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चुदासी मम्मी चुदवाने के लिए मान गई 10

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नमस्ते दोस्तों, मैं आरव शर्मा, चुदाई की शुरुआत के दसवें भाग में आपका स्वागत करता हूँ। पिछले भाग चुदासी मम्मी चुदवाने के लिए मान गई 9 में आपने पढ़ा कि मैंने स्नेहा मौसी को वो वीडियो दिखाया तथा फिर उन्होंने बताया कि अजीत उनको कैसे ब्लैकमेल करके उनकी चुदाई कर रहा था। तथा मैंने उनसे कहा कि मैं अजीत को सबक सिखाऊँगा। तथा उसके बाद मैंने मौसी से पूछा कि क्या मैं भी उनकी चुदाई कर सकता हूँ। तथा थोड़ी देर बाद उन्होंने मुझे किस कर दिया। अब आगे। Desi Porn Randi Mausi मैं तथा मौसी एक-दूसरे को किस कर रहे थे। फिर हम अलग हुए तथा मैंने अपना लोअर खोल दिया तथा अपना मोटा लंड मौसी के मुँह पर रख दिया। मैं: मौसी, मुँह खोलो। और फिर मैंने अपना लंड मौसी के मुँह में डाल दिया तथा वो मेरा लंड चूसने लगीं। मैं: आह… आह… मौसी, मज़ा आ गया। चूसती रहो… आह… स्नेहा: आह… हह… आग्ग… मैं: चूसो मौसी, चूसो। अभी हमारे पास टाइम है। घर पे सिर्फ़ हम दोनों हैं। थोड़ी देर तक अपना लंड चुसवाने के बाद मैंने मौसी को नंगा होने को बोला तथा खुद भी नंगा हो गया। फिर मैंने मौसी को अपनी तरफ़ खींचा तथा उनकी चूत चाटने लगा। सच कहूं तो, उनकी चूत का वो स्वाद, उसकी वो कोमल… मैं: आह… मौसी, आपकी चूत… स्स… मस्त है। स्नेहा: बेटा… बेटा… आह… चाट… चाट… मैं मौसी की चूत चाटता रहा। आपको बता दूं कि, फिर मैंने मौसी को लंड मुँह में डालने को बोला तथा उन्होंने मेरा लंड अपने मुँह में ले लिया तथा मैं उनका मुँह चोदने लगा। मैं: आह… मौसी, चूसो… चूसती रहो। मौसी की मुँह चुदाई करते-करते मेरा पूरा लंड उनकी लार से भर गया था तथा उनके मुँह से भी लार गिर रही थी। मैंने मेरा लंड मौसी के मुँह से बाहर निकाला तथा उन्हें किस करने लगा, जिसकी वजह से मेरा मुँह उनकी लार में भर गया। फिर मैं सेज पर लेट गया तथा मौसी को मेरी सवारी करने को बोला। यकीन मानिए, मैं: आओ मौसी, चढ़ जाओ अपने भांजे के लंड पे तथा करो सवारी उसकी। स्नेहा: ठीक है। और फिर मौसी ने मेरा मोटा लंड अपनी चूत में डाल लिया तथा उछल-उछल के चुदाई करने लगीं। मैं: आह… मौसी… मौसी… स्नेहा: आह… आह… तेरा लंड इतना मोटा है… आह… मैं: मौसा जी तथा अजीत से भी? स्नेहा: हाँ, उनसे भी… आह… काफी मोटा है… आह… मर गई… करीब इसी पोज़िशन में 5 मिनट चुदाई के बाद मैंने मौसी को घोड़ी बनाया तथा पीछे से उनकी चूत चोदने लगा। मैं: आह… अब आया ना मज़ा। और फिर मैंने वापस मौसी की चुदाई शुरू कर दी तथा ज़ोर-ज़ोर से उनकी चुदाई करने लगा तथा वो भी चीखने लगीं। ध्यान देने वाली बात है कि, स्नेहा: आह… आरव बेटा, आराम से कर। मैं: आराम का टाइम नहीं है मौसी। असल में, अगर सब वापस आ गए तो लेने के देने पड़ जाएँगे। और मैंने उनकी चुदाई जारी रखी। करीब 15 मिनट तक उनकी चुदाई के बाद मैं उनकी चूत में झड़ गया तथा हम दोनों चादर ओढ़ के लेट गए। मैं: आह… मौसी, मज़ा आ गया। आपको आया? स्नेहा: हाँ, काफी मज़ा आया। मैं: क्या सच में? मतलब मैंने अजीत से भी बेहतर चुदाई