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एक अनसुनी दास्तान: दोस्त के वाइफ के सेक्सी बदन की मालिश

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यह कहानी तब की है जब मेरा घर पर किसी कारण झगड़ा होने की वजह से मैं 3 साल के लिए घर से दूर एक कच्छ किराए पर लेकर रहता था और खर्चे के लिए मिनी बस पर खलासी का काम करता था। उस वक़्त मेरी मुलाकात एक बस ड्राईवर से हुई.. जिसका नाम प्रमोद था। मेरी प्रमोद से काफी अच्छी दोस्ती हो गई। कुछ दिनों बाद प्रमोद का खलासी किसी काम से अपने घर चला गया। अब उसे एक खलासी की आवश्कता थी.. Hot Bhabhi Cheat Sex तो उसने मुझसे बात की और कहा- तू मेरे साथ परमानेन्टली मेरी गाड़ी पर चल और मेरे साथ ही रह। सच कहूं तो, मैंने कहा- ठीक है.. पर मैं हफ्ते में एक दिन की छुट्टी करूँगा। उसने कहा- ठीक है। मैंने कहा- एक तारीख को आ जाऊँगा। जब मैं एक तारीख को प्रमोद के घर पहुँचा तो प्रमोद की पत्नी ने दरवाजा खोला और पूछा- आप कौन हैं और किससे मिलना है? तो मैंने कहा- मुझे प्रमोद ने गाड़ी पे चलने के लिए बुलाया है। तो उसने मुझे बताया- प्रमोद तो किसी काम से अपने गाँव गए हुए हैं.. 4-5 दिनों में आयेंगे.. पर प्रमोद ने मुझे बताया था कि कोई आने वाला है। यह कहकर उसने मुझे अन्दर आने को कहा और मुझे कच्छ दिखाया और कहा- नहा-धोकर खाना खाने आ जाओ। मैंने कहा- ठीक है.. मैं फ्रेश होकर खाना खाने आ गया। खाना खाते समय मैंने पूछा- आपका नाम क्या है? तो उसने अपना नाम मुस्कान बताया.. उसने मुझसे पूछा- क्या तुम यहाँ अकेले ही रहते हो? तो मैंने कहा- यहाँ मैं अपने परिवार के साथ रहता हूँ.. पर किसी कारण से अभी अलग कच्छ लेकर अकेले ही रहता हूँ.. अब हमने खाना खाया और काफी सारी बातें की। आपको बता दूं कि, खाना खाकर मैं अपने कमरे में आ गया और अपने वस्त्र उतार कर सो गया। ध्यान देने वाली बात है कि, मुझे पता नहीं.. मेरी आँख कब लग गई। जब आँख खुली तो देखा मुस्कान मेरे सामने चाय लेकर खड़ी थी। मैं एकदम से चौंक गया.. तो मुस्कान ने मुझसे कहा- कोई बात नहीं.. घर पर ही तो हो.. पर आगे से ध्यान रखना। मैंने कहा- ठीक है। मुस्कान ने मुझे चाय दी और बाहर चली गई। कुछ देर बाद मुस्कान ने मुझे बुलाया और कहा- मेरे साथ बाजार चलो। मैंने कहा- ठीक है। मैं तैयार होकर मुस्कान के साथ बाजार निकल गया। बाज़ार से खरीददारी करके जब हम घर लौट रहे थे.. तब बस में भीड़ होने के कारण मुस्कान मेरे आगे चिपक कर खड़ी हो गई.. मुस्कान की गाण्ड मेरे लौड़े के बिल्कुल नजदीक होने से और चिपकने के कारण मेरे लौड़े में एक अजब सा तनाव पैदा हो गया.. जो मेरे साथ पहले कभी नहीं हुआ था। ध्यान देने वाली बात है कि, अब मेरा लौड़ा पूरा खड़ा हो चुका था। शायद जिसका अहसास मुस्कान को भी हो रहा था.. लेकिन मुस्कान ने मुझे कुछ नहीं कहा। थोड़ी देर बाद हम घर पर आ गए। मुस्कान अपने वस्त्र बदल कर रसोई में चली गई। असल में, मैं भी वस्त्र बदल कर हॉल में टीवी देखने बैठ गया। तभी मुस्कान ने मुझे बुलाया- रंजन जरा रसोई में आना। मैं खड़ा होकर रसोई में चला गया। मैंने देखा मुस्कान ने बिल्कुल ही पतला सा नाईट-गाउन पहन रखा है.. जिसके कारण मुस्कान का जिस्म मुझे बिल्कुल साफ दिख रहा था। मेरी नजर एकटक मुस्कान को देख रही थीं। तभी मुस्कान ने कहा- मुझे ऐसे क्या देख रहे हो.. पहले कभी किसी को नहीं देखा? मैं डर गया और कहा- ऐसी कोई बात नहीं है.. आज से पहले कभी इतनी खुबसूरत स्त्री को नहीं देखा है.. खाश तौर पर ऐसी नाईट-ड्रेस में तो किसी को नहीं.. तो मुस्कान ने मुझसे पूछा- ऐसा इस ड्रेस में क्या है? तो मैंने कहा- ड्रेस में नहीं.. इसे पहनने वाले में कुछ बात है। तभी मुस्कान ने मुस्कुरा कर कहा- कोई तारीफ़ करना तो तुम बस वालों से सीखे.. अब तारीफ करना बंद करो और मेरी कुछ मदद करो। मैंने कहा- ठीक है.. पर मुझे रसोई का काम नहीं आता। तो मुस्कान ने कहा- कोई बात नहीं.. मैं सब सिखा दूंगी। यकीन मानिए, यह कहकर मुस्कान मेरे पीछे खड़ी हो गई जिससे मुस्कान के मम्मे मेरी कमर में चुभने लगे, मुझे काफी आनन्द आ रहा था। तभी मुस्कान ने मुझसे कहा- बस में तुम क्या कर रहे थे? मैंने कहा- कुछ नहीं.. वो भीड़ होने के कारण.. मैं आपसे चिपक गया था और कोई बात नहीं। मुस्कान ने कहा- ठीक है। फिर मैं हॉल में बैठकर टीवी देखने लग गया। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है. मुस्कान ने खाना लगा कर मुझे बुलाया- रंजन खाना तैयार है.. आकर खा लो। मैं खाना खाने चला गया.. खाना खाने के बाद मैं फिर टीवी देखने बैठ गया। कुछ देर मुस्कान ने भी मेरे साथ बैठ कर टीवी देखा. फिर उसने मुझसे कहा- मैं सोने जा रही हूँ.. किसी चीज की जरूरत हो तो मुझे बुला लेना। मैंने कहा- ठीक है। वो कमरे में चली गई और मैं टीवी देखने लगा। सच कहूं तो, तभी मुस्कान ने मुझे आवाज लगाई- रंजन जरा कमरे में आना.. जब मैं कमरे में गया.. तो मैंने देखा मुस्कान सिर्फ ब्रा और पेटीकोट में थी। जिसे देखकर मैं दीवाना हो गया। आपको बता दूं कि, एक मन तो हुआ कि जाकर मुस्कान को चोद दूँ.. प्यार से नहीं तो जबरदस्ती ही चोद दूँ.. लेकिन मैंने खुद को संभाला और बोला- क्या बात है? इस पर मुस्कान ने कहा- मेरी पीठ में दर्द हो रहा है.. जरा सी बाम लगा दो। मैंने कहा- ठीक है आप लेट जाओ। आपको बता दूं कि, वो औंधी हो कर लेट गई.. और मैंने उसकी पीठ पर बाम लगानी शुरू कर दी। जैसे-जैसे मैं उसकी नरम पीठ पर अपना हाथ फेर रहा था.. धीरे-धीरे मेरी हालत खराब होने लगी। मुझे फिर से बस वाला दौरा पड़ना चालू हो गया.. मेरा लौड़ा पूरी तरह से तन कर पैन्ट से बाहर आने के लिए उछलने लगा। पीठ पर मालिश करवाते समय मुस्कान ने मुझसे कहा- रंजन.. जरा मेरी इस ब्रा के हुक को खोल कर.. ‘अच्छी’ तरह से मालिश कर दे। मैंने ठीक वैसे ही किया.. मुस्कान के ब्रा का हुक खोल कर उसके नंगे जिस्म की मालिश करने लगा.. मालिश करते हुए धीरे-धीरे मैंने अपना हाथ मुस्कान के मम्मों पर लगाया और उसकी तरफ से कोई आपत्ति न होते