एक अनसुनी दास्तान: लॉकडाउन के बाद फिर चुदी आंटी
कोरोना सेक्स स्टोरी में पढ़ें कि मैं लॉकडाउन में ढील मिली तो मैं लौटा. आंटी के घर ताला लगा था. गांव में फंस कर मुझे चूत नहीं मिली. मैं तड़प उठा था. नमस्कार दोस्तो, मेरा नाम राज शर्मा है. अन्तर्वासना हिन्दी सेक्स कहानी में आपका एक बार फिर से स्वागत है. मैं आपको अपनी आंटी की चुदाई की कहानी बता रहा था. पिछली कहानी आंटी ने पति बनाकर सुहागरात मनायी में मैंने आपको बताया था कि कैसे हमें निशा में चुदाई करने का मौका मिला तथा मैंने कैसे आंटी की चूत तथा गांड की चुदाई कर डाली. उसके बाद मैं अपने घर आ गया था तथा फिर कोरोना के चलते लॉकडाउन हो गया. अब आगे की कोरोना सेक्स स्टोरी: लॉकडाउन में थोड़ी ढील मिलते ही जब मैं अपने रूम पर लौटा तो आंटी के घर का ताला लगा हुआ था. एक दो दिन तक मैंने इंतजार किया. मगर ताला नहीं खुला. फिर मैंने आंटी को फोन करने की कोशिश की लेकिन उनका फोन बंद आ रहा था. मैं ये सोचकर निराश होने लगा कि कहीं आंटी ने ये फ्लैट बदल न लिया हो. हफ्ते भर तक मैं मरे मन से ऑफिस जाता रहा. निशा को पोर्न वीडियो देखकर मुट्ठ मारकर सो जाता था. फिर एक दिन जब मैं बाहर से लौटा तो आंटी अपने गेट पर खड़ी थी तथा मुस्करा रही थी. वो लोग आज दोपहर में ही वापस आये थे. आंटी को देखकर मेरी खुशी का ठिकाना न रहा. वो धीरे से मेरे पास आकर बोली- इनकी आज से वही नाइट ड्यूटी शुरू हो रही है. मैंने खाना तैयार कर लिया है. मैं तुम्हारा इंतजार करूंगी. मैं भी खुशी से झूम उठा तथा ऊपर जाकर जल्दी से फ्रेश हो लिया. फिर मैं अंकल के जाने का इंतजार करने लगा. ऊपर बालकनी में से मैं बार बार झांक कर देख रहा था. अंकल के स्कूटर से मुझे पता चल जाता था कि वो घर में हैं या नहीं. फिर कुछ देर के बाद स्कूटर के निकलने की आवाज हुई. मैंने जल्दी से अपने रूम को लॉक किया तथा नीचे चल दिया. मैं चुपके से आंटी के घर में घुस गया. आंटी मेरा ही इंतजार कर रही थी. मैंने जाते ही आंटी को गले से लगा लिया तथा हम दोनों एक दूसरे से लिपट गये. आंटी को बांहों में भरकर मैं उनको चूमने लगा तथा फिर उसकी गांड को जोर जोर से भींचने लगा. वो भी मेरे लंड को पकड़ कर सहलाने लगी. फिर हम दोनों किस करने लगे. कुछ देर तक हम वहीं खड़े होकर एक दूसरे के होंठों की प्यास बुझाते रहे. फिर हमने साथ में खाना खाया तथा बेड पर आ गये. मैंने आंटी को बताया कि लॉकडाउन में मैंने उनको कितना मिस किया. वो भी कहने लगी कि वो मेरे लंड को काफी मिस कर रही थी. बातें करने के बाद हम दोनों फिर से होंठों को चूसने में लग गये. मैं आंटी की चूचियों को दबाने लगा तथा उसने मेरे लौड़े को बाहर निकाल लिया. मैंने उसकी मैक्सी उतार दी. उसने पहले ही ब्रा पैन्टी उतार दी थी. अब वो मेरे सामने नंगी हो