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रोमांचक कहानी: पड़ोस की गर्म आंटी की चुत चुदाई का मजा- 2

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नोनवेज सेक्सी स्टोरी में पढ़ें कि कैसे मुझे पड़ोस की आंटी पसंद आ गयी, मैंने उसे पटाया और एक रात उसने मुझे अपने घर बुला लिया. दोस्तो, मैं राजेश एक बार फिर से अपनी देसी सेक्स कहानी के अगले भाग के साथ हाजिर हूँ. आपने नोनवेज सेक्सी स्टोरी के पिछले भाग पड़ोस की गर्म आंटी को सेक्स के लिए पटाया में पढ़ा था कि कैसे मैंने सावी आंटी को पटाया और उनको अपने से लंड से चुदने के लिए मना लिया. आंटी ने भी चुदाई के लिए सुहागरात जैसी तैयारी की हुई थी. हम दोनों मस्ती करने लगे थे और आंटी ने मेरा लौड़ा पैंट से बाहर निकाल लिया था. अब आगे नोनवेज सेक्सी स्टोरी: सावी- अरे मेरी जान देखो ना … कैसे तन कर खड़ा है. तुम्हारा लंड इतना बड़ा कैसे है … मैं तो आज से तुम्हारी ही हो गई मेरे राजा. यह बोलकर सावी आंटी ने मेरे लौड़े को पकड़ कर दबा दिया. मैं फिर से चिंहुक उठा. मैंने सीत्कार भरते हुए कहा- आह मेरी जान आराम से … काफी नाजुक चीज है … प्लीज़ प्रेम से करो ना! अब सावी आंटी मेरे लौड़े को धीरे-धीरे सहलाने लगीं और मैं उनके बाल पकड़ कर उन्हें सहलाने लगा. सावी आंटी लंड हिला रही थीं और मैं उनके गालों पर किस करने में लगा था. कुछ पल बाद सावी आंटी ने मेरी पैंट निकाल दी और अंडशौर्ययर रहने दिया. फिर वो मदहोश निगाहों से मुझे देखती हुई मेरी शर्ट के बटन खोलने लगीं. आंटी कहने लगीं- राजा जबसे मैंने तुमको देखा है ना … तभी से मैं तुम्हारी दीवानी हो गई हूं … बस समाज से थोड़ा सा डरती हूं कि कहीं बदनामी ना हो जाए. मैंने कहा- सावी मेरी जान, मैंने भी जब से आपको देखा है ना … तभी से आपसे प्रेम करने लगा हूँ. मैं आपको बता दूं दोस्तो … औरत शादी के बाद हमेशा और भी ज्यादा सुंदर लगने लगती है. इस समय आंटी की परिपक्व जवानी मुझे खा जाने को मचल रही थी. अब मैं अंडशौर्ययर और बनियान में था. मैंने धीरे धीरे सावी आंटी के कपड़े खोलने शुरू कर दिए. जैसे ही मैंने आंटी का ब्लाउज खोला तो उनके बोबे दिखने लगे. मैंने उनके एक बोबे को दबा दिया तो सावी आंटी के मुँह से आह निकल गई. वो कहने लगीं- आंह राजा मेरी जान … और दबाओ तुम्हारे हाथ कितने सुखद लग रहे हैं. मैंने उनका दूसरा दूध और जोर से दबा दिया. वो मस्त हो गईं और हल्के से बोलीं- अब इन्हें चूस भी लो. मैंने सावी आंटी को लेटा दिया और उनके बगल में लेट गया. मैं आंटी के होंठों पर किस करने लगा और हम दोनों के होंठ लॉक हो गए. मैं आंटी के ऊपर का होंठ दबा रहा था तो आंटी मेरे नीचे का होंठ काट रही थीं. फिर मैं इमरान हाशमी की तरह सावी आंटी को किस करने लगा, उनके मुँह में अपनी जीभ डालकर उन्हें गर्म करने लगा. दोस्तो, आपको बता दूं कि होंठों से होंठों को किस करने का और जीभ से जीभ लड़ाने का आनंद ही कुछ और होता है. इसके बाद मैंने सावी आंटी की ब्रा को थोड़ा सा साइड में करके उनके एक बोबे के निप्पल को मुँह में भर लिया और दबा कर चूसने काटने लगा. वो आंह आंह करती हुई मेरे बालों में हाथ डाल कर मेरा मुँह अपने दूध पर दबाने लगीं. मैंने उनके निप्पल को खींच खींच कर चूसना शुरू किया, तो आंटी अपने मुँह से ‘अअअह … होई मां … धीरे करो न … प्लीज धीरे धीरे करो हां … और जोर से करो राजा … मुझे काफी आनंद आ रहा है. आंटी की वासना उन पर हावी हो गई थी और उनका होशो-हवास खत्म हो गया था. वो आंख बंद करके मेरे मुँह से अपना दूध चुसवाए