मंदबुद्धि लड़के साथ जिस्म की प्यास बुझवाई
मेरा नाम सोनम है.. मेरी उम्र 27 साल है तथा में शादीशुदा हूँ। मेरे पति का नाम सुधीर है तथा वो एक प्राईवेट कम्पनी में प्रॉजेक्ट मैंनेजर है। में तथा मेरे पति सुधीर एकदम खुले विचारों के है तथा उन्हें मुझे काफी ही सेक्सी ड्रेस में देखना तथा दिखाना काफी पसंद करता है। Bhabhi Bathroom हमारे शादी के तीन साल हो गये तथा हमारी सेक्स लाईफ काफी ही अच्छी है। असल में, हम एक रोज में तीन, चार बार सेक्स करते है.. लेकिन में तो बताना ही भूल गयी थी कि मेरे फिगर का साईज 34-30-34 है तथा में हर टाईम काफी ही सेक्सी वस्त्र पहनती हूँ तथा मुझे अपना बदन सभी लोगो को दिखाना काफी अच्छा लगता है। दोस्तों यह उस समय की बात है.. जब सुधीर कम्पनी की तरफ से 1महीने के लिए अर्जेंमीना गये हुए थे तथा में उन दिनों घर पर काफी ही अकेली हो गयी थी तथा में सेक्स के लिए काफी तड़प रही थी.. मेरी चूत में जैसे आग सी लगी हुई थी। मुझे अब कैसे भी अपनी चूत की आग ठंडी करनी थी। असल में, तो रोज निशा को सुधीर से मेरा नेट पर चेट होता था तथा हम दोनों नंगे पूरे होकर चेट करते थे.. लेकिन चेट करने से भी मुझे सन्तुष्टि नहीं थी तथा मेरी चूत दिनों रोज तथा बेकाबू होती जा रही थी। में सेक्स के लिए पूरी तरह से पागल हो चुकी थी तथा अपनी चूत में उगलियाँ करके चूत का सारा जल निकालकर रोज गुजर रही थी। यकीन मानिए, फिर उस टाईम हमारे पड़ोस में एक फेमिली रहने के लिए आई.. उस फेमिली में पति, पत्नी तथा उनका एक 17 साल का एक लड़का था। फिर धीरे धीरे मुझे मालूम पड़ा कि उनका जो लड़का है उसका थोड़ा दिमाग़ ठीक नहीं है तथा उसका बदन तो 20 साल का है.. लेकिन उसका दिमाग़ 10 साल के लड़के जैसा है तथा वो लोग इस बात से काफी परेशान रहते थे। तो कुछ दिनों में मेरी उनसे काफी अच्छी दोस्ती हो गयी तथा वो जो औरत थी वो काफी ही अच्छी थी। फिर में अपने रोज के पहनावे की तरह उसके सामने भी छोटे छोटे वस्त्र पहनती थी तथा उनको कोई प्राब्लम नहीं थी। हमारी दोस्ती काफी ही अच्छी हो गयी तथा फिर एक रोज अचानक ही वो औरत मेरे पास आई. और मुझसे बोली कि उनको भी एक अच्छी नौकरी मिल गयी है तथा यह सब तुम्हारी वजह से हुआ है.. क्योंकि मैंने ही उस औरत को नौकरी करने की सलाह दी थी तथा फिर वो कहने लगी कि अब तुम्हे मेरा एक तथा काम करना पड़ेगा.. क्या तुम मेरे लड़के को सम्भाल सकती हो? तो मैंने थोड़ी देर सोचा तथा में भी राज़ी हो गयी। तो एक हफ्ते के बाद उसने नौकरी पर जाना शुरू कर दिया तथा वो अपने पागल लड़के को मेरा पास देखभाल करने के लिए छोड़ गयी। असल में, एक दो रोज में मुझसे उस लड़के की दोस्ती होने लगी.. लेकिन वो वैसे बिल्कुल ही पागल था। में उसके सामने भी हर रोज की तरह सेक्सी वस्त्र पहनती थी। तो एक रोज अचानक वो मुझे बोला कि आंटी आप मम्मी जैसी क्यों नहीं रहती? तो मैंने उससे पूछा कि तुम्हारी मम्मी कैसे रहती है क्या पहनती है? जिग्नेश : ( उसका नाम जिग्नेश था ) मेरी मम्मी घर में हमेशा गाऊन पहनती है.. लेकिन आप तो बच्ची जैसी छोटी स्कर्ट पहनती हो। में : हाँ में इसलिए यह सभी पहनती हूँ.. क्योंकि अभी गर्मी का टाईम है तथा मुझे