रोमांचक कहानी: दोस्त के पापा के साथ हिंदी गे सेक्स स्टोरी
दोस्तो, मैं आपके सामने एक बार फिर से अपनी एक नई हिंदी गे सेक्स स्टोरी लेकर आया हूँ.
मेरी पिछली कहानी
कॉलेज में मिला टीचर का बड़ा लंड
में जैसे आप लोगों ने पढ़ा था कि मेरे कॉलेज टीचर के साथ मेरे संबंध बन गए थे. उस कहानी को लेकर आप सभी के काफी सारे मेल मिले, जिससे प्रोत्साहित होकर आज मैं अपनी एक तथा हिंदी गे सेक्स स्टोरी आपके लिए लिख रहा हूँ.
उस वक्त मेरी उम्र 23 साल की थी, जब ये घटना मेरी साथ हुई, मैं कॉलेज की समर वेकेशन के लिए अपने मित्र के पास देहरादून गया था. मैंने सोचा कि कुछ समय पहाड़ों पर बिता कर आऊं.
मेरे मित्र के घर में तीन लोग थे. उसके पापा उसकी मम्मी तथा मेरा दोस्त. उसके पापा आर्मी में ऑफीसर रैंक पर हैं तथा उसकी मम्मी हाउस वाइफ हैं. उन दिनों मित्र के पापा की भी छुट्टियां चल रही थीं.
हम दोनों उसके घर करीब शाम को पहुंचे थे. मैं उनकी फैमिली से मिला, मुझे काफी ही अच्छा लगा. उसके पापा की फिज़ीक उनकी उम्र के हिसाब से काफी ही अच्छी थी. उनकी उम्र लगभग 48 साल के आस पास थी.
उसके पापा से मैंने नमस्ते की तथा पैर छूने के लिए अपने आपको झुकाया ही था, पर उन्होंने मुझसे सीधे हाथ मिलाया तथा गले लगा लिया.
उसके बाद हम लोगों ने बैठ कर थोड़ी देर बातें की. फिर मेरा मित्र मुझे मेरा कच्छ दिखाने ऊपर ले गया. ये काफी ही अच्छा कच्छ था, एकदम होटल जैसा व्यवस्थित था.
फिर निशा में हम सबने साथ ही डिनर किया तथा अपने अपने कमरों में सोने चले गए. अगले दिन घूमने का प्रोग्राम था इसलिए मैंने सफ़र की थकान दूर करने के लिए आराम करना उचित समझा.
सुबह हम लोग तैयार होकर गाड़ी से घूमने निकल गए. मेरा मित्र गाड़ी चला रहा था तथा उसकी मम्मी साइड में बैठी थीं. मैं तथा उसके पापा पीछे बैठे थे. वो मुझसे मेरे बारे में तथा मेरी फैमिली के बारे में बातचीत कर रहे थे.
तभी मैंने नोटिस किया कि वो मुझसे चिपक कर बैठे हुए थे तथा बातें करते करते किसी भी बहाने से मेरी जांघों पर हाथ रख देते थे.
पहले मुझे लगा कि ये सब ऐसे ही होगा. पर जब वे बार बार ये करने लगे, तो मुझे थोड़ा अजीब सा लगा तथा मेरे मन में भी उनके बारे में सोच कर ख्याल आने लगा.
हालांकि मैं पहले, पहल नहीं करना चाहता था कि शायद मैं ग़लत न होऊं तथा बेकार में मित्र के घर पर बदनामी हो जाए.
उस पूरे दिन वो मेरे आस-पास ही घूमते रहे तथा किसी ना किसी बहाने से मुझे टच करने लगे.
मैं भी अब तक समझ चुका था कि वो क्या चाहते हैं, इसलिए मैं कोई आपत्ति भी नहीं जता रहा था. पर कोई पक्का सिग्नल भी नहीं मिल रहा था. मुझे इस बारे में पहले पूरी तरह कन्फर्म करना था.
फिर जब मैं एक टाइम पर अकेला था, वो मेरे पास आए तथा मुझसे बोले- तेरी कोई गर्लफ्रेंड है क्या?
मैंने हंस कर बोला- नहीं अंकल.
तभी वो मज़ाक में बोले- तो ब्वॉयफ्रेंड है क्या?
