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देवर से लिया चुदाई का असली मजा- 4

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देसी नंगी आंटी की कहानी में पढ़ें कि उसके देवर ने कैसे आंटी को पूरी नंगी करके उसकी तमन्ना पूरी की, उसे खूब आनंद देकर चोदा. देसी नंगी आंटी की कहानी के पिछले भाग देवर से लिया चुदाई का असली मजा- 3 में आपने पढ़ा कि कैसे मैं अपने देवर के साथ अपनी चूत की नंगी चुदायी करवाने आई थी. अब आगे देसी नंगी आंटी की कहानी: उसने मेरी आँखों को देखा तथा बोला- अरे आंटी, रो क्यों रही हो? “तुम इतना दर्द जो दे रहे हो। ” “सॉरी आंटी!” कहते हुए कबीर मेरी आँखों से निकलते हुए जल को अपनी जीभ पर ले लिया तथा बोला- आंटी, आपके जिस्म के एक-एक अंग के रस को चखना चाहता हूं, इसलिये तुम्हारी चूचियों को मैं कस कर मसल रहा था. कहकर एक बार फिर बड़े प्रेम से मेरे चूचियों को सहलाने लगा तथा उसको बारी-बारी पीने लगा. बीच-बीच में कभी मेरे गालों को चूमता तो कभी मेरी पलकों को तो कभी मेरे होंठों को चूम लेता. साथ ही उसके हाथ मेरी चूत को सहला रहे थे. इससे पहले इतनी उत्तेजित मैं कभी नहीं हुयी थी। मेरे अन्दर की गर्मी एक तरल पदार्थ के रूप में बहते हुए पेन्टी से चिपक गयी तथा कबीर की उंगली उसी गीली जगह को ही सहला रही थी। फिर मेरा देवर अपनी उंगली मुझे दिखाते हुए बोला- आपकी चूत ने मेरे लिये मलाई छोड़ दी है. कहकर वो उंगली को चाटने लगा। आपको बता दूं कि, “नहीं कबीर!” मेरे मुख से इतना ही निकला। मेरे इस शब्द को सुनकर बोला- क्या आंटी, अभी भी मुझसे शर्मा रही हो। इस समय मैं तुम्हारी मलाई चाट लेता हूं. फिर तुम मेरी मलाई चाट लेना! कहकर वो मेरे पैरों की तरफ आया तथा उस गीली जगह पर अपनी जीभ लगा दी। मैं सनसना गयी, मेरा जिस्म अकड़ गया- क्या कर रहे हो कबीर? मेरी कांपती हुयी आवाज से शब्द निकल रहे थे. लेकिन कबीर बिना सुने हौले-हौले से मेरी पेन्टी को चाट रहा था- आह आंटी, काफी आनंद है इस रस में! मेरे जीवन के इस आनन्द के क्षण को अब मैं जीवन भर नहीं भूल पाऊँगी। ध्यान देने वाली बात है कि, फिर वो मेरे पैरों के बीच से हट गया. अब उसने मेरे बायें पैर के पंजे को चाटना शुरू किया. अब मेरे कम्पकपाते हुए होंठ बोले- अब यह क्या कर रहे हो? “आंटी तुम्हारे जिस्म के एक-एक हिस्से को अपने अन्दर समा रहा हूं। ” कहते हुए उसने पंजे से चाटना शुरू किया. और फिर जांघ के पास आकर जांघ को अच्छे से चाटा. फिर पेन्टी के अन्दर छुपी हुयी मेरी चूत को चाटते हुए मेरी नाभि, पेट, चूचियों के बीच की घाटी को, फिर ठुड्डी को, कान को, गाल को, फिर मेरे दायें कान को, गाल को तथा फिर उसी क्रम में चाटता हुए दूसरे पैर के पंजे तक पहुंचा। मैं आनन्द के सागर में गोते लगा रही थी। फिर उसने मुझे हल्के से करवट दिलायी तथा फिर मेरे पीछे के हिस्से को चाटने लगा. मेरे कूल्हे को बारी-बारी से दांत गड़ाता हुए पीठ पर अपनी जीभ चलाते हुए मेरी गर्दन को चाटने के बाद मेरे होंठ चूसने लगा। ध्यान देने वाली बात है कि, फिर वो झटके से खड़ा हुआ तथा अपने सब कपड़े एक-एक करके उतारने लगा। मेरी नजर सिर्फ तथा सिर्फ उसकी