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Meri Didi Ki Garam Jawani – Part 12

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आपको बता दूं कि, हैलो दोस्तों, शनिवार के सुबह ही मेरी तनीषा कीर्ति की चिकनी चूत खुजलाने लगी, तो मेरे दिल में भी उनको चोदने की इच्छा थी। बस मै शर्त हारना नहीं चाहता था, एक २२-२३ साल की कुंवारी लड़की अपने जिस्म की आग को कैसे शांत करती है। वो तो मुझे नहीं पता लेकिन कीर्ति की लंड के लिए तड़प हमेशा उसे मेरे करीब खींच लाती थी। सच कहूं तो, शौर्यवार के सुबह घर के सभी सदस्य साथ बैठकर चाय पी रहे थे, तो मेरी नजर कभी कीर्ति के स्तन पर जाती तो कभी उसके जांघों की ओर जाती। वो सलवार कमीज़ पहन कर बैठी हुई थी। उसका गोरा मुखड़ा, सुराही नुमा गर्दन, टेनिस बॉल समान चूची तो सपाट पेट लेकिन मेरी बहन के बदन का निचला भाग अधिक भारी और सेक्सी था। उसकी गोल गुंबदाकार चूतड़ और मोटे चिकने जांघों के साथ उसके बीच में बुर, दोनों फांक गद्देदार और दरार काफी कसी हुई है। यकीन मानिए, तो कीर्ति बुर को काफी हद तक बाल रहित रखती थी। चाय पीने के बाद, कीर्ति वहां से उठकर चली गई तो मम्मी बोली -कीर्ति को लेकर ब्यूटी पार्लर जाऊंगी, तुम स्नान करके नाश्ता कर लेना। मैं – कोई खास बात। असल में, मम्मी – हां, कल उसे देखने के लिए लड़के वाले आ रहे है। आपको बता दूं कि, तो अब मै क्या बोलत, खैर मै उठकर अपने कमरे में चला गया। फिर वाशरूम घुसा, स्नान करते वक़्त सिर्फ कीर्ति को सोच रहा था। लेकिन उसकी शादी होने पर मुझे ही परेशानी थी, खैर स्नान करके डायनिंग हाल में घुसा और फिर नाश्ता लेने के लिए किचन चला गया। नाशता कर ही रहा था कि कीर्ति और मम्मी दोनों अपने अपने कमरे से बाहर निकले और फिर मम्मी बोली। मम्मी – बेटा मै एक घंटे में आ जाऊंगी। मै कीर्ति को घूरता हुआ बोला – ठीक है। वो काले रंग की स्कर्ट और टॉप पहने हुए थी, उनके जाने के बाद मेरा नाश्ता खत्म होते ही मैने घर का दरवाजा बंद कर दिया। पापा भी किसी दोस्त के घर गए हुए थे, तो अकेले में मैने अपना मोबाइल लिया और बेड पर लेटकर एक पोर्न वीडियो देखने लग गया। असल में, कीर्ति की शादी उसको कुछ खास परेशान नहीं करती, आखिर हर लड़की का ये एक स्वाति होता है। और २२-२३ साल की लड़की के लिए अपनी जवानी को संभालना काफी कठिन भी होता है और वो भी बिना किसी बॉयफ्रेंड के। खैर मै पोर्न वीडियो देखने में मशगूल था। पोर्न वीडियो देख मेरा लन्ड टाईट हो गया और मै एक नग्न महिला को दो लड़कों के साथ मजे लेते देख अपने लंड को बरमूडा से बाहर निकाल कर उसे धीरे धीरे हिलाने लग गया। महिला एक लड़के के लंड को चूसते हुए दूसरे से चूद रही थी, वो सेज पर घोड़ी बनकर गान्ड की ओर से लंड लिए दूसरा लंड मुख में भर मुखमैथुन करने में मस्त थी। सच कहूं तो, तो उसके दोनों स्तन सीने से लटक रहे थे जिसे एक लड़का पकड़कर दबा रहा था। तभी मैने वाशरूम जाकर पिसाब किया और फिर बेड पर आकर लेट गया। अब आराम फरमाते हुए मैं लंड को ठंडा कर रहा था। कीर्ति के रहते मुठ मारकर लंड को ठंडा करना बेवकूफी था और फिर मेरी