रोमांचक कहानी: प्यारी मिनी और उसका सरप्राइज-2
अन्तर्वासना के सभी पाठको को नमस्कार !
तीन-चार महीने कैसे निकले … जैसे रोकेट से चाँद पर पहुच गए, चार रोज में ही चार महीने पूरे हो गए…
फिर अभी लगभग १५ रोज पहले ही एक रोज अचानक उसने चैट करते हुए मुझको अपने घर का पता दिया…
मैं दंग रह गया, मैंने पूछा- मिनी आज कैसे तुमने अपना पता मुझको दिया?
तो फिर वो टाल गई। स्त्री मन के रहस्यों का खजाना किन गहराइयों में है ये तो खुद विधाता भी नहीं जान सके तो मैं अदना सा इंसान क्या जानता?
वो मेरे शहर की नहीं है। मिनी ने बस इतना सा पूछा कब आओगे?
मैंने कहा- आर्यनवार को मेरे संस्थान की छुट्टी होती है, किसी काम से बहाने इस आने वाले इतवार को आ जाऊं?
तो मिनी ने हाँ कर दी तथा बोली- मैं अकेली ही घर में होउंगी, तुम सीधे मेरे घर में आना तथा आने से पहले मुझको कॉल करना अपने मोबाइल से…
उसने अपना मोबाइल नंबर मुझको दिया तथा साथ ही साथ यह बताया कि एक सरप्राइज तुम्हारा इन्तजार कर रहा है। मैं तथा भी ज्यादा उत्सुक हो उठा कि क्या सरप्राइज हो सकता है। कहीं कुछ उलटा सीधा तो नहीं है कुछ, आखिर यह नेट है। लेकिन यदि मिनी के मन में कुछ मैल होता तो वो जो करती, अचानक ही करती फिर तो वो कुछ बताती भी नहीं। मैं काफी बेसब्री से आर्यनवार का इन्तजार करने लगा। ध्यान देने वाली बात है कि, घर पर बोला कि संडे को अन्य शहर में मुझको स्पेशल क्लास लेने को बुलाया है, इसलिए मैं जा रहा हूँ निशा को लेट हो जाऊंगा !
मैं कोई प्यारी सी गिफ्ट मिनी को देना चाहता था, मुझे तथा तो कुछ समझ आया नहीं, क्यूंकि अभी तक मिले ही नहीं थे इसलिए काफी अनिश्चय की स्थिति में मैंने एक डांसिंग पेयर का मयूजिकल मेमोरी आइटम खरीदा… तथा अपनी कपड़ों के साथ पैक कर लिया। और शनिवार निशा को बस पकड़ कर मिनी के शहर रवाना हो गया, काफी सुबह करीब ४ बजे जब मैं उसके शहर उतरा तो मैंने मिनी को कॉल किया तो मिनी ने बताया कि उसके घर तक कैसे पहुचना है। मैंने ऑटो किया तथा उसके मोहल्ले की गली के पास ऑटो को छोड़ दिया। एक बार फिर मेरी हालत वो ही हो गई जैसे कि उसकी मेल पढ़ने पर हुई थी, मेरे पैर थरथराने लगे थे…..दिल था कि मेरे गले में धड़क रहा था। मकान नंबर के आधार पर जब मैं मिनी के मकान के पास पंहुचा तो एक चेहरा खिड़की में से झांकता नजर आया तथा जैसे ही मैंने गेट को हाथ लगाया दरवाजा खुला तथा मिनी बोली…. नीरज ?
मैंने कहा- हाँ मिनी ! मैं ही हूँ !
उसने मुझको अन्दर आने को बोला। मेरा दिल मेरे गले में अटक रहा था. पहली बार किसी लड़की से मिलने यूँ उसके घर गया था….. तथा वो भी नेट फ्रेंड से……
उसने दरवाजा बंद किया, मिनी सशरीर मेरे सामने थी, रंग कुछ सांवला सा परन्तु आँखों में गजब का आकर्षण, शोख आँखें जबरदस्त निमंत्रण देती हुई …, सुता हुआ शरीर। सच कहूं तो, मैंने अपना ब्रीफकेस कुर्सी पर रखा, मिनी की ओर देखा, वो भी मुझे ही देख रही थी, मेरे हाथ ज़रा से उठे, उसके कदम बढ़े वो मेरे सीने से लग गई तथा मेरे हाथ उसके इर्दगिर्द बंध गए, उसका चेहरा साइड से मेरे सीने से कंधे पर चिपका हुआ था…
मैं उसके चेहरे को देखने लगा, कितना प्यारा…., कोमल…., निर्मल……. आँखें मुंदी हुई !
मेरी सांस उसके चेहरे पर टकराने लगी. मेरा मुँह उसके गालों पर आया तथा आँखें मुंद गई हम जाने कितनी सदियों के प्यासे एक दूसरे में खो गए। जाने कितना समय निकल गया कुछ पता ही नहीं !
अचानक वो चोंक कर मुझसे अलग हुई तथा बोली- नीरू, तुम फ्रेश हो लो, चाहो तो नहा भी लो, फिर कुछ खा पी लेते हैं। मिनी नाईट ड्रेस में थी। असल में, तो मैंने कहा- मिनी ! फ्रेश तो मैं हो लेता हूँ परन्तु मुझे नहलाओगी तो तुम ही, फिर तुम भी तो नहाओगी ना ! साथ ही नहा लेंगे। मिनी बोली धत्त्त्त शैतान कहीं के…..
फिर मैं फ्रेश होने चला गया। फ्रेश होकर आया, फिर हमारी छेड़छाड़ शुरू हो गई, हम दोनों एक दूसरे के बदन पर यहाँ वहाँ हाथ लगाने लगे। मिनी ने घर के बाहर वाली सारी खिड़कियों के परदे चढ़ा दिए। मैं कभी मिनी को खींच कर किस कर देता, कभी उसके बोबे दबा देता कभी उसकी जांघो के बीच हाथ डाल देता !
वो भी कभी मेरे गाल पर कभी मेरे होटों पर किस कर देती, कभी मेरे गाल नोच लेती, कभी लंड पर हाथ मार देती !
हम पूरे घर में थिरकते फिर रहे थे अपने को सामने वाले से बचाने की झूठी कोशिश में लगे थे। फिर अचानक ही मैंने एक हाथ से मिनी को जकड़ा तथा दूसरे हाथ से उसके नाईट ड्रेस के बटन खोलने लगा, मिनी मेरे हाथ से छूटने की कोशिश करने लगी, मैंने उसको दबोच लिया, वो प्लीज प्लीज ! करती रही तथा मैं उसके बटन खोलता गया, फिर मैंने कमीज को उतार कर कमरे में पलंग पर उछाल दिया। वो अपनी कोहनी से हाथ मोड़े अपने बोबे ढकने लगी, नाईट ड्रेस के कारण उसने ब्रा नहीं पहनी थी। मैंने उसके हाथ खींच कर सीधे कर दिए, उसका चेहरा गुलाबी हो गया, आँखें नशीली तथा आँखों में शर्म उतर आई…
सेब से डेढ़ गुना बड़े साइज के कसे हुए बोबे देख कर मैं मदहोश हो गया, मेरे दिल में हलचल मच गई. मैंने एक हाथ से मिनी को भींचा तथा दूसरे हाथ से उसके बोबे दबाने लगा। हम दोनों ही गरम होने लगे। फिर मिनी एकदम से चुलबुली हो गई तथा फिर हमारे बीच में छीना झपटी होने लगी एक दूसरे के वस्त्र उतारने को ले कर !
५-७ मिनट में ही हम सिर्फ अंडआर्यनअर में थे। फिर मैंने मिनी को पकड़ा, उसको उठाया तथा सीधे गुसलखाने में ले गया, नल खोल कर बाल्टी में जल चालू किया. तथा मिनी के होटों पर अपने होंट रख दिए। यकीन मानिए, हमारी साँसे चढ़ने लगी ….,
मैं एक हाथ से मिनी का बोबा दबा रहा था, उसके होंट चूस रहा था, तथा दूसरे हाथ से उसकी पीठ सहला रहा था तथा कभी कूल्हे। मिनी का एक हाथ मेरी गर्दन को घेरे था, दूसरे हाथ से मेरे लंड को अंडआर्यनअर के साइड से निकाल कर अपनी टांगो को थोड़ा सा चौड़ा करके पैंटी को थोड़ा सा साइड में सरका कर अपनी चूत पर रगड़ रही थी, मैं शादीशुदा होने तथा इतना सेक्स कर चुकने के बाद भी खुद को कण्ट्रोल करने में असमर्थ पा रहा था. मिनी लगभग मुझमें घुसने जैसी हालत में हो गई तथा कण्ट्रोल खोने लगा तो मैंने मिनी को खींच कर किसी तरह से अलग किया, वो तो अलग होने को ही तैयार नहीं थी। यकीन मानिए, अब हमारे अंडआर्यनअर भी अलग होकर बाथरूम की शोभा बन गए। मैंने मग्गे से बाल्टी में से जल लेकर मिनी पर डालना शुरू किया, तथा मिनी ने बाल्टी में से चुल्लू चुल्लू जल मेरे ऊपर ……
