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यार के दोस्त से भी चुद गई मैं

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सच कहूं तो, यह होटल हॉट सेक्स स्टोरी मेरी डबल चुदाई की है. मैं अपने मित्र के साथ सेक्स का आनंद लेने होटल रूम में गयी. वहां पर उनका एक मित्र भी था. मैं डर गयी. हैलो मैं अवनी … आप सभी को मेरा नमस्कार. आप सभी को मेरी सेक्स कहानी मेरी अन्तर्वासना- कुछ अधूरी कुछ पूरी बहुत पसंद आयी. आपके काफी संख्या में मुझे ईमेल भी मिले, इसके लिए आप सभी का काफी धन्यवाद. मैंने आपको अपनी पिछली सेक्स कहानी में अपने एक प्रशंसक मित्र से चुदवाकर अपनी चुत चुदाई का पूरा आनंद दिया था. मैंने न चाहते हुए भी अशौर्यन्द जी को अपने आपको सौंप दिया था क्योंकि वो मुझे काफी अच्छे इंसान लगे थे. आज की यह होटल हॉट सेक्स स्टोरी उसी कहानी का अगला भाग है. इस कहानी में मैं अपने उन्हीं मित्र अशौर्यन्द से दोबारा मिली थी तथा उन्होंने मेरी जिस्मानी भूख की जरूरत को बड़ी अच्छी तरह से पूरी की थी. दरअसल उनसे मिलने तथा चुदने के बाद मेरी उनसे फोन पर बातें तो होती ही रहती थीं. मुझे भी उनके स्वभाव के कारण उनसे बात करना अच्छा लगने लगा था. उनसे बात करते हुए दो-तीन महीने बीत गए. उन्होंने मुझसे फिर से मिलने के लिए कहा तो मेरा भी होटल हॉट सेक्स के लिए मन हो गया. इस बार वो मुझसे चुदाई के लिए कहने लगे थे, तो मैंने मन बना लिया था कि अशौर्यन्द जी से फिर से चुदने का मन बना कर ही जाना है. उनके लंड से चुदाई की मुझे बड़ी याद भी आ रही थी. मैंने उनसे कहा- ठीक है, आप टाइम निकालकर फिर से दिल्ली आ जाइए, मैं भी आ जाऊंगी. वो हंस कर बोले- इस बार तुम खुद से मेरे साथ सेक्स करने की पहल करोगी न! मैंने हंस कर कहा- देखूंगी. वो बोले- देखूंगी का क्या मतलब है जान! मैंने कहा- अच्छा ठीक है, मैं अपने मन के मुताबिक़ सब करूंगी. उन्होंने कहा- चलो ठीक है, मैं तुम्हें फोन करके बताऊंगा कि कब आना है. मैंने ओके कह दी तथा फोन कट हो गया. कुछ दस दिन बाद अशौर्यन्द का फोन आया तथा उन्होंने मुझे सारा प्रोग्राम बता दिया. वो अपनी प्लानिंग के अनुसार दिल्ली आ गए तथा उन्होंने एक होटल में रूम बुक कर लिया. उनका फोन आया, तो मैं भी वहां चली गई. जब मैं वहां गई, तो वहां उनके साथ एक तथा व्यक्ति था. अशौर्यन्द ने मेरा उससे परिचय कराया. उसका नाम अशोक था. उसे देख कर मैं थोड़ा सा सहम गई थी. लेकिन उन्होंने मुझसे कहा- डियर घबराने की कोई जरूरत नहीं है. अशोक मेरा जिगरी मित्र है. ये मेरे साथ दिल्ली किसी काम से आया है. यह थोड़ी देर में चला जाएगा. मैंने राहत की सांस लेते हुए कहा- ठीक है. फिर मैं तथा अशौर्यन्द वहां होटल के रूम में चले गए. अशोक कमरे के