काफी गर्मी लगती है.. इसी वजह से में छोटी छोटी वस्त्र पहनती हूँ.. क्यों तुम्हे यह सभी वस्त्र अच्छे नहीं लगते? जिग्नेश : नहीं मुझे काफी अच्छा लगता है तथा आप इन सभी कपड़ो में काफी सुंदर लगती हो। असल में, फिर ऐसे ही कुछ रोज बीत गये में देख रही थी कि वो मुझे काफी घूरता था तथा में भी उसे उतना ही चाहने करने लगी थी। एक रोज उसकी मम्मी हर रोज की तरह उसको मेरे पास छोड़कर ऑफिस चली गयी तो वो रोने लगा। सच कहूं तो, में उसके पास जाकर उसका सर अपने सीने पर लेकर सहलाने लगी तथा उससे पूछने लगी कि तुम क्यों रो रहे हो? जिग्नेश : मम्मी मुझे प्रेम नहीं करती है.. वो सिर्फ़ पापा को प्रेम करती है। में : तुम ऐसा क्यों कह रहे हो? जिग्नेश : क्योंकि मैंने कल निशा को देखा कि मम्मी, पापा को काफी प्रेम कर रही थी। में : लेकिन वो कैसे? जिग्नेश : पापा ने मम्मी को काफी देर तक चूम रही थी तथा उसके बाद मम्मी के सारे वस्त्र उतार दिए तथा मम्मी ने पापा को अपना दूध पिलाया.. लेकिन सुबह जब मैंने मम्मी से कहा कि मुझे भी प्रेम करो तथा मुझे भी अपना दूध पिलाओ तो उसने मुझे ज़ोर से थप्पड़ मारा तथा मुझे दूध भी नहीं पिलाया। तो में समझ गयी कि वो अभी भी बिल्कुल बच्चा ही है तथा बिल्कुल पागल है तथा उसको दूध भी पीना है तथा में भी सेक्स के लिए काफी तड़प रही थी तथा फिर मैंने भी सोच लिया कि उसको में अपनी जरूरत बनाऊंगी तथा सेक्स का मज़ा लूँगी। में : कोई बात नहीं.. में तुम्हे काफी प्रेम करूंगी तथा दूध भी पिलाऊंगी। तो मैंने उसको अपने सीने से लगा लिया तथा उसके बाल सहलाने लगी उसके मुहं मेरे बूब्स पर दब रहे थे। आपको बता दूं कि, मुझे जोश चड़ रहा था तथा वो एकदम चुपचाप मेरे बूब्स के ऊपर सर रखकर लेटा था.. में उसको चूमने लगी तो उसने पूछा कि आंटी यह क्या कर रहे हो? में : क्यों तुमको प्रेम कर रही हूँ.. क्या तुम को अच्छा नहीं लगा? जिग्नेश : हाँ मुझे काफी अच्छा लग रहा है मुझे तथा प्रेम करो। तो में उसको तथा चूमने लगी तथा मैंने धीरे से उसके लंड को छू दिया.. उसका लंड काफी बड़ा था। जिग्नेश : आंटी आज में नहाया नहीं हूँ.. क्या आप मुझे नहला दोगे? फिर में भी यह मौका छोड़ना नहीं चाहती थी.. क्योंकि में भी यह चाहती थी कि तथा फिर मैंने बोला कि ठीक है चलो आज में तुम्हे नहलाती हूँ। में : तुम बाथरूम में जाओ में चेंज करके आती हूँ। यकीन मानिए, तो वो बाथरूम में चली गई तथा मैंने अपनी ड्रेस उतार कर एक टावल लपेट लिया तथा बाथरूम में गयी। असल में, फिर जब में बाथरूम में घुसी तो देखी कि वो सिर्फ़ अंडशौर्ययर में खड़ा था। मैंने उसको जल से भिगोया तथा साबुन लगाकर मसलने लगी। तभी अचानक उसने मुझसे पूछा कि तुम टावल में क्यों हो? में : अगर में तुम्हे वस्त्र पहनकर नहलाऊँगी तो मेरे भी वस्त्र गीली हो जाएगे। जिग्नेश : तो तुम भी मम्मी कि तरह ब्रा तथा पेंटी पहन लो। में : क्या तुम्हारी माँ तुम को ब्रा तथा पेंटी पहन कर नहलाती है? जिग्नेश : हाँ तथा कभी कभी तो वो ब्रा भी नहीं पहनती। मुझे सेक्स चड़ने लगा तथा में बोली कि ठीक है.. तुम थोड़ा तथा रूको में दोबारा से चेंज करके आती हूँ। सच कहूं तो, तो मेरी निप्पल टाईट होने लगी तथा