मैंने भी हंस कर कह दिया- अरे नहीं अंकल … वो भी नहीं है.
फिर वो मुझसे बोले- तुम तो गुडलुकिंग हो … फिर भी कोई गर्लफ्रेंड नहीं है.
मैंने कहा- हां ऐसे ही अंकल … मैंने कभी इस बारे में सोचा ही नहीं है.
यह कह कर मैं हंस दिया.
फिर मैंने उनसे पूछा कि आपकी तो शादी से पहले काफी गर्लफ्रेंड्स रही होंगी, आप भी अच्छे दिखते हो.
तो वो बोले- हां थी … मगर शादी के बाद कोई भी नहीं रही … बस ब्वॉयफ्रेंड रहे.
मैंने पूछा- क्या सच में अंकल?
वो बोले- हां तुम्हारे भी रहे होंगे … ये मुझे भी पता है.
मैंने पूछा- आपको कैसा पता है?
तो वो बोले कि मैं सुबह से तुम्हारे पास घूम रहा हूँ तथा तुम्हें यहां-वहां टच कर रहा हूँ, पर तुम फिर भी कुछ नहीं कह रहे हो … इसका क्या मतलब है … बोलो?
उनकी ये बात सुनकर पहले तो मैं थोड़ा डर गया … फिर बोला- बस ऐसे ही मैंने इस बात पर ध्यान नहीं दिया.
फिर वो बोले- देखो … मैं साफ़ बात करता हूँ, जब से मैंने तुम्हें देखा है. मैं तुम्हारा दीवाना हो गया हूँ. तुम्हें देख कर मेरे अन्दर खलबली मच गई है.
उनकी ऐसी बातें सुनकर मुझे शरम आ गई तथा मैं वहां से चला गया.
फिर वो भी समझ गए कि मैं भी यही चाहता हूँ.
उसी शाम को हम लोग घर आ गए तथा डिनर करके अपने अपने रूम में चले गए.
मैं अपने सेज पर लेटा हुआ अंकल के बारे में ही सोच रहा था कि तभी मेरे रूम के दरवाज़े पर खटखट की आवाज़ होने लगी.
मैंने गेट खोला, तो सामने अंकल खड़े थे मैंने पूछा- आप इस समय पर?
तो वे बोले- मुझे तुमसे बात करनी है.
इतना कह कर वो कमरे के अन्दर आ गए तथा बोले- देखो रोहन … तुम मुझे काफी अच्छे लगते हो तथा मैं ये भी जानता हूँ कि मैं भी तुम्हें अच्छा लगता हूँ, फिर दिक्कत क्या है?
मैंने बोला- अंकल दिक्कत कुछ नहीं है … बस मैं थोड़ा शर्मीला हूँ. आप मेरे मित्र के पापा हो, तो थोड़ी हिचकिचाहट है.
वो बोले- बस इतनी सी बात … मैं अभी तुम्हारी शर्म दूर कर देता हूँ. तुम ये बात मत सोचो कि मैं तुम्हारे मित्र का पापा हूँ, बल्कि तुम ये सोचो कि मैं तुम्हारा ब्वॉयफ्रेंड हूँ.
इतना कह कर वो मेरे करीब आ गए तथा मुझे गले से लगा लिया. मैं भी उनसे चिपक गया. उन्होंने मेरे मुँह को ऊपर किया तथा मेरे होंठों पर किस कर दिया … मैं शर्मा गया.
फिर वो बोले कि तुम मुझे किस नहीं करोगे?
अब मैंने भी उनके होंठों पर किस कर दिया.
उसके बाद हम दोनों एक दूसरे के होंठों को चूसने लगे. उनके हाथ मेरी गांड पर घूमने लगे. मुझे उनके हाथ का स्पर्श अच्छा लग रहा था.
फिर वो मुझसे बोले- लास्ट टाइम तुमने कब किया था?
मैंने बोला- लगभग तीन महीने पहले तथा आपने?
वो बोले- छह महीने पहले.
हम दोनों काफ़ी देर तक एक दूसरे को किस करते रहे. फिर वो मुझसे बोले कि तुम पीछे घूम जाओ.
