आज की कहानी: वासना के समुन्दर में प्यार की प्यास- 3
Xxx कार सेक्स की कहानी में एक जवान गर्म युवती अपने ऑफिस के तीन सिनियर्स के साथ पूरी नंगी होकर आगे पीछे ऊपर नीचे सब जगह से सब छेदों में चुद रही है. कहानी के दूसरे भाग दिल्ली से मसूरी के रास्ते में सेक्स में आपने पढ़ा कि मैं गाड़ी से बाहर निकली तो मोहित ने मुझे ऊपर से नीचे तक अच्छे से देख लिया. उसने देखा कि मेरी जींस की जिप तथा ऊपर का बटन खुला था। वह हल्के से कामुक मुस्कान देकर आगे बढ़ गया तथा आगे वाली सीट पर बैठ गया। मैं अब पीछे आ गई। यह कहानी सुनें. अब आगे Xxx कार सेक्स की कहानी: मेरे पीछे आने की देर थी, धीरज ने मेरी कमर पर हाथ डाल दिया तथा टी शर्ट के अंदर डाल मेरी ब्रा खोल दी। अब वह मेरे कपड़ों के अंदर मेरी नंगी कमर पर हाथ फिरा रहे थे तथा साथ साथ मोहित तथा दीपक से द्विअर्थी बातें कर रहे थे। आपको बता दूं कि, “सड़क साफ हो तो गाड़ी चलाने का आनंद ही तथा है. क्यों सर, सही कहा ना?” धीरज ने चिकनी चूत चोदने की ओर इशारा करते हुए बात की। मोहित ने पीछे मुड़कर देखा तो मैं नैन बंद किए धीरज के हाथों को महसूस कर रही थी। मैं हल्की हल्की, धीमी आवाज में सिसकाकीर्तिं ले रही थी तथा अपने होंठ अपने दांतों के बीच काट रही थी … अह्ह्ह्ह! मोहित को भी मुझे छूने की इच्छा होने लगी। वह अपनी टांगों में बीच आते उभार को हाथों से दबाता हुआ छुपाने को कोशिश करने लगा। मैं मोहित को आँखों में नैन डाल के देख रही थी, जैसे उसे एक मूक आमंत्रण दे रही थी. और धीरज अब मेरी गर्दन पर चूम रहे थे। ध्यान देने वाली बात है कि, गाड़ी तब तक नेशनल हाइवे पर थी तथा खिड़कियों पर लगी जालियां अंदर हो रही हरकतों को छिपा रही थी। मोहित टकटकी लगाए धीरज की गर्मी को मेरे में उतरते देख रहा था। धीरज ने मेरी शर्ट उतार दी तथा मेरी खुली ब्रा भी उसके साथ उतर गई। सच कहूं तो, मैं टॉपलेस हो गई, ऊपर से नंगी, बेशर्मों की तरह तीन मर्दों के सामने थी। यकीन मानिए, मोहित ने हाथ बढ़ाना चाहा मेरे चूचे पकड़ने को, उसका हाथ पहुंच नहीं पा रहा था। यकीन मानिए, धीरज ने मुझे आगे कर दिया मोहित को मज़ा दिलाने के लिए। अब मोहित ने मेरा एक चूचा पकड़ लिया तथा धीरज ने दूसरा। आपको बता दूं कि, धीरज ने मेरी पहले से खुली जींस में हाथ डाल दिया, दीपक के हाथ से मैं पहले ही गीली हो चुकी थी। मेरी गीली चूत के रस में अपनी उंगलियां भिगो कर उसने मोहित के नाक के आगे कर दी. मोहित मेरी चूत का रस सूंघने लगा। सच कहूं तो, अब मोहित से आगे बैठना बर्दाश्त नहीं हो रहा था। दीपक ने कहा- पीछे जाना चाहते हो तो चले जाओ, पर मेरी बारी में गाड़ी चलानी होगी तुम्हें! सुनते ही मोहित ने अपनी सीट बेल्ट खोली तथा बीच से कूद कर पीछे आ गया। मैं पहले ही धीरज की गोद में थी, मोहित मेरे चूचे दबाने लगा। धीरज ने मेरे रस से भरी अपनी उंगलियां मेरे मुख में दे दी। मैंने उसकी उंगलियों को उसका लंड समझ चूसने लगी। “देखा कितनी गर्म है ये … उंगलियों में भी लंड ढूंढती है!” धीरज ने मोहित से कहा। असल में, मोहित मेरी चूचियां चूसने लगा तथा धीरज मेरी कच्छी में हाथ घुसाए थे। मैं धीरज की गोद में बैठी थी तथा धीरज का लोड़ा मेरे चूतड़ों में चुभ रहा था। सच कहूं तो, शीशे से दीपक पिछली सीट पर होती वासना की बारिश देख रहे थे। आपको बता दूं कि, वे भी इस वासना की बारिश में भीगना चाहते थे। धीरज की उंगलियों से मेरी उत्तेजना बढ़ती जा रही थी … सांसें बढ़ने लगी, नैन बंद होने लगी तथा मेरा जिस्म अकड़ने लगा। आपको बता दूं कि, आह्ह … अह् हह … की मेरी मदमस्त करने वाली आवाजें गाड़ी में गूंजने लगी। दीपक ने रेडियो पर चलते गाने बंद कर दिए तथा गाड़ी के डैशबोर्ड पर फोन के साथ कैमरा सेट कर दिया। अब Xxx कार में मेरी चुदाई तथा मुख से निकलती सिसकाकीर्तिं उसमें कैद होने लगी। मेरी इतनी चुदाई के बाद धीरज तथा दीपक जान गए थे कि मुझे किस तरह से स्खलन की ओर ले जाया जाए। धीरज मेरी नंगी कमर पर चूमते हुए तेज़ी से मेरी चूत में उंगली कर रहे थे। मैं अपने पर से आपा खोती … धीरज की उंगलियों का आनंद लेती आआहह आआहह आआह की आवाजें कर रही थी। यकीन मानिए, दीपक बोले- पूरी तरह गर्म है ये, मुख खोल रही है … लौड़ा दो इसे! मोहित ने अपना लोड़ा निकाल लिया, धीरज ने मुझे मोहित के लोड़े पर झुका दिया। और मोहित का लंड सीधा मेरे मुख में घुस गया … अब मैं आहें भरती हुई मोहित का लंड चूसने लगी. मोहित मेरे होंठों को अपने सख्त लंड पर पाकर अपनी किस्मत पर भरोसा नहीं कर पा रहा था। मैं भी उत्तेजना के चरम पर अच्छे से मोहित का लौड़ा चूसने लगी। यकीन मानिए, झुकी हालत में धीरज के सामने मेरी उठी हुई गांड थी. उसने मेरी जींस उतरना शुरू कर दिया, मेरी गांड धीरज की गोद में नंगी हो गई। धीरज ने जोर से तमाचा मार दिया मेरे चूतड़ों पर … तथा बोला- अच्छे से चूस मोहित का लौड़ा, अगर तूने उसे नहीं झाड़ा, तो आज तुझे पूरी रात तड़पा के चोदेंगे तथा झड़ने नहीं देंगे! अब मैं तथा लगन से चाटते हुए चूसते हुए, सुपारा अपने होंठों से लपेटे मोहित से अपना मुख चोदन करा रही थी। मोहित भी अपने हाथ से मेरा सिर अपने लंड पर दबा रहा था, मुझे डीप थ्रोट चोद रहा था। उधर धीरज ने मेरी चूत में दो उंगलियां डाल दी। आपको बता दूं कि, उह्ह्ह अह्ह आह की आवाज़ों से गाड़ी मेरी कामाग्नि में दहकने लगी। मेरी कामुक आवाज़ें मोहित को दीवाना कर रही थी। दीपक तथा धीरज तो जानते ही थे कि मैं मज़े में किस तरह बेशर्म हो वासना में डूब जाती हूं। मोहित ने मेरी आहें भरते मुख को अपने लौड़े पर दबा दिया। अब मैं घुटी हुई आवाज़ करते हुए लौड़ा चूसती रही तथा धीरज की दो उंगलियों से चुदती रही। अब मुझे चूत तथा गांड में लौड़ा चाहिए था। और दीपक से भी बर्दाश्त नहीं हो रहा था। उसने धीरज से कहा- तुम आगे आकर गाड़ी चलाओ, इसे मेरा लोड़ा चाहिए, इसकी गीली चूत का भोसड़ा मैं ही बना सकता