मैंने बाहर आकर एक सफेद कलर की ब्रा तथा पेंटी पहन ली तथा फिर से बाथरूम में चली गयी। वो अब भी वैसे ही खड़ा था तो में उसको साबुन लगाने लगी तथा चिपकने लगी.. मेरा तथा उसका बदन एक दूसरे से घिसने लगे में पूरी गीली हो चुकी थी.. मेरी ब्रा तथा पेंटी पारदर्शी हो चुके थे। तभी उसने अचानक से अपनी अंडशौर्ययर को उतार दिया तथा कहने लगा कि थोड़ा इसको भी साबुन लगा दो। में : क्या मम्मी तुम्हारे साथ ऐसा भी करती है? जिग्नेश : हाँ मम्मी मेरे पूरे बदन को साबुन लगाकर अच्छे से साफ करती है। ध्यान देने वाली बात है कि, तो में भी उसकी गांड तथा लंड में साबुन लगाकर रगड़ने लगी तथा फिर थोड़ी ही देर में उसका लंड खड़ा होने लगा। आपको बता दूं कि, में : तुम यह क्या हो रहा है? जिग्नेश : मालूम नहीं आंटी.. लेकिन ऐसा तो रोज होता है.. आप भी नहा लो फिर एक साथ बाहर जाएँगे। तो में भी नहाने लगी तथा जितना सेक्सी पोज़ हो सकता है देने लगी तथा बोली कि तुम भी मुझे साबुन लगा दो। फिर उसने साबुन लिया तथा मेरे सारे बदन को लगाने लगा.. मेरे बूब्स के ऊपर, मेरी गांड में साबुन लगाया तथा बोला कि आंटी तुम्हारे दूध कितनी अच्छे है.. में तो इनको देखकर पागल हो रहा हूँ फिर उसने मेरे पेंटी के अंदर हाथ डाला तथा बोला कि आंटी तुम्हारे पास तो मेरे जैसा नहीं है। में : नहीं बेटा.. लडकियों को वैसा नहीं होता.. जिग्नेश अब तुम बाहर जाओ में अभी आती हूँ। तो वो बाहर चला गया तथा में नहाकर टावल लपेटकर बाहर आई तथा मैंने बेडरूम में आकर देखा तो वो अभी भी नंगा बैठा था। जिग्नेश : आंटी में क्या पहनूं? मेरी तो अंडशौर्ययर पूरी गीली हो गई है। सच कहूं तो, में : कोई बात नहीं.. तुम ऐसे ही रहो.. में तुम्हे कुछ पहनने के लिए देती हूँ। ध्यान देने वाली बात है कि, तो उसके बाद मैंने उसको मेरी एक मिनी स्कर्ट दी तथा बोली कि तुम इसको पहन लो। तो उसने वो मिनी स्कर्ट पहन ली तथा में भी चेंज करने लगी मैंने एक लाल कलर की ब्रा तथा पेंटी पहनी तथा ऊपर एक पारदर्शी गाऊन पहना वो गाऊन काफी ही छोटा था तथा उससे सिर्फ मेरी गांड ढक रही थी.. तब तक मैंने मन बना लिया था कि कैसे भी मुझे उससे चुदवाना है। उसका लंड काफी बड़ा था तथा मोटा भी था। फिर हम दोनों ने एक साथ लंच किया तथा बेड पर सोने के लिए गये। सच कहूं तो, उसने मेरी स्कर्ट पहनी था तथा उसका लंड साफ साफ दिख रहा था। असल में, फिर मैंने अपना गाऊन उतार दिया तथा सिर्फ़ ब्रा तथा पेंटी में सेज पर लेट गयी तथा उसको बोली कि आओ आज में तुम्हे प्रेम करती हूँ.. वो मेरे पास आ गया तथा में उसको काफी चूमने लगी तथा उसका लंड सहलाने लगी। आपको बता दूं कि, जिग्नेश : क्या आंटी मुझे दूध पिलाओगे? में : क्यों नहीं बेटा आओ अभी पिलाती हूँ? में कुछ करने से पहले ही उसने मेरी चूची को दबाया तथा ब्रा से बाहर कर दिया। फिर चूची से खेलने लगा। ध्यान देने वाली बात है कि, में पागल हो रही थी तथा मैंने अपनी ब्रा उतार दी.. अब में सिर्फ़ पेंटी मे थी. फिर वो मेरे बूब्स को मुहं में लेकर ज़ोर ज़ोर से चूसने लगा। ध्यान देने वाली बात है कि, में भी पागलों की तरह उसके लंड को ऊपर नीचे करने लगी। तो थोड़ी ही देर बाद वो झड़ गया तथा में