देख मैं उसके मम्मों को मसलने लगा। आपको बता दूं कि, थोड़ी देर के बाद मैंने अपना हाथ हटा लिया.. इस पर मुस्कान ने कहा- क्या हुआ..? मालिश करो न.. मुझे काफी आनंद आ रहा है। ध्यान देने वाली बात है कि, इस पर मैंने कहा- आपको तो आनंद आ रहा है.. पर मेरी हालत ख़राब हो रही है। तो मुस्कान ने हँस कर पूछा- क्यों.. क्या हुआ? मैंने कुछ नहीं कहा.. तभी मुस्कान ने मेरा हाथ पकड़ कर सेज पर खींच लिया और मेरी छाती पर बैठ गई। सच कहूं तो, कहने लगी- मुझे मालूम है.. तुम्हें क्या हुआ है। यह कहकर उसने अपनी लटकती हुई ब्रा खोल दी.. अब मेरे सामने उसके मम्मे बिल्कुल नंगे थे। मुस्कान ने अपनी चूचियों की तरफ इशारा करते हुए कहा- रंजन इनको पकड़ के इनका दूध निकाल कर पी जा.. मैंने भी ठीक वैसे ही किया। जब मैंने मुस्कान के मम्मों को छुआ तो मुझे यकीन ही नहीं हुआ कि किसी के मम्मे इतने नाजुक कैसे हो सकते हैं? मैं मुस्कान के मम्मों को जोर से मसलने लगा.. तभी मुस्कान ने कहा- आह्ह.. जरा आराम से.. थोड़ी देर तक अपने मम्मों को दबवाने के बाद मुस्कान मेरे ऊपर से उठी और अपने पेटीकोट का नाड़ा खोल दिया। यकीन मानिए, जैसे ही मुस्कान का पेटीकोट नीचे गिरा तो मैंने देखा कि उसने पेटीकोट के नीचे कुछ भी नहीं पहना था। मैं उसे अपलक देखता ही रह गया। तभी मुस्कान ने कहा- क्या हुआ मेरे राजा? मैंने कहा- मैंने आज से पहले कभी किसी को ऐसे नहीं देखा। तो मुस्कान ने पूछा- क्या आज से पहले तुमने कभी चुदाई नहीं की? मैंने कहा- नहीं.. मगर ब्लू-फिल्म काफी देखी हैं और मुठ मारकर रह जाता था। तो मुस्कान ने कहा- मतलब मुझे ही तुम्हें सब कुछ सिखाना है। मैंने कहा- मुझे कुछ-कुछ पता तो है.. जो नहीं मालूम है.. वो आप बता देना। ध्यान देने वाली बात है कि, इस पर मुस्कान ने कहा- ठीक है.. मगर मेरी एक शर्त है। मैंने कहा- मुझे आपकी सारी शर्त मंजूर हैं। तो मुस्कान ने कहा- सुन तो लो.. मेरी पहली शर्त है कि तुम मुझे ‘आप’ नहीं बल्कि मुस्कान कहोगे.. मैंने कहा- ठीक है। आपको बता दूं कि, ‘और दूसरी शर्त यह है कि मैं जब भी कहूँ.. तुम मुझे चोदोगे। ’ मैंने कहा- ठीक है.. अब मुस्कान ने कहा- पहले अपने सारे वस्त्र खोल दो और पलंग पर लेट जाओ। मैंने अपने सारे वस्त्र खोल दिए और पलंग पर लेट गया। मुस्कान मेरे पास आकर बैठ गई और मेरे लौड़े को हाथ में लेकर हिलाने लगी.. मेरा लौड़ा तन्ना गया। फिर अचानक मुस्कान मेरे लवड़े को अपने मुँह में लेकर लॉलीपॉप की तरह चूसने लगी। मुझे काफी आनंद आ रहा था.. तभी एकदम से मेरे शरीर में करंट सा दौड़ गया और मेरे लौड़े से कुछ रस सा निकला.. जो सीधा मुस्कान के मुँह में गिर गया। इस पर मुस्कान ने कहा- कोई बात नहीं.. पहली बार ऐसे ही होता है। थोड़ी देर बाद मुस्कान मेरे ऊपर आकर बैठ गई और मुझे चुम्बन करने लगी। कम से कम 8 -9 मिनट बाद मैंने मुस्कान से कहा- मुस्कान.. चल कुछ नया करते हैं। इस पर मुस्कान ने अपने मुँह में लौड़े को लेकर फिर चूसने लगी.. जिसके कारण मेरा लौड़ा दुबारा तन कर खड़ा हो गया। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है. अब मुस्कान ने कहा- रंजन तुम भी मेरी चूत को चाटो। मैं मुस्कान की चूत को चाटने लगा.. जैसे ही मैंने चूत पर अपना मुँह लगाया.. मुस्कान ने सिसकाकीर्तिँ भरनी शुरू कर दीं। कुछ देर बाद मुस्कान की चूत से कुछ जल निकला.. मैं उसे पी गया। ऐसा रस मैंने कभी नहीं पिया था। मुझे काफी अच्छा लगा। हम काफी देर तक ऐसे ही एक-दूसरे को चाटते रहे। फिर मैंने मुस्कान से कहा- मुस्कान.. अब मुझे लगता है कि मेरा जल निकलने वाला है.. तभी मुस्कान ने मेरे लौड़े को मुँह से बाहर निकाला और मुझसे कहा- रंजन अब तुम अपने लंड को नीचे मेरी चूत में पेल दो.. लेकिन आराम से.. क्योंकि तुम्हारा सुपारा बड़ा है। मैंने कहा- ठीक है.. जब दर्द हो तो कह देना.. मैं रुक जाऊँगा। अब मैं लंड लगाने को हुआ और मुस्कान की चूत पर अपने लौड़े को लगाया तो गीलेपन के कारण लौड़ा फिसल गया। इस पर मुस्कान ने गुस्से में कहा- भोसड़ी के.. अब मुझे ही बताना होगा कि तेरे लंड को चूत में कैसे डालना है। उसने मेरे लौड़े को पकड़ कर अपनी चूत पर लगाया और कहा- अब जोर से धक्का मार.. मैंने वैसे ही किया.. एक जोर का धक्का लगाया और इसके साथ ही मेरा सुपारा मुस्कान की चूत में घुस गया। मुस्कान जोर से चिल्ला उठी और बोली- हरामी.. धीरे डालने के लिए कहा था न.. मैंने- सॉरी यार.. अनाड़ी हूँ.. तो उसने कहा- कोई बात नहीं.. मैं समझ सकती हूँ.. लेकिन किसी और के साथ ऐसे मत करना.. वरना वो कहीं मर न जाए। मैंने कहा- गुरू जी.. तुम्हारे होते हुए मुझे क्या डर और वैसे तुम हो ना.. मुझे सिखाने के लिए। इस पर मुस्कान ने मुझसे कहा- कभी मैं न हुई तो? मैंने कहा- अभी तुम मुझे अच्छी तरीके से तैयार कर देना। मुस्कान ने कहा- ठीक है.. लेकिन अभी तो जो काम कहा है.. वो तो करो.. मुझे चोदो और मेरी प्यास बुझा दो। मैंने कहा- ठीक है.. मैंने एक जोर का झटका लगाया.. मेरा पूरा लंड मुस्कान की चूत में घुस गया। फिर मैंने जोर से धक्के लगाने शुरू कर दिए। करीबन आधा घंटे के बाद मैंने उससे कहा- मेरा अब जल निकलने वाला है.. तो मुस्कान ने कहा- मुझे तुम्हारा जल पीना है.. तुम अपना जल मेरे मुँह में निकाल दो। मैंने वैसे ही किया.. अपना लंड मुस्कान के मुँह में डाल दिया और सारा जल मुस्कान के मुँह में निकाल दिया.. और थक कर मुस्कान के पास ही लेट गया। मुस्कान भी थक चुकी थी। थोड़ी देर बाद मुस्कान ने कहा- रंजन आज के जैसा आनंद मुझे पहले कभी नहीं मिला। मुस्कान ने मुझे चुम्बन किया और सो गई निशा को मुस्कान ने मुझे जगाया और चोदने के लिए कहा। उस निशा मैंने मुस्कान को कम से कम 4 बार चोदा.. सुबह मेरी आंख 9 बजे खुली जब मुस्कान मेरे पास चाय लेकर आई। असल में, मुझे चाय पीकर फिर से निशा का कार्यक्रम चालू करने के लिए कहा। दोस्तों में पहले ही थका हुआ था.. मगर शर्त के कारण मना भी नहीं कर सकता था। मुस्कान ने मुझसे प्रमोद के आने तक खूब चुदवाया और मुझे नए तरीके भी बताए।