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मजेदार किस्सा: दूसरा विवाह (सुहागरात)-1

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ये कहानी मेरी पत्नी कीर्ति की है। उसकी उम्र 36 वर्ष है तथा हाईट 4’6″ है। आपको बता दूं कि, उसके बूब्स तथा गांड भी नार्मल है कोई ज्यादा बड़े नहीं है। एक रोज अचानक मेरी तबियत ख़राब हुई तथा डॉक्टर ने मुझे बताया मुझे लंग्स कैंसर हो गया है। तभी से मेरी हालत बिगड़ने लगी तथा देखते ही देखते एक साल से ऊपर हो गया था। घर की स्तिथि भी काफ़ी ख़राब हो गयी थी, तथा कीर्ति अब मेरे साथ रहना नहीं चाहती थी। वो मेरे बेटे को अपने साथ लेकर अपने भाई के घर चली गयी। फिर 2 महीने बाद मुझे तलाक के लिए पेपर भेज दिए। मैंने भी उस पर साइन कर दिए तथा तलाक हो गया। वैसे भी मेरी जिंदगी का कोई भरोसा नहीं था। सच कहूं तो, इसी बीच उसके घर पर एक रिश्ता आया कीर्ति के दूसरे विवाह के लिए। युवक उम्र में थोड़ा ज्यादा था। वो लोग उसे देखने आये उसका नाम राकेश था तथा वो 45 साल का एक काल तथा थोड़ा मोटा सा दिख रहा था। उसकी हाईट 5’9″ थी। सच कहूं तो, वो एक कंपनी में वरिष्ठ अकाउंटेंट था। तभी कीर्ति काली साड़ी तथा स्लीवलेस ब्लाउज पहन कर चाय लेकर आती है। उसे देख कर राकेश अपना हाँथ लंड पर घुमाता है। कीर्ति ये देख कर शर्मा के चाय दे कर हॉल के कोने में खड़ी जो जाती है। दोनों आँखों से इशारों में बात करते है तथा फिर कीर्ति धीरे से अपनी साड़ी पेट पे से हटाती है तथा अपना हाँथ अपनी साड़ी पर से अपनी चूत पर इशारा करती है। कुछ देर बात करने के बाद सब लोग दोनों को अकेले में बात करने के लिए कहते है। दोनों छत पर जाके बात करते है। अच्छा घर-बार तथा अच्छी सैलरी ये सब देख कर कीर्ति तथा उसके घर वालों ने शादी के लिए हाँ कर दी। कीर्ति को भी अपने तथा अपने बच्चे के भविष्य लिए ठीक लगा। 2 महीने बाद शादी के लिए महूरत निकला। कुछ 15 रोज बाद कीर्ति को राकेश का कॉल आता है- राकेश: कैसी हो मेरी जान? कीर्ति: आप कौन, तथा ये कैसे बदतमीजी से बात कर रहे हो? राकेश: मैं राकेश। कीर्ति: ओह्ह्ह, आपको मेरा नंबर कैसे मिला? राकेश: मेरे होने वाले साले ने दिया। तथा बताओ कैसे चल रही है शादी की तैयारी? कीर्ति: इसमें तैयारी की क्या बात है? बस आर्या समाज में जाना है, शादी करनी है तथा क्या? राकेश: मेरी जान वो तो ठीक है। एक बात बोलने के लिए कॉल किया था। कीर्ति: बोलो। राकेश: आपकी गांड तथा दूध दोनों थोड़े छोटे है। कीर्ति: तो अब आप बड़े कर देना शादी के बाद। वैसे मुझे देख कर तो खूब हाथ फेर रहे थे। राकेश: तुम भी तो आपन हाथ घुमा रही थी। एक काम करो, मैं तुम्हें कुछ टैबलट भेजता हूं। वो खाना। उसमें सब लिखा है। आज शाम को मिल जाएगी। कीर्ति: वो किस लिए? राकेश: तुम बस खाना शुरू करो कीर्ति, ठीक है? कीर्ति शाम को टैबलेट