की आपकी? स्नेहा: अजीत कोई मेरी चुदाई नहीं करता था। वो साला तो बस अपनी हवस उतार के जाता था। आपको बता दूं कि, वो मुझे चुदाई में संतुष्ट नहीं कर पाया। मैं: मैंने तो किया ना? स्नेहा: अरे मेरा बच्चा, बिल्कुल किया तूने। मैं: मौसी, एक बार तथा कर लें जब तक सब नहीं आ जाते। स्नेहा मौसी थोड़ा सोच में पड़ गईं। स्नेहा: ठीक है, एक बार तथा करते हैं। तथा तू मेरी ज़िंदगी में से अजीत को निकाल दे। तू जब आएगा, तब तुझसे चुदवाऊँगी। मैं: आप चिंता मत करो। अजीत की ऐसी की तैसी तो मैं कर दूँगा। बस थोड़ी सी मदद लेनी होगी। स्नेहा: मदद किसकी? मैं: सबकी। आपकी मम्मी की, सविता आंटी की, रीना मौसी की। स्नेहा: नहीं आरव, प्लीज़, इनको मत बताना। मैं: मौसी, आप मेरी बात समझो। इनको बताना पड़ेगा। तभी हम उस हरामी अजीत को सबक सिखा पाएँगे। प्लीज़, आप चिंता मत करो। मैं समझाऊँगा ना मम्मी तथा सविता आंटी को। स्नेहा: ठीक है, पर प्लीज़ रीना को मत बताना। प्लीज़। मैं: पर आज नहीं बताया तो आज नहीं तो कल तो उनको पता चलना ही है। उनको क्या, सबको पता चलना है। अजीत का गंदा चेहरा सबके सामने लाऊँगा मैं। स्नेहा: नहीं आरव, ऐसा मत करना। मेरी मम्मी-पापा की नाक कट जाएगी तथा राजीव भी मुझे तलाक दे देंगे। मैं: ऐसा कुछ नहीं होगा मौसी। ये बात सिर्फ़ घर के लोगों को पता चलेगी। किसी बाहर के लोगों को नहीं। तथा मैं उसे ऐसे ही दिखाऊँगा कि आपके साथ गलत हुआ है। चिंता मत करो। तथा जहाँ तक बात रही राजीव मौसा की, तो उनकी भी चिंता मत करो। वो आपसे काफी प्रेम करते हैं। वो ऐसे इंसान नहीं हैं जो अपनी पत्नी की बात ही ना सुनें या उसे समझें नहीं। सच कहूं तो, स्नेहा: राजीव… पता है आरव, मुझे नहीं लगता राजीव मुझे जैसी कैरेक्टरलेस औरत को डिज़र्व करते हैं। ज़रा देखो मुझे — अपनी बहन के पति से चुद गई, अपने खुद के भांजे से चुद गई तथा आगे भी चुदना चाहती हूँ। असल में, मुझ जैसी कैरेक्टरलेस रंडी औरत कैसे किसी के प्रेम की हकदार है? मौसी की बात सुनके मुझे भी बुरा तो लगा, क्योंकि कह तो वो भी गलत नहीं रही थीं। परन्तु मुझे ये पता था कि राजीव मौसा स्नेहा मौसी से प्रेम तो काफी करते हैं। हाँ, जानता हूँ मैंने भी स्नेहा मौसी के साथ वही किया जो अजीत ने किया था। देखने जाए तो मैं तथा अजीत एक जैसे ही हैं। आपको बता दूं कि, शायद इसलिए मुझे अजीत पहले नज़र में ही खटक गया था — क्योंकि हम दोनों ही कमीने हैं। आपको बता दूं कि, मैंने भी मेरी माँ के साथ ज़बरदस्ती करने की कोशिश की थी। अजीत ने मौसी को ब्लैकमेल किया। परन्तु आज जब स्नेहा मौसी की बात सुन रहा हूँ, तो मुझे एहसास हो रहा है कि मैं कितना गिरा हुआ इंसान हूँ। इसलिए मैं अब खुद को बदलना चाहता हूँ। मैं अजीत जैसा नहीं बनूँगा। खुद की गलतियों को सुधारूँगा। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है. मैं: मौसी, आप ये मत सोचो। आप कोई कैरेक्टरलेस औरत नहीं हो। अजीत ने आपके साथ ज़बरदस्ती की। उसमें आपकी कोई गलती नहीं है। तथा जो हमारे बीच हुआ, वो सिर्फ़ एक बार के लिए ही था। सच कहूं तो, आज के बाद हम कभी चुदाई नहीं करेंगे। असल में, स्नेहा: पर आरव… मैं: मैं आपका तथा राजीव मौसा का रिश्ता खराब नहीं होने दूँगा। आपको बता दूं कि, स्नेहा: आरव, सुनो तो… मैं: मैं आपका तथा राजीव मौसा का तलाक नहीं होने दूँगा। सच कहूं तो, तभी मौसी चिल्ला के बोलीं: स्नेहा: आरव, मेरी बात सुनो! मुझे नहीं रोकनी है चुदाई तुम्हारे साथ! मैं: क्या? पर क्यों? स्नेहा: पता नहीं। परन्तु जब हम चुदाई कर रहे थे, तब मुझे कुछ एहसास हुआ। मैं नहीं जानती वो क्या था, पर मुझे वो एहसास हुआ। मुझे ये एहसास ना तो कभी राजीव के साथ महसूस हुआ तथा ना कभी अजीत के साथ। तथा दूसरी बात — एक तुम ही हो जिसने मुझे संतुष्ट किया है। मैं राजीव से काफी प्रेम करती हूँ, पर तुम्हारे साथ चुदाई नहीं रोकना चाहती। मौसी की बात सुनकर मैं शॉक में था। मुझे समझ नहीं आ रहा था कि मैं क्या बोलूँ। क्योंकि मौसी भी कुछ गलत तो नहीं बोल रही थीं। मैं: ठीक है मौसी। अपना चुदाई बंद नहीं करेंगे। परन्तु मैं आपका तथा राजीव मौसा का तलाक भी नहीं होने दूँगा। तथा अजीत को भी आपकी ज़िंदगी से निकाल दूँगा। स्नेहा: थैंक्यू आरव, थैंक्यू। तू मेरे लिए एक फरिश्ता बनके आया है। फिर मौसी धीरे-धीरे मेरे पास आईं तथा उन्होंने मुझे किस कर दिया। तथा मैं भी उन्हें किस करने लगा। तथा फिर मौसी मेरा लंड सहलाने लगीं। उसके बाद उन्होंने मेरा लंड अपने मुँह में लिया तथा उसे चूसने लगीं तथा फिर से लार बहाने लगीं। फिर मैंने मौसी को लिटाया तथा उन्हें चाटना शुरू किया तथा धीरे-धीरे उनका पूरा बदन चाट लिया था। और उसके बाद मैंने अपना लंड एक बार फिर उनकी चूत में डाल दिया था तथा उनकी चुदाई शुरू कर दी। ऐसे ही हमने तथा दो-तीन बार चुदाई की तथा फिर सबके आने से पहले हम नहा लिए थे। असल में, करीब निशा के सात बजे अजीत तथा नानू आ गए थे। तथा ठीक एक घंटे बाद यानी 8 बजे बाकी के घरवाले भी आ गए थे। मम्मी, प्रतिक्षा मौसी तथा बाकी सब दिखा रहे थे कि उन्होंने क्या-क्या खरीदा। सविता आंटी तथा रीना मौसी सबके लिए चाय बनवा रहे थे। स्नेहा मौसी भी आराम से राजीव मौसा के पास बैठके खरीदा हुआ सामान देख रही थीं। नानू शायद थक कर रहे थे। परन्तु अजीत उस बेचारे की हालत देखके तो ऐसा लग रहा था कि आज नानू ने इसे जगह-जगह भगाया है। सही भी है — जब मैं इसे घर से निकलवाऊँगा, तब जगह-जगह भागने में आसानी होगी। खैर, ऐसे ही समय बीता। हमने खाना खाया। खाना बनाने की टेंशन नहीं थी क्योंकि मम्मी तथा ये लोग बाहर से खाना लेके आए थे। हमने वो खाया तथा सब अपने कमरे में चले गए। मैं अपने कमरे में शांति से लेटा हुआ था। तभी मम्मी तथा सविता आंटी अंदर घुसीं तथा गेट बंद कर दिया। असल में, ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है. माँ: आरव, उठ। मैं: हाँ, क्या हुआ? सविता: क्या बोल रहा था तू अजीत के बारे में? सुबह बता। मैं: अजीत? माँ: हाँ। तथा ये भी बता कि तूने आज स्नेहा के साथ क्या किया। मैं: क्या? मैंने कुछ नहीं किया मौसी के साथ। माँ: बेटा, भले ही तुझसे चुदवाती हूँ, परन्तु फिर भी तेरी माँ हूँ। तेरी रग-रग से वाकिफ़ हूँ कि तू कब झूठ बोलता है तथा कब नहीं। अब सच बता। असल में, मैं: हाँ, मैं तथा स्नेहा मौसी ने की चुदाई। सविता: आरव, तू