुलाबी रंग की पंजाबी ड्रेस, एक गर्मी के लिए स्कर्ट और टॉप और 2-3 टी-शर्ट खरीदीं। हम लोग मार्केट में और थोड़ी देर तक घूमते रहे। अब क़रीब 7:30 बज गए थे। आपको बता दूं कि, तनीषा ने मुझे सारे शॉपिंग बैग थमा दिए और बोलीं- आगे जा कर मेरा इंतज़ार करो, मैं अभी आती हूँ। वो एक दुकान में जा कर खड़ी हो गईं। मैंने दुकान को देखा, वो महिलाओं के अंडरगार्मेन्ट की दुकान थी। मैं मुस्कुरा कर आगे बढ़ गया। यकीन मानिए, मैं देखा कि तनीषा का चेहरा लाज के मारे लाल हो चुका है, और वो मेरी तरफ़ मुस्कुरा कर देखते हुए दुकानदार से बातें करने लगीं। कुछ देर के बाद तनीषा दुकान पर से चल कर मेरे पास आईं। तनीषा के हाथ में एक बैग था। मैं तनीषा को देख कर मुस्कुरा दिया और कुछ बोलने ही वाला था कि तनीषा बोलीं- अभी कुछ मत बोल और चुपचाप चल! हम लोग चुपचाप चल रहे थे। मैं अभी घर नहीं जाना चाहता था और आज मैं तनीषा के साथ अकेला था और मैं तनीषा के साथ और कुछ समय बिताने के लिए बेचैन था। मैंने तनीषा से बोला- चलो कुछ देर हम लोग समुंदर के किनारे पर बैठते हैं और भेलपुड़ी खाते हैं। ‘नहीं, देर हो जाएगी!’ तनीषा मुझसे बोलीं। परन्तु मैंने फिर तनीषा से कहा- चलो भी तनीषा। अभी सिर्फ़ 7:30 बजे हैं और हम लोग थोड़ी देर बैठ कर घर चल देंगे और माँ जानती हैं कि हम दोनों साथ-साथ हैं, इसलिए वो चिंता भी नहीं करेंगी। तनीषा थोड़ी सोच कर बोलीं- चल समुंदर के किनारे चलते हैं। तनीषा के राज़ी होने से मैं काफी खुश हुआ और हम दोनों समुंदर के किनारे, जो कि मार्केट से सिर्फ़ 10 मिनट का पैदल रास्ता था, चल दिए। असल में, हमने पहले एक भेलपुड़ी वाले से भेलपुड़ी ली और एक मिनरल वाटर की बोतल ली और जाकर समुंदर के किनारे बैठ गए। हम लोग समुंदर के किनारे पास-पास पैर फैला कर बैठ गए। अभी समुंदर का जल पीछे था और हमारे चारों तरफ़ बड़े-बड़े पत्थर पड़े हुए थे। सच कहूं तो, वहाँ खूब ज़ोरों की हवा चल रहीं थी और समुंदर की लहरें भी तेज़ थी। इस समय काफी सुहाना मौसम था। आपको बता दूं कि, हम लोग भेलपुड़ी खा रहे थे और बातें कर रहे थें। तनीषा मुझ से सट कर बैठी थीं और मैं कभी-कभी तनीषा के चेहरे को देख रहा था। तनीषा आज काले रंग की एक स्कर्ट और ग्रे रंग का ढीला सा टॉप पहनी हुई थीं। एक बार ऐसा मौका आया जब तनीषा भेलपुड़ी खा रहीं थी, तो एक हवा का झोंका आया और तनीषा की स्कर्ट उनकी जाँघ के ऊपर तक उठ गईं और तनीषा की जांघें नंगी हो गईं। तनीषा ने अपने जाँघों को ढकने की कोई जल्दी नहीं की। आपको बता दूं कि, उन्होंने पहले भेलपुड़ी खाईं और आराम से रूमाल से हाथ पोंछ कर फिर अपनी स्कर्ट को जाँघों के नीचे किया और स्कर्ट को पैरों से दबा लिया। वैसे तो हम लोग जहाँ बैठे थे वहाँ अंधेरा था, फिर भी चाँदनी की रोशनी में मुझे तनीषा की गोरी-गोरी जाँघों का पूरा नज़ारा मिला। तनीषा की जाँघों को देख कर मैं कुछ गर्म हो गया। जब तनीषा ने अपनी भेलपुड़ी खा चुकी तो मैं तनीषा से पूछा- तनीषा, क्या हम उन बड़े-बड़े पत्थरों के पीछे चलें? तनीषा ने फ़ौरन मुझसे पूछा- क्यों? मैंने तनीषा से कहा- वहाँ हम लोग और आराम से बैठ सकते हैं। तनीषा ने मुझसे मुस्कुराते हुए पूछा- यहाँ क्या हम लोग आराम से नहीं बैठे हैं? ‘लेकिन वहाँ हमें कोई नहीं देखेगा!’ मैंने तनीषा की आँखों में झाँकते हुए धीरे से बोला। तब तनीषा शरारत भरी मुस्कान के साथ बोलीं- तुझे लोगों के नज़रों से दूर क्यों बैठना है? मैंने तनीषा को आँख मारते हुए बोला- तुम्हें मालूम है कि मुझे क्यों लोगों से दूर बैठना है। तनीषा मुस्कुरा कर बोलीं- हाँ मालूम तो है, परन्तु सिर्फ़ थोड़ी देर के लिए बैठेंगे। हम लोग को वैसे ही काफ़ी देर हो चुकी है। और तनीषा उठ कर पत्थरों के पीछे चल पड़ी। असल में, मैं भी झट से उठ कर पहले अपना बैग संभाला और तनीषा के पीछे-पीछे चल पड़ा। वहाँ पर दो बड़े-बड़े पत्थरों के बीच एक अच्छी सी जगह थी। मुझे लगा वहाँ से हमें कोई देख नहीं पाएगा। मैंने जा कर वहीं पहले अपने बैग को रखा और फिर बैठ गया। तनीषा भी आकर मेरे पास बैठ गईं। तनीषा मुझसे क़रीब एक फ़ुट की दूरी पर बैठी थीं। मैंने तनीषा से और पास आ कर बैठने के लिए कहा। तनीषा थोड़ा सा सरक कर मेरे पास आ गईं और अब तनीषा के कंधे मेरे कंधों से छू रहे थे। मैंने तनीषा के गले में बाहें डाल कर उनको और पास खींच लिया। ध्यान देने वाली बात है कि, मैं थोड़ी देर चुपचाप बैठा रहा और फ़िर तनीषा के कान के पास अपना मुँह ले जाकर धीरे से कहा- आप काफी सुंदर हो। ‘सोनू’, क्या तुम सही बोल रहे हो?’ तनीषा ने मेरी आँखों में आँखें डाल कर मुझे चिढ़ाते हुए बोलीं। मैंने तनीषा के कानों पर अपना होंठ रगड़ते हुए बोला- मैं मजाक नहीं कर रहा हूँ। मैं तुम्हारे लिए पागल हूँ। तनीषा धीरे से बोलीं- मेरे लिए? मैंने फिर तनीषा से धीरे से पूछा- मैं तुम्हें क़िस कर सकता हूँ? तनीषा कुछ नहीं बोलीं और अपनी सर मेरे कंधों पर टिका कर आँखें बंद कर लीं। मैंने तनीषा की ठुड्डी पकड़ कर उनका चेहरा अपनी तरफ़ घुमाया। तो तनीषा ने एकाएक मेरी आँखों में झाँका और फिर से अपनी आँखें बंद कर लीं। मैं अब तक तनीषा को पकड़े-पकड़े गर्म हो चुका था और मैंने अपने होंठ तनीषा के होंठों पर रख दिए। ओह! भगवान तनीषा के होंठ काफी ही रसीले और गर्म थे। जैसे ही मैंने अपने होंठ तनीषा के होंठ पर रखे। आपको बता दूं कि, तनीषा की गले से एक घुटी-सी आवाज़ निकल गईं। मैं तनीषा को कुछ देर तक चूमता रहा। असल में, चूमने से मैं तो गर्म हो ही गया और मुझे लगा कि तनीषा भी गर्मा गईं हैं। तनीषा मेरे दाहिने तरफ़ बैठी थीं। अब मैं अपने हाथ से तनीषा की एक चूची पकड़ कर दबाने लगा। मैं इत्मीनान से तनीषा की चूची से खेल रहा था क्योंकि यहाँ माँ के आने का डर नहीं था। मैं थोड़ी देर तक तनीषा की एक चूची कपड़ों के ऊपर से दबाने के बाद मैंने अपना दूसरा हाथ तनीषा की टॉप के अंदर घुसा दिया और उनकी ब्रा के ऊपर से उनकी चूची मींज़ने लगा। मुझे हाथ घुसा कर तनीषा की चूची दबाने में थोड़ा अटपटा सा लग रहा था और इसलिए मैंने अपने हाथों को तनीषा की टॉप में से निकाल कर अपने दोनों हाथों को उनकी कमर के पास रखा और धीरे-धीरे तनीषा की टॉप को उठाने लगा और फिर अपने दोनों हाथों से तनीषा की दोनों चूचियों को पकड़ कर ज़ोर-ज़ोर से मसलने लगा। असल में, तनीषा मुझे रोक नहीं रही थीं और मुझे कुछ भी करने का अच्छा मौक़ा था। मैं अपने दोनों हाथों से तनीषा की दोनों चूचियों को पकड़ कर ज़ोर-ज़ोर से मसल रहा था। तनीषा बस अपने गले से घुटी- घुटी मस्त सिसकारियाँ निकाल रही थीं। मैं अपने दोनों हाथों को तनीषा के पीछे ले गया और उनकी ब्रा के हुक खोलने लगा। जैसे ही मैंने तनीषा की ब्रा का हुक खोला तो ब्रा गिर कर उनके मम्मों पर लटक गईं। तनीषा कुछ नहीं बोलीं। मैं फिर से अपने हाथों को सामने लाया और तनीषा की चूचियों पर से ब्रा हटा कर उनकी चूचियों को नंगा कर दिया। मैंने पहली बार तनीषा की नंगी चूची पर अपना हाथ रखा। जैसे ही मैं तनीषा की नंगी चूचियों को अपने हाथों से पकड़ा। तनीषा कुछ कांप सी गईं और मेरे दोनों हाथों को अपने दोनों हाथों से पकड़ लिया। ध्यान देने वाली बात है कि, मैं अब तक काफी गर्मा गया था और मेरा लौड़ा खड़ा हो चुका था। मुझे काफी ही उत्तेजना चढ़ गई थी। मैं सोच रहा था झट से अपने पैंट में से अपना लौड़ा निकालूँ और तनीषा के सामने ही मुट्ठ मार लूँ। परन्तु मैं अभी मुट्ठ नहीं मार सकता था। मैं अब ज़ोर-ज़ोर से तनीषा की नंगी चूचियों को अपने दोनों हाथों से पकड़ कर मसल रहा था। ध्यान देने वाली बात है कि, मैं तनीषा की चूची को दबा रहा था, रगड़-रगड़ कर मसल रहा था और कभी-कभी उनके निप्पलों को अपने उँगलियों में पकड़ कर मसल रहा था। तनीषा के निप्पल इस वक़्त अकड़ कर कड़े हो गए थे। जब-जब मैं निप्पलों को अपने उँगलियों में पकड़ कर उमेठता था, तो तनीषा छटपटा उठती। मैंने काफी देर तक चूचियों को पकड़ कर मसलने के बाद, अपना मुँह नीचे करके तनीषा के एक निप्पल को अपने मुँह में ले लिया। तनीषा ने अभी भी अपनी आँखें बंद कर रखी थीं। जब तनीषा की चूची पर मेरा मुँह लगा तो तनीषा ने अपनी आँखें खोल दीं और देखा कि मैं उनके एक निप्पल को अपने मुँह में भर कर चूस रहा हूँ, वो भी गर्मा गईं। तनीषा की साँसे ज़ोर-ज़ोर से चलने लगीं और उनका बदन उत्तेजना से काँपने लगा। तनीषा ने मेरे हाथों को कस कर पकड़ लिया। इस वक़्त मैं उनकी दोनों दूधों को बारी-बारी से चूस रहा था। अब तनीषा के गले से अजीब-अजीब सी आवाजें निकलने लगीं। उन्होंने मुझे कस कर अपनी छाती से लिपटा लिया और थोड़ी देर के बाद शांत हो गईं। मेरा चेहरा नीचे की तरफ़ था और तनीषा की चूचियों को ज़ोर-ज़ोर से चूस रहा था। मुझे पर तनीषा के जल की खुशबू आई। ओह माय गॉड! मैंने अपनी तनीषा की चूत की जल सिर्फ़ उनकी चूची चूस-चूस कर निकाल दिया था? मैं अपना हाथ तनीषा की चूची पर से हटा कर उनकी चूचियों को हल्के से पकड़ते हुए उनके होंठों को चूम लिया। मैंने अपना हाथ तनीषा के पेट पर रख कर नीचे की तरफ़ ले जाने लगा और धीरे-धीरे मेरा हाथ तनीषा की स्कर्ट के हुक तक पहुँच गया। आपको बता दूं कि, तनीषा मेरा हाथ पकड़ कर बोलीं- अब और नीचे मत ले। मैंने तनीषा से पूछा- क्यों? तनीषा तब मेरे हाथों को और ज़ोर से पकड़ते हुए बोलीं- नीचे अपना हाथ मत ले जाओ, अभी उधर काफी गंदा है। असल में, मैंने झट से तनीषा को चूम कर बोला- गंदा क्यों हैं? क्या तुम झड़ गईं। तनीषा ने काफी धीमी आवाज़ में कहा- हाँ, मैं झड़ गई हूँ। मैंने फिर तनीषा से पूछा- तनीषा मेरी वजह से तुम झड़ गईं हो? ‘हाँ’ सोनू, तुम्हारी वजह से ही मैं झड़ गई हूँ। तुम इतने उतावले थे कि मैं अपने आप को संभाल ही नहीं पाई। आपको बता दूं कि, ’ तनीषा ने मुस्कुरा कर मुझसे कहा। मैंने भी मुस्कुरा कर तनीषा से पूछा- क्या तुम्हें अच्छा लगा? तनीषा मुझे पकड़ कर चूमते हुए बोलीं- मुझे तुम्हारी चूची चुसाई काफी अच्छी लगी, और उसके बाद मुझे झाड़ना और भी अच्छा लगा। तनीषा ने आज पहली बार मुझे चूमा था। तनीषा अपने कपड़ों को ठीक करके उठ खड़ी हो गईं और मुझसे बोलीं- सोनू, आज के लिए इतना सब काफ़ी है, और हम लोगों को घर भी लौटना है। असल में, मैंने तनीषा को एक बार फिर से पकड़ चुम्मा लिया और सड़क की तरफ़ चलने लगे। मैंने सारे बैग फिर से उठा लिए और तनीषा के पीछे पीछे चलने लगा। थोड़ी दूर चलने के बाद वे मुझसे बोलीं- मुझे चलने में काफी परेशानी हो रही है। सच कहूं तो, मैंने फ़ौरन पूछा- क्यों? तनीषा मेरी आँखों में देखती हुई बोलीं- नीचे काफी गीला हो गया है। यकीन मानिए, मेरी पेंटी बुरी तरह से भीग गई है। मुझे चलने में काफी अटपटा लग रहा है। मैंने मुस्कुराते हुए बोला- तनीषा मेरी वजह से तुम्हें परेशानी हो गई है न? तनीषा ने मेरी एक बाँह पकड़ कर कहा- सोनू, यह ग़लती सिर्फ़ तुम्हारी अकेले की नहीं है, मैं भी उसमें शामिल हूँ। हम लोग चुपाचाप चलते रहे और मैं सोच रहा था कि तनीषा की समस्या को कैसे दूर करूँ? एकाएक मेरे दिमाग़ में एक बात सूझी। सच कहूं तो, मैंने फ़ौरन तनीषा से बोला- एक काम करते हैं। वहाँ पर एक पब्लिक टॉयलेट है, तुम वहाँ जाओ और अपने पेंटी को बदल लो। ध्यान देने वाली बात है कि, अरे तुमने अभी अभी जो पेंटी खरीदी है, वहाँ जाकर उसको पहन लो और गन्दी हो चुकी पेंटी को निकाल दो। तनीषा मुझे देखते हुए बोलीं- तेरा आईडिया तो काफी अच्छा है। आपको बता दूं कि, मैं जाती हूँ और अपनी पेंटी बदल कर आती हूँ। हम लोग टॉयलेट के पास पहुँचे और तनीषा ने मुझसे अपनी ब्रा और पेंटी वाला बैग ले लिया और टॉयलेट की तरफ़ चल दीं। जैसे ही तनीषा टॉयलेट जाने लगी, मैंने तनीषा से धीरे से बोला- तुम अपनी पेंटी चेंज कर लेना तो साथ ही अपनी ब्रा भी चेंज कर लेना। इससे तुम्हें यह पता लग जाएगा कि ब्रा ठीक साइज़ की हैं या नहीं!! तनीषा मेरी बातों को सुन कर हँस पड़ीं और मुझसे बोलीं- काफी शैतान हो गए हो और स्मार्ट भी। तनीषा शर्मा कर टॉयलेट चली गईं। आपको बता दूं कि, क़रीब 15 मिनट के बाद तनीषा टॉयलेट से लौट कर आईं। हम लोग बस स्टॉप तक चल दिए हम लोगों को बस जल्दी ही मिल गईं और बस में भीड़ भी बिल्कुल नहीं थीं। बस क़रीब-क़रीब ख़ाली थीं। असल में, हमने टिकट लिया और बस के पीछे जा कर बैठ गए। सीट पर बैठने के बाद मैंने तनीषा से पूछा- तुमने अपनी ब्रा भी चेंज कर ली न? तनीषा मेरी तरफ़ देख कर हँस पड़ीं। मैंने फिर तनीषा से पूछा- बताओ ना तनीषा। आपको बता दूं कि, क्या तुमने अपनी ब्रा भी चेंज कर ली है? तब तनीषा ने धीरे से बोलीं- हाँ सोनू, मैंने अपनी ब्रा चेंज कर ली है। मैं फिर तनीषा से बोला- मैं तुमसे एक रिक्वेस्ट कर सकता हूँ? तनीषा ने मेरी तरफ देखा और कहा- हाँ बोल। ‘मैं तुम्हें तुम्हारे नए पेंटी और ब्रा में देखना चाहता हूँ। ’ मैंने तनीषा से कहा। तनीषा फ़ौरन घबरा कर बोलीं- यहाँ? तुम मुझे यहाँ मुझे ब्रा और पेंटी में देखना चाहते हो? मैंने तनीषा को समझाते हुए बोला- नहीं, यहाँ नहीं, मैं घर पर तुम्हें ब्रा और पेंटी में देखना चाहता हूँ। तनीषा फिर मुझसे बोलीं- पर घर पर कैसे होगा। माँ घर पर होगी। घर पर यह संभव नहीं हैं। ‘कोई समस्या नहीं हैं’, माँ घर पर खाना बना रही होंगी और तुम रसोई में जाकर अपने कपड़े चेंज करोगी। जैसे तुम रोज़ करती हो। लेकिन जब तुम कपड़े बदलो। ‘रसोई का पर्दा थोड़ा सा खुला छोड़ देना। मैं हॉल में बैठ कर तुम्हें ब्रा और पेंटी में देख लूँगा। ध्यान देने वाली बात है कि, ’ तनीषा मेरी बातें सुन कर बोलीं- नहीं सोनू, फिर भी देखते हैं। आपको बता दूं कि, फिर हम लोग चुप हो गए और अपने घर पहुँच गए। सच कहूं तो, हमने घर पहुँच कर देखा कि माँ रसोई में खाना बना रही हैं। हम लोगों ने पहले 5 मिनट तक रेस्ट किया और फिर तनीषा अपनी मैक्सी उठा कर रसोई में कपड़े बदलने चली गईं। मैं हॉल में ही बैठा रहा। ध्यान देने वाली बात है कि, रसोई में पहुँच कर तनीषा ने पर्दा खींचा और पर्दा खींचते समय उसको थोड़ा सा छोड़ दिया और मेरी तरफ़ देख कर मुस्कुरा दीं और हल्के से आँख मार दीं। सच कहूं तो, मैं चुपचाप अपनी जगह से उठ कर पर्दे के पास जा कर खड़ा हो गया। यकीन मानिए, तनीषा मुझसे सिर्फ़ 5 फ़ीट की दूरी पर खड़ी थीं और माँ हम लोग की तरफ़ पीठ करके खाना बना रही थीं। माँ तनीषा से कुछ बातें कर रही थीं। तनीषा माँ की तरफ़ मुड़ कर माँ से बातें करने लगी फिर तनीषा ने धीरे-धीरे अपनी टी-शर्ट को उठा कर अपने सर के ऊपर ले जाकर धीरे-धीरे अपनी टी-शर्ट को उतार दीं। ध्यान देने वाली बात है कि, टी-शर्ट के उतरते ही मुझे आज की खरीदीं हुई ब्रा दिखने लगी। वाह क्या ब्रा थीं। फिर तनीषा ने फ़ौरन अपने हाथों से अपनी स्कर्ट की इलास्टिक को ढीला किया और अपनी स्कर्ट भी उतार दीं। अब तनीषा मेरे सामने सिर्फ़ अपनी ब्रा और पेंटी में थीं। तनीषा ने क्या मस्त ब्रा और मैचिंग की पेंटी खरीदीं है। मेरे पैसे तो पूरे वसूल हो गए। तनीषा ने एक काफी सुंदर नेट की ब्रा खरीदी थीं और उसके साथ पेंटी में भी खूब लेस लगा हुआ था। मुझे तनीषा की ब्रा से तनीषा की चूचियों के आधे-आधे दर्शन भी हो रहे थे। फिर मेरी आँखें तनीषा की पेट और उनकी दिलकश नाभि पर जा टिकीं। ध्यान देने वाली बात है कि, तनीषा की पेंटी इतनी टाइट थी कि मुझे उनके पैरों के बीच उनकी चूत की दरार साफ़-साफ़ दिख रही थी। असल में, उसके साथ-साथ तनीषा की चूत के होंठ भी दिख रहे थे। मुझे पता नहीं कि मैं कितनी देर तक अपनी तनीषा को ब्रा और पेंटी में अपनी आँखें फाड़-फाड़ कर देखता रहा। मैंने तनीषा को सिर्फ़ एक या दो मिनट ही देखा होगा। परन्तु मुझे लगा कि मैं कई घंटो से तनीषा को देख रहा हूँ। तनीषा को देखते-देखते मेरा लौड़ा पैंट के अंदर खड़ा हो गया और उसमें से लार निकलने लगी। मेरे पैर कामुकता से कांपने लगे। सारे वक़्त तनीषा मुझसे आँखें चुरा रही थीं। शायद तनीषा को अपने छोटे भाई के सामने ब्रा और पेंटी में खड़ी होना कुछ अटपटा सा लग रहा था। जैसे ही तनीषा ने मुझे देखा, तो मैंने इशारे से तनीषा पीछे घूम जाने के लिए इशारा किया। तनीषा धीरे-धीरे पीछे मुड़ गईं परन्तु अपना चेहरा माँ की तरफ़ ही रखा। मैं तनीषा को अब पीछे से देख रहा था। तनीषा की पेंटी उनके चूतड़ों में चिपकी हुई थी। सच कहूं तो, मैं तनीषा