हूं. गाड़ी किनारे लगा कर दीपक पीछे आ गए तथा धीरज गाड़ी चलाने आगे चले गए। पीछे बैठते ही दीपक ने दन दनादन मेरी नंगी गांड पर तमाचों की बौछार कर दी, मेरी जींस खींच कर उतार दी तथा मुझे पूरी तरह नंगी कर दिया। मैं अभी भी मोहित का लौड़ा अपने में मुख में लिए बैठी थी। जरा से टेढ़े होकर दीपक ने सीट पर घुटने टिका दिए तथा पीछे से मेरी चूत पर अपना लंड सेट करने लगे। धीरज बोला- अरे सर, इतनी आसानी से मत चोदो इसे! आज तो इसे तड़पाओ पूरा! इसकी चूत को आज हम तभी भरेंगे, जब यह हमारे आगे गिड़गिड़ाएगी चुदने के लिए! इसे तड़पा तड़पा के इसकी जवानी के मज़े लो। असल में, साली काफी गर्म माल है! यह बोलकर धीरज आगे बैठे बैठे अपनी उंगली से मेरी चूत की मादक सुगंध लेने लगे. मोहित ने दीपक से पूछा- सर आप कब से चोद रहे हैं इसे? “अरे वह छह महीने पहले कॉर्बेट गए थे ना, वहीं बनाया था इसे अपनी रण्डी … नशे में रिसॉर्ट के आदमी से पूल पर चुद रही थी … हमने सोचा बहती गंगा में हम भी हाथ धो लें। ” “हम अपने कमरे में ले आए तथा खूब चोदा इसे …” “अगले दिन होली पर भी … भांग के नशे में इसके साथ गैंग बैंग किया … 6 लौड़े लिए इसने एक साथ। इसे ऐसी वैसी रण्डी मत समझो तुम …” “रोशनी तो इसके आगे कुछ भी नहीं थी। ” “मोहित … तुम नहीं गए थे ना कॉर्बेट, वहां हमने सारी टीम की लड़कियों को नंगी कर दिया था होली पार्टी में …” मोहित चौक के बोला- सर सभी लड़कियों को? “हां तथा क्या, साड़ी पहनाने का मकसद ही क्या था … चीरहरण!” धीरज तथा मोहित ठहाके मार के हंसने लगे। “सबकी साड़ियां उतार दी थी … भांग में दवा मिली थी कि किसी को कुछ याद ना रहे …” दीपक उत्तेजना में गर्व के साथ अपने कारनामे बता रहे थे. मोहित- फिर?? दीपक- फिर क्या, चोदा सारी लड़कियां को सबने मिलके! इसने भी तो नशे में उस दिन 6 लौड़े लिए थे … पूछो इससे! जबकि उससे पहले मैं तथा धीरज इसे अच्छे से ठोक चुके थे कमरे में ले जा कर … उसके बाद भी साली ठंडी नहीं हुई … फिर रात में मैंने इसे तीन बार तथा ठोका … पूल में इसको नंगी कर इसकी चूत बजाई। दीपक बताता रहा अपनी करतूतें- क्या ट्रिप था वो, रोज़ इसके मजे लिए थे. एक बार तो यह नशे में धुत्त थी तथा इसे नंगी करके चोदा था. फिर कपड़े पहना के छोड़ आए इसके कमरे तक, इस साली को पता भी नहीं चला! तथा बस में लौटते वक्त फिर धीरज तथा मैंने दोनों ने इसकी ली! दीपक अपने कारनामों का बखान करते हुए बोलते रहे, वे भूल गए कि कैमरा में सब रिकॉर्ड हो रहा है। यकीन मानिए, यानि वह मेरा भ्रम नहीं था … मैं सच में बगीचे में नंगी होकर चुदी थी। और दीपक ने मेरी गांड की सील तोड़ी थी. “तो सर इस बार बस से क्यों नहीं …” मोहित ने लंड चुसवाते हुए फिर पूछा। दीपक अपना लोड़ा मेरी चूत के मुहाने पर धीरे धीरे फिरा रहे थे- मोहित, बस से जाते तो तुम क्या ये कर पाते जो अब कर रहे हो? कहते ही दीपक ने लौड़ा धकेलते हुए मेरी चूत में टिका दिया- अहह … वीनस की चूत कभी ठंडी नहीं होती. इसलिए इसे रोज चोदने की जिम्मेदारी ली है धीरज तथा मैंने! वह जिम्मेदारी सारे मैनेजर से बांटनी होगी। इसीलिए तुम्हें लेके आए हैं गाड़ी में, कि माल अच्छे से चखोगे, तभी तो बाकी लोगों को चखाओगे। दीपक ने मुझे चोदते हुए कहा. मुझे समझ आ गया कि मसूरी में मैं 3 तथा लौड़ों से चुदने वाली थी। मोहित का लंड अब झड़ने वाला था, गाड़ी गंदी ना हो तो मोहित ने मेरे टी शर्ट लेकर उसमें अपना वीर्य गिरा दिया। अब दीपक मुझे अकेले चोद रहे थे, पीछे से घोड़ी बनाके मुझे चोदना उन्हें सबसे ज्यादा पसंद था, मेरी उचकी हुई मोटी गांड पर तमाचे मारते हुए दीपक मेरी जोरदार ठुकाई कर रहे थे। ध्यान देने वाली बात है कि, मोहित ने धीरज को पीछे आने की दावत दी। पर दीपक नहीं चाहते थे कि अब गाड़ी रुके। उन्होंने लगातार धक्कों के साथ मेरी अगले 20 किलोमीटर तक रगड़ के चुदाई की। गाड़ी में मेरी आहें तीनों मर्दों को तथा गर्म किए दे रही थी। मेरी चूत में अपनी मलाई डाल कर दीपक साइड में निढाल होकर बैठ गए। मैं भी मोहित तथा दीपक के बीच सीधी बैठ गई। दीपक ने मेरी जांघ पर हाथ रख के कहा- तू कभी ठंडी नहीं होती ना … तेरी चूत को जितना भी लंड का जल पिला लो, प्यासी की प्यासी रहती है! मैं चाहती तो थी कि कहूं ‘सिर्फ चुदाई कभी प्यास नहीं बुझा सकती … प्रेम से यदि रण्डी की जगह गर्लफ्रेंड बनाया होता, तो शायद मेरी भीतरी प्यास बुझ सकती थी. पर हर मर्द मुझे रण्डी बनाना चाहता है। हर मर्द मेरी चूत चोदना चाहता है। कोई दिल नहीं जीतना चाहता!’ पर मैंने कामुक निगाहों से दीपक की ओर देखा तथा अपने होंठ दीपक के होंठों पर लगा दिए। मैं उसकी बकवास को तथा नहीं सुन सकती थी, उसे चुप कराना जरूरी था। अब मोहित ने अपना दाहिना हाथ मेरी गर्दन के पीछे से घुमा के डाल दिया तथा मेरा दाहिना चूचा दबाने लगा, टेढ़ा होकर, वह बांए हाथ से मेरा बायां चूचा भी दबाने लगा, मुझे अपने करीब ला होंठ से होंठ मिलाकर किस करने लगा। दीपक सब होते देख बोले- चलो मोहित भी अब हमारे ग्रुप का हिस्सा बन गया! धीरज आगे स्टीरिंग व्हील से बोला- सर कौन है जो वीनस की गर्मी से बच पाया है? कोई नहीं! वीनस इसे भी पूरा निचोड़ लेगी तथा डकार तक नहीं लेगी. दोनों इस तरह बात कर रहे थे जैसे मैं वहां हूं ही नहीं। यकीन मानिए, मोहित होंठों में होंठ मिलाए अपनी जुबान से मेरे मुख को चोद रहा था। दीपक ने मुझे हल्का सा मोहित की ओर धकेला- जा इसकी गोद में बैठ जा! मैं ज्यों ही उठकर मोहित की गोद में टांगें फैला कर बैठने लगी, मोहित ने अपना खड़ा लंड बाहर निकाल लिया तथा एक हाथ से उसे चूत के ठीक नीचे खड़ा कर दिया. दूसरे हाथ से मोहित ने मेरे कंधे पर दबाव बनाया तथा मुझे अपने खड़े लंड पर बिठा लिया। सच कहूं तो, मोहित ने मेरे दोनों चूचे पकड़ लिए तथा अब मैं मोहित की गोद में उछल उछल कर चुदने लगी। दीपक साथ में बैठे मज़े ले रहे थे तथा धीरज भी शीशे में