मैं घूम गया. उन्होंने मेरा पजामा उतार दिया तथा मेरी नंगी गांड उनके सामने आ गई. फिर उन्होंने मुझे थोड़ा झुकने को कहा तथा मेर गांड खोल उसकी गंध लेने लगे. अपनी जीभ से हल्के हल्के चाटने भी लगे.
उनकी इस हरकत से मुझे भी बड़ा आनन्द आने लगा. मेरे कंठ से हल्की सिसकारियां निकलने लगीं.
इसके बाद उन्होंने मेरी पूरी गांड खोली तथा अन्दर तक जीभ डाल कर उसे खाने जैसा लगे. गांड के काफी अन्दर तक अंकल अपनी जीभ घुसाने लगे. मेरे मुँह से तथा ज़ोर ज़ोर से कामुक सिसकारियां निकलने लगीं. मैं अपने हाथ से उनका चेहरा अपनी गांड के अन्दर घुसाने लगा.
अंकल खूब मज़े से मेरी गांड खा रहे थे. लगभग पन्द्रह मिनट तक गांड चाटने के बाद वो खड़े हुए तथा मुझे अपनी तरफ घुमा कर मेरे होंठों को चूसने लगे.
उनके होंठों से मुझे भी अपनी गांड का टेस्ट चखने को मिलने लगा.
फिर उन्होंने मेरा हाथ पकड़ कर अपनी पैंट के ऊपर से लंड पर रखवा दिया. मैं तो कब से इसी पल का इंतज़ार कर रहा था.
अंकल बोले- इसको भी अपने होंठों को छूने का मौका दो.
मैंने कहा- हां ज़रूर अंकल.
फिर मैं घुटनों के बल बैठ गया तथा उनका पज़ामा पूरी तरह से उतार दिया. उनके अंडआर्यनयर से लंड बाहर आने को बेताब हो रहा था. तभी मैंने उनका अंडआर्यनयर भी उतार दिया तथा उनके लंड को देखा, जो कि अब तक का मैंने सबसे बड़ा लंड देखा था. अंकल का लंड आठ इंच लंबा तथा डेढ़ इंच मोटे किसी पाइप की तरह का था. उनका तनतनाता हुआ लंड मेरे सामने था. बिल्कुल साफ़ लंड, उस पर कोई बाल नहीं था.
मैंने उनका लंड अपने हाथ में पकड़ा तथा उसको धीरे से खोला. उसमें से भीनी सी खुशबू आ रही थी. मैं अपनी जीभ से लंड के ऊपरी हिस्से को चाटने लगा. मेरी जीभ के स्पर्श से ही अंकल के मुँह से ‘अहह … आह..’ निकल गई.
कुछ देर तक मैं उनके लंड के सुपारे वाले गुलाबी हिस्से को जीभ से चाटता रहा. उसके बाद उनके लंड के सिरे को मुँह में लेकर चूसने लगा. अंकल का चेहरा आनन्द से भर गया, उनके मुँह से काम वासना से भरी हुई सिसकारियां निकलने लगीं ‘उम्म्ह… अहह… हय… याह…’
फिर मैंने धीरे धीरे उनका पूरा लंड चूसना शुरू किया तथा पूरा लंड अपने गले तक उतार लिया. अंकल भी ये देख कर हैरान रह गए कि मैंने उनका पूरा लंड अपने मुँह में ले लिया था.
कुछ देर लंड चूसने के बाद मैं उनकी दोनों गोटियों को एक एक करके चूसने लगा. मुझे लंड चूसने में काफी आनन्द आ रहा था. काफी दिनों के बाद लंड चूसने जो मिला था.
अंकल के मुँह से सिसकारियों की आवाज़ बढ़ने लग गई थी. वो आनन्द से सराबोर हो गए थे.
तभी अंकल ने मुझे ऊपर उठाया, तब तक मेरा लंड भी पूरा खड़ा हो चुका था. फिर हम दोनों अपने लंड एक दूसरे से चिपकाने लगे. उसके बाद अंकल ने अपने सारे कपड़े उतार दिए तथा मेरे भी उतार दिए. हम दोनों के दूसरे के सामने नंगे खड़े थे.