के मस्त चूतड़ देख रहा था और मन ही मन सोच रहा था कि अगर मैं तनीषा को पूरी नंगी देखूँगा तो शायद मैं अपने पैंट के अंदर ही झड़ जाउँगा। थोड़ी देर के बाद तनीषा मेरी तरफ़ फिर मुड़ कर खड़ी हो गईं और अपनी मैक्सी उठा लीं और मुझे इशारा किया कि मैं वहाँ से हट जाऊँ। मैंने तनीषा को इशारा किया कि अपनी ब्रा उतारो और मुझे नंगी चूची दिखाओ। तनीषा बस मुस्कुरा दीं और अपनी मैक्सी पहन लीं। ध्यान देने वाली बात है कि, मैं फिर भी इशारा करता रहा परन्तु तनीषा ने मेरी बातों को नहीं माना। मैं समझ गया कि अब बात नहीं बनेगी और मैं पर्दे के पास से हट कर हॉल में बिस्तर पर बैठ गया। तनीषा भी अपने कपड़ों को लेकर हॉल में आ गईं। अपने कपड़ों को अल्मारी में रखने के बाद तनीषा बाथरूम चली गईं। मैं समझ गया कि अब बात नहीं बनेगी और मैं पर्दे के पास से हट कर हॉल में बिस्तर पर बैठ गया। तनीषा भी अपने कपड़ों को लेकर हॉल में आ गईं। अपने कपड़ों को अल्मारी में रखने के बाद तनीषा बाथरूम चली गईं। मैं तनीषा को सिर्फ़ ब्रा और पेंटी में देख कर इतना गर्मा गया था कि अब मुझको भी बाथरूम जाना था और मुट्ठ मारना था। मेरे दिमाग़ में आज शाम की हर घटना बार-बार घूम रही थी। पहले हम लोग शॉपिंग करने मार्केट गए, फिर हम लोग समुंदर के किनारे गए, फिर हम लोग एक पत्थर के पीछे बैठे थे। फिर मैंने तनीषा की चूचियों को पकड़ कर मसला था और तनीषा चूची मसलवा कर झड़ गईं, फिर तनीषा एक पब्लिक टॉयलेट में जाकर अपनी पेंटी और ब्रा चेंज की थी। आपको बता दूं कि, एकाएक मेरे दिमाग़ यह बात आई कि तनीषा की उतरी हुई पेंटी अभी भी बैग में ही होगी। मैंने रसोई में झाँक कर देखा कि माँ अभी खाना पका रही हैं और झट से उठ कर गया और बैग में से तनीषा उतरी हुई पेंटी निकाल कर अपनी जेब में रख ली। मैंने जल्दी से जाकर के बाथरूम का दरवाज़ा बंद किया और अपना जीन्स का पैंट उतार दिया और साथ-साथ अपना अंडआर्यनयर भी उतार दिया। फिर मैंने तनीषा की गीली पेंटी को खोला और और उसे उल्टा किया। मैंने देखा कि जहाँ पर तनीषा की चूत का छेद था वहाँ पर सफ़ेद-सफ़ेद गाढ़ा-गाढ़ा चूत का जल लगा हुआ है, जब मैंने वो जगह छुई तो मुझे चिपचिपा सा लगा। मैंने पेंटी अपने नाक के पास ले जाकर उस जगह को सूंघा। मैं धीरे-धीरे अपने दूसरे हाथ को अपने लौड़े पर फेरने लगा। ध्यान देने वाली बात है कि, तनीषा की चूत से निकली जल की महक मेरे नाक में जा रही थी, और मैं पागल हुआ जा रहा था। मैं तनीषा की पेंटी की चूत वाली जगह को चाटने लगा। वाह तनीषा की चूत के जल का क्या स्वाद है, आनंद आ गया। सच कहूं तो, मैं तनीषा की पेंटी को चाटता ही रहा और यह सोच रहा था कि मैं अपनी तनीषा की चूत चाट रहा हूँ। मैं यह सोचते-सोचते झड़ गया। मैं अपना लंड हिला-हिला कर अपना लंड साफ़ किया और फिर पेशाब की और फिर तनीषा की पेंटी और ब्रा अपने जेब में रख कर वापस हॉल में पहुँच गया। थोड़ी देर के बाद जब तनीषा को अपनी भीगी पेंटी की याद आई तो वो उसको बैग में ढूँढने लगीं। शायद तनीषा को उसे साफ़ करना था। तनीषा को उनकी पेंटी और ब्रा बैग में नहीं मिली। थोड़ी देर के बाद तनीषा ने मुझे कुछ अकेला पाया तो मुझ से पूछा- “मुझे अपनी पुरानी पेंटी और ब्रा बैग में नहीं मिल रही है। ” मैंने तनीषा से कुछ नहीं कहा और मुस्कुराता रहा। यकीन मानिए, ‘तू हँस क्यों रहा हैं? इसमें हँसने की क्या बात है। ’ तनीषा ने मुझसे पूछा। आपको बता दूं कि, मैंने तनीषा से पूछा- तुम्हें अपनी पुरानी पेंटी और ब्रा क्यों चाहिए? तुम्हें तो नई ब्रा और पेंटी मिल गई। तब कुछ-कुछ समझ कर मुझसे पूछा- उनको तुमने लिया है? मैं भी कह दिया- हाँ, मैंने लिया है। वो दोनों अपने पास रखना है, तुम्हारी गिफ़्ट समझ कर। तब तनीषा बोलीं- सोनू, वो गंदे हैं। मैं मुस्कुरा कर तनीषा से बोला- मैंने उनको साफ़ कर लिया। लेकिन तनीषा ने परेशान हो कर मुझसे पूछा- क्यों? मैंने तनीषा से कहा- मैं बाद में दे दूंगा। अब माँ कमरे आ गईं थीं। इसलिए तनीषा ने और कुछ नहीं पूछा। अगले सुबह मैंने तनीषा से पूछा- क्या वो मेरे साथ दोपहर के शो में सिनेमा जाना चाहेंगी? तनीषा ने हँसते हुए पूछा- कौन दिखायेगा? मैं भी हँस के बोला- मैं। तनीषा बोलीं- मुझे क्या पता तेरे को कौन सा सिनेमा देखने जाना है। मैंने तनीषा से बोला- हम लोग न्यू थियेटर चलें? वो सिनेमा हॉल थोड़ा सा शहर से बाहर है। ‘ठीक है, चल चलें। ’ तनीषा मुझसे बोलीं। असल में तनीषा के साथ सिनेमा देखने का सिर्फ़ एक बहाना था। ध्यान देने वाली बात है कि, मेरे दिमाग़ में और कुछ घूम रहा था। सिनेमा के बाद मैं तनीषा को और कहीं ले जाना चाहता था। यकीन मानिए, पिछले कई दिनों से मैंने तनीषा की मुसम्मियों को कई बार दबाया था और मसला था और दो तीन-बार चूसा भी था। अब मुझे और कुछ चाहिए था और इसीलिए मैं तनीषा को और कहीं ले जाना चाहता था। मुझे तनीषा को छूने का अच्छा मौक़ा सिनेमा हॉल में मिल सकता था, या फिर सिनेमा के बाद और कहीं ले जाने के बाद मिल सकता था। जब तनीषा सिनेमा जाने के लिए तैयार होने लगी तो मैं धीरे से तनीषा से कहा- आज तुम स्कर्ट पहन कर चलो। तनीषा बस थोड़ा सा मुस्कुरा दीं और स्कर्ट पहनने के लिए राज़ी हो गईं। ठंड का मौसम था इसलिए मैं और तनीषा ने ऊपर से जैकेट भी ले लिया था। असल में, मैंने आज यह सिनेमा हॉल जान बूझ कर चुना था क्योंकि यह हॉल शहर से थोड़ा सा बाहर था और वहाँ जो