बाहर लॉबी में ही बैठ गया. होटल के रूम में जाते ही अशौर्यन्द मुझे प्रेम करने लगे. वो मेरे होंठों को अपने होंठों में लेकर चूसने लगे. मेरा बदन एकदम गर्म होने लगा था तथा मेरे शरीर के रोंगटे एकदम खड़े हो गए थे. अपने वादे के मुताबिक़ मैंने खुद से अशौर्यन्द को चूमना शुरू कर दिया था. फिर अशौर्यन्द ने धीरे-धीरे करके मेरे सारे वस्त्र उतार दिए तथा रूम की लाइट ऑफ कर दी. मैंने उनसे कहा- अभी आपका मित्र अशोक भी बाहर क्यों है! उन्होंने कहा- कोई बात नहीं बेबी वह उधर ही रहेगा … हमारे पास रूम में नहीं आएगा. मैं आश्वस्त हो गई. फिर वह मेरे मम्मों को अपने मुँह में लेकर बारी बारी से चूसने लगे. मैं सनसनी महसूस करने लगी तथा मुझे चुदास चढ़ने लगी. वो मुझे किस करते हुए नीचे मेरी चूत तक चले गए. मैं तो जैसे दीवाना सी हुई जा रही थी. ऐसा लग रहा था, जैसे आज मेरे बदन को कोई खा जाए. उनके दोनों हाथ मेरे बदन पर चल रहे थे. एक हाथ से उन्होंने मेरे एक दूध को दबाया हुआ था तथा दूसरे हाथ से मेरी जांघों को पकड़े हुए थे. इसी के साथ वो मेरी चूत को जमकर चूस रहे थे. मैं उस अवस्था में थी कि मेरे बदन पर मेरा कंट्रोल नहीं था. मेरे जिस्म को तो इस समय अशौर्यन्द ने अपने कंट्रोल में ले रखा था. फिर अचानक मैंने महसूस किया कि उन दो हाथों के अलावा मेरे बदन पर दो हाथ तथा चल रहे थे, जो शायद मेरे जिस्म को मसल रहे थे. इससे मैं एकदम से डर गई. रूम में अंधेरा था, परन्तु इतना अंधेरा भी नहीं था. मैंने नैन खोलकर देखा तो ये उनका वही मित्र था, जो बाहर लॉबी में बैठा था. मैंने उसके हाथ को झटके से एक तरफ किया तथा अपने बदन को होटल की सफ़ेद चादर से ढकने लगी. असल में मुझे दो आदमियों के साथ सेक्स करने में कोई ऐतराज नहीं था. पर अशौर्यन्द जी के समक्ष अपने को मासूम साबित करने की कोशिश में मैंने अपने नंगे जिस्म को ढक कर लज्जा का प्रदर्शन किया था. अशौर्यन्द ने मुझसे कहा- बेबी डरो मत, मुझ पर भरोसा करो. मैं कभी भी तुम्हें किसी भी बुरी स्थिति में नहीं फंसने दूंगा … तुम्हें आनंद आएगा. प्लीज हम दोनों पर भरोसा करो. बस इतना कहकर उन्होंने मेरे बदन से चादर खींच ली तथा मेरी चूत को किस करने लगे. मैंने उन्हें रोकने की कोशिश की, परन्तु उनके उस मित्र ने मुझे बेड की तरफ धक्का दे दिया तथा मेरी गर्दन पर किस करने लगा. वो मेरे गालों तथा मेरे बूब्स को चूसने में लग गया. मैंने दो मिनट तो आनाकानी की, परन्तु फिर मैंने सोचा कि जैसे एक से चुदने के आनंद लेना है, तो दो से क्या घिस जाएगा. ये सोचते ही मुझे आनंद आने लगा तथा मैंने अपने बदन ढीला छोड़ दिया. अब वो दोनों मेरे बदन को खूब जमकर चूस चूम रहे थे. सहला रहे थे तथा मसल रहे थे. मैं उन दोनों के बीच में अकेली नंगी पड़ी