आज की कहानी: सासु माँ की ठरक मिटाई दामाद ने
मेरा नाम विकास है तथा मैं शादीशुदा लड़का हूँ। तो सबसे पहले मैं आप सब लंड वालों तथा चूत वालियों को अपने खड़े लंड का नमस्कार देता हूँ। मैं आपको बताना भूल गया, मेरे लंड का साइज़ है 10 इंच लंबा और 4 इंच मोटा, जो मेरी सबसे बड़ी पहचान है। मेरी शादी 23 साल की उम्र में हो गई। Damad Sas Ki Chudai Kahani वैसे मेरी बीवी काफी सुंदर तथा भोली है, पर चूदने में अपनी माँ से कोसों दूर है। मेरी माँ सास (जिनको मैं प्यार से सासू माँ कहता हूँ), दिखने में एकदम माल हैं तथा भगवान ने वासना तो कूट-कूट कर भरी है। आपको बता दूं कि, मुझे अपनी किस्मत पर यकीन नहीं होता कि मुझे कभी अपनी वासना की भूख मिटाने को अपने आस-पास कोई कमी नहीं पड़ी। मेरी सास जिनका नाम नीलम है, मैं शादी के बाद से देखता आया हूँ वो काफी सेक्सी लगती हैं। वो 4 बच्चों की माँ हैं पर दिखने में अपनी 22 साल की बेटी की बड़ी बहन लगती हैं। भगवान ने भी हर जगह में मांस (फ्लेश) दिया है उनका। वैसे तो जब मेरा रिश्ता उनकी बेटी से तय हुआ था, तब से ही मुझे इशारों में किसी ने बताया था तथा एक आस दी थी, कि “बेटा तू बड़ा किस्मत वाला होगा अगर तू ये शादी के लिए हाँ कर देगा। ” शादी से ही मेरी सास का हमारे घर पर काफी आना-जाना था। मेरी नज़रें हर वक्त उनके बूब्स पर टिकी रहतीं। माँ कसम क्या परफेक्ट गोलाई हैं उनके बूब्स की। ध्यान देने वाली बात है कि, मेरे हाथ उन्हें पकड़ कर दबाने के लिए तरसते थे तथा मेरी जीभ हमेशा उन्हें चूसने के लिए ललचाती रहती। जब मैं 21 साल का हुआ तो वो अपनी 20 साल की बेटी का मेरे लिए माँगा। मेरे परिवार वालों ने बिना हिचकिचाहट रिश्ता कबूल कर लिया तथा मुझसे आकर मेरी राय पूछी। मेरी नज़र उनकी बेटी पर तो थी ही, जो कि एकदम भोली-भाली तथा काफी सुंदर थी, पर अभी उसका जिस्म माँ के जितना खिला नहीं था। और बिना कोई हिचकिचाहट मैंने भी रिश्ते के लिए हाँ कर दी। तथा फिर क्यों न करता, बेटी के साथ उसकी माँ भी तो इतनी सुंदर थी। मेरा ससुर बड़ा ही दुबला-पतला इंसान है तथा दिखने में काफी कमज़ोर लगता है। मेरे ससुर का 37 साल की उम्र में काफी भयानक एक्सीडेंट हुआ था, जिसके कारण उनकी रीढ़ की हड्डी में काफी खतरनाक चोट लगी थी। अब उनकी कमर काफी कमज़ोर हो गई है तथा कोई भारी काम करने से दर्द होने लगता है। फिर हमारी शादी हो गई। फिर शादी के बाद तो मैंने खुलकर अपने ससुराल आना-जाना शुरू कर दिया। नॉर्मली मैं फोन करके अपने ससुराल जाया करता था। एक दिन मैंने ऑफिस से छुट्टी ली हुई थी तथा बीवी को बिना बताए सोचा कि आज ससुराल होकर आया जाए। आपको बता दूं कि, बिना कोई फोन किए ही मैं 10:30 सुबह-सुबह अपने ससुराल पहुँच गया। मैंने बीच में अपना पहुँचने का समय तय किया था। मेरा ससुर 9:30 बजे ऑफिस चला जाता है तथा मेरी दोनों साली अपने कॉलेज चली जाती हैं। जब मैंने ससुराल पहुँचकर घंटी बजाई तो कुछ 10 मिनट के बाद मेरी सास ने अंदर से ध्वनि लगाई, “कौन है?” मैंने कहा, “मैं विकास हूँ, आपका दामाद। ” और उन्होंने दरवाज़ा खोल दिया तथा उन्हें भीगा हुआ देख मेरी आँखें चकाचौंध हो गईं। सच कहूं तो, उन्होंने