सिनेमा चल रहा था। वो दो हफ़्ते पुरानी हो गई थी। यकीन मानिए, मुझे मालूम था कि हॉल में ज्यादा भीड़ भाड़ नहीं होगी। हम लोग वहाँ पहुँच कर टिकट ले लिए और हॉल में जब घुसे तो किसी और सिनेमा का ट्रेलर चल रहा था। इसलिए हॉल के अंदर अंधेरा था। जब अंदर जा कर मेरी आँखें अंधेरे में देखने में कुछ अभ्यस्त हो गई, तो मैंने देखा कि हॉल में कुछ लोग ही बैठे हुए हैं और मैं एक किनारे वाली सीट पर तनीषा को ले जाकर बैठ गया। हम लोग जहाँ बैठे थे उसके आस पास और कोई नहीं था। और जो भी हॉल में बैठे थे वो सब किनारे वाली सीट पर बैठे हुए थे। हम लोग भी बैठ गए सिनेमा देखने लगे। मैं सिनेमा देख रहा था और दिमाग़ में सोच रहा था मैं पहले तनीषा की चूची को दबाऊँगा, मसलूँगा और अगर तनीषा मान गईं तो फिर तनीषा की स्कर्ट के अंदर अपना हाथ डालूँगा। मैंने क़रीब 15 मिनट तक इंतज़ार किया और फिर अपनी सीट पर मैं आराम से पैर फैला कर बैठ गया। संगीता तनीषा मेरे दाहिने तरफ़ बैठी थीं। मैं धीरे से अपना दाहिना हाथ बढ़ा कर तनीषा की जाँघों पर रख दिया। फिर मैं धीरे-धीरे तनीषा की जाँघों पर स्कर्ट के ऊपर से हाथ फेरने लगा। तनीषा कुछ नहीं बोलीं। तनीषा बस चुपचाप बैठी रही और मैं उनकी जाँघों पर हाथ फेरने लगा। अब मैं धीरे-धीरे तनीषा की स्कर्ट को पैरों से ऊपर उठाने लगा जिससे कि मैं अपना हाथ स्कर्ट के अंदर डाल सकूँ। तनीषा ने मुझको रोका नहीं और ऊपर से मेरे कानों के पास अपनी मुँह लेकर के बोलीं- कोई देख ना ले। आपको बता दूं कि, इधर-उधर देख कर मैंने भी धीरे से बोला- नहीं कोई नहीं देख पाएगा। तनीषा फिर से बोलीं- स्क्रीन की लाइट काफ़ी ज़्यादा है और इसमें कोई भी हमें देख सकता है। मैंने तनीषा से कहा- अपना जैकेट उतार कर अपनी गोद में रख लो। तनीषा ने थोड़ी देर रुक कर अपनी जैकेट उतार कर अपनी गोद में रख लीं। यकीन मानिए, और इससे उनकी जाँघ और मेरा हाथ दोनों जैकेट के अंदर छुप गया। मैं अब अपना हाथ तनीषा के स्कर्ट के अंदर डाल कर के उनके पैरों और जाँघों को सहलाने लगा। तनीषा फिर फुसफुसा कर बोलीं- कोई हमें देख ना ले! मैंने तनीषा को समझाते हुए कहा- हमें कोई नहीं देख पाएगा। आप चुपचाप बैठी रहो। यकीन मानिए, मैंने अपना हाथ अब तनीषा के जाँघों के अंदर तक ले जाकर उनकी जाँघ के अंदरूनी भाग को सहलाने लगा और धीर-धीरे अपना हाथ तनीषा की पेंटी की तरफ़ बढ़ाने लगा। मेरा हाथ इतना घूम गया की तनीषा की पेंटी तक नहीं पहुँच रहा था। मैंने फिर हल्के से तनीषा के कानों में कहा- थोड़ा नीचे खिसक कर बैठो न। तनीषा ने हँसते हुए पूछा- क्या तुम्हारा हाथ वहाँ तक नहीं पहुँच रहा है। ‘हाँ’ मैंने दबी जुबान से तनीषा को बोला। तनीषा धीरे से हँसते हुए बोलीं- तुमको अपना हाथ कहाँ तक पहुँचाना है? मैं शर्माते हुए बोला- तुमको मालूम तो है! तनीषा मेरी बातों को समझ गईं और नीचे खिसक कर बैठीं। मेरा हाथ शुरू से तनीषा के स्कर्ट के अंदर ही घुसा हुआ था और जैसे ही तनीषा नीचे खिसकी मेरा हाथ जा करा अपने आप तनीषा की पेंटी से लग गया। फिर मैं अपने हाथ को उठा कर पेंटी के ऊपर से तनीषा की चूत पर रखा और ज़ोर से तनीषा की चूत को छू लिया। यह पहलीं बार था कि अपने तनीषा की चूत को छू रहा था। तनीषा की चूत काफी गर्म थीं। मैं अपनी ऊँगलीं को तनीषा की चूत के छेद के ऊपर चलाने लगा। थोड़ी देर के बाद तनीषा फुसफुसा कर बोलीं- रुक जाओ, नहीं तो फिर से मेरी पेंटी गीलीं हो जायेगी। लेकिन मैंने तनीषा की बात को अनसुनी कर दी और तनीषा की चूत के छेद को पेंटी के ऊपर से सहलाता रहा। तनीषा फिर से बोलीं- प्लीज़, अब मत करो, नहीं तो मेरी पेंटी और स्कर्ट दोनों गंदी हो जायेगीं। मैं समझ गया कि तनीषा काफी गर्मा गईं हैं। परन्तु मैं यह भी नहीं चाहता था कि जब हम लोग सिनेमा से निकलें तो लोगों को तनीषा गंदी स्कर्ट दिखे। इसलिए मैं रुक गया। मैंने अपना हाथ चूत पर से हटा कर तनीषा की जाँघों को सहलाने लगा। थोड़ी देर के बाद इंटरवल हो गया। इंटरवल होते ही मैं और तनीषा अलग-अलग बैठ गए और मैं उठ कर पॉपकॉर्न और पेप्सी ले आया। मैंने तनीषा से धीरे से कहा- तुम टॉयलेट जाकर अपनी पेंटी निकाल कर नंगी होकर आ जाओ। तनीषा ने आँखें फाड़ कर मुझसे पूछा- मैं अपनी पेंटी क्यों निकालूँ? मैं हँस कर बोला- निकाल लेने से पेंटी गीलीं नहीं होगी। तनीषा ने तपाक से पूछा- और स्कर्ट का क्या करें? क्या उसे भी उतार कर आऊँ? ‘सिंपल सी बात है जब टॉयलेट से लौट कर आओगी तो बैठने से पहले अपनी स्कर्ट उठा कर बैठ जाना’ मैंने तनीषा को आँख मारते हुए बोला। तनीषा मुस्कुरा कर बोलीं- तुम काफी शैतान हो और तुम्हारे पास हर बात का जवाब है। असल में, जैसा मैंने कहा था, तनीषा टॉयलेट में गईं और थोड़ी देर के बाद लौट आईं। जब मैं तनीषा को देख कर मुस्कुराया तो तनीषा शर्मा गईं और अपनी गर्दन झुका लीं। हम लोग फिर से हॉल में चले गए जब बैठने लगीं तो अपनी स्कर्ट ऊपर उठा लीं, परन्तु पूरी नहीं। हम लोगों के जैकेट अपने-अपने गोद में थीं और हम लोग पॉपकॉर्न खाना शुरू किया। थोड़ी देर के बाद हम लोगों ने पॉपकॉर्न खत्म किए और फिर पेप्सी भी खत्म कर लिया। फिर हम लोग अपनी-अपनी सीट पर नीचे हो कर पैर फैला कर आराम से बैठ गए थोड़ी देर के बाद मैंने अपना हाथ बढ़ा कर तनीषा की गोद पर रखी हुई जैकेट के नीचे से ले जाकर के तनीषा की जाँघों पर रख दिया। मेरे हाथों को तनीषा की जाँघों से छूते ही तनीषा ने