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मां की चुदाई दोस्त की दुकान पर-1

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दोस्तों मेरा नाम अभिषेक है। मैं वाराणसी का रहने वाला हूं। मेरी उमर 21 साल है, और मैं कॉलेज में पढ़ता हूं। मेरे परिवार में मम्मी-पापा और एक छोटा भाई है। मेरे पापा एक प्राइवेट फर्म में काम करते है। और अक्सर उनकी काम के सिलसिले में बाहर आना-जाना पड़ता है। वो महीने में 15 दिन घर पर और 15 दिन बाहर रहते है। मेरी मां एक हाउसवाइफ है। सुंदर, सुशील, घरेलू, पवित्र हाउसवाइफ, जो कि असल में उतनी पवित्र नहीं थी, जितनी मुझे लगता था। सच कहूं तो, ये मुझे तब पता चला जब मैंने मेरी मां को अपने दोस्त से चुदते देखा। उसी के बारे में आज की कहानी है। ध्यान देने वाली बात है कि, तो चलिए बताता हूं सब कैसे हुआ- ये पिछले साल की बात है। असल में, जिस मोहल्ले में हम लोग रहते है, वहां एक नई राशन की दुकान खुली। उस दुकान में सब सामान बाकी दुकानों के मुकाबले में सस्ता मिल जाता था, इसलिए देखते ही देखते वहां पर ग्राहकों की लाइन लगने लगी। मम्मी ने मुझे बताया कि वो दुकान कोई बाप-बेटा मिल कर चलाते थे। जब मैं उस दुकान पर गया, तो पता चला कि जो लड़का था, वो 2 साल पहले मेरे कॉलेज में था। उसका नाम हिमेश था। वो अपनी क्लास का टॉपर था, और कॉलेज में काफी मशहूर था। मैंने देखते ही उसको पहचान लिया। हम लोग कॉलेज में मिल चुके थे, इसलिए उसने भी मुझे पहचान लिया। वो मुझसे मिल कर काफी खुश हुआ, कि चलो एक दोस्त मिल गया पास ही में। फिर मैं अक्सर उसकी दुकान पर जाने लगा। हम दोनों में अच्छी दोस्ती हो गई थी। संडे के दिन हम लोग क्रिकेट भी खेलने लगे। वो मेरी मम्मी की भी बड़ी रिस्पेक्ट करता था। जब भी मम्मी उसकी दुकान पर कुछ लेने जाती, तो वो उनके पांव जरूर छूता था। परन्तु पांव छूने वाले उस लड़के ने कब मां के पांव उठा दिए, पता ही नहीं चला। एक बार शौर्यवार का दिन था। उस दिन भी हम क्रिकेट खेलने जाने वाले थे। मैच से एक दिन पहले सब प्लेयर्स को फोन करके पूछना होता था कि वो आ रहे है या नहीं। जब मैं हिमेश को फोन किया तो उसने किसी काम का बोल कर मना कर दिया। फिर अगले दिन मैं अकेला ही चला गया मैच खेलने। मैच में मैं जल्दी आउट हो गया। वैसे मैं आउट नहीं था, परन्तु फिर भी आउट दे दिया गया। उस वजह से मेरा मूड खराब हो गया, और मैं जल्दी वापस आ गया। जब मैं घर आया, तो देखा घर पर ताला लगा था। असल में, मुझे और गुस्सा आने लगा कि अब मम्मी कहां चली गई थी। आपको बता दूं कि, फिर मैंने मम्मी को काल लगाया तो मम्मी फोन भी नहीं उठा रही थी। अब कुछ कर तो सकता नहीं था, तो सोचा वहीं बैठ कर इंतजार कर लेता हूं। इसलिए मैं घर की दहलीज पर बैठ कर मम्मी के आने का इंतजार करने लगा। यकीन मानिए, मैं वहां बैठा इधर-उधर देख रहा था, कि तभी मेरी नज़र बाइक पर आते हुए हिमेश पर पड़ी। वो अभी काफी दूर था। मैंने सोचा जब तक मम्मी नहीं आती, उसकी दुकान पर बैठ कर इंतजार कर लेता हूं, और थोड़ी बातें भी हो जाएंगी। ये सोच कर मैं