जा रही थीं. फिर मैंने दूध से मुँह हटा कर नीचे आना शुरू किया. मैं आंटी के पेट और नाभि को चूमता हुआ उनकी चुत के करीब आ गया था. मैंने आंटी की पैंटी को उतार दिया. आह … सामने का नजारा देख कर देख कर मेरे तो मानो होश ही उड़ गए थे. आंटी की चुत एकदम फूली हुई थी और उस पर एक भी बाल नहीं था. सफाचट चुत को देख कर मुझसे रहा ही न गया और मैंने अगले ही धीरे से आंटी की चुत पर अपना हाथ रख कर चुत को सहला दिया. आंटी की एक कामुक आह निकल गई. मैंने अपनी एक उंगली उनकी चुत अन्दर डाल दी. आंटी की चुत पूरी गीली हो चुकी थी. उंगली अन्दर लेते ही आंटी के मुँह से लम्बी आह निकल गई मगर मैंने उनकी आंह ऊंह की परवाह किए बिना अपनी उंगली को चुत की गहराई में उनकी बच्चेदानी के मुँह को स्पर्श कर लिया. आंटी ने अपनी टांगें हवा में उठा दीं और चुत की रगड़ाई का आनंद लेने लगीं. मैंने भी अपना पूरा ध्यान चुत पर लगाना तय कर लिया. सावी आंटी के मम्मे को चूसना छोड़ मैंने 69 का पोज बनाया और अपने लौड़े को आंटी के मुँह के पास करके उनकी चुत पर अपना मुँह लगा दिया. मेरा लौड़ा आंटी मुँह में लेकर चूस रही थीं और मैं उनकी चूत चाट रहा था. आंटी की चुत का गजब का स्वाद था. चुत में से जो रस निकल रहा था, मैं उसको चाटता जा रहा था. आंटी भी मस्ती से मेरा लौड़ा चूस रही थीं. हम दोनों को काफी आनंद आ रहा था. ऐसे ही लंड चूस चूस कर आंटी ने मेरे लौड़े का जल निकाल दिया और पूरा वीर्य गटक गईं. मैं आंटी को छोड़कर खड़ा हो गया और अपने कपड़े पूरे निकाल दिए. सावी आंटी को भी मैंने पूरी नंगी कर दिया. क्या गजब लग रही थीं सावी आंटी! मैंने उन्हें धक्का देकर बिस्तर पर लिटा दिया और खुद उनके ऊपर चढ़ गया. आंटी के होंठों से होंठों को मिलाकर किस करने लगा. ऐसे ही 15 मिनट तक किस करने के बाद मेरा लौड़ा फिर से खड़ा हो गया. अबकी बार मैंने उनकी चूत को थोड़ी देर के लिए चाटा और जब वो गर्म होने लगीं तो मैंने अपने लौड़े पर थोड़ा सा थूक लगा लिया. अब सावी आंटी की दोनों टांगें चौड़ी करके उनकी चुत पर अपने लौड़े को घिसने लगा. सावी आंटी ने गांड उठा कर कहा- आह और मत तड़पाओ राजा … जल्दी से डाल दो अपना लौड़ा चुत में … आह मुझे शांत कर दो यार … अब मुझसे रहा नहीं जाता! मैं समझ गया कि यही सही मौका है. धीरे से लौड़े के टोपे को चुत के द्वार पर रखा और लंड को धीरे से धक्का दे दिया. लंड चुत में फंस गया. सावी आंटी जोर से चिल्ला दीं- अअअह … अअअह …. मर गई … फट गई मेरी आह रुक जाओ तुम्हारा काफी मोटा है. मैं वहीं रुक गया और धीरे धीरे उनके होंठों को किस करने लगा. उनके बोबों को दबाने लगा. सावी आंटी ने बोला- आह … धीरे करो मेरी जान … मुझे चुदे हुए काफी दिन हो गए … मेरी चुत को किसी का लौड़ा ही नहीं मिला. ये काफी दिनों से प्यासी है और तुम्हारा अब तक का सबसे बड़ा लंड मेरी चुत में घुसा हुआ है … आह प्लीज धीरे धीरे करो. मैं धीरे-धीरे अपने लौड़े को आगे पीछे करने लगा. कुछ देर की रगड़ाई के बाद सावी आंटी को भी चुत चुदवाने में आनंद आने लगा. उनकी दोनों टांगें हवा में उठ कर फ़ैल गई थीं और वो नीचे से अपनी गांड को उठा उठा कर लंड चुत में ले रही थीं. मुझे समझ आ गया कि अब सावी आंटी पूरे लौड़े को अन्दर लेने की कोशिश कर रही हैं. चुत में काफी चिकनाई हो गई थी तो लंड सटासट आ-जा रहा था. मैंने पूरे लौड़े को बाहर निकाल कर जोर से सावी आंटी की चुत में पेल दिया. लंड की चोट सीधे बच्चेदानी पर जाकर लगी. सावी आंटी जोर से चिल्ला पड़ीं- उई मम्मी मर गई … अअअह …. उईईई मार दिया आज तो … राजा धीरे चोद … क्या आज ही चुत का भोसड़ा बनाएगा! मैं आंटी की बातों को अनसुना करते हुए लौड़े को आगे पीछे करता रहा. फिर कुछ पल बाद सावी को भी आनंद आने लगा. वो भी मेरी कमर पकड़ कर मुझे अपने ऊपर खींचने लगीं. आंटी- आह … और जोर से रगड़ मेरी जान …. आह हचक कर चोदो मेरी जान … आह राजा आपका लौड़ा तो मुझे भा गया कसम से! मेरा लौड़ा इस समय बार बार आंटी की बच्चेदानी तक जाकर टकरा रहा था. आंटी मस्ती में जोर-जोर से चीख रही थीं- आह हां राजा … और जोर से करो … आह काफी आनंद आ रहा है आआआ राजा और तेज करो …. और तेज करो ना …. पेलो चोदो मुझे … और कसके चोद चोद मेरी चुत का भोसड़ा बना दो … आह मेरी जान आज तो आनंद आ गया. कुछ देर बाद मैं उठा और सावी आंटी को खड़ा कर दिया. उनकी एक टांग को मैंने अपने कंधे पर रख ली और उनकी चुत में लंड पेल कर स्पीड से चोदने लगा. चुदाई के साथ ही मैं सावी आंटी को किस करने लगा, उनके बोबे दबाने लगा, दोनों निप्पलों को बारी बारी से काटने लगा. ऐसे ही काफी देर की चुदाई के बाद मैं चरम नीलम पर आ गया था. हालांकि अभी मैं झड़ना नहीं चाहता था, तो मैंने अपने लौड़े को बाहर निकाल लिया और सावी आंटी को किस करने लगा. सावी आंटी मेरे लौड़े को पकड़कर हिलाने लगीं और फिर से अन्दर डालने कहने लगीं. मैंने सावी आंटी को अब घोड़ी बना दिया और पीछे से उनकी चुत में लौड़ा डाल दिया. लंड चुत को धकापेल चोदने लगा था. ऐसे ही पांच मिनट तक चुत चुदाई करने के बाद सावी आंटी ने अपने जिस्म को अकड़ाते हुए कहा- आह और जोर से करो राजा … आह मेरा होने वाला है. बस अभी उन्होंने इतना कहा ही था कि आंटी झड़ गईं और निढाल हो गईं. मैं भी अपनी चरम नीलम पर आ गया था. मैंने सावी आंटी को सीधा करके लौड़ा चुत में डाला और उनकी चुत को जोर जोर से चोदने लगा. सावी आंटी कहने लगीं- आह बस करो ना … राजा बस करो, मैं मर जाऊंगी. तभी मैं झड़ गया और मैंने अपने लंड का पूरा जल आंटी की चुत में डाल दिया. मैं झड़ कर आंटी के ऊपर ही लेट गया और लम्बी लम्बी सांसें भरने लगा. सावी आंटी ने मेरी पीठ को सहलाते हुए कहा- सच में राजा … आज पहली बार चुदाई में आनंद आया है. अब आप मुझे रोज ऐसे ही चोदना. कुछ पल बाद मैं आंटी के बाजू में लेट गया और उन्हें अपनी बांहों में भरकर प्रेम करने लगा. हम दोनों आधे घंटे तक ऐसे ही लेटे रहे. मुझे कब नींद आ गई, पता ही नहीं चला. जब मैं उठा, तो सुबह के 5:00 बज गए थे. मैंने सावी आंटी को उठाया और कहा- आंटी, मैं जा रहा हूं. वह उठ कर मुझे बाहर तक छोड़ कर आने को चलने लगीं, तो उनसे चला भी नहीं जा रहा था. वह लंगड़ा लंगड़ा कर चल रही थीं. तभी सावी आंटी ने कहा- आज मैं कंपनी नहीं जाऊंगी. मैंने पूछा- क्यों? आंटी बोलीं- देख नहीं रहे हो मेरी हालत कैसी हो गई है … मुझसे चला भी नहीं जा रहा है. मैं मुस्कुराने लगा. आंटी ने कहा- तुम आज दिन भर यहीं रह जाओ. मैंने कहा- ओके आंटी, मैं सुबह 10:00 बजे तक आ जाऊंगा. इतना कह कर मैंने आंटी को एक लम्बा चुम्बन किया और अपने कपड़े पहन आर वहां से निकल कर अपने घर आकर सो गया. तो दोस्तो, यह थी मेरी देसी आंटी सेक्स कहानी. आपके मेल मिलने के बाद अगली बार मैं आपको बताऊंगा कि मैंने कैसे सावी आंटी की गांड मारी. आंटी के साथ उनकी एक सहेली और मकान मालकिन की भी चुदाई की. दोस्तो, अभी के लिए इतना ही, अभी आपसे विदा लेता हूं. आप इस देसी नोनवेज सेक्सी स्टोरी के लिए मुझे मेल करना ना भूलें. धन्यवाद. आपका अपना राजा [email protected] इससे आगे की कहानी: पड़ोसन आंटी को दिन में दोबारा चोदा