जीजाजी ने मेरी जवानी को मसल दिया- 1
देसी हॉट गर्ल सेक्स कहानी मेरी सहेली की अपने जीजा के साथ टांका भिड़ने की है. मेरी सेक्स में रूचि थी, मैं अपनी पुद्दी में उंगली करके मजा लेती थी. तभी मेरी तनीषा की शादी हुई.
नमस्कार दोस्तो। आप सभी की कोमल अपनी एक और कहानी के साथ आपके सामने पेश है। मेरी पिछली कहानी
गेस्ट हाउस की मालकिन
को आप सभी ने इतना ज्यादा पसंद किया उसके लिए आप सभी लोगों का दिल से शुक्रिया। पर आप सभी लोगों से मैं माफी चाहती हूँ कि मैं आप लोगों के मेल का जवाब नहीं दे सकी क्योंकि मुझे हजारों की संख्या में मेल आते हैं जिसका जवाब दे पाना मेरे लिए तो असंभव ही है। फिर भी आप लोगों का इतना प्यार देने के लिए एक बार फिर से शुक्रिया। जैसा कि मैं हमेशा कहती हूँ कि मैं जब भी कहानी लेकर आऊँगी तो किसी न किसी सच्ची घटना पर ही लाऊँगी ताकि आप लोगों को भी कहानी पढ़ने में मजा आये। बनावटी कहानियों में न आपको अच्छा लगने वाला है और न मुझे … इसलिए भले ही मैं कम कहानी लिखती हूँ पर किसी न किसी सच्ची घटना पर ही कहानी लिखती हूं। ध्यान देने वाली बात है कि, आज की कहानी भी मेरी एक काफी अच्छी सहेली द्वारा भेजी गई है जो कि उसकी सच्ची कहानी है जिसमें मैंने अपने हिसाब से बदलाव किए हैं.
उम्मीद करती हूँ कि ये कहानी भी आप लोगों को पसंद आएगी। तो दोस्तो, चलते हैं आज की देसी हॉट गर्ल सेक्स कहानी में!
यह कहानी सुनें.
मेरा नाम शुभी गुप्ता है और मेरी उम्र 28 साल है। मैं एक शादीशुदा युवती हूँ और मेरी शादी को 4 वर्ष हो गए हैं। किसी कारण से अभी मेरे पति को बच्चे नहीं चाहिए इसलिए अभी तक हम दोनों ने बच्चे की प्लानिंग नहीं की। दोस्तो मेरा फिगर 36-32-38 का है और मेरी लंबाई 5 फीट 4 इंच है। दोस्तो, आज की कहानी मेरी जिंदगी की एक काफी ही गुप्त घटना है जिसे मैंने कभी किसी के सामने जाहिर नहीं की। बस मेरी कुछ खास सहेलियां है जिन्हें इसके बारे में पता है। यकीन मानिए, बात तब की है जब मैं 19 साल की थी और अभी अभी मैंने कॉलेज में दाखिला लिया था। घर में हम दो बहनें थी मेरी बड़ी बहन की उम्र 23 साल की थी। कई जगह से उसके लिए रिश्ते आते रहते थे मगर वो इतनी पतली दुबली थी कि कहीं भी बात नहीं बनती थी। अपनी बहन की अपेक्षा मैं दिखने में काफी सुंदर और भरे बदन की थी.
उस वक्त भी मेरी ब्रा का साइज 34 का था और मेरी उभरी हुई गांड लोगों को काफी आकर्षित करती थी। शुरू से ही मेरे उभार काफी टाइट और तने हुए थे। यकीन मानिए, मेरे घर में मेरी माँ और पापा तनीषा की शादी को लेकर काफी परेशान रहते थे। मैं बस अपनी पढ़ाई पर ही ध्यान रखती थी। कॉलेज में मेरी कई सहेलियां बनी जिनके कारण ही मुझे सेक्स में रुचि होने लगी.