सिर्फ एक हाथ से तौलिया पकड़ रखा था तथा उनके सारे शरीर पर जल की बूँदें मोतियों की तरह चमक रही थीं। मेरी सास बोलीं, “अरे तुम, इस वक्त यहाँ?” मैं बोला, “क्यों इस वक्त नहीं आ सकता क्या?” मेरी सास ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया, “अरे बेटा तुम तो इस घर के अकेले बेटे हो। आओ… आओ… अंदर आओ… ये तुम्हारा ही तो घर है। ” पहली बार मैंने अपनी सास की जाँघें तथा टाँगें एकदम नंगी देखीं। बड़ी ही चिकनी थीं उनकी टाँगें। उनके घने तथा लंबे बाल उनके चूतड़ों को छू रहे थे। मेरा लंड मेरी पैंट में, मेरी चड्डी में एकदम सनसनाता हुआ खड़ा हो गया। सच कहूं तो, मैं घर में घुसकर सीधा ड्रॉइंग रूम में सोफे पर बैठ गया, ताकि अपनी सास के पत्तों को गौर से देख सकूँ। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है. फिर वो दरवाज़ा बंद कर वापस मेरी तरफ चलकर आ रही थीं तो मैं ताक-झाँक लगाए उनके शरीर को देख रहा था। एकदम हूर परी लग रही थीं। असल में, एक शादीशुदा लड़की की माँ होने के बावजूद भी उनके शरीर में वो कसक तथा उनकी चाल में थुमक देख मेरा लंड अंदर चुटपटा रहा था। मेरा लंड अंदर मेरी चड्डी में मुड़ गया था तथा बिना कुछ सोचे, मैंने अपने हाथ से अपने लंड को एडजस्ट किया। मेरे इस रिएक्शन को देख उनके चेहरे पर एक शरारत भरी मुस्कान आ गई। मुस्कुराते हुए बोलीं, “क्या बात है आज सुबह-सुबह ससुराल चले आए। घर पर सब ठीक-ठाक है?” मैं कसमसाते हुए कहा, “बस इधर से गुजर रहा था। मैंने सोचा कि आपसे मिलता चलूँ। ” अब तो मुझे अपनी सास की हर अदा पर प्यार आ रहा था। वो बोलीं, “मैं ज़रा नहा कर आती हूँ। तुम यहीं पर इंतज़ार करो। फिर कुछ दामाद की सेवा करती हूँ। ” मैंने कहा, “ठीक है, सासू जी। ” फिर मैंने नीचे झुककर ड्रॉइंग टेबल से एक मैगज़ीन उठाने के बहाने सामने हुआ। सच कहूं तो, जब मैं नीचे झुका, तो वो इठलाती हुई मेरे काफी नज़दीक से होती हुई अपने बेडरूम की तरफ धीरे-धीरे गई। ध्यान देने वाली बात है कि, इस दौरान मैंने झुके-झुके अपनी सास की नशीली टाँगों के दर्शन किए। फिर वो बेडरूम के दरवाज़े पर मुड़कर मेरी तरफ मुस्कुराती हुई देखकर बोलीं, “सब कुछ ठीक है ना? अगर कुछ चाहिए तो बिना झिझक ले लेना। ” मैंने कहा, “हाँ-हाँ, कोई प्रॉब्लम नहीं, मैं ले लूँगा अगर कुछ चाहिए तो। ” और फिर वो अंदर चली गईं। वैसे तो मैंने अपनी सास के बारे में काफी बार फैंटसी की थी। परन्तु सच में, वो इतनी मस्त होगी, कभी सपने में भी नहीं सोचा था। ध्यान देने वाली बात है कि, बस, अब तो उनके शरीर को भोगने की एक तमन्ना दिल में बँध सी गई। असल में, मैगज़ीन तो मेरे हाथ में पकड़ी थी, लेकिन मेरी आँखों पर मेरी सास के मस्त शरीर का नशा छाया हुआ था। कुछ देर बाद मैं उठा तथा उनके बेडरूम की तरफ बढ़ा। ध्यान देने वाली बात है कि, अंदर देखा कि मेरी सास ने बाथरूम का दरवाज़ा ठीक तरह बंद नहीं किया था। कुछ हिम्मत करके मैं बाथरूम की तरफ बढ़ा। दरवाज़ा ठीक से बंद न होने के कारण एक छोटी सी दरार से बाथरूम का कुछ हिस्सा दिख रहा था। अंदर शावर की ध्वनि आ रही थी। मैंने हिम्मत कर अंदर झाँका। शावर तो चल रहा था, पर सासू माँ उसके नीचे नज़र