हम जैसे जैसे भीगते गए तथा भी गरम होते चले गए। सच कहूं तो, पानी डालने की इस हरकत में हमारे अंग जिस तरीके से हिल रहे थे उसने हमें गर्म करना शुरू कर दिया। यकीन मानिए, लेकिन मैं कोशिश कर रहा था कि किसी तरीके से नहाने का काम पूरा हो जाये तो चुदाई का काम शुरू किया जाये। इसलिए छेड़ा छाड़ी से ज्यादा कुछ करने की कोशिश नहीं कर रहा था। अचानक से मिनी आगे बढ़ी तथा मेरी गर्दन को कस कर बाँहों में जकड लिया तथा अपने होंट मेरे होंटो पर फिर से चिपका दिए. अब तो अंडआर्यनअर भी नहीं पहने हुए थे इसलिए मेरा लंड मिनी की चूत पर ठकठकाने लगा. मेरे हाथ अपने आप पहले वाली स्थिति में आते चले गए एक बोबे पर तथा दूसरा उसकी पीठ से कूल्हों तक सरकने लगा. मैंने एक बार मिनी को अपने से दूर करने की कोशिश की परन्तु उसने अपने हाथों को तथा भी जोर से कस लिया. मेरी समझ में आ चुका था कि अब कुछ नहीं हो सकता मैंने किसी तरह से नल से निकलते जल को बंद किया तथा शावर को धीमा चालू कर दिया. दोनों जल के नीचे भीगते हुए एक दूसरे में घुस जाने की कोशिशों में लगे थे. फिर मिनी ने अपनी टांगो को उठा कर मेरी कमर के घेरे पर कस ली. अलग होने की अब ज़रा सी भी उम्मीद नहीं बची। मैंने अपना बैलेंस बनाते हुए ५५ किलो की उस फूल की कली को अपनी बाँहों में कसे हुए किसी तरह से घुटनों के बल बैठा। अब मिनी लगभग मेरी गोद में थी। आपको बता दूं कि, अपने कूल्हे मैंने मेरी एडियों पर रख लिए……..
अब एक हाथ किसी तरह से दोनों के बीच में डालते हुए मेरे तन्नाते लंड को पकड़ कर मिनी की चूत के छेद पर लगाया तथा मिनी के कूल्हों को दोनों हाथों में पकड़ कर मिनी से बोला- मिनी मैं तुम्हारे हिप्स पर जोर लगा कर लंड को चूत में एंट्री कर रहा हूँ, थोड़ा सा कूल्हों को ढीला छोड़ो !
चूत का छेद काफी गीला हो चुका था, मैंने कोशिश की परन्तु व्यर्थ। दूसरी बार जोर लगाया फिर बेकार ! मैं समझ गया कि कोशिश बेकार है। उसको लिए-दिए फिर से बैलेंस बनाते हुए उठा तथा शॉवर बंद करके बेडरूम की राह चलने लगा. मिनी कभी मेरे होंट चूसती कभी जीभ, तथा कभी गर्दन पर दांत गड़ा कर चूसती। सारा जल भाप बन कर उड़ गया तथा हमारे बदन भट्टी की तरह तप गए। सच कहूं तो, बेडरूम में ड्रेसिंग टेबल पर से क्रीम उठाई ऊँगली में लगाईं किसी तरह से वापस दोनों के बदन के बीच राह बना कर क्रीम मेरे लंड के सुपाडे पर तथा उसकी चूत के मुँह पर लगाई। कई महीने हो गए थे मिनी के साथ किसी लड़के ने धोखे से सेक्स किया था. उसके बाद आज वो मेरे से चुद रही थी, सो चूत थोड़ा सा कस गई थी। मिनी बोली- चलो ! बाकी का नहाना पूरा करो। क्या करता हुकुम मानना ही था. वापस गुसलखाने में आकर शॉवर चालू किया तथा मिनी को गोद में बिठाये मैं फिर से घुटनों के बल हो गया। दोनों के बदन के बीच में हाथ घुसाया तथा लंड को चूत के छेद पर सेट करके मिनी के कूल्हों पर हाथ से दबाव बनाया, मिनी ने अपनी टांगों को हरकत दे कर हल्का सा धक्का लगाया तथा लंड अपनी रानी में समाता चला गया. मेरे तथा मिनी दोनों के मुँह से आह, उह, उम्म्म, हाँ, हह्हः आवाजें आने लगी। उत्तेजना इतनी बढ़ गई कि हम दोनों ही एक दूसरे के होटों पर दांत कस दिए तब होश आया तथा होटों को हटा कर जीभ चूसने लगे परन्तु कभी कभी फिर भी एक दूसरे को काट लेते थे। सच कहूं तो, मिनी बोली – राजा करो….. मेरे बुरी तरह से चढ़ चुकी है, तथा वो अपने चूतड़ चलाने लगी। मैं भी मिनी के हिप्स के नीचे हाथ लगा कर मिनी को ऊपर नीचे करने लगा। ध्यान देने वाली बात है कि, हम दोनों ही खूब मदहोश हो चुके थे तथा जोर लगा कर अपनी मंजिल को पाने के लिए यत्न करने लगे। आपको बता दूं कि, धीरे धीरे ओर्गास्म आने लगा हमारे हिलने हिलाने की रफ़्तार बढ़ने लगी- ऊऊह आया रानू…. मैं आया….
