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पुणे की चुदासी हेमा-3

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हेमा बिल्कुल उत्तेजित हो चुकी थी.. हम एक-दूसरे के होंठों का रसपान कर रहे थे। उसकी स्ट्रॉबेरी लिपस्टिक का स्वाद मुझे तथा पागल बना रहा था। उसकी साँसें तथा मेरी साँसें एक हो गई थीं। उसने मुझे सेज पर गिरा दिया तथा मेरे ऊपर आकर मुझे चूमने लगी। वो कभी मेरी जीभ चूसती तो कभी होंठ.. तो कभी मेरे गालों को चूमती.. तो कभी मेरे गले को चूमती। ध्यान देने वाली बात है कि, मैं तो जैसे जन्नत में विचर रहा था। जिन्दगी में पहली बार किसी के साथ चूमा-चाटी कर रहा था, वो पूरी उत्तेजित होकर जोश में चूम रही थी तथा मैं तो इसे अब भी सपना समझ रहा था। तभी कुछ गिरने की आवाज आई तथा हम दोनों डर कर अलग हो गए.. देखा तो स्अंजलि ने फूलदानी तोड़ दी थी। सच कहूं तो, हेमा ने मुझे मुस्कुराते हुए कहा- अभी खाना खाते हैं बाकी की मूवी ब्रेक के बाद.. और हँसने लगी। ध्यान देने वाली बात है कि, यह सुन कर स्अंजलि ने कहा- कौन सी मूवी देख रहे थे आप लोग..? मुझे भी देखनी है.. सुन कर हेमा तथा मैं खूब हँसे तथा मैंने कहा- मैं तुम्हें मूवी दिखाने जरुर ले जाऊँगा। सच कहूं तो, फिर हम तीनों ने खाना खाया.. अपनी पसंद का केक खाकर स्अंजलि बहुत खुश थी.. उसे खुश देख कर हम दोनों भी खुश थे। यकीन मानिए, मैंने हेमा को साड़ी वाला गिफ्ट दिया.. उसने मेरी तरफ देखा तथा आँखें बड़ी की तथा वो कुछ कहती.. उससे पहले ही मैंने अपनी ऊँगली उसके होंठों पर रख दी तथा कहा- आज कुछ मत कहो.. बस ले लो.. उसने मस्ती में कहा- आज तो मुझे तुमसे बहुत कुछ चाहिए.. वो फिर अश्लील भाव से हँसने लगी, आज उसकी हँसी में कुछ तथा बात थी, जो कि मेरे अन्दर के शैतान को जगाने का काम कर रही थी। खाना खाने के बाद मैं स्अंजलि के कमरे में कार्टून मूवी देख रहा था.. वो जल्दी ही सो गई। मैं बाहर गया तो देखा हेमा रसोई में काम कर रही थी, मैंने पूछा- तुम क्यों काम कर रही हो? सारे नौकर कहाँ गए? मुस्कुराते हुए उसने कहा- मैंने उनको दो दिन की छुट्टी दे दी है.. ताकि हम दोनों को कोई डिस्टर्ब न करे.. वो शरमाते हुए मेरे गले से लग गई। अब तो मेरे अन्दर का शैतान भी पूरी तरीके से जाग गया था, मैंने हेमा को कस कर पकड़ा.. तथा उसकी आँखों में देखने लगा.. मानो उसकी आँखें कह रही हों- राज अब देर न करो.. चबा लो मुझे.. खा जाओ.. मैंने उसके दोनों गालों को अपने हाथों से पकड़ा तथा धीरे से उसकी आँखों को चूमा.. फिर उसके माथे पर चूमा.. फिर उसके गोरे-गोरे गालों को मैं चूमने लगा। उसकी