क्लासमेट की माँ को चोदा
असल में, हैलो दोस्तो, कैसे हो?
मेरा नाम प्रथम है, मैं गुजरात का रहने वाला हूँ तथा मैं अपनी एक कहानी बताने जा रहा हूँ जो काफ़ी दिलच़स्प है। अब मैं मुख्य बात पर आ रहा हूँ। असल में, स्कूल के दिनों में मेरे साथ एक लड़का पढ़ता था जिसका नाम हिमांशु था। हमारे स्कूल में हमने एक समूह बना रखा था जो मौज-मस्ती करता था तथा साथ-साथ खेलते-कूदते भी थे। एक रोज हिमांशु आया तथा उसने हमसे पूछा कि मैं भी तुम्हारे समूह में सम्मिलित होना चाहता हूँ। पर हमने उसे मना कर दिया तथा वह वहाँ से चला गया। उसने लगातार दस दिनों तक प्रयास किया कि वह हमारे साथ शामिल हो जाए पर उसे निराशा ही हाथ लगी। एक रोज हिमांशु ने मुझसे कहा कि तुमसे मेरी माँ मिलना चाहती है, तुम्हें बुलाया है। तो मैंने उसे टालने के लिए कह दिया कि ठीक है, मैं मिलकर आ जाऊँगा, पर मैं गया ही नहीं। एक रोज मैं रास्ते पर जा रहा था कि सामने हिमांशु की मम्मी आती दिखीं, उन्होंने मुझसे कहा- मैंने तुम्हें बुलाया था, आते क्यों नहीं?
मैंने कहा- ठीक है, आज आ जाऊँगा। और मैं चला गया। उसके बाद मैं दोपहर को उसके घर गया तो हिमांशु घर पर नहीं था, उसकी मम्मी थी। उसने मुझे कुर्सी पर बिठाया तथा कहा कि तुम मेरे बेटे को अपने समूह में शामिल क्यों नहीं करते हो?
तो मैंने कहा- कुछ नहीं, बस ऐसे ही। सच कहूं तो, तो आंटी ने कहा- ऐसा नहीं करते, तुम उसे शामिल कर लो। मैंने हामी भर दी। फिर उसने मुझसे पूछा कि थम्स अप पीओगे?
तो मैंने हाँ कहा। असल में, उसने उस समय क्रीम रंग की साड़ी तथा उसी रंग की ब्लाऊज़ भी पहन रखी थी। अन्दर काली ब्रा पहनी थी, वो भी साफ़ दिख रही थी तथा उसकी गांड इतनी मोटी तथा गोल-मटोल थी कि कोई देख ले तो पागल हो जाए। वह किचन में चली गई, थम्सअप लाने के लिए। जब वह थम्सअप लेकर आई तो मैं हैरान हो गया कि उसने साड़ी उतारकर सफेद पारदर्शी गाऊन पहना हुआ था तथा अन्दर काली ब्रा तथा काली पैन्टी साफ़ दिख रही थी, तथा भरा हुआ बदन जैसे संगमरमर का ताज़महल हो। वह थम्सअप के दो गिलास लेकर मेरे पास बैठ गई तथा एक गिलास मुझे दिया तथा एक ख़ुद पीने लगी। पीते-पीते मेरे जाँघों पर हाथ रख कर घुमा रही थी, मुझे गुदगुदी हो रही थी, परन्तु मुझे मज़ा भी आ रहा था, इसलिए कुछ नहीं बोला। असल में, धीरे-धीरे उसका हाथ मेरे लण्ड के पास ले गई तथा पकड़ के मसलने लगी तो मैं खड़ा हो गया तथा कहा- मैं जा रहा हूँ। तो उसने मेरा हाथ पकड़ कर मुझे बिठा दिया, पूछा- क्या हुआ। मैंने कहा- गुदगुदी हो रही है। तो उसने कहा- आज तुझे कुछ सिखाऊँगी जो तेरे काफी काम आएगा। फिर मैं बैठ गया। पहले तो उसने मुझे गाल पर किस किया तथा मेरी शर्ट उतार दी। मैंने मना किया तो वह बोली- कुछ नहीं होगा, तुझे काफी मज़ा आएगा। फिर मैंने विरोध करना छोड़ दिया, उसने मेरी पैन्ट की चेन खोल कर मेरा लण्ड बाहर निकाल कर उसे किस्स किया तथा मुँह में लेकर कैण्डी की तरह चूसने लगी तथा मैं तो जैसे स्वर्ग में पहुँच गया था। मेरे मित्र की मम्मी 15 मिनट तक मेरा लंड चूसती रही, इसी दौरान मेरे सारे कपड़े भी उतार दिए। उसने मुझसे कहा कि मेरा गाऊन उतार दो!