थी. वो दोनों पूरी मस्ती से मेरे जिस्म का जमकर भोग लगा रहे थे. एक हुस्न की परी को दो मर्द जमकर चूस तथा चाट रहे थे. फिर अशौर्यन्द ऊपर की ओर आ गए तथा उनका वह मित्र नीचे मेरी चूत की तरफ चला गया. वो मेरी चूत के अन्दर तक अपनी पूरी जीभ डाल कर चुत चाटने लगा. मेरी टांगें खुद ब खुद खुलती चली गईं तथा मैं अपनी चुत चुसाई का न केवल आनंद लेने लगी बल्कि अपनी गांड उठा कर उसके मुँह में अपनी चुत भरने लगी. इधर अशौर्यन्द ऊपर आकर मेरे माथे पर किस करने लगे तथा अपने दोनों हाथों से मेरे मम्मों को दबाने लगे. फिर उनके मित्र ने धीरे धीरे अपना लंड बाहर निकाला तथा मेरी चूत पर सटा कर लंड का सुपारा मेरी चुत की फांकों में घिसने लगा. मुझे बड़ी व्याकुलता हो रही थी कि ये आदमी जल्दी से मेरी चुत में लंड पेल कर मुझे चोदना शुरू कर दे. मैंने अपनी कमर उठा कर उसके लंड को चुत में लेने की कोशिश की, तो उसी समय उसने धीरे से धक्का लगा दिया. मेरी चूत इस समय इतनी ज्यादा गीली तथा रसीली हो चुकी थी कि उसका पूरा लंड एक बार में ही अन्दर तक घुसता चला गया. उसका लंड इतना मोटा था कि मैं चिल्ला उठी तथा मैंने अशौर्यन्द को अपने दोनों हाथों से अपनी ओर खींच कर उस दर्द को सहने की कोशिश करने लगी. धीरे धीरे लंड चुत में अन्दर बाहर करते हुए उसका मित्र मेरी चूत में धक्के लगाने लगा तथा मेरे जिस्म का आनंद लेने लगा. वह कभी मेरी कमर तथा मेरे पेट पर हाथ फिराता तो कभी मेरी जांघों पर किस करता. इधर अशौर्यन्द मेरे दोनों बूब्स को बारी बारी से खींच खींच कर चूस रहे थे. हम तीनों उस अवस्था में थे कि हमें चुदाई का भरपूर आनंद आ रहा था. मुझे तो इतना अच्छा लग रहा था तथा मैं सोच रही थी कि मेरी जिंदगी में हर समय इसी तरह की अवस्था बनी रहे. कुछ ही देर में मुझे अपनी चरम नीलम आते हुए महसूस होने लगी. मैं उन दो मर्दों के जिस्म की गर्मी सह नहीं पाई तथा मेरी चूत ने अपना जल छोड़ दिया. मैं अपने जिस्म को अकड़ाते हुए पूरी झड़ चुकी थी. मुझे झड़ता देख कर उनका वो मित्र भी मेरी चूत में ही झड़ गया तथा उसने अपने लंड का सारा वीर्य मेरी चूत में भर दिया तथा निढाल होकर मेरे ऊपर लेट गया. इसी दौरान अशौर्यन्द थोड़ा पीछे हो गए थे तथा मुझे पूरी तरह से चुदाई के बाद का आनंद लेने दे रहे थे. अशोक ने थोड़ी देर मेरे ऊपर ऐसे ही लेटने के बाद मेरे साइड में पलटी ले ली. अब अशौर्यन्द की बारी आ गई थी. अशौर्यन्द ने बिस्तर की चादर के सिरे से मेरी चूत को साफ किया तथा अपना लंड हिलाते हुए मेरे ऊपर चढ़ गए. उन्होंने बिना मुझे गर्म किए मेरी चूत में लंड पेल दिया. मैंने उनको हटाने की कोशिश की … क्योंकि मैं अभी-अभी झड़ी थी तथा पूरी तरह से गर्म भी नहीं हुई थी. लेकिन अशौर्यन्द नहीं माने तथा मेरी