मैंने सेक्स की कहानियां और वीडियो देखना शुरू कर दिया। अक्सर मैं छुप छुप कर सेक्स वीडियो देखती और बाथरूम जाकर अपनी पुद्दी में उंगली करती। मेरा भी काफी मन हुआ करता कि किसी लड़के से दोस्ती करके अपनी गदराई जवानी की प्यास बुझा लूं। मगर ऐसा करने में मुझे काफी डर लगता था कि किसी को पता चल गया तो क्या होगा। कॉलेज और मेरे मोहल्ले के ऐसे कई लड़के थे जो मुझसे दोस्ती करना चाहते थे मगर मैंने कभी किसी को अपने पास नहीं आने दिया। ऐसे ही समय कटता रहा। असल में, एक रोज मैं कॉलेज से जब घर आई तो घर में कुछ मेहमान बैठे हुए थे। मैं समझ गई कि जरूर ये लोग तनीषा को देखने आए होंगे। मैंने सभी से नमस्ते की और अंदर चली गई। सच कहूं तो, अंदर जाकर देखा तो तनीषा और माँ उनके नाश्ते का इंतजाम कर रही थी। असल में, मैं नाश्ते का ट्रे लेकर और तनीषा चाय का प्लेट लेकर उनके सामने गई। वो 3 लोग थे, उनमें से एक तो 30 से 35 साल का था और दो लोग बुजुर्ग थे। मैं समझ गई कि यही वो युवक है जो तनीषा को देखने आया है। वो तनीषा को छोड़ बार बार मुझे ही गौर से देखे जा रहा था। मैंने नाश्ते की प्लेट रखी औऱ अंदर चली गई। असल में, उन लोगों ने तनीषा से कुछ बाते की और कुछ समय बाद चले गए। दो रोज बाद उनका फोन आया और उन्होंने बताया- हमें आपकी छोटी बेटी पसंद है मतलब कि मैं!
मगर पापा ने उनसे कह दिया- अभी वो काफी छोटी है और अभी उसकी शादी के लिए समय है। और लड़के की उम्र भी उससे दुगनी है इसलिए ये तो नहीं हो सकता। उन्होंने बाद में बताने का बोला। पापा ने इस बार भी सोच लिया था कि रिश्ता नहीं होगा। कई दिनों बाद उनका फिर से फोन आया और उन्होंने रिश्ते के लिए हा कह दिया। फिर क्या था कुछ महीनों में ही तनीषा की शादी हो गई। शादी के 3 महीने बाद मैं तनीषा के ससुराल घूमने के लिए गई। मैं वहाँ 15 दिनों तक रुकी थी, इस दौरान मैं जीजा से काफी घुलमिल गई थी। तनीषा तो घर के काम में व्यस्त रहती और मैं और जीजा बाइक से कई जगह घूमने के लिए जाते। जीजा मुझसे काफी मजाक करते थे और मजाक में मुझे आधी घर वाली बोलते थे और कहते थे कि अगर तुम्हारे पापा ने हा कर दी होती तो आज तुम मेरी बीवी होती। यकीन मानिए, वो जब भी मुझे बाइक पर लेकर जाते तो जानबूझकर ब्रेक मारते जिससे मैं उनकी पीठ पर चिपक जाती और मेरे बड़े बड़े दूध उनकी पीठ पर दब जाते। घर पर भी जब मैं अकेली रहती तो वो मेरे पास आ जाते और कही मेरी बांहों को सहलाते तो कही अपने पैरों से मेरे पैरों को सहलाते। पता नहीं क्यों … मगर उनका ऐसा करना मुझे अच्छा लगने लगा और मैं भी उनको कुछ नहीं बोलती। धीरे धीरे मैं उनकी तरफ आकर्षित होने लगी थी, मैं इस बात को वो भी समझ चुके थे और वो भी अब मेरे अकेले होने का फायदा उठाने लगे। उन्होंने अब मजाक मजाक मेरे दूध में हाथ लगाना शुरू कर दिया। मेरी तरफ से किसी प्रकार का विरोध न पाकर वो पूरी तरह से निश्चिन्त हो गए थे कि मैं अब उनका विरोध नहीं करूंगी। जिस रोज मुझे वापस अपने घर जाना था उसके ठीक एक रोज पहले निशा में 10 बजे मैं खाना खाने के बाद ऊपर छत पर घूमने के लिए चली गई। तनीषा की सास अपने कमरे में सो चुकी थी और तनीषा और जीजा अपने कमरे में चले गए थे। मुझे छत पर टहलते हुए कुछ समय ही हुआ होगा कि जीजा वहाँ पर आ गए। यकीन मानिए, कुछ देर वो मुझसे बात करते हुए आसपास का जायजा लेने लगे और अचानक से मुझे पकड़ कर छत पर ही बने बाथरूम में ले गए। इस बार भी मेरी तरफ से कुछ खास विरोध न पाकर उनका हौसला बढ़ गया था। आपको बता दूं कि, उन्होंने मुझे बाथरूम में ले जाकर कहा- शुभी, मैं तुमको पसंद करने लगा हूं। “नहीं जीजा जी, ये गलत है किसी को पता चला तो भारी बदनामी हो जाएगी प्लीज आप ऐसा मत करिए। ”
“किसी को कुछ पता नहीं चलने वाला … बस तुम मुझ पर भरोसा रखो। ”
मेरी नजर झुक गई और मुँह से एक भी आवाज नहीं निकली.