नहीं आईं। असल में, मैंने थोड़ा सा दरवाज़ा अंदर की तरफ धकेला, तो मुझे शीशे में जो नज़ारा दिखा, उसे देख मेरा लंड तो जैसे पैंट को फाड़ बाहर निकलने को हुआ। मेरी सास टॉयलेट सीट पर बैठी थीं, एक हाथ से अपनी चूत में लंबा सा बैंगन घुसा रही थीं तथा दूसरे हाथ से अपना एक निप्पल पकड़कर उसे मसल रही थीं। अब तो मुझसे तथा रहा नहीं गया। मैंने अपने सारे वस्त्र उतार लिए तथा सीधा बाथरूम का दरवाज़ा खोलकर अंदर घुस गया। मुझे नंगा देख मेरी सास को कोई शॉक होने की जगह मुस्कुराने लगीं। ध्यान देने वाली बात है कि, अब मुझे यकीन हो गया, मेरी सास तो यही चाह रही थीं। ध्यान देने वाली बात है कि, एकदम नंगी थीं मेरी सास तथा दामाद भी एकदम नंगा। मैंने सीधा अपना लंड पकड़ा तथा उनके सामने हिलाने लगा। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है. वो बोलीं, “ओई माँ… सुना था… पर इतना बड़ा तथा कड़क होगा, मुझे तो बिल्कुल यकीन नहीं हो रहा था… हाय राम… आज मेरी बरसों की तमन्ना पूरी होगी… बड़ी प्यासी है बेटा ये चूत… तेरे लंड ने एक आस सी जगा दी थी… पर दामाद है करके एक डर सा था… आज तो मुझे यकीन हो गया कि ऐसे लंड की तो कोई भी एक चूत भूख नहीं मिटा सकती… लगता है मैं कुछ ज़्यादा ही बोल गई… है ना बेटा… प्लीज़ आज मेरी बरसों की भूख मिटा दो दामाद जी…” मैंने जवाब दिया, “सासू माँ… जब से शादी हुई है… मैं तो आपके शरीर को खूब निहारता करता हूँ… कोई नहीं कह सकता कि आप मेरी बीवी की माँ हैं… आपका तो हर अंग बोलता हुआ नज़र आता है… ऐसा लगता है कि जवानी ने आपका साथ अब तक नहीं छोड़ा… बल्कि भगवान ने तो समय के साथ-साथ आपको तथा भी माल बना दिया है… मेरे तो दोस्त भी आपको देख अपनी लार टपकाते हैं। ” वो बोलीं, “हाँ… बेटा तेरे ससुर तो पहले से ही कमज़ोर थे… तथा जब उनका एक्सीडेंट हुआ मैं तो सिर्फ २५ की थी… तब से अब तक कोई मर्द ने नहीं चोदा है मुझे… मेरा तो एक बेटा है वो दुबला-पतला तथा सबसे छोटा भी है… अब मुझे दामाद के रूप में बेटा मिल गया… वो भी इतने लंबे तथा मोटे लंड वाला…” मैं बोल पड़ा, “लो ना… इसे पकड़ लो सासू जी… अब कभी आपको इस बैंगन या खीरे की ज़रूरत नहीं पड़ने दूँगा… आपने पहले कभी कहा होता तो भी मैं पीछे नहीं हटता… मैं तो शादी के बाद से ही आपके शरीर का दीवाना था… आप जब भी मेरे सामने होती थीं… मेरा तो आपको भरपूर चोदने का मन करता था… आप चीज़ ही ऐसी हैं। ” फिर मेरी सास ने आव देखा न ताव… सीधा मेरा लंड पकड़ लिया… तथा उसे सहलाते हुए बोल पड़ीं, “सच में बड़ा भारी है रे तेरा लंड… बड़ी खुशकिस्मत है मेरी बेटी… कि उसे ऐसा लंड मिला… तथा तेरी सासू माँ को भी…” मैंने अपनी सासू माँ के गीले बालों में अपना हाथ डाला तथा उनकी गर्दन पर, कानों के नीचे अंगूठों से सहलाते हुए ज़ोर से अपनी तरफ खींचकर अपना होंठ उनके होंठों पर रखा तथा जीभ उनके मुँह में डालकर पागलों की तरह चूमने लगा। शायद मेरे ससुर ने मेरी सास को कभी ठीक से चूमा भी नहीं। सच कहूं तो, मेरी सास भी अपनी जीभ मेरे मुँह में डालकर मेरी जीभ को अपनी जीभ से रगड़ने लगीं। एकदम गर्म होने लगीं हमारी साँसें। फिर मैंने अपनी जीभ बाहर निकालकर उन्हें भी वही