लेती है। आपको बता दूं कि, वो दोनों टैबलेट हार्मोनोस डेवलोपमेन्ट की थी। ध्यान देने वाली बात है कि, एक महीने में ही कीर्ति के दूध तथा गांड के आकार बढ़ जाते है। कुछ रोज बाद ही दोनों की शादी का रोज आता है। शादी का आयोजन आर्य समाज के माध्यम से एक मंदिर में होता है। सच कहूं तो, शादी के बाद कीर्ति अपने बेटे को अपने भाई के पास ही छोड़ जाती है। फिर वो अपने नये पति के घर आती है। सभी घर के रीती-रिवाज होने के बाद राकेश कीर्ति को अपने साथ अपने दोस्त के खाली फ्लैट पर ले जाता है जहां पर केवल एक डबल बेड था। रूम में जाते ही कीर्ति राकेश को पकड़ कर किस्स करने लगती है। आपको बता दूं कि, कीर्ति: राकेश जी आप तो बिलकुल सही जगह पर लाये हो। राकेश: मुझे पहले ही पता था कि तुम अकेले में चुदना चाहती हो, जहाँ आस-पास कोई ना हो। सही कहना मेरी जान? कीर्ति: हाँ जानू,‌आज हमारी सुहागरात है। मैं इसका पूरा आनंद लेना चाहती हूं। फिर राकेश कीर्ति को किस्स करते हुए उसका ब्लाउज उतारता है। कीर्ति ने ब्रा नहीं पहनी थी। सच कहूं तो, वो उसे पहले उतार देती है राकेश के सामने बड़े-बड़े दूध लटक रहे थे वो देख कर ही उसे भूखे कुत्ते की तरह चूसने लगता है। कीर्ति: आह आह आराम से। आज से ये सब कुछ आपका ही है। राकेश: तुम्हारे दूध बड़े तो हो गये है, बाकी लटके हुए है। लेकिन मजेदार रसीले आम की तरह लग रहे है। कीर्ति आपने हाथ राकेश के लंड पर फिराती है तथा राकेश की पेंट को खोलती है। राकेश का लंड अंडशौर्ययर में ही बड़ा सा लग रहा था। कीर्ति: तुम्हारा औजार कितना बड़ा लग रहा है। राकेश: अभी तो खड़ा भी नहीं हुआ है। कीर्ति: हाय मैया, खड़ा होने पर कितना बड़ा होगा? राकेश: खुद ही देख लेना, आज तुम्हें बहुत दर्द होने वाला है। मुझे पता है कि तुम्हारे पहले पति का लंड सिर्फ 4″ का था। सच कहूं तो, कीर्ति: तुम्हें कैसे पता है? राकेश: मैं उससे मिलने गया था हॉस्पिटल। उसने मुझे सब कुछ बता दिया है, इसलिए मैन तुम्हें यहां पर लाया हूं सुहागरात मनाने के लिए। कीर्ति कुछ नहीं बोली तथा राकेश का लंड अंडशौर्ययर के ऊपर से ही मसलने लगी। राकेश अब कीर्ति के पूरे बदन की मसलने लगा, ताकि वो जल्दी उत्तेजित हो जाये। फिर उसने कीर्ति के लहंगे को उठाया तथा कीर्ति की काली चूत को देखा तो वो पानी से भारी हुई थी। उसने एक ऊंगली कीर्ति की चूत में डाली। कीर्ति के मुँह से स्स्स्स की आवाज़ आयी। आपको बता दूं कि, राकेश: उत्तेजित हो गयी है ये तो। लो अब मेरा औजार आपने मुँह लो। और अंडशौर्ययर उतारता है उसके लंड बिना खड़ा हुए ही 6″ लम्बा तथा 2.5″ मोटा था। कीर्ति: ओह! ये कितना बड़ा तथा मोटा है, तथा अभी खड़ा भी नहीं हुआ है। असल में, राकेश: चलो चूसो इसको, अब देर मत करो। यकीन मानिए, तुम तो पहले ही ये सब कर चुकी हो। एक्सपीरियंस हो। राकेश बेड पर घुटनों के बाल