गई थी. मैंने अपनी उंगली को उसकी चूत में रगड़ना शुरु कर दिया। उसने मेरी टी-शर्ट तथा लोअर को उतार दिया. अब हम दोनों 69 की पोजीशन में आ गए। रेखा आंटी मस्त होकर मेरा लंड चूसने लगी. मैंने अपनी जीभ उनकी चूत में डाल दी। अब वो अपनी चूत को मेरे मुख पर दबाने लगी थी तथा मैंने अपनी जीभ से उसकी चूत को चोदना शुरू कर दिया। वो गपागप … गपागप … मेरे लंड को चूसती जा रही थी. कुछ ही देर में उसकी चूत ने जल छोड़ दिया. मैं आंटी की चूत का रस पूरा चाट गया. अब मैं खड़ा हो गया तथा उसके मुख में लंड देकर उसके मुख को चोदने लगा. दो मिनट के बाद मेरे लंड ने भी जल छोड़ दिया. वो मेरे सारे माल को गटागट पी गयी. पूरे दो महीने के बाद आंटी को मेरे लंड का रस पीने के लिए मिला था इसलिए उसने मेरे लंड की एक एक बूंद को निचोड़ निचोड़ कर खींच लिया था. वीर्य छूटने के बाद मेरा घोड़ा सो गया. मगर आंटी उसको प्रेम से दुलारती रही. वो धीरे धीरे लंड से खेलने लगी तथा लंड फिर से तैयार हो गया। उसने लंड को फिर से मुख में लेकर चूसना शुरू कर दिया तथा लोलीपॉप के जैसे चूसने लगी. अब मेरा लौड़ा आंटी की चुदाई के लिए तैयार था. मैंने उसे सेज पर लिटा दिया तथा उसके ऊपर आ गया. मैंने आंटी की चूत में थूक मला तथा लंड को चूत में टिका कर अंदर घुसा दिया. आंटी की रेलम-पेल चुदाई मैंने शुरू कर दी तथा आंटी के मुख से मस्त मादक सिसकाकीर्तिं निकलने लगीं. दो महीने के बाद आंटी की चूत कुछ टाइट सी लग रही थी. मजा आ रहा था उसकी चूत को ठोकने में. वो गांड को उठा उठाकर चुदने लगी तथा बोली- आह्ह राज … चोद … जोर से चोद … दो महीने बाद तेरा लंड मिला है. मैंने पूछा- गांव में क्यों नहीं चुदी? आंटी मेरी गांड को अपनी चूत की ओर खींचकर लंड लेते हुए बोली- आह्ह … गांव में तेरे जैसा लौड़ा कोई मिला ही नहीं. मैं बोला- अंकल भी तो थे? वो बोली- अब अंकल का लंड लेने का मन नहीं करता है. ये बात सुनकर मैं उसको जोर जोर से किस करने लगा. वो भी मुझे बेतहाशा चूमने लगी. मैं जोश में आ गया तथा तेज़ी से चोदने लगा. मेरे धक्कों की रफ्तार बढ़ती ही जा रही थी तथा आंटी का मजा अब दर्द में बदल रहा था. मगर वो लंड को झेलती रही तथा 15 मिनट की चुदाई में दो बार झड़ गयी. फिर मैं भी उसकी चूत में धक्के लगाता हुआ ही खाली हो गया. मेरे लंड ने आंटी की चूत को भर दिया. फिर हम दोनों लेट गये. आंटी बताने लगी कि गांव में मनरेगा के सचिव ने भी उसकी चूत चोदी थी. मगर उसको मेरे लंड के जैसे मजा नहीं मिला. मैंने भी आंटी को बताया कि कैसे मैंने अपने गांव जाकर अपनी आंटी, मैडम तथा दोस्त की मां तथा बीवी की चुदाई की. इस तरह से चुदाई की बातें करते हुए हम दोनों फिर से गर्म हो गये. फिर हम दोनों एक दूसरे के लंड तथा चूत को चूसने लगे. फिर मैंने आंटी को घोड़ी बना लिया. उसकी