चूत में ऐसे ही धक्के लगाने लगे. मेरे मुँह से काफी तेज तेज आवाजें निकल रही थीं … क्योंकि मैं उनके धक्के सहन नहीं कर पा रही थी. मुझे ऐसे चीखते हैं तथा चिल्लाते देख अशौर्यन्द को भी आनंद आने लगा था. उन्होंने तथा तेज तेज धक्के लगाने शुरू कर दिए. अब तक उनके लंड ने मेरी चूत में अपनी जगह बना ली थी. मैंने उसी समय अपनी दोनों टांगों से उनको जकड़ लिया ताकि वह तेज धक्के ना लगा सकें. मगर वो मेरे ऊपर चढ़े थे तथा उनका लंड मेरी चुत में चल रहा था. भले ही धक्के तेज नहीं लगे, मगर उनका लंड मेरी चुत के चिथड़े उड़ाता रहा. कुछ देर बाद वो भी झड़ गए तथा उन्होंने भी अपने लंड का सारा वीर्य मेरी चूत में निकाल दिया. मैं भी दो लंड से चुदने के बाद एकदम थक गई थी तथा अपने बदन को निढाल छोड़कर एकदम सीधी लेट गई. मेरी तेज तेज हांफी चल रही थी तथा मेरी चूत में हल्का सा दर्द भी हो रहा था. फिर उन्होंने मुझसे कहा- बेबी होटल हॉट सेक्स में आनंद आया ना? मैंने उनसे कहा- आपने मेरे साथ ये अच्छा नहीं किया. मैंने आप पर भरोसा किया था, परन्तु आपने बिना बताए अपने मित्र को भी इसमें शामिल कर लिया. उन्होंने मुझसे कहा- बेबी मैं तुम्हें सरप्राइज़ देना चाहता था. मैं तुमसे ये बताता, तो शायद तुम मना ही कर देतीं. परन्तु मैं मैंने जो भी किया, वह तुम्हें आनंद दिलाने के लिए किया. देखो तुम दो मर्दों के जिस्म की गर्मी आज झेल नहीं पाईं तथा कितनी जल्दी झड़ गईं. मुझे उनकी बात से थोड़ी लाज सी आई तथा मेरा चेहरा लाल हो गया. तभी उनके मित्र ने भी मुझसे कहा- डियर आप घबराओ मत, हम हमेशा आपके साथ हैं. ये सब जो हमारे बीच हुआ, हम किसी को पता नहीं चलने देंगे. मैंने उनसे कहा- ठीक है, अब मुझे जाना है, बाद में फिर कभी मिलेंगे. अशौर्यन्द ने मुझसे कहा- तो ठीक है चली जाइए, मगर अभी मेरा मन नहीं भरा था. मैं समझ गई कि यदि मैं इधर तथा रुकी तो ये दोनों मुझे फिर से चोदेंगे. इसलिए मैं कुछ नहीं बोली; अपने कपड़े उठा कर बाथरूम में चली गई तथा जल्दी ही अपने कपड़े पहन कर वहां से चली आई. इससे ज्यादा मेरे तथा उनके बीच में कुछ नहीं हुआ था. जो कुछ भी हुआ, वो सब इस होटल हॉट सेक्स स्टोरी में मैंने आपके सामने बयां कर दिया. हालांकि इसके बाद भी मैं अशौर्यन्द से तथा उनके उस मित्र से फिर से मिलने गई थी. उस दिन भी हमारे बीच में एक खूब मजेदार वाकिया हुआ था. हमने खूब सेक्स किया था. उस दिन शायद मैंने अपनी जिंदगी को कुछ समय के लिए भरपूर समय दिया था. उस दिन हमारे बीच में क्या हुआ, मैं वह सब अपनी अगली सेक्स कहानी में बताऊंगी. आपको मेरी यह होटल हॉट सेक्स स्टोरी कैसी लगी, कृपया करके मुझे ईमेल पर बताएं. मेरी ईमेल आईडी है. 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