तो मैंने उसका गाऊन उतार दिया तथा काली ब्रा-पैन्टी में जैसा आगरा का ताज़महल मेरे सामने आ खड़ा हुआ। उसने कहा मेरी ब्रा भी उतार दो, तो मैंने वैसा ही किया। ब्रा खोलते ही जैसे दो कबूतर आज़ाद होकर उछलकर बाहर आ गए। ध्यान देने वाली बात है कि, उसने मेरा सिर पकड़कर मेरा मुँह उसकी चूचियों पर रख कर मुझे चूसने को कहा तो मैं जीभ घुमाने लगा तथा चूसने लगा। यकीन मानिए, तब उसके मुँह से आआआ आआ… हहह हहह… निकने लगी। वह मेरा लण्ड पकड़कर दबाने लगी। थोड़ी देर में वह काफ़ी उत्तेजित हो गई तथा मुझे नोचने-खसोटने लगी, उसने कहा- तुम्हारा लण्ड तो काफी बड़ा है तथा मेरे पति का तो इसका आधा ही है। मैं तो मानो अपने होश में ही नहीं था। वह जैसा कह रही थी मैं वैसे ही करता जा रहा था। असल में, मेरे अन्दर इतनी समझ नहीं थी मैं कुछ कर सकूँ। फिर वह सेज पर लेट गई तथा बोली- तुम मेरी भोस को चाटो!
तो मैं उसकी पाँवों के बीच में बैठ कर जीभ घुमा-घुमा कर चाटने लगा। आपको बता दूं कि, वह मेरा मुँह दबा कर जोर से चिल्ला रही थी… चाटो… चाटो… चाटो… मुझे खत्म कर दे, खत्म कर दे। उसी समय उसकी भोस से कुछ चिकना-चिकना क्रीम निकलने लगा वो मैं पी गया वह मुझे काफी मज़ेदार लगा, तो मैंने पूरा चाट लिया। ध्यान देने वाली बात है कि, अब उसने कहा- अब उठो तथा मेरी भोस में डालो!
तब मैं पोज़ीशन लेकर उसकी पाँवों के बीच बैठ गया तथा लण्ड पकड़कर उसकी भोस पर रख कर थोड़ा धक्का दिया। चिकनाई की वज़ह से मेरा लण्ड सटाक से अन्दर चला गया। उसने कहा- शाबास बेटे तुमने सिक्सर लगाया, चालू रख!
मैं तो धक्के पर धक्का लगा रहा था, वो खुशी से पागल हो रही थी, नीचे से गांड उठा उठाकर साथ दे रही थी.
थोड़ी देर बाद वह उठकर खड़ी हो गई तथा मुझसे कहा- मेरी गांड में डाल तथा फाड़ दे। उसने मुझे क्रीम दी तथा कहा- पहली बार गांड में डलवा रही हूँ इलसिए मेरी गांड पर ये थोड़ा लगा, तथा थोड़ा अपने लण्ड पर भी लगाकर पेल दे। मैंने ऐसा ही किया तथा उसकी गांड पर रख कर धक्का दिया तो उसकी एक लम्बी चीख निकल गई, तथा बोली, बाहर निकाल नहीं तो मैं मर जाऊँगी। परन्तु मैंने कुछ नहीं सुना तथा धक्के जारी रखे, उसकी गांड से थोड़ा सा खून भी निकला, मैं घबरा गया तो उसने कहा कि डार्लिंग, कुछ भी नहीं, तू चालू रख, ये खुशी का खून है। कुछ देर तक धक्के मारने के बाद मैंने अपना लण्ड निकाल कर उसके मुँह में दे दिया तथा वह मेरा लण्ड चूसने लगी तथा मेरा क्रीम सारा उसके मुँह में चला गया तथा उसने पूरा पी लिया। फिर चाटकर मेरा लण्ड साफ कर दिया.
फिर उठकर कपड़े पहनने लगा तो उसने कहा- कल आना, मैं तुझे दूसरा मज़ा दूँगी जो तेरी शादी के बाद तुझे काम आएगा तथा तुझे तक़लीफ नहीं होगी तथा काफी मज़ा आएगा। अगली कहानी दूसरी बार। [email protected]
What did you think of this story