गांड पर थूक लगाया तथा फिर अपना लौड़ा उसकी गांड पर टिका दिया. फिर मैंने अपने लंड पर थूका तथा उसके छेद पर रगड़ने लगा. वो समझ गयी कि लंड अब उसकी गांड में घुसने वाला है. मैंने उसकी गांड को थाम लिया तथा जैसे ही धक्का लगाने लगा तो उसने भी पीछे की ओर गांड को धकेल दिया. लंड सट्ट से अंदर चला गया. मैं आंटी के ऊपर लिपट गया तथा कुत्ते की तरह उसकी गांड चुदाई करने लगा. वो भी चुदाई में मेरा साथ देते हुए पूरा मजा ले रही थी. हम दोनों चुदाई का पूरा आनंद उठा रहे थे. रेखा आंटी की गांड का सुराख अब पहले की अपेक्षा ज्यादा खुल गया था. वो अब गांड चुदवाने का पूरा मजा लेती थी. फिर मैंने उसे लिटा दिया तथा उसकी टांगों के नीचे तकिया लगा दिया. उसकी गान्ड थोड़ी ऊपर आ गयी तथा मैं उसके ऊपर लेटकर उसको चोदने लगा. अब मेरा लौड़ा तथा तेज़ तेज़ अंदर बाहर होने लगा. मैं अपनी पूरी रफ़्तार से चोदने लगा. कुछ देर चोदने के बाद मैंने लंड को निकाल लिया तथा फिर उसके सामने आ गया. उसने मेरे लंड को मुख में ले लिया तथा चूसने लगी. कुछ देर लंड चुसवाने का मजा लेकर मैंने लंड को पूरा उसकी लार में गीला करवा लिया था. एक बार फिर से मैंने आंटी की गांड में लंड को पेलकर चुदाई शुरू कर दी. अब वो मजे से लंड लेने लगी तथा बोली- राज तुम मस्त चोदते हो, मुझे किसी तथा के लंड से मजा नहीं आता। मैंने तथा जोर से झटका लगाया तथा कहा- मेरा लौड़ा स्पेशल है रेखा आंटी. ऐसा मजा तुम्हें तथा कहीं नहीं मिलेगा. फिर मैंने चोदते हुए ही पूछा- वहां गांव में कैसे चुदी? गांव में चुदाई की कहानी तो बताओ? उसने मेरा लौड़ा लेते हुए बताया- निशा को मैं मनरेगा वाले सचिव को अपने घर में बुला लिया करती थी. जब सब लोग सो रहे होते थे तो घर की बैठक वाले कमरे में जाकर चुदती थी. उसकी चुदाई की स्टोरी सुनकर मेरा जोश तथा ज्यादा हो गया था. मैं जोर जोर से पूरी ताकत लगाकर उसको पेलने लगा तथा उतने में ही मेरे लंड का माल निकल गया. मैं निढाल होकर उसके ऊपर लेट गया. फिर लेटे हुए वो बताने लगी कि एक बार सचिव उसे मनरेगा में काम करने के दौरान एक दिन किसी काम से बाहर ले गया. गाड़ी में ले जाकर उसने बीच सुनसान रास्ते में उसकी चुदाई कर डाली. उस दिन की चुदाई के बाद वो रोज उसको घर बुलाने लगी तथा फिर सचिव उसको बिना काम पर जाये हुए ही पैसे देने लगा. मैं अभी भी आंटी की चूचियों से खेल रहा था तथा वो मेरे लंड से खेल रही थी. फिर पता नहीं कब हमारी आंख लग गयी तथा हम दोनों सो गये. सुबह 4 बजे मेरी नींद खुली तो आंटी की चूत मेरी आंखों के सामने थी. मेरा लौड़ा खड़ा हो गया। यकीन मानिए, मैंने पास में पड़ी तेल की शीशी उठाई तथा लंड को चिकना कर दिया. फिर उसकी टांग को मोड़कर एक जोर का झटका लगाया. उसको एकदम से झटका लगा तथा वो जोर से चिल्लाई- ऊईई