दोस्तों की तनीषा की चूत चोदने की चाहत पूरी हुई
यकीन मानिए, सबसे पहले सभी पाठकों से क्षमा चाहता हूं, ज्यादा देरी से कहानी लाने के लिए, आशा है आप प्रेम देंगे। जैसा कि आप पिछली कहानी श्रृंखला “सविता तनीषा की जवानी के दीवाने” में पढ़ चुके हैं, कि कैसे रोहन और विजय दोनों मिल कर बाथरूम में तनीषा को आहें भरवा देते हैं। पर अचानक से तनीषा की आंख खुलती है, तो दोनों की मेहनत पर जल फिर जाता है, आगे क्या हुआ पढ़िए… दोनों ने तनीषा के चूत का दर्शन कर लिया था, जिसकी वजह से तनीषा शरमा रही थी। पर उनके मन में बस यही चल रहा था कि आज तो अभी वो चुद ही जाती, और ये सोचते-सोचते उनका भी मन करने लगा था। पर वो डर रही थी और करीब बीस मिनट वो शान्ति से बाथरूम में बैठी रही। असल में, वो अपने आप पर हंस भी रही थी कि सविता आज तू तो बच गयी, वरना आज तेरे भाई के दोस्त तुम्हारी चूत चोद देते। असल में, करीब 20 मिनट बाद जब सब कुछ शान्त लगा, तो सविता तनीषा बाथरूम से तौलिया लपेटे ये सोच कर बाहर निकली, कि रोहन और विजय जा चुके थे। पर उन्हें क्या पता था कि वो दोनों पहले से ही उनके बेडरूम में छुप कर उनके आने का इंतजार कर रहे थे। असल में, बाहर आते ही सबसे पहले वो मेन दरवाजा अन्दर से बन्द की और सुकून की सांस ली। असल में, पर रोहन और विजय उनके हुस्न को देख दीवाना हो रहे थे। पर जल्दबाजी करना सही नहीं समझ रहे थे। क्यूंकि उन दोनों को पता था कि जो आग रोहन ने सविता तनीषा की चूत में लंड डाल कर लगाई थी, वो भड़केगी जरूर, और इसी पल का वो दोनों बेसब्री से इंतजार कर रहे थे। यकीन मानिए, दरवाजा बन्द करके सविता तनीषा वापस आ ही रही थी, कि तभी उनका तौलिया अचानक से खुल जाता है और उनकी बड़ी-बड़ी चूचियां झट से आजाद हो जाती हैं। असल में, तो अचानक से सविता तनीषा की निगाह अपनी चूचियों पर जाती है जो कुछ देर पहले रोहन मसल रहा था, और मसलने की वजह से लाल हो गए थे। ये सब देखते ही रहती हैं। तभी उन्हें अपनी चूत से एक दो बूंद लार टपकते हुए दिखता है, तो वो झट से नीचे बैठती हैं और वो उंगलियों से उठा कर सूंघने का प्रयास करती हैं। तो हल्की गंध होने की वजह से वो नाक के पास नहीं ले जाती, क्यूंकि वो शायद रोहन के लंड के चूत में जाने की वजह से झाग की तरह बना था। ये सब चीजें देख अचानक से उनके बदन में ऐसा लगता है कि करंट दौड़ जाता है, और सविता तनीषा के अन्दर की आग भड़क जाती है, जो अब शान्त होने का नाम नहीं ले रही थी। तो वो अपने तौलिए को निकाल कर बगल में कर दी, और खुद की उंगली से चूत में उंगली करने लगी। पहले एक उंगली डाल रही थी। सच कहूं तो, फिर धीरे-धीरे उत्तेजना बढ़ती गयी और कामवासना की ज्वाला बढ़ती गयी। फिर वो दो उंगली चूत में अंदर-बाहर करने लगी। फिर जल्दी जल्दी उंगली चूत में डालने लगी तो उनके मुख से उहहहहहहहहहह अअअअअअआहहहहहह की आवाज भी निकलने लगी। ये सब दृश्य रोहन और विजय छुप कर देख रहे थे। देखते ही देखते अचानक सविता तनीषा उठी और किचन की ओर चल दी। ये सब देख रोहन विजय अब भी शांति से छुप कर बैठे थे। तभी किचन से सविता तनीषा एक पतला सा खीरा लेकर आई और सोफे पर बैठ कर दोनों टांगे फैला ली। इससे रोहन और विजय ने पहली बार सही से सविता तनीषा की गुलाबी चूत का दर्शन