मिनी भी बोली- हाँ राजा आओ ! मैं भी हुई रे ईईईए
मैंने अपना लंड तुंरत मिनी की चूत से निकाल बाहर किया तथा हाथ से दो चार रगड़ मारी फिर सारा जल पिचकारी मार मार कर बहने लगा। आपको बता दूं कि, थोड़ी देर हम यूँ ही चिपके रहे, फिर धीरे धीरे अलग हुए तथा एक दूसरे की आँखों में देखने लगे। मिनी की आँखे झुकी, मैंने मग्गे से जल लेकर मिनी पर डालना चालू किया। ध्यान देने वाली बात है कि, फिर हमने एकदूसरे पर साबुन मला, खूब मलमल कर झाग बनाए, खूब नहाए, खूब मस्ती की। तब तक हम दोनों फिर सुरूर में आ चुके थे. मैंने मिनी को अपनी तथा खींचा, उसके बोबे हाथों में लिए तथा मुँह लगा कर पीने लगा। मिनी ने मेरा चेहरा अपने बोबों में भींच दिया। मुझको सांस लेने में कठिनाई होने लगी.. तो मुख खोल कर सांस लेने लगा तथा जीभ घुमा कर निप्पल चाटने लगा. हाथों से मिनी का बदन सहलाता जा रहा था। फिर नीचे घुटनों के बल बैठ कर मिनी की कमर को बाँहों में लेकर मिनी की नाभि में जीभ दे दी तथा जीभ से हरकत करने लगा। मिनी ने फिर से मेरा चेहरा भीच कर पेट पर चिपका लिया। मैंने शॉवर बंद किया, मिनी को कमर से पकड़ कर अपनी गोद में उठाया तथा उसको लिए हुए बेडरूम में आया तथा सेज पर लिटा दिया। अब तक मुझे आये लगभग २.३० घंटे हो चुके थे. दीवार घड़ी ६:३० बजा रही थी। समय पलक झपकते ही निकल गया कुछ पता ही नहीं चला। पेट में थोड़ी हलचल होने लगी। मैंने मिनी से कहा- पहले खाने को थोड़ा कुछ तैयार कर लेते हैं !
तो मिनी- बोली हाँ यार ! चलो तयारी करें ! खेल तो बाद में भी होता रहेगा। सच कहूं तो, अचानक मुझे याद आया तथा मैंने ब्रीफकेस खोल कर मेमोरी आइटम मिनी को दिया….
मैंने सोचा- पता नहीं पसंद आयेंगे या नहीं……
मिनी ने खोल कर देखा तथा मेरे होटों पर किस किया- एकदम गर्म !
फिर मैंने मिनी से पूछा- मिनी, तुमने क्या सरप्राइज देने के लिए मुझको बोला था?
तो मिनी ने कहा- बता ही दिया तो क्या सरप्राइज हुआ ! इन्तजार करो प्रियतम…….!
फिर हम लोग पोहे बनाने की तैयारी में जुट गए। मैंने आलू, मिर्च, अदरक आदि कतरे, मिनी ने मटर तथा पोहे भिगोये… बनाते बनाते ७ बज गए, मैं आश्चर्य कर रहा था कि ये पोहे इतने ज्यादा क्यों हैं, परन्तु चुप रहा। अचानक दरवाजे पर धीरे धीरे चार बार ठक ठक हुई, मेरा दिल एक दम उछल कर गले में आ गया। मेरा घबराया चेहरा देखकर मिनी बोली- क्या हुआ राजा? घबरा क्यों रहे हो ? मैं देखती हूँ ना… !
और वो दरवाजे पर चली गई सिर्फ पैंटी पहने हुए ही, परन्तु मैंने ध्यान ही नहीं दिया…
मैं बेडरूम की ओर लपका, निशा की पैंट टांगो में चढ़ा ली कि बेडरूम के दरवाजे पर दो चेहरे नजर आये, मैं अकबकाया सा देखने लगा, मिनी हंसने लगी, बोली- नीरू इनसे मिलो .. ये स्अंजलि हैं मेरी पक्की सहेली तथा तुम्हारा सरप्राइज………….!
सॉरी यार नीरू, एक बार फिर से मैं सॉरी बोलूंगी….
तुमको देखकर तो कोई भी कुर्बान हो जाये…
तुम सच में भोले हो….
मैं थोड़ा सा संयत होने लगा था। मैंने स्अंजलि की ओर हाथ बढ़ाया मिलाने के लिए
तो स्अंजलि की आँखें शरारत से चमक उठी ओर बोलते हुए मेरे गले से चिपक गई कि वाह मेरी सहेली को तो सब कुछ तथा मुझसे हाथ मिलाना ही …….
मेरे हाथ स्अंजलि की पीठ पर बंध गए तथा पीठ से ही उसके चेहरे को बालों से खींच कर पीछे किया तथा होटों पर एक प्यारा किस किया.. तथा बोला- प्लीज स्अंजलि ! मुझको नोर्मल होने दो। ज़रा बैठते हैं। ओस में नहाए हुए गुलाब के फूल सा चेहरा तथा गदराया हुआ बदन ! मेरे मन में ख़याल आया कि ये तो सच में ही सरप्राइज है। इतने में मिनी पोहे हाफ प्लेट में डाल कर ले आई। हम तीनों बेड पर बैठ कर पोहे खाने लगे तथा मिनी ने बताया कि स्अंजलि ने उसको किस तरह से देह शोषण का शिकार होने के बाद सहायता की। वो दोनों काफी पक्की सहेलियां हैं इतनी कि दो जिस्म तथा एक जान, मैंने तुमको इसलिए नहीं बताया कि शायद तुम शातिर होंगे तो तुमको कोई फर्क नहीं पड़ेगा … परन्तु तुमने जो लिखा वैसे ही हो… खैर अब मेरी बात मानोगे ना… ?
मेरी प्रश्न भरी आँखों को देखकर वो बोली- आज हम तीनों एकसाथ रहेंगे … मंजूर…?
मैं बोला- मिनी, मेरी रानी … यार … मेरी नजरें स्अंजलि पर अटकी थी …
मिनी बोली- हाँ बिना हिचक बोलो राजा, बिना किसी परेशानी के हम आज से अलग नहीं है…!
देखो मिनी, मैंने कभी इस तरह से सेक्स नहीं किया है. एक लड़की को संतुष्ट करना अलग बात होती है, तथा इस तरह…
तो मिनी बोली- मेरे राजा हमने कौन सा इस तरह या उस तरह से किया है। और हमने सोचा कि आज इस तरह से खेल आजमा कर देखते हैं… जब मैंने स्अंजलि से तुम्हारी बात बताई तो उसने ही ये स्कीम सोची है। अब तुमको मैं बता दूं कि ये स्अंजलि सरप्राइज क्यूँ है !
जैसे ही तुमने मुझको कॉल किया कि तुम शहर में आ गए हो तो तुमसे बात करके मैंने स्नेह को फोन करके बता दिया, स्नेह ने मुझको बोला कि तुम देखो, यदि आदमी ठीक लगे तो तुम मुझको बताना तो मैं थोड़ा सा लेट यानि ७ बजे के लगभग आउंगी, तथा यदि आदमी चालू लगे तो तुंरत फोन करना तो मैं तुंरत आकर, अपन दोनों मिलकर एकदम से फुटा देंगे। मैं एक हादसा पहले झेल चुकी हूँ तथा दूसरे किसी लफड़े में फंसना नहीं चाहती थी तो मैंने अपनी प्यारी पक्की सहेली स्अंजलि को राजदार बनाया,
जैसे ही तुम फ्रेश होने गए तो मैंने स्अंजलि को दूसरा कॉल किया तथा बोला कि ७ बजे आ जाना !
मेरे दिमाग में एक विचार कौंधा – मिनी एक बात मानोगी….
मिनी – क्या राजा ?
मैं- क्यों न हम खेल खेल में सेक्स करें ?
मिनी- कैसे….. ज़रा बताओ तो ?