पैन्ट पर थी, जो अब उतर चुकी थी. और इससे पहले मेरी पलक झपकती, उसने अपनी चड्डी भी उतार फेंकी. उसका लंड तना हुआ लपलपा रहा था। “आंटी, बस तुम इसको एक बार चूम लो. तो फिर यह तुम्हारी चूत की गुफा में घुसे। आपको बता दूं कि, ” मैंने देवर के लंड को चूम लिया. “अरे न आंटी … ऐसे नहीं … जीभ चलाओ। ” मैंने उसके खुले हुए हिस्से पर जीभ लगाई। ध्यान देने वाली बात है कि, “बस आंटी, अब तुम उस आईसक्रीम के स्वाद का आनंद लो तथा अब मैं चला देसी नंगी आंटी की चूत के अन्दर!” एक बार फिर कैंची उसके हाथ में थी। उसने मेरी पेन्टी को कैंची से काट डाला। “क्या आंटी, कितने बड़े-बड़े बाल हो गये हैं। आनंद किरकिरा कर दिया। ” फिर खुद ही बोला- मैं जानता था. इसलिये इन झांटों को बनाने का सामान भी साथ लाया हूं. परन्तु इससे पहले एक चुदाई ऐसे ही! कहकर वो मेरी टांगों के बीच आ गया तथा एक झटके में लंड को मेरी चूत के अन्दर डाल दिया। मेरे देवर कबीर का लंड मेरी चूत के अन्दर जाने का मुझे एक नया ही आनन्द मिल रहा था। उसने धक्के मारना शुरू कर दिया। धीरे-धीरे उसके धक्के का घर्षण चूत के पोर पोर को हिला रहा था। असल में, कबीर की स्पीड बढ़ती जा रही थी तथा उतनी ही तेज फच-फच की आवाज मेरी चूत तथा कबीर के लंड के मिलने से आ रही थी. पलंग हिल रहा था, मानो अब टूटा कि तब टूटा। मेरी कंपन गायब हो चुकी थी, जोश बढ़ चुका था. और उसी जोश में मैं चिल्ला उठी- कबीर, तथा जोर से चोदो, आनंद आ रहा है। चोदते तो मुझे मेरे पति भी थे. उसमें भी फच-फच की आवाज आती थी. परन्तु वो जोश नहीं आता था जो मैं कहती कि ‘विराज तथा जोर से चोदो मुझे, आनंद आ रहा है। ध्यान देने वाली बात है कि, ’ क्योंकि लाज का पर्दा दोनों ही तरफ था। लेकिन यहां सब पर्दा बेपर्दा हो चुका था। मेरे देवर कबीर के चोदने से मेरा सारा जिस्म पसीने से नहा चुका था. मेरा ही नहीं, कबीर भी पसीने से नहा चुका था। असल में, कबीर भी अपने दांतों को भींचे बोल रहा था- आंटी हां, आंटी हां, क्या चूत है तुम्हारी। यकीन मानिए, इधर मैं कहती- कबीर तथा तेज … उधर कबीर हम्म-हम्म किये जा रहा था. फच-फच की आवाज में कोई कमी न थी। तभी मुझे लगा कि मेरी चूत के अन्दर की नसें खुल चुकी हैं. उसमें से तरल पदार्थ, मेरा रज बाहर आ रहा है. मैं शिथिल पड़ने लगी. लेकिन कबीर की स्पीड में कोई कमी नहीं थी. मेरे झड़ने के दो तीन मिनट बाद ही कबीर के लंड से निकलता हुआ उसका लावा मैंने अपनी चूत के अन्दर महसूस किया. तथा फिर कुछ तथा धक्के लगाने के बाद कबीर भी हाँफता हुआ मेरे ऊपर गिर पड़ा। थोड़ी देर तक वो यूं ही वो मेरे ऊपर पड़ा रहा। फिर वो मुझसे अलग हुआ तथा मेरे गर्दन पर अपनी जीभ फिराते हुए बोला- आंटी, आपकी चूत तथा आपके जिस्म का रस मुझे काफी पसंद आया। थोड़ी देर बाद एक बार फिर वो थोड़ा सा मेरे ऊपर आया तथा अपनी एक टांग को मेरी टांगों पर चढ़ाकर मेरे निप्पल पर जीभ फिराने लगा. और साथ ही मेरी चूत के बालों से खेलने लगा। वो चूत की झांटों से खेल क्या रहा था, उन्हें जड़ से ही उखाड़ने की कोशिश कर रहा था। इससे मुझे उस जगह हल्का सा दर्द भी हो रहा था तथा साथ ही खुजली भी मचने लगती. पर हाथ बंधे होने की हालत में मैं खुजला भी नहीं सकती थी। मैं रूँआसी होती हुई बोली- कबीर, अपनी आंटी को तड़पा-तड़पा कर मारने के लिये लाये हो क्या? “क्या हुआ आंटी?” कबीर बोला. “बाल जो तुम नोच रहे हो, उससे मुझे दर्द होने के साथ-साथ खुजली हो रही है। ” “सॉरी आंटी, अब नहीं तोड़ूंगा.” कहकर वो अपनी गर्म आंटी की चूत खुजलाने लगा। ध्यान देने वाली बात है कि, “अब कैसा लगा आंटी?” “बहुत अच्छा लग रहा है। ” तभी वो उठा तथा अपने बैग से कुछ निकालने लगा। उसके हाथ में शेविंग किट्स थी। मैंने कहा- अब इसका क्या करोगे? “कुछ नहीं आंटी, तुम्हारी झांट बनाऊँगा, मुझे अपनी देसी नंगी आंटी की चिकनी चूत देखनी है। ” उसने शेविंग किट मेरे बगल में रख दी तथा फिर कमरे में चारों ओर देखने लगा. फिर उसने कमरे के कोने में पड़ा हुआ अखबार उठाया तथा मेरी कमर के नीचे फैला दिया तथा फिर मेरे झांटों को कुतरने लगा। बीच बीच में वो जानबूझ कर या फिर अपने ही आप कैंची का नुकीला भाग मेरी चूत के लबों में चुभ जाता था. फिर उसने अपनी आंटी की चूत के बालों पर शेविंग क्रीम लगाई. उन पर अच्छे से ब्रश चलाने लगा. तथा फिर रेजर से उसने बाल उतारने शुरू कर दिये. मुझे गुदगुदी हो रही थी. इसकी वजह से मैं थोड़ा हिल डुल गयी. तो कबीर टोकते हुए बोला- आंटी हिलो मत. नहीं तो तुम्हारी चूत जख्मी हो जायेगी। असल में, लेकिन मैं हल्का फुल्का हिलती ही रही. पर कबीर अपने काम में लगा रहा. जैसे-जैसे मेरी बुर चिकनी होती गयी, वो उसको चूमता गया. जब उसने मेरी चूत की शेविंग कर ली तो मेरी तरफ देखता हुआ बोला- क्या आंटी, इतनी सुंदर तथा चिकनी चूत को झांटों के बीच छिपाकर रखी थी? देखो तो कितनी सुंदर लग रही है। अब मेरा देवर मेरे हाथ-पैरों को खोलता हुआ बोला- लो चलकर तुम खुद ही देख लो! कहकर उसने मुझे अपनी गोदी में उठाया तथा एक बड़े से शीशे के सामने खड़ा कर दिया। मैं भी अपनी सुंदर चूत को बस निहारती रह गयी तथा अनानयास मेरे मुख से निकल ही पड़ा- साहिल, मेरी चूत तो तुम्हारी वजह से सुंदर हो गयी है। “साहिल नहीं आंटी, सैंया बोलो!” “हाँ मेरे सैंया। ” उसने मुझे कसकर अपनी एक बांह में जकड़ लिया तथा दूसरा हाथ मेरी चूत को सहलाने लगा. मेरा खुद का हाथ कबीर को हेल्प करने लगा। थोड़ी देर बाद कबीर बोला- आओ आंटी, चलकर नहा लेते हैं। मैं उसकी बात काट नहीं सकती थी. उसने मुझे गोद में उठाया तथा बाथरूम के अन्दर ले जाकर शॉवर के नीचे खड़ा कर दिया तथा शॉवर चलाकर मेरे साथ चिपक गया। हम दोनों के नंगे जिस्म एक-दूसरे से चिपके हुए एक-दूसरे की गर्मी का अहसास कर रहे थे तथा हमारे ऊपर गिरता हुआ शॉवर का जल … कबीर ने मुझे तथा कस कर जकड़ लिया। कबीर का फड़फड़ाता लंड बार-बार मेरी चूत से टकरा रहा था। ध्यान देने वाली बात है कि, मैंने देवर के लंड को अपनी मुट्ठी में कैद किया तथा अपनी चूत की दरार के ऊपर चलाने लगी। कबीर मुझसे अलग हुआ तथा मुझे दीवार से सटाकर मेरी चूचियों को कस-कस कर मसलने लगा। वो मेरे निप्पलों को चुटकियों से रौंदने लगा। मुझे दर्द हो रहा था, आनंद भी आ रहा था। कबीर अभी भी निप्पलस को भींज रहा था तथा घुटनों के बल आकर मेरी नाभी तथा चूत पर जीभ चला