खड़ा हो जाता है तथा कीर्ति घोड़ी बन कर राकेश का लंड चूसने लगती है अपने लहंगे को कमर के ऊपर उठाती है, जिससे राकेश को उसकी गांड दिखे। असल में, कीर्ति की बड़ी-बड़ी गांडों को देख कर राकेश मुख में पानी आ जाता है। वो उस पर हाथ फेरता है। कीर्ति को भी आनंद आ रहा था। वो अपनी गांड हिलाने लगती है। सच कहूं तो, राकेश: गोली ने अपना काम सही से कर दिया। आपको बता दूं कि, तेरी गांड तो बहुत बड़ी हो गयी है कीर्ति। कीर्ति: हां जानू, तथा ये लौड़ा भी बड़ा हो गया है। अब घुसा दो इसको मेरी काली चूत में। 2 साल से मैं भी नहीं चुदी हूं। राकेश: मुझे पाता है तू कितनी शौकिन है चुदाई की। तुझे रांड बन कर चुदना बहुत पसंद है। सच कहूं तो, कीर्ति: इसीलिए तो आपसे शादी की है। मुझे मालूम था आप भी बड़े चोदूं हो। अब देर मत करो, जल्दी से मेरे पीछे आ जाओ तथा पेल दो अपना काला औजार मेरी गुफा में। राकेश कीर्ति के पीछे जाता है, तथा उसकी गांड पर चुम्मा लेता है। फिर अपने बड़ा लंड जो करीब 9″ का होता है, उसे कीर्ति की गांड पर थपथपाता है तथा चूत के छेद पर रख कर धीरे-धीरे अंदर डालने लगता है। कीर्ति: मेरे पतिदेव कोई कुंवारी युवती नहीं चौद रहे हो। एक झटके में पेल दो, पहले से ही फटा मेरा छेद है। राकेश: रांड मुझे लगा कि 2 साल से नहीं चुदी है, तो दर्द होगा। ले तेरी बहन की चूत साली। और एक झटका मारा तथा आधे से ज्यादा लंड कीर्ति की चूत अंदर चला गया। ध्यान देने वाली बात है कि, कीर्ति के मुख से कोई आवाज़ नहीं आयी। राकेश ने फिर लंड पीछे किया तथा एक तथा झटका मारा। कीर्ति: आह राकेश जी, आनंद आ गया। राकेश का अभी भी 1″ लंड बाकी था। वो कीर्ति की कमर पकड़ कर झटके मारने लगता है। कमरे में फच फच की आवाज़ आ रही थी। कीर्ति भी मदहोशी में स्स्स्स स्स्स्स आह्ह अह्ह्ह आवाज़ निकाल रही थी, जिससे राकेश का जोश तथा बढ़ रहा था। वो कीर्ति को तेजी से तथा जोश में कुतिया बना कर चोदे जा रहा था। कीर्ति: राकेश जी चोदो, जोर-जोर से आअह्ह्ह अह्ह्ह्हह उम्म्म्म आनंद आ रहा राकेश जी। तथा करो, ऐसे ही चोदो अपनी कुतिया को। 5 मिनट के बाद राकेश आपने दोनों पंजो पर खड़ा होके कीर्ति के ऊपर हो गया तथा उसके दोनों कंधो को पकड़ कर जोर-जोर से धक्के मारने लगा। ये कीर्ति के लिए थोड़ा नया था। लंड बड़ा होने के कारण कीर्ति की चूत में पूरा नहीं घुस रहा था। आपको बता दूं कि, राकेश जबरदस्ती उसको घुसाने में लगा था। कीर्ति: एक रोज में ही पूरा नहीं जायेगा राकेश जी ऊऊ ऊऊ मेरा चूत की घेराई काम है। ‌ हंम्म्म्म हुम्म्म हुम्म्म हमऊऊऊ लंड के अनुसार ढलने में टाइम लगेगा आआआ। मान जाओ जानू, रुक जाओ थोड़ा। राकेश: पूरा 8″ खाने के बाद भी तेरी घेराई काम है? आज तो पूरा चेले जायेगा मेरी रांड.. साली छिनाल, रंडियों की तरह पूरा लंड घुसवा लिया तूने। इधर कीर्ति जोर-जोर से चिल्लाने लगी: छोड़ दो, दर्द हो रहा है। और राकेश उसे जोर-जोर से पेलता रहा। 