पूरी गीली हो चुकी थी। जिग्नेश : आंटी यह क्या हो रहा है? में : कुछ नहीं बेटा ज़्यादा प्रेम करने से ऐसा ही होता है। जिग्नेश : ठीक है आंटी। यकीन मानिए, फिर से वो मेरे बूब्स को चूसने लगा तथा दबाने लगा। यकीन मानिए, में : जिग्नेश आओ में तुम्हे तथा प्रेम करना सिखाती हूँ। जिग्नेश : ठीक है आंटी। फिर मैंने जिग्नेश को पूरा नंगा कर दिया तथा अपनी भी पेंटी उतार दी। जिग्नेश : आंटी आप बिल्कुल मम्मी जैसी लग रही हो.. मम्मी भी ऐसे ही पापा को प्रेम करती है। में : हाँ में जानती हूँ.. अब से रोज हम दोनों ऐसे ही रहेंगे तथा काफी प्रेम करेंगे। जिग्नेश : ठीक है आंटी अब में क्या करूँ? में : तुमने आज मेरा काफी दूध पी लिया.. अब तुम अपना मुहं मेरी चूत में ले जाओ तथा चूत का रस पियो। जिग्नेश : ठीक है आंटी। ध्यान देने वाली बात है कि, तो जिग्नेश मेरी चूत चाटने लगा तथा में पागल हो रही थी मैंने एक बार जल भी छोड़ दिया था। में : आओ जिग्नेश अब हम एक दूसरे को प्रेम करें। ध्यान देने वाली बात है कि, जिग्नेश : आंटी वो कैसे? में : तुम मेरी चूत का रस पियो तथा में तुम्हारे लंड का रस पीती हूँ। जिग्नेश : आंटी ठीक है। हम दोनों 69 पोज़िशन में आ गये तथा एक दूसरे को काफी चूसने लगे.. वो मेरी चूत में अपनी जीभ घुसा घुसाकर जोर जोर से चूसने लगा तथा कहने लगा कि आंटी आपके छेद से नमकीन नमकीन जल निकल रहा है तो में कहने लगी कि जिग्नेश चूसो तथा जोर से चूसो यह जल तुम्हारे लिए ही है तो वो तथा जोर से चूसने लगा तथा अपनी ऊँगली चूत में डालकर उँगलियाँ चाटने लगा। फिर करीब आधे घंटे के बाद हम दोनों एक एक करके झड़ गये। ध्यान देने वाली बात है कि, उसको काफी मज़ा आ रहा था तथा फिर मैंने भी उसका लंड करीब बीस मिनट तक चूसा तथा काफी मजे किए तथा हम एक दूसरे को बाहों में लेकर नंगे ही सो गये.. लेकिन बीच में जब भी उसकी नींद खुली तो वो मेरे बूब्स को मुहं में लेकर चूसने लगा.. बिल्कुल एक छोटे बच्चे की तरह तथा इसके बाद से रोज सुबह उसके आते ही हम दोनों नंगे हो जाते थे तथा साथ में सेक्स गेम खेलते थे। एक रोज मैंने उसको बोला कि आज तुम मुझे वैसे ही प्रेम करोगे जैसे तुम्हारे पापा तुम्हारी मम्मी को प्रेम करते है. जिग्नेश : वो कैसे? में : बताती हूँ. फिर मैंने उसके लंड को चूस चूसकर खड़ा कर दिया तथा बोली कि अब तुम इसको मेरी चूत के अंदर डाल दो तथा अंदर बाहर करो तथा वो इसको नया खेल समझ कर जोश के साथ तैयार हो गया तथा मुझे चोदने लगा। उसका लंड काफी ज़्यादा बड़ा था तथा उसने मुझे करीब 25 मिनट तक चोदा तथा फिर झड़ गया। तो मुझे काफी आनंद मिलने लगा था तथा में उससे अलग अलग पोज़ में चुदवाती रही तथा वो इसको प्रेम का गेम समझकर खेलता रहा। तब से हम दोनों घर में हमेशा ही नंगे रहने लगे तथा मेरे पति आने तक हम लोग रोज 5-6 बार सेक्स करते रहे। अब वो मेरी जरूरत बन चुका था तथा उसको में जैसे चाहे इस्तमाल करती थी। हम हर जगह पर तथा अलग अलग तरीके से कभी रसोई में, कभी बाथरूम में, कभी सोफे पर, कभी बालकनी में भी सेक्स किया तथा यह करीब एक महीने तक चला। यकीन मानिए, वो मेरे लिए इतना पागल था कि जब भी उसका लंड खड़ा होता था वो मुझे चोद देता था।