रहा था। अच्छे से मेरी चूत चाटने के बाद वो खड़ा हुआ तथा मुझसे बोला- आंटी, अब तुम्हारी बारी! कहते हुए अपनी पीठ दीवार पर सटा ली। मैंने भी उसकी नकल करते हुए पहले उसके निप्पल पर जीभ चलाने लगी. फिर निप्पल को दांतों से काटने लगी। कबीर सिसियाते हुए बोला- काफी अच्छे आंटी, बस इसी तरह करती रहो। आनंद आ रहा है। फिर जिस तरह से उसने मेरी चूचियों को कठोरता के साथ मसला था, मैं भी उसकी छाती को अच्छे से मसल रही थी. पर वो दर्द से चिल्लाने की जगह अभी भी सिसिया रहा था तथा मुझे तेज-तेज भींचने के लिये उसका रहा था। मैं हार चुकी थी। तभी कबीर बोला- आंटी, मैंने तो आपकी चूत को भी चाटा है, तुम मेरा लंड चूसो। उसके कहते ही मैंने उसके लंड को मुख बिना किसी हिचक के ले लिया तथा उसको चूसने लगी। मैं कुछ देर ऐसा ही करती रही। आपको बता दूं कि, एक बार फिर कबीर ने मुझे रूकने के लिये इशारा किया तथा लंड के लाल-लाल सुपारे पर उंगली चलाते हुए बोला- आंटी इसको आईसक्रीम की तरह चाटो। मैं उसके सुपारे पर जीभ चलाने लगी. मुलायम-मुलायम सुपारा बिल्कुल लॉलीपॉप की तरह लग रहा था। आपको बता दूं कि, फिर कबीर ने मुझे एकबार फिर दीवार से सटाकर खड़ा किया तथा मेरी एक टांग को पकड़कर मुझे एक टांग पर खड़ा कर दिया. और फिर लंड को अपनी आंटी की चूत के मुहाने पर रगड़ने लगा. और अचानक उसने एक झटका दिया. देसी नंगी आंटी की चूत ने उसके लंड को अपने अंदर लील लिया। कबीर अब मेरी चुदाई कर रहा था। कबीर मेरी चुदाई करते-करते बीच-बीच में मेरे होंठों को भी चूम लेता था। कई धक्के उसने इस पोजिशन में लगाये। तब कबीर रूका तथा हाँफ रहा था. शायद थक गया था. वो बोला- आंटी अपनी दूसरी टांग भी उठाकर मेरी कमर को जकड़ लो। जब मैंने अपनी दूसरी टांग उठायी तो ऐसा लगा कि कहीं मैं गिर ना जाऊँ. पर कबीर का हाथ तब तक मेरे चूतड़ पर आ चुका था। उसने मुझे उससे सहारा दिया तथा मेरी टांगों ने उसकी कमर को जकड़ लिया. फिर भी मैं अपनी सहूलियत के लिये अपनी बांहों से कबीर को कसकर जकड़ चुकी थी। असल में, इस समय कोई आदमी घोड़े की सवारी करता है, ठीक उसी प्रकार मेरी चूत कबीर के लंड की सवारी कर रही थी। मैं उसी तरह उसके लंड पर चढ़ी हुयी थी तथा कबीर मुझे बाथरूम के बाहर ले आया. उसने मुझे पलंग पर लेटा दिया तथा मेरे ऊपर झुक गया। फिर मेरी दोनों टांगों को झुके हुए अपने कंधे पर रखा तथा एक बार फिर चुदाई शुरू कर दी। आपको बता दूं कि, इस पोजिशन में लगा कि मेरी चूत थोड़ी तथा टाईट हो गयी है। फच-फच की आवाजें आने लगी थी। सच कहूं तो, मेरे जिस्म में अकड़न चालू हो चुकी थी. मुझे लगा कि अब मेरे अन्दर का सारा जल निकलने वाला है। इधर कबीर भी तेजी दिखानी शुरू कर चुका था। यकीन मानिए, फिर वो रूकते हुए बोला- आंटी, पलंग पर सीधी लेट जाओ। मैं बिल्कुल सीधी लेट गयी। मेरे मुख में अपने लंड को देते हुए बोला- आंटी, जैसे अभी तुम मेरे लंड को चूस रही थी, उसी तरह चूसो. तथा अन्दर से निकलने वाली मलाई को चाटो. मैं तुम्हारी चूत चाटते हुए उसकी मलाई चाटूंगा. कहकर कबीर ने लंड मेरे होंठों से रगड़ते हुए मुख के अन्दर डाल दिया तथा खुद अपनी देसी नंगी आंटी की चूत चाटने लगा। आपको