ईईई … ऊईईईई … आह्ह … मर गयी। आंटी की नींद खुल गयी. मैंने उसका मुख बंद कर दिया तथा तेज़ तेज़ चोदने लगा. उसने मेरा हाथ हटाया तथा बोली- राज … ये क्या तरीका है? मैंने कहा- मेरा लौड़ा खड़ा हो गया था तथा मुझसे रुका न गया. वो बोली- तो मुझे जगा लेता हरामी! मैंने बिना कुछ जवाब दिये झटके मारना शुरू कर दिया तथा गपागप गपागप चोदने लगा। अब वो भी साथ देने लगी तथा बोली- राज, मुझे लंड पर बैठना है। उसकी बात मानकर मैं सेज पर लेट गया. वो लंड पर जैसे ही बैठी तो मेरा गीला लंड फच्च … करके अंदर तक घुस गया। उसके मुख से कामुक सिसकाकीर्तिं निकलने लगीं- आह्ह … आह्ह … उईई … आह्ह … चोदो अब … आह्ह। वो अब उछल उछल कर चुदने लगी. वो खुश होकर मेरे लौड़े को चोदे जा रही थी. उसकी चूत ने मेरे लंड को कसना शुरू कर दिया था. मैं भी नीचे से तेज तेज धक्के लगा रहा था. दो मिनट बाद ही आंटी की चूत ने जल छोड़ दिया. मेरा लंड अब पूरा गीला हो गया तथा सटासट आंटी की चूत में जाने लगा. अब रेखा ने चूत को ढीला छोड़ दिया तथा अंदर तक लंड को लेने लगी। अब मैंने उसे लंड से नीचे उतार दिया तथा घोड़ी बना दिया। तेल की बूंदें गांड में डाल कर लंड को गांड में सेट करके जोर से झटका लगाया तथा वो एकदम से उचक गयी- आह्ह … ऊईई … ईईई … आह्ह … आराम से … गांड घायल कर दी है तेरे लंड ने। मैंने फिर से एक धक्का मारा तथा पूरा लौड़ा अन्दर चला गया. मैं उसकी कमर पकड़कर अपनी रफ़्तार से आंटी की गांड को चोदने लगा। अब मेरा लौड़ा सुपरफास्ट ट्रेन के जैसे दौड़ने लगा। यकीन मानिए, रेखा आंटी की दर्द भरी आवाज अब सिसकारियों में बदल गई थी। अब मेरा लौड़ा गच गच उसकी गान्ड को चोद रहा था। आंटी अब थक चुकी थी लेकिन फिर भी मेरा साथ दे रही थी. उसकी गति धीमी हो गयी थी तथा मेरे लौड़े का जवाब नहीं दे रही थी. उसकी हालत देखकर मैंने उसको पट लेटा लिया तथा चोदने लगा. अब मेरा लंड उसकी गांड में पूरा घिस घिस कर जाने लगा. लॉकडाउन के बाद की ये हमारी पहली चुदाई थी. काफी दिनों बाद ऐसा मजा मिल रहा था. अब मेरे लौड़े की रफ्तार एकदम तेज होकर धीमी होती चली गयी. मेरा माल आंटी की गांड में छूट गया. मैं पांच मिनट तक आंटी के ऊपर ही लेटा रहा. जब मेरा लंड खुद ही सिकुड़ कर बाहर आ गया तो मैं उठा तथा आंटी ने मेरे लंड को चूस कर साफ कर दिया. हम दोनों एक दूसरे से चिपक कर लेट गये. फिर वो मेरी पीठ को सहलाने लगी तथा मैं आंटी की गांड को सहलाने लगा. एक बार फिर से हम दोनों के होंठ मिल गये. मैं आंटी के बूब्स मसलने लगा तथा होंठों को चूसता रहा. वो मेरे लंड को सहलाती रही. सुबह के पांच बज गये थे तथा मेरे जाने का समय हो गया था. मैंने आंटी से कहा- अच्छा, अब मैं जाऊं? उसने नीचे की ओर आकर मेरे लंड को मुख में ले लिया तथा चूसने लगी. आंटी जैसे मेरे लंड