आंख लग गई। मेरी नींद मोबाइल की घंटी बजने से टूटी, तो मै मम्मी का नंबर देख कर थोड़ा हैरान रह गया। फिर मैंने मोबाइल पर कॉल रिसीव किया और मैं बोला.। मैं – हां मम्मी, बोलो? मम्मी – दरवाजे के बाहर खड़ी हूं। यकीन मानिए, फिर मैंने जाकर दरवाजा खोला, मुझे देख कर मम्मी गुस्से में थी और वो बोली – इतनी देर से दरवाजा खटखटाया और तुम कहाँ थे? मैं – मेरी नैन लग गई थी। ध्यान देने वाली बात है कि, फिर मम्मी अपने कमरे में चली गई और कीर्ति अपने कमरे की ओर चली गयी। मै कुछ देर रुककर कीर्ति के कमरे में घुसा तो उसको देख दिमाग सन्न रह गया। वो अपने स्कर्ट और टॉप्स को उतारकर सिर्फ पेंटी और ब्रा में खड़ी थी। लेकिन उसका चेहरा दीवार की ओर था तो मै हल्के कदम से उसके करीब पहुंचा और पीछे से दबोच लिया। कीर्ति मेरे छुअन से डर गई, पीछे देखते हुए बोली। कीर्ति – पता है ना, कल मुझे लड़के वाला देखने आयेगें। मै कीर्ति की गोलाई को दबाने लग गया और मैं बोला – तो क्या हुआ बेबी, उसको जों देखना है वो तो ऊपर से ही दिख जाएगा। कीर्ति – क्यों शादी के बाद क्या वो अंदर का हिस्सा नहीं देखेंगे? मै कीर्ति के गर्दन को चूमने लग गया और बोला – वो तो तुम्हारे पति देखेंगे, नाकि उनके मम्मी और पापा। कीर्ति मुझे पीछे की ओर धकेलने का प्रयास कर रही थी और बोली – चुपकर साले कुत्ते, जब देखो मुझे देख मुख से लार टपकाने लगता है। असल में, दीपक अपनी तनीषा की चूची को जोर जोर से मसलता हुआ अपने लंड को उसके चूतड़ पर गड़ा रहा था। तभी कमरे से बाहर पैर की आहट सुनाई दी, तो मै डर सा गया। मैंने तभी कीर्ति को छोड़ा और वो अपना नाइटी लिए वाशरूम घुस गई। मैं तनीषा के बेड पर लेटकर एक किताब उठा कर और उसे पढ़ने लग गया। आपको बता दूं कि, पल भर बाद मै तनीषा के कमरे से बाहर गया, तो मम्मी किचन में थी। फिर मैं सीधे अपने कमरे में घुसा और बेड पर लेटकर सोचने लग गया कि किस तरह से कीर्ति को अपने खड़े लंड से जल्दी चोदा जाये। खैर वक़्त दोपहर के १२:३० हो रहे थे, तो मुझे पता था कि मम्मी खाना बनाकर मार्केट निकलेगी और शायद वो कुछ देर आराम करे। फिर हम सब ने एक साथ खाना खाया। तभी मै डायनिंग रूम गया, तो मम्मी किचन में ही थी और मै एक ग्लास जल लेने के लिए रेफ्रिजरेटर के पास गया। तो मम्मी पीछे देखते हुए बोली – मै अब आराम करने जा रही हूं, अगर नींद लग जाय तो एक घंटे बाद उठा देना। फिर मम्मी अपने रूम चली गई और में मौका पाते ही कीर्ति के कमरे में चला गया। वो बेड पर लेटकर एक किताब पढ़ रही थी, मुझे देख का वो उठकर बैठ गई और मै उसके सामने बैठकर बोला। मैं – एक तो तुम शर्त मुझसे हार चुकी हो, उस पर से इतना नखरा। कीर्ति मुस्कुराने लगी और बोली – चल बोल जल्दी से, अभी यहां तेरा क्या काम है। यकीन मानिए, तो मै झट से उसके गर्दन के पीछे हाथ लगा कर उसके होंठो को चूमने लग गया। सच कहूं तो, चूमते चूमते मैं उसके रसीले होठो को अपने मुख में भरकर चूसने लग गया। कीर्ति नाइटी में मस्त माल लग रही थी, और वो धीरे से मेरे गोद में बैठकर अपने दोनों पैर को मेरे कमर से लपेटने लग गयी। ध्यान देने वाली बात है