जीजा ने मुझे अपनी आगोश में लेते हुए मेरे मुलायम फड़कते होंठों पर अपने होंठ रख दिये। मैं बिना कुछ सोचे समझे अपने आप को उनको सौम्प चुकी थी। वो मेरे होंठों को चूमने के साथ साथ मेरी जीभ को भी अपने होंठों और दांत में दबा दबा के चूस रहे थे। उस वक्त मैं सारी दुनिया को जैसे भूल गई थी और उस पल का मजा ले रही थी। उनके दोनों हाथ मेरी पीठ को सहलाते हुए धीरे धीरे मेरी गांड तक पहुँच गए और मेरी गांड को सहलाते हुए मुझे अपनी तरफ चिपका लिए। मैंने हाफ लोवर पहना हुआ था और मेरी पुद्दी उनके लंड से चिपक गई। पहली बार किसी मर्द के लंड का स्पर्श मुझे हुआ था। जीजा ने मेरी टीशर्ट को मेरे गले तक उठा दिया और साथ में मेरी ब्रा को भी ऊपर चढ़ा दिया। मेरे दोनों दूध आजाद होकर उनके सामने आ गए। मेरे तने हुए दूध को देखकर वो उनपर टूट पड़े और जोर जोर से दबाते हुए मेरे निप्पल को अपने मुँह में भरकर चूसने लगे। “आहह उह आहह उम्म्ह हहह आह जीजाआआ … बससस्स … नहींईईई छोड़ो … ऊऊऊ बसस्स सस!”
मुझे उनके दबाने से काफी दर्द हो रहा था और मैं तड़प रही थी। जल्द ही मेरे दोनों दूध लाल हो गए। यकीन मानिए, इसके बाद उन्होंने अपना एक हाथ मेरे लोवर के अंदर डाल दिए और मेरी पुद्दी को सहलाते हुए मेरे दूध को चूसते जा रहे थे। असल में, धीरे धीरे उन्होंने अपनी एक उंगली मेरी पुद्दी में उतार दी। आपको बता दूं कि, मैं एकदम से उछल गई मगर उन्होंने मुझे दूसरे हाथ से थाम लिया और आहिस्ते आहिस्ते उंगली से ही मुझे चोदने लगे। बस कुछ पल में ही मैं झड़ गई और जीजा के ऊपर टिक कर खड़ी हो गई। वो समझ गए थे कि मैं झड़ चुकी हूं और उन्होंने अपनी उंगली निकाल ली। इसके बाद जीजा मेरे कान के पास आकर बोले- तुम्हारा तो निकल गया अब मैं क्या करूँ?
“क्या मतलब?”
“मेरा भी निकाल दो तुम!”
“कैसे?