अपने जाँघों को और फैला दिया। फिर तनीषा ने अपने चूतड़ थोड़ा ऊपर उठा करके अपने नीचे से अपनी स्कर्ट को खींच करके निकाल दिया और फिर से बैठ गईं अब तनीषा हॉल के सीट पर अपनी नंगी चूतड़ों के सहारे बैठी थीं। सीट की रेग्जीन से तनीषा को कुछ ठंड लगीं पर वो आराम से सीट पर नीचे होकर के बैठ गईं। मैं फिर से अपने हाथ को तनीषा की स्कर्ट के अंदर डाल दिया। मैं सीधे तनीषा की चूत पर अपना हाथ ले गया। जैसे ही मैं तनीषा की नंगी चूत को छुआ, तनीषा झुक गईं जैसे कि वो मुझे रोक रही हो। मुझे तनीषा की नंगी चूत में हाथ फेरना काफी अच्छा लग रहा था। मुझे चूत पर हाथ फेरते-फेरते चूत के ऊपरी भाग पर कुछ बाल का होना महसूस हुआ। मैं तनीषा की नंगी चूत और उसके बालों को धीरे धीरे सहलाने लगा। मैं तनीषा की चूत को कभी अपने हाथ में पकड़ कर कस कर दबा रहा था, कभी अपने हाथ उसके ऊपर रगड़ रहा था और कभी-कभी उनकी क्लिंट को भी अपने उँगलियों से रगड़ रहा था। ध्यान देने वाली बात है कि, मैं जब तनीषा की क्लिंट को छेड़ रहा था तब तनीषा का शरीर कांप सा जाता था। उनको एक झुरझुरी सी होती थीं। मैंने अपनी एक ऊँगलीं तनीषा की चूत के छेद में घुसेड़ दी। सच कहूं तो, ओह भगवान चूत अंदर से काफी गर्म थीं और मुलायम भी थीं। चूत अंदर से पूरी रस से भरी हुई थीं। मैं अपनी ऊँगलीं को धीरे-धीरे चूत के अंदर और बाहर करने लगा। थोड़ी देर के बाद मैंने अपनी दूसरी ऊँगलीं भी चूत में डाल दी। ये तो और भी आसानी से चूत में समा गईं। यकीन मानिए, मैंने दोनों उँगलियों से तनीषा चूत को चोदना शुरू किया। तनीषा की तेज सांसों की आवाज मझे साफ़-साफ़ सुनाई दे रही थीं। आपको बता दूं कि, थोड़ी देर के बाद तनीषा का शरीर अकड़ गया, कुछ ही देर के बाद तनीषा शांत हो कर सीट पर बैठ गईं। अब तनीषा की चूत में से ढेर सारा जल निकलने लगा। आपको बता दूं कि, चूत की जल से मेरा पूरा हाथ गीला हो गया। आपको बता दूं कि, मैं थोड़ी देर रुक कर फिर से तनीषा की चूत में अपनी ऊँगलीं चलाने लगा। थोड़ी देर के बाद तनीषा दोबारा झड़ी। फिर मुझे जब लगा कि सिनेमा अब खत्म होने वाला है, तो मैंने अपना हाथ तनीषा की चूत पर से हटा लिया। जैसे ही सिनेमा खत्म हुआ, मैं और तनीषा उठ कर बाहर निकल आए। बाहर आने के बाद मैंने तनीषा से कहा- अगले शो में जो भी उस सीट पर बैठेगा उसका पैंट या उसकी साड़ी भीग जाएगी। असल में, तनीषा मेरे बातों को सुन कर काफी शर्मा गईं और मुझसे नज़र हटा लीं। तनीषा टॉयलेट चलीं गईं हो सकता था, कि अपनी चूत और जाँघों को धोकर साफ़ करने के लिए और अपनी पेंटी फिर से पहनने के लिए गईं हों। अभी सिर्फ़ तीन बजे थे और मैंने तनीषा से बोला- तो काफी टाइम है और माँ भी घर पर सो रही होंगी। क्या तुम अभी घर जाना चाहती हो? वैसे मुझे कुछ प्राइवेट में चलने का इच्छा हैं। क्या तुम मेरे साथ चलोगी? तनीषा मेरी आँखों में झाँकती हुई बोलीं- प्राइवेट में चलने की क्या बात हैं? वैसे मैं भी अभी घर नहीं जाना चाहती। मैं बोला- प्राइवेट का मतलब है कि किसी होटल में जाना हैं? तनीषा बोलीं- सिर्फ़ होटल? या और कुछ? मैं तनीषा से बोला- सिर्फ़ होटल या और कुछ! मतलब? तनीषा बोलीं- तेरा मतलब होटल के कच्छ से है? ‘हाँ मेरा मतलब होटल के कमरे से ही है। ’ मैंने कहा। तनीषा ने तब मुझसे फिर पूछा- होटल के कमरे में ही क्यों? मैंने तनीषा की बातों को सुन कर यह समझा कि तनीषा ने अभी भी होटल चलने के लिए ना नहीं किया हैं। असल में, मैंने तनीषा की आँखों में झाँकते हुए बोला- अभी तक मैंने कई बार तुम्हारी चूची को छुआ, दबाया, मसला और चूसा है, फिर मैंने तुम्हारी चूत को भी छुआ और उसके अंदर अपनी ऊँगलीं भी डालीं। और तुमने कभी भी मना नहीं किया। मैं आगे बढ़ने से रुका तो इस बात से कि हमारे पास पूरी प्राइवेसी नहीं थीं। यकीन मानिए, इस बात के डर से कि कोई आ ना जाए, या हमें देख न ले। इसलिए मैं चाहता हूँ कि अब होटल के कमरे में जाकर हम लोगों को पूरी प्राइवेसी मिले। मैं इतना कह कर रुक गया और तनीषा की तरफ़ देखने लगा कि अब तनीषा भी कुछ बोले। जब तनीषा कुछ नहीं बोलीं तो मैंने फिर उनसे कहा- तुम क्या चाहती हो? तनीषा मुझसे बोलीं- मतलब यह हुआ कि तुम इसलिए मेरे साथ होटल जाना चाहते हो ताकि वहाँ जा कर तू मुझे अच्छी तरफ़ से छू सके। सच कहूं तो, मेरे दूध को चूस सके और मेरे पैरों के बीच अपना हाथ डाल कर आनंद ले सके? ‘ठीक’ कह रही हो, तनीषा। मैं जब भी तुम्हें छूता हूँ तो हम लोगों के पास प्राइवेसी ना होने की वजह से रुकना पड़ता है, ‘जैसे आज सिनेमा हॉल में ही देख लो’ मैंने तनीषा से कहा। ‘तो तू मुझे ठीक से और बिना डर के छूना चाहता है। मेरी चूची पीना चाहता है, और मेरी टांगो के बीच हाथ डाल कर अपनी ऊँगलीं चूत में डाल कर देखना चाहता है?’ तनीषा ने मुझसे पूछा। ध्यान देने वाली बात है कि, मैंने तब थोड़ा झल्ला कर तनीषा से कहा- तुम बिल्कुल सही कह रही हो। और मुझे लगता है कि तुम भी यही चाहती हो। सच कहूं तो, तनीषा कुछ नहीं बोलीं और मैं उनकी चुप्पी को उनकी हाँ समझ रहा था। फिर तनीषा थोड़ी देर तक सोचने के बाद बोलीं- कमरे में जाने का मतलब होता है कि हम वो सब भी??? मैंने तब तनीषा को समझाते हुए कहा- परन्तु तुम चाहोगी तभी। नहीं तो कुछ नहीं। तनीषा फिर भी बोलीं- पता नहीं सोनू, यह काफी बड़ा क़दम है। मैंने तब फिर से तनीषा को समझाते हुए बोला- बाबा, अगर तुम नहीं चाहोगी तो वो सब काम नहीं होगा और वही होगा जो जो तुम चाहोगी। असल में, परन्तु मुझे तुम्हारी दोनों मुसम्मियाँ बिना किसी के डर के साथ पीना है बस! मैं समझ रहा था कि तनीषा मन ही मन चाह तो रही थीं कि मैं उनकी चूची को बिना किसी डर के चूसूं और उनकी चूत से खेलूँ। तनीषा बोलीं- बात कुछ समझ में नहीं आ रही है। परन्तु यह बात तो तय है कि मैं अभी घर नहीं जाना चाहती हूँ। इसका मतलब साफ़ था कि तनीषा मेरे साथ होटल में और होटल के कमरे में जाना चाहती हैं। इसलिए मैंने पूछा- तो होटल चलें? तनीषा मेरे साथ चल पडीं। मैं काफी खुश हो गया। तनीषा मेरे साथ होटल में चलने के लिए राज़ी हो गईं है। मैं खुशी-खुशी होटल की तरफ़ चल पड़ा। मैं इतना समझ गया था कि शायद तनीषा मुझे खुल कर अपनी चूची और चूत मुझसे छुआना चाहती हैं और हो सकता हैं कि वो बाद में मुझसे अपनी चूत भी चुदवाना भी चाहती हों। यह सब सोच-सोच कर मेरा लंड खड़ा होने लगा। ध्यान देने वाली बात है कि, मैं सोच रहा था कि आज मैं अपनी तनीषा को ज़रूर चोदूंगा। मैं काफी खुश था और गर्म हो रहा था। असल में, मुझे यह मालूम था कि उस सिनेमा हॉल के पास दो-तीन ऐसे होटल हैं जहाँ पर कमरे घंटे के हिसाब से मिलते हैं। मैं एक दो बार उन होटलों में अपने गर्लफ्रेंड के साथ आ चुका हूँ। आपको बता दूं कि, मैं वैसे ही एक होटल में अपनी तनीषा को लेकर गया और वहाँ बात करके एक कच्छ तय किया और कमरे का किराया भी दे दिया। होटल का वेटर हम लोगों को एक कमरे में ले गया। जैसे ही वेटर वापस गया, मैंने कमरे के दरवाज़े को अच्छी तरह से बंद किया। मैंने कमरे की खिड़की को भी चेक किया और उनमें पर्दा डाल दिया। तब तक तनीषा कमरे में घुस कर कमरे के बीच में खड़ी हो गईं। तनीषा को कुछ समझ में नहीं आ रहा था और वो चुपचाप खड़ी थीं। मैं तब बाथरूम में गया और बाथरूम की लाइट को जला करके बाथरूम का दरवाज़ा आधा बंद कर दिया, जिससे कि कमरे में बाथरूम से थोड़ी काफी रोशनी आती रहे। फिर मैंने कमरे की रोशनी को बंद कर दिया। आपको बता दूं कि, तनीषा आराम से बिस्तर के एक किनारे पर बैठ गईं। कमरे में रोशनी काफी कम थीं, परन्तु हम लोग एक दूसरे को देख पा रहे थे। मैं अपनी शर्ट के बटन खोलने लगा और तनीषा से बोला- तुम भी अपने कपड़े उतार दो। तनीषा ने भी कपड़े उतारने शुरू कर दिए। जैसे ही अपना पैंट खोला तो मैंने देखा की तनीषा भी अपनी ब्रा और पेंटी उतार रही हैं। अब तनीषा मेरे सामने बिल्कुल नंगी हो चुकी थीं। मैं समझ गया कि तनीषा भी आज अपनी चूत चुदवाना चाहती हैं। अब मैं धीरे-धीरे बिस्तर की तरफ़ बढ़ा और जा कर तनीषा के बगल में बैठ गया। पलंग पर बैठ कर मैंने तनीषा को अपनी बाहों में भर लिया और उनको अपने पैरों के बीच खड़ा कर दिया। कमरे की हल्की रोशनी में भी मुझे अपनी तनीषा की नंगी जवानी और मादक बदन साफ़-साफ़ दिख रहा था और मुझे उनकी नंगी चूचियों को पहली बार देख कर आनंद आ रहा था। मैंने अब तक तनीषा को सिर्फ़ कपड़ों के ऊपर से देखा था और मुझे पता था की तनीषा का बदन काफी सुडौल और भरा हुआ होगा, परन्तु इतनी अच्छी फिगर होगी ये नहीं पता था। तनीषा की गोल संतरे सी चूची, पतली सी कमर और गोल-गोल सुंदर से चूतड़ों को देख कर मैं तो जैसे पागल ही हो गया। मैं धीरे से अपने हाथों में तनीषा की चूचियों को लेकर के धीरे-धीरे बड़े प्यार से दबाने लगा। ‘तनीषा तुम्हारी चूचियाँ काफी प्यारी हैं काफी ही सुंदर और ठोस हैं। यकीन मानिए, ’ मैंने तनीषा से कहा और तनीषा ने मुस्कुरा कर अपने हाथ मेरे कंधों पर रख दिए। मैंने झुक करके अपने होंठ उनकी चूचियों पर रख दिए। मैं तनीषा की चूचियों के निप्पलों को चूसने लगा और तनीषा सिहर उठीं। आपको बता दूं कि, मैं अपने मुँह को और खोल करके तनीषा की एक चूची को मेरे मुँह में भर लिया और चूसने लगा। मेरा दूसरा हाथ तनीषा की दूसरी चूची पर था और उसको धीरे-धीरे दबा रहा था। फिर मैं अपना मुँह जितना खोल सकता खोल करके तनीषा की चूची को अपने मुँह में भर लिया और चूसने लगा। सच कहूं तो, अपने दूसरे हाथ को मैं धीरे से नीचे लाकर के तनीषा चूत को पहले सहलाया और फिर धीरे से अपनी एक ऊँगली चूत के अंदर कर घुसेड़ दी। मैं कुछ देर तक अपने मुँह से तनीषा की मुसम्मी चूसता रहा और अपने दूसरे हाथ की ऊँगली तनीषा की चूत के अंदर-बाहर करता रहा। मुझे लगा रहा था कि तनीषा आज अपनी चूत मुझसे ज़रूर चुदवायेंगी। थोड़ी देर के बाद मैंने अपना मुँह तनीषा की चूची पर से हटा कर तनीषा को इशारे से पलंग पर लेटने के लिए बोला। तनीषा चुपचाप पलंग पर लेट गईं और मैं भी उनके पास लेट गया। फिर मैं तनीषा को अपने बाहों में भर कर उनकी होठों को चूमने और फिर चूसने लगा। मेरा हाथ फिर से तनीषा की चूचियों पर चला गया और तनीषा की बड़ी-बड़ी चूचियों को अपने हाथों ले कर बड़े आराम से मसलने लगा। इस वक़्त तनीषा की चूचियों को मसलने में मुझे किसी का डर नहीं था और बड़े आराम से तनीषा की चूचियों को मसल रहा था। चूची मसलते हुए मैंने तनीषा से बोला- तुम्हारी चूचियों का जवाब नहीं, बड़ी मस्त मुस्म्मियाँ हैं। मन करता है कि मैं इन्हें खा जाऊँ। मैंने अपना मुँह नीचे करके तनीषा की चूची के एक निप्पल को अपने मुँह में भर कर धीरे-धीरे चूसने लगा। थोड़ी देर के बाद मैंने अपना एक हाथ नीचे करके तनीषा की चूत पर ले गया और उनकी चूत से खेलने लगा, और थोड़ी देर के बाद अपनी एक ऊँगली चूत में घुसेड़ कर अंदर-बाहर करने