मैं- देखो आज सुबह भी अपन खुद को बचाकर दूसरे को किस कर रहे थे, पकड़ रहे थे, दबा रहे थे तो क्यों न अब भी एसा ही करें …. जो ज्यादा बार ये सब करेगा तो वो जीता हुआ माना जायेगा तथा सेक्स में उसकी पसंद सबको माननी होगी…….
बोलो मंजूर… मैंने वैसे भी आज तक इस तरह दो के साथ सेक्स नहीं किया है तो मैं भी नोर्मल हो जाऊंगा तब तक…
मिनी, स्अंजलि ने एक दूसरे की तथा देखा फिर दोनों ने मेरी ओर देखा हम तीनों की नजरें एकसाथ मिली हमारे हाथ बढ़े तथा एकसाथ मिल गए। आपको बता दूं कि, हमने नियम तय किये कि कोई प्रहार नहीं करेगा, हाँ हाथ सामने लाकर धक्का दे सकता है, नाखून से नहीं खरोंचेगा-नोचेगा तथा कोई ऐसी चीज नहीं फैंकेगा जो चोट पंहुचा सकती हो ! किस करना, बोबे दबाना तथा लंड-चूत को छेड़ना स्कोर बनाएगा !
सब राजी हो गए. १५ मिनट का समय तय हुआ. तथा अब खुद को बचाते हुए हम लोगों को अपना स्कोर बनाना था। सच कहूं तो, रेडी गो …
और धमाल शुरू हो गया, पहले पांच मिनट में मेरा स्कोर था ११ तथा मिनी व स्अंजलि थी ७ तथा ८ पर. दोनों ने नजरें मिलाई तथा शैतानी पर उतर आई दोनों एकसाथ मेरे पर टूट पड़ी। मुझको खुद को बचाना मुश्किल हो गया. हम एक दूसरे के पीछे दोड़ रहे थे तथा खुद को भी बचा रहे थे. दोनों ने मुझको दोनों ओर से पकड़ लिया तथा मुझको दबाना, किस करना चालू कर दिया, मैंने भी उनको दबाना, भीचना चालू कर दिया. हमारे स्कोर तेजी से बढ़ रहे थे, खूब हंस रहे थे तथा गरम हो रहे थे। दोनों ने मिलकर मेरी पैंट भी खींच डाली तथा नंगा कर दिया. मैंने ओब्जेक्शन उठाया कि ये स्अंजलि कपड़ो में क्या कर रही है. तो मैंने तथा मिनी ने मिलकर स्अंजलि के गुदाज जिस्म से उसके कपडे भी खोल डाले। १५ मिनट में हम खूब गरम हो गए, मेरा लंड तना हुआ भागने पर इधर उधर डोल रहा था तथा उन दोनों के बोबे भी…. ये देखकर हंस कर हम लोटपोट हो गए। तकिये तथा कुर्सी की गद्दियाँ भी हवा में उछल रही थी तथा अंत में किसने कितने पॉइंट्स बनाए गिनने की फुर्सत किसे रह गई थी….
हम तीनों ही बेड पर लस्त पस्त गिर गए। दोनों मेरी दोनों साइड में हो गई तथा मेरी तथा आकर मुझसे चिपक गई. एक होटों को किस करने लगी तथा दूसरी गर्दन पर चूसने लगी, मैं इस दोहरे प्रहार के लिए तैयार नहीं था। मुझमें इतना करंट भर गया कि शायद चक्की की मोटर तक चल जाती मैंने किसी तरह से अपने मुँह को कहने की स्थिति में लाकर कहा- कि मेरी रानू जानू मुझ पर रहम करो यार, ऐसे तो मैं जल जाऊँगा, कुछ तो धीरे धीरे चलो ….
तो स्अंजलि बोली- डरो मत हम लोग तुमको काफी आराम से ही अन्त तक ले जायेंगे। सब आपस की बात ही है। तुम भी हमारे अपने हो अब तो…….
स्अंजलि का बदन भरा हुआ तथा बोबे मेरी ९ इंच की हथेली में एक आने वाले थे उनको दबाने में खूब आनंद आ रहा था, परन्तु यह समझ नहीं आ रहा था कि इन दोनों में से किसको क्या करूँ…..