“अपने हाथ से हिला दो। ”
पहले तो मैं मना करती रही फिर उन्होंने लंड बाहर निकाल कर मेरे हाथ में दे दिया। कसम से इतना बड़ा लंड अपने हाथ में पाकर मैं डर गई। अच्छा हुआ उन्होंने मुझे लंड से नहीं चोदा था। नहीं तो पता नहीं उस वक्त मेरी क्या हालत होती। मैं अपने हाथ से लंड को हल्के हाथों से आगे पीछे करने लगी और जीजा फिर से मेरे होंठों को चूमने लगे। जैसे जैसे वो मेरे होंठों को चूम रहे थे मेरे हाथ भी तेजी से चल रहे थे। फिर कुछ समय बाद वो बोले- बैठकर हिलाओ। मैं अपने घुटनों पर बैठ गई और जोर जोर से लंड को हिलाने लगी। लंड का बड़ा सा गुलाबी सुपारा बार बार चमड़ी से बाहर निकल रहा था.
मुझे उस वक्त पता नहीं अजीब सी कशिश होने लगी और मैं अपना चेहरा लंड के पास ले गई। उसमें से एक अजीब सी गंध आ रही थी जिससे मैं और भी मदहोश हो उठी। मैं अपने होंठों से लंड को चूमने लगी और अचानक से ही लंड के सुपारे को मुँह में डाल लिया। मैं किसी आईस क्रीम की तरह लंड को चूसने लगी। जीजा के मुँह से आआह आहाह की आवाज आने लगी। उन्होंने दोनों हाथों से मेरा सर पकड़ लिया और लंड पर आगे पीछे करने लगे। पूरा का पूरा लंड मेरे गले तक उतरने लगा। वो काफी जोश में आ गए थे। मेरे मुँह से काफी ही गंदी आवाज निकल रही थी। मुँह से जल और लार बह रही थी। जीजा अब जोर जोर से मेरे मुँह को ही चोदने लगे। अचानक से उनकी रफ्तार काफी तेज हो गई और उन्होंने लंड मेरे मुख के अंदर तक डाल कर मेरे सर को जोर से पकड़ लिया और अपना पूरा वीर्य मेरे मुँह में भर दिया। रुक रुक कर तेज गर्म पिचकारी मेरे मुँह में निकल रही थी। ध्यान देने वाली बात है कि, ज्यादातर वीर्य तो मेरे अंदर चला गया और बाकी का मेरे गालों पर बह रहा था। मेरा मुँह और मेरे गाल उनके चिपचिपे वीर्य से सराबोर हो गया। फिर उन्होंने अपना लंड बाहर निकाल कर अपना लोवर पहना और मैं उठकर अपने मुँह को जल से साफ करने लगी। मैंने भी अपने वस्त्र ठीक किये और नीचे चली गई। सारी निशा मुझे नींद नहीं आई और अचानक हुए किस कांड के बारे में सोच सोच कर मैंने किसी तरह से निशा काटी। बार बार मेरे सामने जीजा का वो लंबा सा मोटा लंड आ रहा था। अगली सुबह मैं जल्दी नहा धोकर तैयार हुई और पापा मुझे लेने के लिए आ गए। मैं वहाँ से अपने घर आ चुकी थी मगर जीजा के साथ फोन पर जुड़ी हुई थी। हर रोज हम लोग फोन पर बाते करते और जीजा फोन पर ही मेरी चड्डी गीली कर देते। जीजा मुझे चोदने के लिए बेसब्री से इंतजार कर रहे थे मगर हम दोनों को ही कोई सही मौका नहीं मिल रहा था। मैं भी चुदने के लिए बेताब हुए जा रही थी रोज उंगली करती और जीजा के मूसल जैसे लंड को याद करती। सच कहूं तो, दोस्तो, कहानी अभी जारी है और आप कहानी के अगले भाग में पढ़ेंगे कि किस तरह से मुझे और जीजा को एक शानदार मौका मिला और जीजा ने मेरी कुँवारी पुद्दी की धज्जियां उड़ा दी। देसी हॉट गर्ल सेक्स कहानी पर अपने विचार मुझे मेल और कमेंट्स में बताएं.
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देसी हॉट गर्ल सेक्स कहानी का अगला भाग: जीजाजी ने मेरी जवानी को मसल दिया- 2
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