बता दूं कि, उसकी जीभ चूत में लगते ही मुझे एक करंट सा लगा। मेरे अंदर का लावा फूटने लगा। आपको बता दूं कि, मैं नहीं चाहती थी कि चूत के अन्दर से निकलते हुए रस को वो चाटे। इसलिये मैं अपनी कमर को हिलाडुला रही थी ताकि कबीर का मुख मेरी चूत से हट सके. पर कबीर कहां मानने वाला था … उसने मेरे कूल्हे को अच्छे से तथा कसकर पकड़ लिया तथा अपनी जीभ मेरी चूत के अन्दर डालकर चाटने लगा। मेरा कंट्रोल खत्म हो गया था तथा मेरे अन्दर का फव्वारा छुट चुका था। इधर मेरी भी इच्छा उसके अन्दर से निकलने वाले वीर्य रस को अपने मुख में लेने की नहीं हो रही थी तथा मैं उसके लंड को अपने मुख से निकाल ही रही थी. पर तब तक तरल तथा गर्म गर्म वीर्य मेरे जीभ में आ चुका था तथा गले के अन्दर उतरना शुरू हो चुका था. उसका लंड रह रहकर मेरे मुख के अन्दर कोने-कोने में लग चुका था। असल में, कुछ कसैला सा स्वाद लगा परन्तु लंड का मुख से बाहर न निकल पाने के कारण मैं विवश हो गयी थी तथा उसके वीर्य को अपने हलक से नीचे लेना पड़ा। कबीर अभी भी मेरी चूत के अन्दर तक अपनी जीभ चला रहा था तथा साथ ही अब उसकी जीभ मेरी गांड की छेद पर चल रही थी। एक कंपकपाहट सी मेरे जिस्म में उतर गयी। इधर उसका लंड भी सिकुड़ चुका था। मेरी चूत तथा गांड को अच्छे से चाटने के बाद वो उकड़ू मेरे मुख के ऊपर बैठ गया तथा बोला- आंटी, थोड़ा अपनी जीभ से बोलो कि मेरे गांड की सैर कर ले। कबीर ने मेरी गांड चाटी थी तथा मुझसे भी अपनी गांड चटवाने को कह रहा था। सच कहूं तो, मैंने उसके कूल्हे को फैलाया तथा उसकी गांड चाटने लगी। जब वो संतुष्ट हो गया तो मेरे ऊपर से हट गया। फिर वो पलंग पर सीधा लेट गया तथा मुझे अपने ऊपर ले लिया तथा अपनी जीभ को बाहर निकालकर मेरे होंठों पर फेरने लगा। सच कहूं तो, मैंने भी अपनी जीभ बाहर निकाली तथा उसके जीभ से लड़ाने लगी। कबीर की उंगली देसी नंगी आंटी की गांड के अन्दर थी। ध्यान देने वाली बात है कि, थोड़ी देर बाद मैं उसके ऊपर से उतरी तथा घड़ी की तरफ देखते हुए बोली- देवर जी, अब घर चलने का वक्त हो गया है. कहकर मैंने अपनी कटी फटी पैन्टी ब्रा उठायी तथा कबीर को दिखाते हुए बोली- इसको उतार के भी तुम अपनी आंटी की चूत को चोद सकते थे। देवर मुस्कुराते हुए बोला- आंटी, इसकी चिन्ता मत करो. मैं आपके लिये नई लाया हूं. कहकर उसने एक काफी ही सेक्सी डोरी नुमा पैन्टी तथा ब्रा मुझे पहनाने लगा. पैन्टी ब्रा पहनाने के बाद वो बोला- आंटी, आप इस सेक्सी पैन्टी ब्रा में तथा सेक्सी लग रही हो. आपकी फूली हुयी चूत मेरे लंड को टाईट कर रही है। मैं उसके मुख में उंगली रखते हुए बोली- देवर जी, अब यह चूत आपकी ही है, जब मन करे तो चोद देना. पर अब पहले घर चलो। “ठीक है आंटी। असल में, ” फिर हमने अपने कपड़े पहने तथा घर चल दिये। उस रोज के बाद से जब भी मौका मिलता, कबीर से मैं चुद जाती। अब मैं खुश थी कि रात को मेरे पतिदेव मेरे कपड़े ऊपर करके चोदते थे तथा देसी नंगी आंटी कबीर के साथ एकदम नंगी होकर चुदती थी। तो दोस्तो मेरी देसी नंगी आंटी की कहानी कैसी लगी। आपके मेल का इंतजार रहेगा। आपका शरद सक्सेना [email protected] [email protected]