को छोड़ना ही नहीं चाह रही थी. मैंने आंटी को रोकना चाहा लेकिन उसने लंड को नहीं छोड़ा. फिर मैं भी उसके बूब्स दबाने लगा तथा उसकी चूचियों को जोर जोर से मसलने लगा. मैंने उसके मुख को चोदना शुरू कर दिया. अब मैं भी पूरे जोश में आ गया तथा मैंने उसको बेड पर पटक लिया. वो बोली- नहीं, चुदाई नहीं … दर्द हो रहा है. मगर मैं नहीं रुका. मैंने उसकी टांगों को चौड़ी किया तथा उसकी चूत में लंड को पेल दिया. फिर उसके ऊपर लेटकर उसकी चूत में लंड को अंदर बाहर करते हुए उसकी चूत की गहाराई नापने लगा. वो बोली- रुक जा, चूत तथा गांड दोनों दुख रही हैं. मैंने कहा- खड़ा भी तो तूने ही किया है, अब तो ये मंजिल पर पहुंचकर ही रुकेगा. ऐसा बोलकर मैं तेजी से आंटी को चोदने लगा. सिसकारते हुए मैं बोला- आह्ह … रेखा डार्लिंग … तेरी चूत नहीं जादू है … इसको जितना चोदो, ये उतनी ही मचलती है. अब धीरे धीरे उजाला होने लगा तो मैंने अपने लौड़े की रफ्तार बढ़ा दी तथा तेज़ी से चोदने लगा. अब मैं लंड गपागप … गपागप अंदर बाहर करने लगा। अब आंटी की चूत ने जल छोड़ दिया तथा गीला लंड फच्च … फच्च … करके अंदर बाहर होने लगा। लंड चूत में फिसलता हुआ बच्चेदानी तक जाने लगा। यकीन मानिए, रेखा आंटी बोली- राज … जल्दी करो, सुबह हो गई है। मैंने कहा- चोद तो रहा हूं … मेरी जान। मैं अब तथा तेज तेज झटके मारने लगा। मैंने देखा 5:40 का समय हो गया था. मैंने अपने लौड़े को जल्दी जल्दी पेलना शुरू कर दिया. अब रेखा भी गांड आगे पीछे करने लगी तथा बोली- राज … तथा तेज़ … तेज़ … करो, चोदो जल्दी. मैं आने वाली हूं. हम दोनों ही तेज तेज अपनी अपनी कमर हिला हिलाकर चुदाई का मज़ा लेने लगे। अब मैंने एकदम से लंड की रफ्तार बढ़ा दी तथा रेखा भी समझ गई. उसने भी अपनी चूत ढीली छोड़ दी तथा तेज़ी से लंड अंदर बाहर होने लगा. उसकी चूत ने एक बार फिर जल छोड़ दिया. लंड पूरा चूत रस में फिर से सन गया. मेरे धक्कों की रफ्तार भी धीमी पड़ी तथा वीर्य निकल कर आंटी की चूत में गिरने लगा. वीर्य अंदर छोड़कर मैंने लंड को तुरंत बाहर निकाल लिया. पूरा लंड हम दोनों के रस से सराबोर हो गया था. आंटी ने लंड को चूस कर पूरा साफ कर दिया. उसके बाद मैं उठा तथा मैंने वस्त्र पहने. रेखा ने मैक्सी पहन कर बाहर देखा तो कोई नहीं था. मैं वहां से निकला तथा चुपके से अपने रूम में आ गया। उस दिन मैं थक गया था तो दिन में ड्यूटी नहीं गया। निशा को मैंने फिर से रेखा आंटी को अपने रूम में बुलाया. अब उसके बाद फिर उस निशा में कैसे मैंने आंटी की चूत चोदी, वो मैं अपनी एक तथा स्टोरी में बताऊंगा. ये कोरोना सेक्स स्टोरी आपको कैसी लगी, इसके बारे में अपनी राय देना न भूलें. मुझे आप लोगों की प्रतिक्कीर्तिओं का इंतजार रहेगा. 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