कि, उसकी गद्देदार गान्ड को जांघों पर रख मै काम की दुनिया में खो गया। अब उसका स्तन मेरे छाती से चिपक रहे थे, जैसे हि मैंने उसके होंठो को चुसना बंद किया, तभी उसने अपनी लम्बी जीभ बहार निकल कर मेरे मुख में डाल दी। अब कीर्ति को मै अपने आगोश में कर चुका था और दोनों के लिए एक घंटे का वक़्त काफी था। कीर्ति की जीभ को चूसते हुए मै उसके चूतड़ को सहला रहा था, तो वो कामुकता की आग में जल रही थी। मैंने कीर्ति की नाइटी को कमर तक कर उपर कर दी, अब तो उसका नग्न चूतड़ मेरे जांघों को सुखद अहसास दे रहे थे। यकीन मानिए, मैं उसको सहलाता हुआ, तनीषा की जीभ को चूस रहा था। लेकिन वो ३-४ मिनट में ही मेरा चेहरा पीछे की ओर करके अपना जीभ मुख से निकालने लग गयी। दी। आपको बता दूं कि, मेरा हाथ उसकी पीठ को सहला रहा था, तो कीर्ति मेरे गर्दन और चेहरा को चूमने में लीन थी। फिर कीर्ति मुझे बेड पर धकेलने लग गयी, अब मै लेटा हुआ था तो बरमूडा के ऊपर से ही मेरे टाईट लंड का उभार स्पस्ट था। कीर्ति उसको थामकर बरमूडा को नीचे करने लगी और मेरे नग्न लंड को पकड़ अपना चेहरा उस पर लगाने लग गयी। मेरा लन्ड काफी उत्तेजित हो चुका था, जो पोर्न वीडियो देख पहले से ही खड़ा हो चुका था। शायद उसकी मुखमैथुन की कला ही उसके वीर्य को निकाल देती बांकी कीर्ति उसके चमड़े को नीचे करके सुपाड़ा को अपने होठों पर रगड़ने लगी। अब कीर्ति मेरा लन्ड मुख में भरकर चुभलाने लगी तो मै सिसक रहा था। मैं – उई आह जरा सर का तो झटका दे साली। और कीर्ति अब अपने सर का झटका देते हुए मेरा लन्ड का हाल खराब कर रही थी, तभी मै बोला – बेबी जरा रुकना। कीर्ति – क्या हुआ साले, सुबह से ही मेरे गान्ड के पीछे घूम रहे हो और इतने में हालत खस्ता हो गयी? मैं – जरा ६९ आसन में हो जाओ। फिर दीपक लेटा हुआ था और कीर्ति को अपने बदन पर लेटने को बोला। यकीन मानिए, तनीषा मेरे मुख के ऊपर अपने चूतड़ को कर दी तो उसकी दोनों टांगें दो दिशा में थी, और उसका चेहरा मेरे लंड के पास था। अब कीर्ति के नाइटी को कमर तक करके उसकी पेंटी को खोल फेंका तो बुर देवी का दर्शन हुआ। कीर्ति मेरे लंड को मुख में लेकर मुखमैथुन करने लगी, तो मै उसके बुर की फांक को अलग करके जीभ से चाटने लग गया। उसकी कसी हुई चूत में जीभ घुसाकर कुत्ते की भांति चाटने लग गया, और मेरा लंड तो आग का गोला बन चुका था। कीर्ति मेरा लन्ड मुख से निकालकर उसको चाटने लग गयी, और मै अब बुर में उंगली घुसाकर कुरेदने लग गया। तो कीर्ति मेरे लंड को फिर से मुख में भरकर चूसने लगी और उसका स्थिर मुख मेरे लंड का हाल खराब कर रहा था। तभी कीर्ति की बुर से जल निकलने लग गया, मै उंगली निकाल अब जीभ से बुर चाटता हुआ मस्त हो रहा था। तो कीर्ति अब तेजी से सर का झटका देते हुए मेरे उत्तेजित लंड का रस निकालने में लीन थी। तभी मुझे रस निकलने का एहसास हुआ और मैने नीचे से कमर उठा पूरा लंड उसके मुख में घुसा दिया। असल में, मेरा सुपाड़ा उसके गले में अटक गया, और लंड पिचकारी की भांति उसके मुख में वीर्यपात करा दिया। यकीन मानिए, फिर दोनों अलग होकर फ्रेश हुए और मै अपना कमरा चला गया।