किए। फिर सविता तनीषा अपनी चूत में खीरा डालने से पहले वो चूत को सहलाती हैं और जैसे वो अपने चूत को दानों को स्पर्श करती हैं, उनका मुख खुल जाता है। ऐसे ही कुछ देर चूत सहलाते-सहलाते वो अपनी चूचियों को भी मसलने लगती हैं, और फिर खुद ही अपनी चूचियों को पीने का प्रयास करती है। ये सब देख रोहन और विजय उन पर झपटना चाहते थे। उन्हें यूं तड़पता देख वो उन्हे पटक कर धक्कम-पेल चोदना चाहते थे। सच कहूं तो, पर फिर उन्हे याद आ जाता था कि जल्दबाजी नहीं करनी थी। वरना जैसे बाथरूम में लंड को धोखा मिल गया था, वैसे फिर से ना हो जाए। इसलिए रोहन और विजय सही मौके का इन्तजार कर रहे थे। कुछ ही देर में उनका इन्तजार करना सफल होता दिख रहा था। क्यूंकि वो चाहते थे कि सविता तनीषा गर्म हो जाएं पूरी तरह, तो फिर हमला किया जाए। कुछ मिनटों बाद सविता तनीषा बेडरूम की तरफ आती हैं। तो ये सब रूम से बाहर पीछे के दरवाजे से निकल जाते हैं। जैसे ही सविता तनीषा आकर बेडरूम में लेटती हैं, तो रोहन और विजय रूम के दूसरे दरवाजे से बालकनी की तरफ छुप जाते है। इससे सविता तनीषा उन दोनों को देख नहीं पाती। फिर सविता तनीषा आती है और बिना कपड़ों के ही बेड पर लेट जाती हैं और अपने उंगलियों से चूत को सहलाती है। वो दूसरे हाथ से अपनी चूचियों को मसलती हैं और ऐसा करते-करते 10-15 मिनट में सविता तनीषा की आंखे बन्द होने लगती है। भले ही उन्होने अन्दर के वासना की आग को अपने हाथों से बुझाने का प्रयास किया था। पर शायद अब भी उनके अन्दर की वासना खत्म नहीं हुई थी, और वो किसी को बुला रही थी। पर आवाज इतनी धीमी थी कि बिना दीवार के पास कान लगाए सुनाई नहीं देती। जब रोहन ने अपना कान लगा कर सुनना चाहा तो वो “वीरू मेरे राजा। आ जाओ ना मेरी आग बुझा दो ना राजा, आ जाओ” कह कर किसी को याद कर रही थी। वो दोनों पहली बार वीरू का नाम सुने थे तो उन्हें पता चल गया कि तनीषा का कोई ब्वायफ्रेंड था, जिससे वो चुदती थी। तभी उसे इतनी देर से याद कर रही हैं। आपको बता दूं कि, और इस तरह रोहन और विजय को एक मौका मिल जाता है तनीषा को चोदने का। वो दोनों तुरन्त फोन निकालते हैं और अपने-अपने फोन में तनीषा का वीडियो बनाना शुरू करते हैं। इधर तनीषा चूत में उंगली करते हुए, एक हाथ से चूची मसलते हुए, वीरू को याद कर रही थी। उधर रोहन और विजय तनीषा का एमएमएस बनाने में लगे थे। करीब 2-3 मिनट का वीडियो बनाने के बाद उन दोनों में हिम्मत हो गई तनीषा के सामने आने की। तो दोनों बिना देर किए दरवाजा धकेलते हैं। दरवाजे के खुलने की आवाज से तनीषा दरवाजे के तरफ देखती हैं तो वो पाती हैं कि रोहन और विजय दोनों बिना कपड़ों के उनके सामने खड़े थे। आपको बता दूं कि, तनीषा चौंकते हुए अपने आप को बेड पर रखे चादर से ढकते हुए: अभी तुम दोनों गए नहीं? रोहन और विजय एक साथ मुस्कुराते हुए: तनीषा आपको देख कर किसको आपसे दूर जाने का मन करेगा? तनीषा(अपने आप को चादर के अन्दर समेटते हुए): मैं राजू को बता दूंगी कि तुम सब कितने बद्तमीज हो। रोहन (चादर पकड़ कर खींचते हुए): अरे नहीं तनीषा मत बताना, हम कुछ नहीं करेंगे। तनीषा: चादर छोड़ो मेरा। विजय: तनीषा बस एक बार दिखा दो, चखा दो तनीषा, आप काफी हाॅट हो, आपको जब से देखा है आपके नाम का पता