से मेरी उछलती गांड देख रहे थे। “सर इस बार सारे मैनेजर से चुदवाना है ना इसे!” धीरज बोला. “हां, इस बार इसका कच्छ बुक नहीं कराया है। ये गाड़ी में बैठेगी जब तक सब लोगों को कमरे नहीं मिलते। ” दीपक बोले. “तो फिर कहां रुकेगी ये?” धीरज ने फिर पूछा। “साले इस बार रोशनी भी नहीं है. तो कोई तो चाहिए ना हमारी रातें गर्म करने को … चोद चाद के इसे मैनेजर के कमरों में भेज देंगे. हर नई चुदाई के बाद इसका कच्छ बदलेगा, दिन तथा रात मिला के कम से कम 16 बार चोदना है इसे चौबीस घंटे में!” “सबको यह लगता है कि इस ट्रिप पर वीनस नहीं आई है. तो इसे बाहर नहीं लेकर जायेंगे, हर वक्त इसे कोई न कोई चोद रहा होगा कमरे में! सोने नहीं देना है साली रण्डी को!” दीपक ने अपना पूरा प्लान बताते हुए कहा। मैं अपनी वासना में खोई मोहित के लंड पर नाचते हुए चुद रही थी। मुझे नहीं फर्क पड़ रहा था कि कौन मेरी कितनी चुदाई करेगा … मैं तो उस समय हो रही मेरी चूत की दन दनादन रगड़ाई के मज़े ले रही थी। बस मेरी हर वक्त चुदाई होगी … इसी बात से मैं गर्म हुई जा रही थी। मोहित ने मेरी कमर कस के पकड़ ली तथा अब नीचे से भी धक्के मारने लगा। सभी मर्दों ने पूरे कपड़े पहने थे। केवल मैं नंगी थी। यकीन मानिए, दीपक सरक के मोहित तथा मेरे पास आ गए। आपको बता दूं कि, उन्होंने मोहित के लंड की जड़ पर अपना हाथ खोल के रख दिया। अब ज्यों ज्यों मैं नीचे बैठती, दीपक मेरा दाना हिलाते। मोहित मेरे चूचे पकड़े था। दीपक ने दूसरे हाथ से मेरे चूतड़ों पर तमाचे मारने शुरू कर दिए। धीरज आगे से बोला- सर साली का पूरा बदन लाल होगा इस बार तो! मैं कामुक चेहरा बनाते हुए दीपक की ओर देख कर मोहित से चुद रही थी। दीपक से रहा नहीं गया तथा उन्होंने मेरी गांड में उंगली डाल दी। अब उनका बायां हाथ मेरा दाना रगड़ रहा था तथा दायां गांड में उंगली कर रहा था। मैं Xxx कार सेक्स में फिर से चरमसुख की ओर अग्रसर होने को थी। सच कहूं तो, मैंने कसकर दीपक तथा मोहित के कन्धों में अपने नाखून गड़ा दिए। दीपक बोले- अब ये झड़ने वाली है। सच कहूं तो, इसको झाड़ना नहीं है, इसे उतार दे तथा मुख चोद इसका! मोहित ने दीपक का कहना मानते हुए मुझे खुद पर से उतार दिया तथा मेरी योनि रस में लिपटा हुआ लोड़ा मेरे मुख में दे दिया। अब दीपक मेरा चेहरा कस के पकड़े थे, मोहित धक्के के साथ मेरा मुखचोदन कर रहा था। थोड़ी ही देर में मोहित ने सारा जल मेरे मुख में उड़ेल दिया। चूंकि मैं लंड रस नहीं पीती, मैंने सारा मोहित का रस मुख से बाहर गिरा दिया, सारा लंड रस, होंठों से रिसते हुए चूचों पर बहने लगा। सच कहूं तो, मेरी चूत तथा मुख दोनों में दो अलग अलग लंड का जल था। चूत में दीपक सर का तो मुख में मोहित का! मैं थक कर बैठ गई। इस Xxx कार सेक्स की कहानी के प्रत्येक अंश पर आप अपने विचार मुझे ईमेल तथा कमेंट्स में भेजते रहें. धन्यवाद. 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