3 से 4 मिनट बाद राकेश ने अपना पूरा माल कीर्ति की चूत में गिरा दिया, तथा दोनों चिपक कर लेट गए। कीर्ति: इतनी मजेदार चुदाई मैंने अभी तक नहीं की थी। आपका लंड सच में दमदार है जानू। यकीन मानिए, राकेश: मैंने भी पहेली बार तेरी जैसी हबशी रांड को देखा है, जो पहली ही बार में मेरा पूरा 9″ का लंड खा गयी। यकीन मानिए, फिर दोनों को बात करते-करते निशा के 1 बज जाते है। कीर्ति फिर से राकेश के लंड को चूसने लगती है। यकीन मानिए, थोड़ी देर बाद दोनों 69 की पोजीशन में एक-दूसरे के लंड तथा चूत को चूसते तथा चाटते है। ‌ राकेश कीर्ति को सीधी लिटाता है तथा अपने दोनों हाथों से कीर्ति के टांगों को उठाता है। फिर कीर्ति थोड़ा सा थूक लेके राकेश के लंड पर लगाती है, तथा अपनी चूत पर भी तथा लंड को पकड़ कर चूत के छेद पर रखती है। कीर्ति: पेल दो राकेश जी। इस रांड की चूत को फिर से अपने लंड का पानी पिलाओ, बहुत प्यासी है। राकेश एक झटका मरता है तथा पूरा लंड अंदर घुसा देता है। कीर्ति के मुख से चीख निकल जाती है। कीर्ति: आअह्ह्ह मईययाआ मर गयी। राकेश: क्या हुआ रांड, अब क्यों चिल्ला रही है? कीर्ति: बाप रे बाप, नीचे लेट के लेने में ये बहुत बड़ा लग रहा है। आज तो इस रांड की चूत पूरी ही फट जायेगी। मेरी नाभि तक टकरा रहा है ये तो। आपको बता दूं कि, लगता है बस मुख से बाहर आने वाला है। राकेश अब कीर्ति के ऊपर लेट कर उसे जोर-जोर से चोदने लगा। कीर्ति भी खूब चिल्ला रही थी तथा अपने दोनों टांगे उठा के राकेश का लंड घपाघप अपनी चूत में खा रही थी। ऐसा लग रहा था जैसे बकरी के ऊपर कोई सांड चढ़ा हो। हर झटके के साथ कीर्ति भी राकेश का साथ दें रही थी, तथा उसके नीचे लेट कर अपने गांड को हिला रही थी। तो कभी ऊपर उठा रही थी। ठीक 30 मिनट ऐसे ही चोदने के बाद- राकेश: कीर्ति मेरा पानी निकलने वाला है। कीर्ति: निकाल दो राकेश जी अपनी रंडी बीवी को चूत में पानी उम्ह उम्मह्ह्ह। ‌ मारो पिचकारी मारो पिचकारी मेरी चूत के अंदरर्रर्रर्र, बहुत बड़ा लंड है आपका राकेश जी। राकेश जी पूरा डाल दो मेरे अंदर। अहह अह्ह्ह्हह कह्ह्ह मम्मी फाड़ दिया आपके लंड ने मेरी बुर को मेरे राकेश जी। राकेश जोर-जोर से 10 से 15 धक्के मारता है। हर धक्के में जोर-जोर की फट फट की आवाज़ आती है तथा कीर्ति अपना मुख खोल के आह्ह आह करके चिल्लाती है। दूसरा राउंड समाप्त होता है। राकेश: क्या कमाल की चूत है तेरी। आज पूरा निचोड़ लिया मुझे। ऐसी दमदार औरत को पहली बार चोदा है। राकेश अपना पानी कीर्ति की चूत में छोड़ देता है तथा उसके ऊपर लेट जाता है। यकीन मानिए, कीर्ति: इतने में ही थक गए आप तो। अभी तो 2 ही बजे है। पूरी निशा तो बाकी है। यकीन मानिए, अभी मुझे भी सवारी करनी है इस बड़े लंड की। आगे की कहानी पार्ट 2 में है।