नहीं कितनी बार मुट्ठी लगा चुका हूं। तनीषा बस एक बार आप इजाज़त दे दो। रोहन: हां तनीषा हमें आपसे प्रेम हो गया है तनीषा। जब से मैंने आपको पहली बार स्टेशन पर देखा, तब से मैं आपको पसन्द करता हूं तनीषा। आपकी जवानी चखना चाहता हूं। आपके गठीले बदन को छूना चाहता हूं। रसीले होठ को चूमना चाहता हूं। पपीते जैसे चूची को पीना चाहता हूं। पाव-रोटी जैसी चूत को चोदना चाहता हूं। तनीषा बस एक बार तनीषा। प्रेम से हम दोनों आपसे प्रेम करेंगे। तनीषा प्लीज तनीषा प्लीज तनीषा। ये कहते हुए रोहन ने तनीषा के चादर को फिर से खींचना शुरू किया। तनीषा: प्लीज यार तुम मेरे भाई के दोस्त हो। ध्यान देने वाली बात है कि, मेरे भाई जैसे हो, मैं तुमसे कैसे चुद सकती हूं? विजय: वैसे ही साली रंडी जैसे वीरू से चुदती थी। वीरू का नाम सुनते ही एकाएक शान्त सी हो गयी। सच कहूं तो, उनके चेहरे की हवाईयां उड़ गयी, चेहरा तमतमा कर लाल हो गया। तनीषा फिर कुछ बोलती तब तक विजय फिर बोलता है, “देखो तनीषा, हम नहीं चाहते कि आपकी बदनामी हो। सच कहूं तो, हम दोनों राजू भाई को भी कुछ नहीं बताएंगे। बस हमें वो करने दीजिए जो हम चाहते है। ” तनीषा: यार वीरू के बारे में तुम्हे कैसे पता? प्लीज ये सब बात मत बताना राजू को। रोहन: तनीषा अब तो ये आपके हाथ में है कि आपको ये बात छुपवाना है या फिर उजागर करना है। यकीन मानिए, विजय: देखिए तनीषा हम भी नहीं चाहते कि आपको कोई परेशानी हो। ध्यान देने वाली बात है कि, थोड़ी ही देर की बात है नाटक मत करो। नहीं तो मेरे पास आपकी वीडियो भी है। राजू भाई को दिखा दिए तो तुम्हारी कोई इज्जत नहीं रह जाएगी। ध्यान देने वाली बात है कि, ये कहते हुए विजय ने तनीषा के ऊपर से पूरा चादर खींच लिया, और झट से बेड पर चढ़ गया। जैसे ही विजय ने तनीषा के ऊपर से चादर खींचा, तनीषा की गदराई मदमस्त जवानी देख, विजय और रोहन के आंखो में फिर से चमक आ गयी। सच कहूं तो, तनीषा अपने स्तनों को एक हाथ से छुपाने की नाकाम कोशिश कर रही थी, और दूसरे हाथ से अपनी चिकनी चुपड़ी चूत को ढकने लगी। तनीषा की बिना झांटो वाली चिकनी चूत को देख दोनों दीवाना हो रहे थे, और दोनों के लंड चूत को देख सलामी देने लगे। यकीन मानिए, तनीषा बेड पर पीछे हटते जा रही थी और रोहन और विजय बेड पर आगे बढ़ते जा रहे थे और उन दोनों के लंड ऊपर नीचे होते हुए सलामी दे रहे थे। पीछे हटते-हटते सविता तनीषा दीवार के पास पहुंच गयी और दीवार के बल बैठी रह गयी, जहां से वो अब पीछे नहीं हो सकती थी। वो दोनों बोले: तनीषा हम कुछ नहीं करेंगे। आप हमें समझने का प्रयास करिए। प्लीज तनीषा, प्लीज तनीषा करने लगे। और तभी दोनों तनीषा के गोरे-गोरे चूचे और उस पर भूरे रंग के निप्पल देख और उतावले हो गए। ध्यान देने वाली बात है कि, जब तक तनीषा समझती कि ये दोनों फिर उन्हे रंडी की नज़र से देख रहे, तब तक रोहन बेड पर झुक गया और झुकते ही उसने अपना मुख तनीषा की चूत के द्वार पर रख दिया। असल में, फिर झट से अपनी जीभ तनीषा की चूत पर रख चाटना शुरू कर दिया। और विजय ने बिना देर किए तनीषा के चूचों को मसलना शुरू कर दिया। अब तनीषा उनके जाल में फंसने लगी थी। सच कहूं तो, आगे क्या होगा जानने के लिए हमसे जुड़े रहें। कमेन्ट करके अपनी राय जरूर दें।