करने को कहा। एकदम पिंक थी मेरी सास की जीभ। मैंने अपनी सास की जीभ को चारों तरफ से खूब चाटा। वो बोल पड़ीं, “ये सब तूने कहाँ से सीखा?” मैंने कहा, “मज़ा आ रहा है ना सासू माँ? सब ब्लू फिल्मों का असर है। सच कहूं तो, ” फिर मैंने अपनी सास की गर्दन को अपनी जीभ से चूमते हुए उनके बूब्स पर ले गया, जो कि एकदम चट्टान की तरह सख्त थे। एक बूब को एक हाथ में पकड़कर दूसरे को चूसने लगा। यकीन मानिए, वो ज़ोर से बोल पड़ीं, “इन्हें तो तेरे ससुर ने कभी मज़ा ही नहीं दिया। आज इन्हें चूस-चूसकर हताश कर दे। ” मैंने कहा, “तभी तो मेरी किस्मत में इतने ठोस बूब्स हाथ लगे हैं। असल में, मेरी तो किस्मत ही अच्छी है, मुझे तो कुंवारी सास मिल गईं। अब तो खूब मज़ा आ जाएगा। सच कहूँ सासू माँ जो नशा आपके इस जिस्म में है, वो अभी आपकी बेटी में नहीं छाया। शायद इसलिए कि आपने इसे काफी बरसों से जमा किया है। ” मेरी सास बोलीं, “बस अब जल्दी कर बेटा… अपना ये भारी भरकम लंड मेरी चूत में सना दे। बड़े बरसों से लंड की प्यासी है तेरी सासू माँ की चूत। फाड़ दे ना इसे आज। ” मैंने अपना लंड लिया तथा अपनी सास की चूत के मुँह पर लगा दिया। कुछ देर उसे वहीं रगड़ा तो सासू माँ से रहा नहीं गया तथा उन्होंने मेरे लंड को दबोचकर अपनी चूत में घुसाने की कोशिश की। पर बड़ी टाइट थी मेरी सासू माँ की गली चूत। फिर मैंने अपनी दो उँगलियाँ नीचे ले जाकर सासू माँ की चूत को उनसे फैलाया, अपने लंड का पहला 2 इंच अंदर धकेला, तो उनकी सिसकारी निकल पड़ी। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है. उनके मुँह से निकल पड़ा, “ओई… माँ… मर गई… हाय… ओह… ये तो सच में फाड़ देगा बड़ी-बड़ी चूतों को भी…” मेरे मुँह से भी निकल पड़ा, “आपकी चूत भी तो बड़ी टाइट है… सासू माँ… कभी चुदाई नहीं हुई ना… आज इसे खोल देगा आपका ये दामाद बेटा…” फिर मैंने बातों ही बातों में एक ज़ोर से धक्का लगाया, अपना आधा लंड अपनी प्यारी सासू माँ की चूत में घुसा दिया। सच कहूं तो, मेरी सासू माँ ने “इस्स्स…” करते हुए मुझे काट लिया। तथा फिर मेरी उत्तेजना तथा बढ़ गई… तथा मेरी सासू माँ ज़ोर से चीखीं. मेरी कमर में अपनी उँगलियाँ घुसा दीं… “हाय… दया… आह… मर गई रे… ओई मायाई… काश 20 साल पहले ऐसा लंड मिला होता… मैं आज इतना ना तड़पती। ” तथा कुछ ही देर में मेरी सासू माँ मेरे लंड की दीवानी हो गईं… उस पर अपनी गरम तथा कसी हुई चूत को इतराने लगीं… उन्होंने मुझे ज़ोर-ज़ोर से काटा… चूमा… जो उनकी सासू माँ के जी में आया, उससे मेरे शरीर के साथ किया… तथा मुझे भी मज़ा आ रहा था तथा साथ ही साथ अपने लंड पर नाज़ भी हो रहा था… कि मेरी सासू माँ की बरसों की प्यास बुझ रही थी… तथा फिर उस दिन मेरी सासू माँ ने मुझसे 4 बार चुदवाया तथा बाद में खूब स्वादिष्ट खाना खिलाया। एक बार तो मैंने उन्हें वहीं किचन में डाइनिंग टेबल पर लिटाकर भी चोद दिया, खाना बनाते-बनाते। उस दिन के बाद तो मैंने तथा सासू माँ ने ब्लू फिल्में देखते हुए काफी अलग-अलग तरीके आज़माए। बड़ी ही भूखी थीं वो। अब मुझे मालूम चल गया कि एक भूखी औरत एकदम भूखी शेरनी की तरह होती है, जिसे चोदने में सबसे ज़्यादा मज़ा आता है।