दीवाना हो गया है क्या? बोला था ना — थोड़ा खुद पर काबू रखना। दिमाग खराब हो गया है क्या तेरा? माँ: मेरी ही गलती है। इसे चुदवा-चुदवा के ये भूल गया कि इसकी माँ भी हूँ। इसे संभाल के रखने की ज़िम्मेदारी मेरी थी। परन्तु अब नहीं… अब… मैं: अरे चुप करो। बात सुने बिना ही चढ़े जा रहे हो। हाँ, मैं तथा स्नेहा मौसी ने की चुदाई। परन्तु उसके पीछे एक रीज़न था। ध्यान देने वाली बात है कि, सविता: क्या रीज़न था? मैं: अजीत। माँ/सविता: अजीत? कैसे? उसके बाद मैंने मम्मी तथा सविता आंटी को वो वीडियो दिखाया। जिसको देखके दोनों हिल गए। माँ: ये तो स्नेहा तथा अजीत… सविता: चुदाई कर रहे हैं। असल में, माँ: शर्म नहीं आई स्नेहा को? अपनी छोटी बहन का घर खराब करते हुए? मैं: खबरदार अगर स्नेहा मौसी के बारे में कुछ बोला तो। ये सब उस अजीत का किया-धरा है। उसके बाद मैंने मम्मी तथा सविता आंटी को पूरी कहानी समझाई। मैं: तथा इसलिए ये सब हुआ। ध्यान देने वाली बात है कि, तथा वो अजीत इतना कमीना है — आप दोनों को तथा रीना मौसी को भी चोदने के फिराक में है। माँ: बाप रे, ये अजीत तो काफी कमीना इंसान है यार। सविता: हाँ। परन्तु मुझे एक बात समझ नहीं आई — इन सबमें तेरा तथा स्नेहा की चुदाई कैसे हुई? मैं: वो जब मैं स्नेहा मौसी से इन सब के बारे में बात करके जा रहा था, तब मैंने उनसे पूछा कि क्या मैं… तब वो मना गईं। परन्तु उसके बाद जब उनकी बातें सुनीं, तो मुझे एहसास हुआ कि मैं तथा अजीत एक जैसे ही तो हैं। उसके बाद मैंने स्नेहा मौसी को चुदाई के लिए मना कर दिया। परन्तु फिर उन्होंने ही मुझे कहा कि वो मेरे साथ चुदाई नहीं रोकना चाहतीं क्योंकि सिर्फ़ मैं ही था जो उनको संतुष्ट कर पाया था। इसलिए मेरे पास तथा कोई चारा नहीं था। आपको बता दूं कि, लेकिन एक चीज़ तो मैंने तय कर ली है — मैं अजीत जैसा नहीं बनूँगा। खुद को सुधारूँगा। अजीत को सज़ा दिलाऊँगा। परन्तु उसके लिए मुझे आप दोनों की मदद चाहिए। आपको बता दूं कि, माँ: कैसी मदद? मैं: अजीत का सच सामने लाने में मदद। सविता: तथा वो कैसे करेंगे, ऐ मिस्टर जीनियस? मैं: उसके लिए ही आप दोनों की मदद चाहिए। मुझे कोई तरीका सुझाओ। ये अजीत टेढ़ी खोपड़ी है। इसके लिए तगड़ा प्लान चाहिए होगा। देखिए, मेरे पास यही एक मौका है अपनी गलतियों को सुधारने का। प्लीज़, आप दोनों ही मेरी मदद कर सकती हो। माँ: ठीक है। हम दोनों तेरी मदद करेंगे। कम से कम तुझे एहसास तो हुआ कि तू गलत था। तथा एक माँ के लिए इससे अच्छी तथा कोई बात नहीं कि उसका बेटा अपनी गलती सुधारना चाहता है। सविता: बस एक सवाल — अपनी गलती सुधारने के चक्कर में तू हमारी चुदाई तो बंद नहीं करेगा ना? मैं: क्या? माँ: हाँ, ऐसा मत करियो। हमें कोई दिक्कत नहीं कि तू हमें चोदे। ठीक है, तू अपनी गलती सुधार ले। यकीन मानिए, परन्तु उस गलती से फल मिला है, उसे मत छोड़ देना। मैं: अरे आप चिंता मत करो। आप दोनों की चुदाई बंद नहीं करूँगा। माँ: चलो ठीक है। मैं: खैर, ये प्लान बनाने का कार्यक्रम कल करते हैं। कल स्नेहा मौसी को भी बुला लूँगा ताकि आप दोनों भी एक बार उनसे बात कर लो। सविता: हम्म, ठीक है। बाकी की कहानी अगले भाग में।