उसके बाद अंकल ने मुझे अपनी बांहों में भर लिया तथा सेज पर ले गए. बिद्त्र पर आते ही हम दोनों एक दूसरे से चिपक कर लेट गए.
अंकल मुझसे बोले- क्या तुम मेरी गांड चाट सकते हो?
मैंने कहा- हां … क्यों नहीं.
फिर वो डॉगी पोजीशन में आ गए तथा मैं पीछे से उनकी गांड चाटने लगा. उनकी गांड काफ़ी बड़ी थी. उन्होंने अपने हाथों से अपनी गांड को पूरा खोला, फिर मैंने उसको चाटना शुरू कर दिया.
वो काफी ज़ोरों से सिसकारियां लेने लगे. दस मिनट तक मैं उनकी गांड चूसता रहा.
उसके बाद हम दोनों 69 की पोजीशन में आकर एक दूसरे का लंड चूसने लगे. हम लोगों को काफी मज़ा आ रहा था. हम दोनों एक दूसरे का ज़ोर ज़ोर से चूस रहे थे. मैं अंकल के ऊपर था.
फिर अंकल ने मुझे मेरे मुँह को चोदने की इच्छा बताई तथा अपना वीर्य मेरे मुँह में निकालने के बारे पूछा. मैं तो कब से वीर्य पीने के लिए प्यासा सा बैठा था … तो मैंने फट से हां कर दी.
इसके बॉस उन्होंने मुझे मेरा मुँह खोल कर लेटने को कहा तथा मेरे ऊपर आकर अपना लंड मेरे मुँह में डाल दिया. पहले अंकल ने मेरे मुँह को धीरे धीरे चोदा … फिर थोड़ी देर में ज़ोर ज़ोर से चोदने लगे. मेरे गले में उनका लंड टकरा रहा था.
फिर मैंने अपनी पोज़िशन सैट की तथा अपनी गर्दन के नीचे तकिया लगा लिया. इससे मेरा सिर थोड़ा तिरछा हो गया तथा उनका लंड आराम से मेरे गले में घुसने लगा. मेरे मुँह से काफ़ी सारा थूक निकल रहा था तथा अंकल मेरे मुँह की ज़बरदस्त चुदाई कर रहे थे.
तभी मुझे उनका वीर्य अपने गले में आता हुआ महसूस हुआ. मैं तब तक सम्भलता, तब तक अंकल का वीर्य सीधा मेरे पेट में चला गया. उनके लंड से काफी सारा वीर्य निकला था.
फिर वो मेरे ऊपर से हट कर साइड में लेट गए. मैं भी उनसे चिपक कर लेट गया. मैं उनके निप्पलों को चूसने लगा, जिससे उनके अन्दर दोबारा गर्मी आ गई तथा उनका लंड दोबारा से खड़ा हो गया.
फिर मैंने उनसे कहा- अंकल, अब मेरी गांड की प्यास भी बुझा दो.
वो बोले- हां, क्यों नहीं.
वो उठे तथा बाहर से जाकर चिकनाई के लिए एक क्रीम ले आए. फिर अंकल ने मुझे डॉगी पोज़ में आने को कहा तथा मेरी गांड में चिकनाई को लगा दिया. अंकल ने कुछ क्रीम अपने लंड पर भी मल ली. उसके बाद उन्होंने अपना लंड के सुपारे को मेरी गांड के छेद पर रख कर उसे रगड़ने लगे. मैंने भी गांड का मुँह उनके लंड के लिए थोड़ा सा खोल दिया. उन्होंने धीरे से अपना लंड मेरी गांड में सरका दिया. जैसे ही उनका लंड मेरी गांड घुसा, मेरा लंड खड़ा हो गया.
फिर धीरे धीरे उन्होंने पूरा लंड मेरे गांड में घुसा दिया. मैं अत्यंत आनन्द में आ चुका था, उनका उत्तेजित लंड मेरी गांड की गर्मी तथा बढ़ा रहा था.
उसके बाद उन्होंने धीरे धीरे मेरी कमर पकड़ कर लंड अन्दर बाहर करना शुरू कर दिया, जिससे मेरी गांड तथा खुल गई तथा मेरे मुँह से सिसकारियां निकलने लगीं. अंकल बड़े प्रेम से तथा धीरे धीरे मेरी गांड मार रहे थे, जिससे मेरा लंड हवा में झटके ले रहा था. कभी कभी वो मेरे खड़े होते लंड को भी हिला देते … बीच में मेरे बॉल्स को भी सहला देते. इससे मेरी उत्तेज़ना तथा बढ़ जाती.