साँसें अब बहुत तेज हो गई थीं सिहरन के साथ ही उसकी आँखें बंद थीं। उसके होंठ भीगे-भीगे से कांप रहे थे। आपको बता दूं कि, मैंने उसके होंठों पर धीरे से अपनी जीभ घुमाई.. उसको जैसे करंट लगा हो, वो तथा जोश में आ गई तथा मेरी जीभ चूसने लगी। ध्यान देने वाली बात है कि, कुछ ही पलों के बाद हम दोनों एक-दूसरे को चूसे जा रहे थे.. चाटे जा रहे थे। असल में, करीब 10-15 मिनट तक हम चुम्मा-चाटी करते रहे थे। हेमा कहने लगी- राज.. मुझे तथा मत तड़पाओ.. मेरी जन्मों की प्यास बुझा दो.. चोद डालो मुझे.. फाड़ डालो मेरी चूत को। आप यह कहानी अन्तर्वासना पर पढ़ रहे हैं। हेमा को मैं ‘चोद दो’ ऐसा कहते हुए पहली बार सुन रहा था। आपको बता दूं कि, उसकी ऐसी खुली हुई बातें मुझमें तथा ज्यादा जोश भर रही थीं। हेमा को मैंने गोदी में उठाया तथा चूमते-चूमते बेडरूम में ले गया। वो सेज पर जाके ऐसी बैठ गई.. जैसे कि नई-नवेली दुल्हन सुहागरात मनाने बैठी हो। यकीन मानिए, वो थोड़ी-थोड़ी सी शरमा भी रही थी, उसका यह अंदाज बहुत ही सेक्सी लग रहा था। मैंने उसकी काली साड़ी का पल्लू हटाया तथा उसके गोरे-गोरे गले पर चूम लिया। हेमा की सांसें तेज होने लगीं। उसने अपनी आँखें बंद कर लीं। उसके बड़े-बड़े मम्मे चुस्त ब्लाउज को फाड़ कर बाहर आने के लिए उतावले हो रहे थे। मैं उसे चुम्बन करने लगा.. मेरा हाथ उसके मम्मों का जायजा लेने लगे। उफ़.. क्या मम्मे थे.. बड़े-बड़े गोल-मटोल… मैं धीरे-धीरे उसके मम्मों को सहलाने लगा। उसे बहुत आनंद आ रहा था.. मैं धीरे से गले से चूमते हुए उसके मम्मों पर आ गया तथा ब्लाउज के ऊपर से ही उसके कड़क चूचुकों को चूसने लगा। सच कहूं तो, साथ ही दूसरे स्तन को हाथ से दबाने लगा। असल में, अब वो पूरे जोश में थी तथा बोल रही थी- आह्ह्ह राज…चूसो इन्हें.. उम्म्म्मम्म.. आह्ह्ह.. तथा जोर से चूसो.. मैं अब से सिर्फ तुम्हारी हूँ.. मेरी प्यास बुझा दो.. खा जाओ इन्हें.. म्मम्मम आह्ह्ह्ह… हेमा अब पूरी उत्तेजित हो चुकी थी.. वो मेरा सर अपने मम्मों पर दबा रही थी तथा सेक्सी आवाजें निकाल रही थी, उसकी इस हरकत से मेरा जोश तथा बढ़ रहा था। ध्यान देने वाली बात है कि, अब मुझसे रहा नहीं जा रहा था, मैंने उसकी पूरी साड़ी तथा ब्लाउज को निकाल दिया। वो अब सिर्फ काले रंग की ब्रा तथा पैन्टी में थी। यकीन मानिए, पैन्टी तो सिर्फ नाम के लिए थी.. बस एक डोर सी बंधी थी जो उसकी रसभरी चूत को ढंकने के त्रिभुज को पकड़े हुए थी। हेमा बिना कपड़ों के बहुत ही सेक्सी लग रही थी.. मैं उसे फिर से चूमने लगा, उसके होंठों का तो मैं दीवाना था। उसके नाजुक होंठ इतने नरम तथा कोमल