मजेदार किस्सा: आंटी को लंड पर झुला झुलाया देवर ने
मेरा नाम सनी है तथा आज मैं अपनी आंटी की चूत मारने की अपनी एक दम सच्ची कहानी सुनाने जा रहा हूं। असल में, मैंने बीए करने के बाद एमबीए करने के लिये अपने बड़े भाई के पास जाने का फ़ैसला किया। बड़े साहिल पुणे रहते हैं तथा उनकी पिछले ही साल शादी हुई है। Kamuk Bhabhi Fuck Kahani उनके पास जाकर रहने के नाम पर ही मुझे अपनी कमसिन आंटी की मासूम सेक्सी सूरत याद आने लगी। ट्रेन पकड़ कर आंटी को याद करते हुए मैं पुणे पहुंचा। भाई साहब मार्केटिंग के जोनल मैनेजर हैं तथा इसलिये वो अक्सर लंबे बिजनेस टूर पर रहते हैं। मैं साहिल के फ़्लैट पर पहुंचा। दो कमरों का फ़्लैट है उनके पास तथा बच्चे हैं नहीं तो एक खाली कमरा स्टडी कम गेस्ट रुम के तौर पर इस्तेमाल होता था। उस रुम में मैने अपना कब्जा जमा लिया। आंटी मुझे देखते ही खुश हो गयीं। वो मुझसे तीन ही साल बड़ी होंगी तथा इस लिये हम काफ़ी हिले मिले थे पहले से ही। रात को डिनर करने के बाद मैंने अपने लैप्टाप पर हालीवुड की फ़िल्म की हॉट मूवी लगा दी। फ़िल्म में काफ़ी किसिंग सीन्स तथा इमोशनल ड्रामा है। रोमांटिक फ़िल्म तथा सुंदर नजारों को देखते हुए मैं ठंडी का आनंद लेते हुए अपने लंड को पकड़ कर ज्वाय स्टिक की तरह हिलाते हुए रगड़ रहा था तथा अंदर ही अंदर आनंद ले रहा था। इस तरह वासना जग चुकी थी तथा आंटी की गुदेली गांड मेरे दिमाग में नाचना शुरु कर चुकी थी। मैने ध्यान से आंटी के रुम में झांका तो पाया कि वो जगी हुई थीं तथा झीनी नाईटी में अपने पारदर्शी बदन का मुजायरा करा रही थीं। मैंने आवाज दी, आईये आंटी फ़िल्म देखते हैं। वो तुरत चली आयीं तथा बोलीं कि मुझे भी नींद नहीं आ रही है इसलिये मैं भी आपके साथ बैठती हूं। यकीन मानिए, हम दोनों ब्लैंकेट ओढे फ़िल्म देखने लगे। हीरो हिरोइन के मस्त चूंचों को खोलता हुआ दीवाल से सटा कर गर्मा उत्तेजित सेक्स सीन दे रहा था तथा हीरोइन चूत मरवाते हुए सीत्काकीर्तिं मार रही थी। मेरा लंड पहले से खड़ा था अचानक मैंने पाया कि आंटी ने मेरा हाथ पकड़ लिया है। मैंने हल्के से उनका हाथ लिये लिये अपने लंड के उपर कर दिया। पक्के तौर पर उनकी चूत पनियाली हो रही होगी। सच कहूं तो, मेरा छह इंच लंबा लंड पूरी तरह से बेतहाशा खड़ा था तथा इसलिये मैने ये जानते हुए कि साहिल हैं नहीं तथा आंटी का इस रोमांटिक माहोल में मूड पाजिटीव दिख रहा है, अपना लंड छुआ दिया। वो गनगना उठीं उनके चेहरे पर लालिमा आ गयी, उनकी नजरें झुक चुकीं थीं वो फ़िल्म नहीं देख रही थीं बल्कि सर नीचे झुकाये अपने स्तनों को झांक रहीं थीं मैं समझ गया कि इनका मन तो कर रहा है परन्तु यह शरमा रही हैं। मैंने हिम्मत दिखाई, जरा सा उनका हाथ पकड़ कर अपने लंड को जबरदस्ती पकड़ा दिया। वो मुठ्ठी में ले ही नहीं रही थीं मैने उनके टांगों को सहलाना शुरु कर दिया। वो अपनी टांगे चिपका के एक दूसरे के उपर चढा लीं जिससे कि मैं उनकी चूत तक आसानी से न पहुंच जाउं। ध्यान देने वाली बात है कि, मैंने उन्हें चोदने का फ़ैसला कर लिया था इसलिये छोड़ने का सवाल ही नहीं उठता था। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है. आंटी शरमा रहीं थीं पर उनका मन चुदाई वाला खेल खेलने को कर रहा था, ये बात पक्की थी। मैंने हिम्मत करते हुए अपने हाथ से उनके पैरों को सहलाना शुरु कर दिया था तथा इसलिये वो अपने पैरों को सिकोड़ चुकी थीं। खैर अब खेल को आगे बढाना था तथा जब कदम रख दिया था तो पैर पीछे नहीं खींच सकता था। इसलिये मैंने अब थोड़ा जबरी करने की कोशिश की। इस बार मैंने उन्हें उठा कर अप्ने गोद में बिठा लिया। वो अपने पैरों को मोड़ कर तथा सकुचा गयीं। परन्तु भागने की कोशिश नहीं की एक बार भी। उनकी नाईटी के अंदर उनकी दूधिया जवानी चूंचों को झलकाती हुई मेरे उपर कयामत ढा रही थी। वो सीधा मेरे लंड पर बैठने के बाद तथा विचित्र तरीके से बिहैव करने लगीं। ध्यान देने वाली बात है कि, बेड पर लेट कर उन्होंने अपने हाथों से मुह तथा नैन बंद कर लीं तथा अपना पिछवाड़ समेत चूत मेरे सामने कर दिया। मैं समझ गया वो आंटी थोड़ी गांव के माहोल से थीं इसलिये शरमाती थीं। मेरे सामने उनका पिछवाड़ा था, चमता हुआ चूतड़ों का संगम उनके सफ़ेद मैक्सी के उपर से ही झलक रहा था तथा काली काली पैँटी में से उभरे हुए फ़ुद्दी के फ़ांक मेरे होश उडा रहे थे। असल में, ये जाल मुझे फ़ांसने के लिये फ़ेंका गया था। मैंने अपना लंड सीधा किया, अपना लोवर उतारा तथा फ़िर आंटी को वैसे ही उकड़ूं रहने दिया। पीछे से मेक्सी उठा दी। अब आंटी की नंगी इंडियन गांड मेरे सामने चमक रही थी। मैंने पीठ पर हाथ फ़ेरते हुए अपनीं उंगलियां गांड की दरार वाली घाटी पर फ़िसलायीं, तथा चूम लीं। टेस्टी गांड थी आंटी की बिल्कुल कुंवारी टीनेजर्स की तरह कोई बदबू नहीं तथा निर्दोष फ़ुद्दी भी थी उनके पास इस बात का अंदाजा आ गया था मुझे। मैंने चड्ढी को किनारे कर दिया तथा चूत व गांड मेरे सामने हो गये। वो हिल डूल नहीं रही थी। यह चुदवाने के लिये मौन प्रस्ताव था। इसका आनंद भी अलग है। बिन बोले चोद डालो, मैने उनकी चूत को सहलाया तथा एक उंगली की। वह वाकैई टाईट थी तथा फ़िर थूक लगा के चूत के होटों को गीला किया, मेरा लन्ड पहले से खड़ा था तथा इसलिये मैंने अब चोदने का प्लान बनाया। अपना सुपाड़ा चूत के उपर रगड़ते हुए, पीछे से ही धक्का दिया तथा आंटी चिल्लाने लगीं। पहले मुझे आश्चर्य हुआ तथा लगा कि वह नौटंकी कर रही हैं, परन्तु जल्दी ही अहसास हो गया कि वह सच में चिल्ला रही थीं, मैने महसूस किया कि उनकी चूत की झिल्ली अभी फ़टी नहीं थी तथा इसलिये प्रेम से मैने अपना हाथ बढाते हुए उनके मुह को बंद किया तथा एक जबरदस्त झटका अंदर मारा। आपको बता दूं कि, फ़च से खून की धार बाहर निकली तथा उनके फ़ुद्दी की झिल्ली फ़ट चुकी थी। सच कहूं तो, अंदर लंड को पेलते हुए मैं मारे खुशी के दीवाना हुआ जा रहा था। असल में, आंटी की आंखों में खुशी के आंसू आ गये थे अब वो वास्तव में महिला बन चुकी थीं तथा उन्हें आनंद आ रहा था। जिसकी चूत में अंदर तक लंड न गया वो क्या खुश रहेगा। शायद भाई साहब का लंड इतना सख्त नही था। इसलिये ऐसा रह गया था। यकीन मानिए, आधे घंटे पेलने के बाद मैं झड़ गया। इसके बाद भाई साहब को भी पेलने में ज्यादा आनंद आने लगा था, साहिल आंटी की जिंदगी खुशहाल हो गयी तथा बाद में मेरी कृपा से उनको एक लड़का भी पैदा हुआ।