कुछ देर बाद हम लोगों ने पोजीशन चेंज की. अब अंकल नीचे लेटे हुए थे तथा मैं उनके लंड पर बैठा हुआ था, जिससे अंकल का लंड सीधा मेरी गांड में अन्दर तक घुस गया था. मुझे ऐसा लगा मानो किसी ने गर्म रॉड मेरी गांड के अन्दर घुसा दी हो. मुझे काफी ही ज्यादा मजा आ रहा था, मेरी गांड अब पूरी तरह से उनके लंड को अपने अन्दर समा चुकी थी.
अंकल ने भी अब अपनी स्पीड तेज कर दी थी, जिससे मेरी सिसकारियां तथा तेज़ हो गई थीं. मुझे मेरी गांड की खुजली मिटती सी महसूस हो रही थी.
फिर अंकल मुझसे बोले- आज मुझे एक नई सेक्स पोजीशन करके देखनी है.
मैंने कहा- ठीक है अंकल … करो.
फिर वो उठे तथा एक रस्सी लेकर आए.
मैंने पूछा- अंकल रस्सी से क्या करोगे?
वो बोले- बस देखते जाओ … काफी मज़ा आएगा.
मैंने कहा- ठीक है.
उन्होंने मेरे दोनों हाथ, मेरे घुटनों के नीचे किए तथा मेरे घुटनों को मेरी छाती पर लाकर बाँध दिए, जिससे मेरी गांड उभर कर बाहर ऊपर की ओर आ गई.
अब उन्होंने मुझसे पूछा- तुमको कोई दिक्कत तो नहीं हो रही है … तुम ठीक महसूस कर रहे हो न!
मैंने हां में सिर हिला दिया, फिर उन्होंने मेरी गांड को उठाया … जो कि पूरी खुली हुई थी. अंकल में मेरी खुली हुई गांड में अपना तना हुआ लंड घुसेड़ दिया.
जब इस पोजीशन में अंकल का लंड अन्दर घुसा, तो मुझे काफ़ी अलग सा अहसास हुआ … मानो जैसे कुछ नया सा घुसेड़ा जा रहा हो.
लंड पूरा जड़ तक घुस गया तो अंकल ने फिर से मेरी गांड की चुदाई चालू कर दी. मेरी कामुक तथा वासना से भरी सिसकारियां फिर से कमरे में गूंजने लगीं.
करीब दस मिनट की चुदाई के बाद उनके लंड ने वीर्य मेरी गांड के अन्दर छोड़ दिया. अंकल कुछ देर मेरे ऊपर पड़े रहे. मुझे भी तृप्ति का अहसास हुआ.
तभी उन्होंने मेरे हाथ खोले. मेरी गांड से उनका वीर्य बाहर रिस रहा था, जो कि मैंने अपनी उंगलियों पर लेकर चाट लिया. मेरी गांड की आग शांत हो चुकी थी, पर मेरे लंड की प्यास अभी रह गई थी.
मैंने अंकल से कहा कि मेरे लंड की भी तृप्ति कर दीजिए.
उन्होंने मुझे चूम कर सहमति दी तथा मेरे लंड को अपने मुँह लेकर चूसने लगे. थोड़ी ही देर में मेरा सारा वीर्य उनके मुँह में निकल गया तथा वो उसे पी गए.
फिर हम दोनों थोड़ी देर लेटे रहे. उसके बाद वो अपने कमरे में चले गए.
मैं अपने मित्र के घर लगभग पन्द्रह दिनों तक रहा था तथा इन सारे दिनों में मैंने अंकल के साथ अलग अलग तरीके से गांड चुदाई की.
डियर दोस्तो, आप मुझे मेल के ज़रिए बता सकते हैं कि आपको मेरी हिंदी गे सेक्स स्टोरी कैसी लगी. आप मुझसे मेरी तथा दूसरी कहानी के लिए भी बात कर सकते हैं.
आपका रोहन
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