थे कि अगर थोड़ा सा काट लूँ तो फट जाएं। मैं चूमते-चूमते उसके मम्मों तक आया तथा एक ही झटके में उसकी ब्रा को अलग कर दिया, उसके बड़े-बड़े दो खरबूजे बाहर आ गए तथा मैं उन पर टूट पड़ा। एक निप्पल को मैं चूस रहा था तथा दूसरे को चुटकी में लेकर मसल रहा था। हेमा अब पूरी तरह मेरे वश में थी तथा सिर्फ सेक्सी आवाजें निकाल रही थी- आह्ह्ह.. उम्म्मम्म्म्मम्म.. जोर से चूसो इन्हें.. काट डालो.. सी..ई.. ओह्ह्हह्ह.. या बेबी.. उम्म्म.. पूरा दूध पीलो.. बहुत सताते हैं ये मुझे आह्हह्ह.. कम ऑन बेबी.. आह्ह्हह्ह.. हेमा की ऐसी मधुर सेक्सी आवाज मुझमें तथा चुदास पैदा कर रही थी। मैंने उसके मम्मों को चूसते-चूसते एक हाथ उसकी चूत पर रखा.. तो जैसे उसे करंट लगा हो। वो तड़प उठी तथा कहा- राज अब तथा ना तड़पाओ.. मेरी चूत की आग बुझा दो.. चोद दो.. इस कुतिया को फाड़ दो। सच कहूं तो, उसकी चूत पूरी गीली थी.. मैंने उसकी पैन्टी की डोरी खोल कर उसे निकाल दिया तथा उसकी चूत गीली होने के कारण मेरी हाथों की ऊँगलियां फिसल कर चूत में चली गई। सच कहूं तो, उसे काफी दर्द हुआ, वो चिल्लाई- साले फाड़ देगा क्या? कितना दर्द हो रहा है.. आराम से नहीं कर सकता क्या? बहुत दिनों से नहीं चुदी.. धीरे कर.. मैं भी नया खिलाड़ी था.. पहली बार चिकनी चूत देख रहा था.. तो मैं बेकाबू हो गया था.. बाद में मैंने उसकी जाँघों पर हाथ फहराया तथा उसकी चूत को चुम्बन किया। एक अजीब सी खुश्बू आ रही थी.. मैंने जैसे ही उसकी चूत पर जीभ लगाई उसकी बदन में जैसे लहर दौड़ गई। ध्यान देने वाली बात है कि, उसने मेरा सर चूत पर दबा दिया तथा अपनी टाँगों में मुझे जकड़ लिया। यकीन मानिए, मैं उसे जीभ से चोदने लगा.. वो मदमस्त होकर आनंद उठा रही थी। थोड़ी देर बाद उसने कुछ झटके दिए.. उन्हीं झटकों के साथ उसकी चूत से पानी बाहर आने लगा जो कि मैं पी गया.. काफी अलग स्वाद था.. पर अच्छा लगा। अब हेमा कहने लगी- राज अब बस भी करो तथा मत तड़पाओ.. तुम अपना लंड निकालो तथा घुसा दो.. मेरी चूत में.. मेरी आग बुझा दो.. ऐसा कहते ही उसने मेरी टी-शर्ट तथा जीन्स उतार दी.. मेरा अंडआर्यनयर खींच कर निकाल फेंका.. इसी के साथ मेरा फनफनाता काला लम्बा मोटा नाग उसके सामने आ गया। उसे देख कर वो खुश होकर कहने लगी- वाह.. इतना मोटा तथा लम्बा.. सपने में जो देखा करती हूँ.. ये उससे भी अच्छा है। आपको बता दूं कि, मैं उसके सामने अपना मूसल लण्ड लहराने लगा। असल में, आज कहानी को इधर ही विराम दे रहा हूँ, आपकी मदभरी टिप्पणियों के लिए उत्सुक हूँ। मेरी ईमेल पर आपके विचारों का स्वागत है। What did you think of this story