उसकी दुकान की तरफ चल पड़ा। तब तक वो दुकान पर पहुंच गया। मैं अभी थोड़ी दूर था। मैंने उसकी तरफ देख कर हाथ भी हिलाया, परन्तु उसका ध्यान नहीं था। तभी मैंने देखा कि उसके साथ कोई औरत भी थी, जिसने मुंह ढका हुआ था। वो जल्दी से बाइक से उतरा, और उस औरत को लेके दुकान के अंदर चला गया। अंदर जाके उसने शटर नीचे कर दिया। आम तौर पर दुकानदार शटर तब नीचे करते है, जब ये बताना हो कि दुकान अभी खुली नहीं है। मुझे समझ नहीं आया कि उसने शटर नीचे क्यों किया, क्योंकि अभी तो दोपहर होने में भी टाइम था जब लंच करना होता है। असल में, फिर अचानक से मेरे दिमाग की बत्ती जली, कि कहीं वो उस औरत को चोदने तो नहीं लेके आया था? क्योंकि ऐसी औरतें मुंह ढक कर ही अंदर घुसती है। ये सोच कर मेरे चेहरे पर एक शैतानी मुस्कान आ गई। मैंने सोचा चलो अंदर जाके चुदाई का नज़ारा देखते है। मैं जल्दी से चुप-चाप उसकी दुकान के अंदर चला गया। उसकी दुकान काफी बड़ी थी, और अंदर की तरफ एक कच्छ बना रखा था मेहमानों के लिए और रेस्ट करने के लिए। मैं चुपके से उस कमरे के बाहर गया, और खिड़की के अंदर झांकने लगा। जैसे ही मैंने अंदर देखा, मेरे पैरों के नीचे से जमीन निकल गई। वो औरत कोई और नहीं बल्कि मेरी मम्मी थी। हिमेश ने मेरी मम्मी को अपनी बाहों में लिया हुआ था और उसके होंठ चूस रहा था। मम्मी भी उसका साथ दे रही थी। आपको बता दूं कि, मेरी समझ में नहीं आ रहा था कि ये क्या हो रहा था? मम्मी ऐसे कैसे कर सकती थी? और ये कब से चल रहा था? ये सब सवाल मेरे दिमाग में आने लगे। होंठ चूसते हुए हिमेश ने मेरी मम्मी की साड़ी खोलनी शुरू कर दी। उसने पल्लू पकड़ कर खींचा तो मम्मी किसी फिल्म की हीरोइन की तरह गोल घूम गई, और उसकी साड़ी पूरी खुल गई। अब वो ब्लाउज और पेटीकोट में थी, और काफी ही सेक्सी लग रही थी। असल में, मम्मी के ब्लाउज में से उनकी गोरी-गोरी क्लीवेज दिख रही थी। उनका सपाट पेट जवान लड़कियों जैसा था। फिर हिमेश ने अपनी शर्ट उतार दी, और ऊपर से नंगा हो गया। उसके बाद उसने फिर से मम्मी को अपनी बाहों में भर लिया, और दोनों फिर से किस्स करने लगे। दोनों ऐसे किस्स कर रहे थे जैसे एक-दूसरे को खा जाना चाहते हों। कुछ देर में दोनों की किस्स टूटी और मम्मी हिमेश की गर्दन चूमने लगे। वो गर्दन चूमते हुए उसकी छाती पर आ गई, और चूमने लगी। हिमेश की बॉडी अच्छी बनी हुई थी। मम्मी उसकी छाती के बीच में अपनी जीभ फिराने लगी। हिमेश ये देख कर मुस्कुरा रहा था, और मम्मी के चूमने का आनंद ले रहा था। ध्यान देने वाली बात है कि, कुछ देर में मम्मी उसको चूमते हुए नीचे बैठ गई, और उसकी पेंट खोलने लगी। मम्मी ने उसकी पेंट खोल कर उतार दी। आपको बता दूं कि, अब हिमेश सिर्फ अंडशौर्ययर में था। उसका लंड अंडशौर्ययर में पूरा तना हुआ था, और टेंट बनाए हुए था। मेरी मम्मी उसके खड़े हुए लंड को देख कर खुश हो गई, और हिमेश की तरफ देख कर मुस्कुराने लगी। इसके आगे इस कहानी में और क्या-क्या हुआ, वो आपको अगले पार्ट में पता चलेगा। यहां तक कि कहानी आपको कैसी लगी आप [email protected] पर बता सकते है।