लगा। तनीषा के मुँह से मादक सिसकारियाँ निकलने लगीं। थोड़ी देर के बाद तनीषा की चूत ने जल छोड़ना शुरू कर दिया। मैं समझ गया कि तनीषा अब चुदवाने के लिए तैयार हैं। असल में, मैं भी तनीषा के ऊपर चढ़ कर उनको चोदने के लिए बेताब हो रहा था। थोड़ी देर तक मैं तनीषा की चूची और चूत से खेलता रहा और फिर उनसे सट गया। सच कहूं तो, मैंने तनीषा के ऊपर झुकते हुए तनीषा से पूछा- तुम तैयार हो? बोलो ना तनीषा क्या तुम अपनी छोटे भाई का लौड़ा अपनी चूत के अंदर लेने के लिए तैयार हो? उस समय मैं मन ही मन जानता था कि तनीषा की चूत मेरा लंड खाने के लिए बिल्कुल तैयार है। और तनीषा मुझे चोदने से ना नहीं करेंगी। तनीषा तब मेरी आँखों में झाँकते हुए बोलीं- सोनू, क्या मैं इस वक़्त ना कर सकती हूँ? इस समय तू मेरे ऊपर चढ़ा हुआ है और हम दोनों नंगे हैं। तनीषा ने अपना हाथ बढ़ा कर मेरे लंड को पकड़ लिया और उसे सहलाने लगीं। तब मैंने अपने लंड को अपने हाथ में लेकर तनीषा की चूत से भिड़ा दिया। यकीन मानिए, चूत पर लंड लगते ही तनीषा ‘आह! अहह्ह्ह! ओहह्ह्ह्ह!’ करने लगीं। मैंने हल्के से अपने कमर हिला कर तनीषा की चूत में अपने लंड का सुपाड़ा फँसा दिया। तनीषा की चूत काफी टाइट थीं परन्तु वो इतना रस छोड़ रही थीं कि चूत का रास्ता बिल्कुल चिकना हो चुका था। जैसे ही मेरा लंड का सुपाड़ा तनीषा की चूत में घुसा, तनीषा उछल पड़ीं और चीखने लगीं- ‘मेरिई चूऊत फटीईईए जा रहिईई हैंईई निकाल अपना लंड मेरी चूऊऊत से ईईए है मैं मर गईंई मेरिईई चूऊऊओत फआआट गईंई’ मैंने तनीषा के होठों को चूमते हुए बोला- तनीषा, बस हो गया और थोड़ी देर तक तकलीफ़ होगी और फिर आनंद ही आनंद है। परन्तु तनीषा फिर भी गिड़गिड़ाती रही। मैंने तनीषा की कोई बात नहीं सुनी और उनकी चूचियों को अपने हाथों से मज़बूती से पकड़ते हुए एक और ज़ोरदार धक्का मारा और मेरा पूरा का पूरा लंड तनीषा की चूत की में घुस गया। तनीषा की चूत से खून की कुछ बूँद निकल पड़ीं। मैं अपना पूरा लंड डालने के बाद चुपचाप तनीषा के ऊपर लेटा रहा और तनीषा की चूचियों को मसलता रहा। थोड़ी देर के बाद तनीषा ने मेरे नीचे से अपनी कमर उठाना शुरू कर दी। मैं समझ गया कि तनीषा की चूत का दर्द खत्म हो गया है और वो अब मुझसे खुल कर चुदवाना चाहती हैं। मैंने भी धीरे से अपना लौड़ा थोड़ा सा बाहर खींचा और उसे फिर तनीषा की चूत में हल्के झटके के साथ घुसेड़ दिया। तनीषा की चूत ने मेरा लंड कस कर पकड़ रखा था और मुझे लंड को अंदर-बाहर करने में थोड़ी सी मेहनत करनी पड़ रही थीं। लेकिन मैं भी नहीं रुका और धीरे-धीरे अपनी स्पीड बढ़ाना शुरू कर दी। तनीषा भी मेरे साथ-साथ अपनी कमर उठा-उठा कर मेरे हर धक्कों का जबाब बदस्तूर दे रही थीं। मैं जान गया कि तनीषा की चूत रगड़-रगड़ कर लंड खाना चाहती है। मैंने भी तनीषा को अपनी बाहों में भर कर उनकी चूचियों को अपने मुँह में भर कर धीरे-धीरे लंड उठा-उठा करके धक्के मारना शुरू किया। अब मेरा लंड आसानी से तनीषा की चूत में आ-जा रहा था। आपको बता दूं कि, तनीषा भी अब मुझे अपने बाहों में भर करके चूमते हुए अपनी कमर उचका रही थीं और बोल रही थीं- भाई, काफी अच्छा लग रहा है और ज़ोर-ज़ोर से चोदो मुझे। ध्यान देने वाली बात है कि, मेरी चूत में कुछ चींटियाँ सी रेंग रही हैं। अपने लंड की रगड़ से मेरी खाज दूर कर दो। चोदो और ज़ोर-ज़ोर से चोदो मुझे। मैं अब अपना लंड तनीषा की चूत के अंदर डाल कर कुछ सुस्ताने लगा। तनीषा तब मुझे चूमते हुए बोलीं- क्या हुआ, तू रुक क्यों गया? अब मेरी चूत की चुदाई पूरी कर और मुझे रगड़-रगड़ कर चोद करके मेरी चूत की प्यास बुझा मेरे जालिम भाई। मैं बोला- चोदता हूँ तनीषा। थोड़ा मुझे आपकी चूत में फँसे लौड़े का आनंद तो उठा लेने दो। आपको बता दूं कि, अभी मैं तुम्हारी चूत चोद-चोद कर फाड़ता हूँ। यकीन मानिए, मेरी तनीषा बोलीं- “साले तुझे आनंद लेने की पड़ी है, अभी तो तू मुझे जल्दी-जल्दी चोद। यकीन मानिए, ” मैं मरी जा रही हूँ! मैं उनकी बात सुन कर ज़ोर-ज़ोर से धक्के लगाने लगा और तनीषा भी मुझे अपने हाथों और पैरों से जकड़ कर अपने चूतड़ उछाल-उछाल कर अपनी चूत चुदवाने लगीं। मैंने थोड़ी देर तक तनीषा की चूत में अपना लंड पेलने के बाद तनीषा से पूछा- कैसा लग रहा है, अपने छोटे भाई का लंड अपनी चूत में डलवा कर? मैं अब तनीषा से बिल्कुल खुल कर बातें कर रहा था। और उन्हें अपने लंड से छेड़ रहा था। ‘यह काम हम लोगों ने काफी ही बुरा किया। परन्तु मुझे अब काफी अच्छा लग रहा है। असल में, ’ तनीषा मुझे अपने सीने से चिपकाते हुए बोलीं। थोड़ी देर के बाद मैं फिर से तनीषा की चूत में अपना लंड तेज़ी से पेलने लगा। कुछ देर के बाद मुझे लग रहा था कि मैं अब झड़ने वाला हूँ। इसलिए मैंने अपना लंड तनीषा की चूत से निकाल कर अपने हाथ से पकड़ लिया और पकड़े रखा। मैंने तनीषा से कहा- अपने मुँह में लोगी? तनीषा ने पहले कुछ सोचा फिर अपना मुँह खोल दिया। मैंने लौड़ा उनके मुँह में दे दिया और अपना वीर्य उनके मुँह में छोड़ दिया। तनीषा ने मेरा माल अपने मुँह में भर लिया और उसको गटक लिया। आपको बता दूं कि, तनीषा ने आसक्त भाव से मेरी तरफ देखा और मैंने अपने होंठ उनके होंठों से लगा दिए। भाई बहन की इस चुदाई ने भले ही समाज की मर्यादाओं को भंग कर दिया हो, पर मेरी और मेरी तनीषा की कामनाओं को तृप्त कर दिया था। असल में, What did you think of this story