दोनों ने शायद समस्या भांप कर मुझसे विचार कर के निर्णय लिया कि दो दो मिनट के लिए एक जाने को बाकी के दो फोरप्ले करेंगे. ताकि गरम भी खूब हो जाएँ तथा हालत भी काबू में रहें,
अब पहले मेरी बारी थी, एक ने मुँह की साइड ली तथा दूसरी ने जांघो की साइड तथा सहलाते, किस करते, चाटते हुए विपरीत दिशा में आती गई, थोडी देर में स्थिति उलट गई, मुँह वाली जांघो पर तथा जांघो वाली मुँह पर आ गई, मेरे बदन में बिजली तथा गर्मी व उत्तेजना ने पूरा बदन लाल कर दिया, मैं जैसे तैसे खुद को कण्ट्रोल करने लगा, २ मिनट २ युग जैसे बीते, मेरी बारी जैसे तैसे ख़त्म हुई, चार हाथ, चार बोबे, दो जोड़ी होंट जब किसी के बदन पर चल रहे हों तो कण्ट्रोल हो सकता है क्या? काफी ही मुश्किल काम है…..
फिर मिनी बीच में आ गई, वो ही क्रिया फिर से शुरू हुई, मैंने मुँह वाली साइड पकड़ी तथा स्अंजलि ने जांघो वाली, स्अंजलि उसकी चूत चाटने लगी, तथा मैं उसको किस करते गर्दन चूसते, बोबे चूसते नाभि में जीभ करते नीचे आने लगा तथा स्अंजलि ऊपर की तथा आने लगी, मिनी उत्तेजना से छटपटाने लगी, मैंने उसकी चूत के चारों ओर होंट घुमाए, चूत को किस किया तो मिनी बोली- चाटो ना !
तो मैंने कहा- आज तो रहने दो, अगली बार जरूर चाटूंगा !
तो वो मान गई, परन्तु मैंने उसकी चूत को किस कई बार कर लिया, उसकी चूत ने जल छोड़ना शुरू कर दिया। असल में, अब बारी आई स्अंजलि की, उसके साथ भी ऐसी ही क्रिया चालू हुई मैं फिर मुँह से उसके नीचे आता गया, स्अंजलि तड़पने छटपटाने लगी, ये दो का फंडा था ही ऐसा कि उत्तेजना चरम पर चली गई, स्थिति वश से बाहर हो जाती है परन्तु ओर्गास्म जल्दी होता है तथा खूब तेज …. जब मैं स्अंजलि की चूत तक आया तो इसकी चूत भी जल छोड़ने लग गई थी. तथा मदहोश सुगंध छोड़ रही थी। ध्यान देने वाली बात है कि, हम तीनों में से किसी के भी होश ठिकाने पर नहीं थे, तथा किसी के भी होश ठिकाने पर तो रह भी नहीं सकते थे, ये हम तीनों ने इस अनुभव से जान लिया। मिनी बोली- स्अंजलि पर चढ़ जाओ तथा शुरू हो जाओ ! तथा खुद ने स्अंजलि के मुँह में मुँह डाल दिया. मैंने स्अंजलि की टाँगे चीरी तथा बीच में बैठ कर लण्ड को स्अंजलि की चूत के छेद पर रख कर अपना मुँह उसके बोबे तक लाकर चूसने लगा, दूसरे हाथ से उसके बोबे दबाने लगा तथा बदन भी सहलाने लगा। स्अंजलि की हालत भी कण्ट्रोल से बाहर होने लगी, दोतरफा हमला हम में से किसी के भी बस का नहीं था। स्अंजलि ने कूल्हे ऊपर की तरफ दबाये तथा मैंने लण्ड को नीचे दबाया तो लण्ड उसके बच्चेदानी के मुँह पर जा लगा, बेचारी स्अंजलि तो मुँह से कुछ भी कहने या सिसकारी भी लेने कि स्थिति में नहीं थी, मिनी ने उसका मुँह खुद के मुँह से बंद कर रखा था, स्अंजलि की आँखे एकदम बंद थी। बस वो खुद के हिप्स तेज चला रही थी, लम्बी साँसे ले रही थी, तथा मेरा लण्ड उसकी चूत में सटासट चल रहा था, उसकी चूत इतनी गीली हो चुकी थी कि लण्ड को चलने में कोई दिक्कत नहीं हो रही थी। फिर मैंने उसके बोबों से मुँह हटा कर गर्दन चूसने लगा…
स्अंजलि का मुँह खुल गया उसके हाथ मेरे पर से ढल गए तथा लम्बी लम्बी उम्म्म्म्म करने लगी !
मैं समझ गया कि स्अंजलि झड़ चुकी है तथा एक से ज्यादा बार झड़ चुकी है तथा खूब जोर से झड़ चुकी है। मैंने अपनी रफ़्तार बढ़ाई तथा ८-१० धक्को में मैं भी आता चला गया हर धक्के पर उसके मुँह से सिसकारी निकल रही थी। यकीन मानिए, मैं स्अंजलि पर पसर गया तथा मिनी को बोला- स्अंजलि तो कभी की झड़ चुकी है। मिनी को भी खूब चढ़ चुकी थी, उसकी आँखें मदहोश दिख रही थी तथा वो चुदना चाहती थी, मैंने स्अंजलि को छोड़ा तथा मिनी को सीधा किया। मिनी को ऊपर से नीचे तक सहलाने लगा, उस के मुँह से ऊह्ह् तथा उम्म्म्म जैसे कुछ निकलने लगा, उसकी आँखें मुंदी हुई थी,
स्अंजलि तो खुद ही हिलने की हालत में भी नहीं थी तो अब मैं ही मिनी से फोरप्ले करने लगा ताकि लण्ड वापस खड़ा हो। सच कहूं तो, मिनी ने मुझको कस लिया मैंने भी मिनी को जोर से भींच लिया मेरे लण्ड में तनाव आने लगा। असल में, मैंने मिनी के बोबे भींचे तथा उसका चेहरा चाटने लगा, वो भी मुझको जगह जगह से चूमने लगी। ध्यान देने वाली बात है कि, फिर उसने मुझको नीचे धकेला तथा मुझ पर चढ़ गई. मेरे पेट पर पैरों की ओर मुँह करके बैठ कर मेरे लण्ड को मुँह में चूसने लगी। लण्ड सख्त होने लगा, २ मिनट में तन गया, मैं अधलेटा होकर मिनी के बोबे दबाने लगा। फिर मिनी को खींच कर अपने पर लिया लिया तथा नीचे से उसकी चूत का छेद लण्ड पर सेट किया तथा नीचे से धक्के लगा कर लण्ड को अन्दर कर दिया। मेरे मुँह से आआआआआ निकला तथा मिनी के मुँह से हाययय्यय !
अब तो रुकना बेकार था, मिनी ने ऊपर से रगड़ना चालू किया तथा मैंने नीचे से धक्के लगाने तथा जीभ मिनी के मुँह में दे दी, बोबे भींच लिए। असल में, मिनी पूरी रफ़्तार में थी जरा सी देर बाद मिनी ने अपने हाथ मेरी गर्दन के नीचे लाकर कस दिए तथा मैंने उसकी पीठ पर अपने हाथ पूरी ताकत से कस लिए तथा जोर जोर से धक्के लगाने लगा, मिनी जोर से उम्म्म करते हुए ढेर हो गई उसकी साँसे लम्बी लम्बी चलने लगी तथा ज़रा सी देर में मेरे लण्ड में इतना तनाव आया कि मेरे वश से सबकुछ बाहर होता चला गया…
अचानक बरसात होने लगी तो आँख खुली, स्अंजलि हाथ में जग लेकर जल छिड़क रही थी मिनी भी जागी, घड़ी देखी तो १२ बज गए थे, हम तीनों एक दूसरे को देखकर हौले से मुस्कुरा रहे थे ,फिर तीनों एकसाथ आपस में बंध गए, एक दूसरे को चुम्बन किया तथा सबने वस्त्र पहने, बाल बनाए तथा कमरे को व्यवस्थित किया. फिर स्अंजलि बोली- चलो खाना होटल में खायेंगे। ठीक भी था कोई भी खाना बनाने की हालत में नहीं था. ओर्गास्म इतने जोरदार हुए थे कि हम सबके चेहरे एकदम मासूम लग रहे थे। स्अंजलि कार लाई थी, होटल में खाना खाया, स्अंजलि ने वेटर को जाने क्या इशारा किया तथा बोली चलो घर चलें !
मैं काउंटर पर पेमेंट करने लगा तो मिनी बोली- ये लेंगे ! चलो …
मैं समझ गया कि स्अंजलि का रसूख काफी है। फिर घर पर आइसक्रीम खाने के बाद स्अंजलि बोली- मेरा गिफ्ट ??
मैंने कान पर हाथ लगाए तथा जयपुर से भेजने का वादा किया … उसके मुँह पर मुस्कराहट तैर गई। उसने मुझको बस स्टैंड छोडा,
मेरे चेहरे पर बिछुड़ने की उदासी आ गई, तो उन दोनों ने कहा- नीरू एक बार हम दोनों आयेंगे तुम्हारे शहर…
मैं उनकी यादों में खोया हुआ कब अपने शहर आ लगा, पता ही नहीं चला.
आज १५ रोज बाद भी वो अनुभूति ऐसे लगती है जैसे कल की सी बात हो…
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