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एक अनसुनी दास्तान: हॉस्पिटल में नर्स के साथ लेस्बियन सेक्स

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नमस्कार दोस्तों, मैं Thor आपके सामने अपनी अगली, लेस्बियन सेक्स की कहानी लेके आया हूं। मेरी कहानियों को आप सब का काफी प्रेम मिल रहा है, उसके लिए मैं आपका दिल से शुक्कीर्ति करता हूं। ये जो कहानी है, वो दिल्ली की मंजू की है। तो चलिए शुरू करते है मंजू की कहानी, उसी के शब्दों में। हैलो दोस्तों, मेरा नाम मंजू है, तथा मैं 21 साल की हूं। मैं कॉलेज अंतिम वर्ष की छात्रा हूं। आपको बता दूं कि, मेरा रंग ठीक-ठाक गोरा है, तथा ऊंचाई 5’2″ है। फिगर साइज मेरा 34-30-36 है। ये कहानी हॉस्पिटल की नर्स के साथ हुए मेरे लेस्बियन सेक्स की है। तो चलिए शुरू करते है। तीन महीने पहले मैं एक सड़क हादसे का शिकार हो गई थी। मैं अपनी एक्टिवा पर कॉलेज से आ रही थी, तथा पीछे से एक बेकाबू गाड़ी ने मेरी एक्टिवा को ठोक दिया। मैं हवा में उड़ कर नीचे गिरी, तथा मेरा दाहिना हाथ तथा पैर दोनों में काफी चोट लग गई। आस-पास खड़े लोगों ने मुझे हॉस्पिटल पहुंचाया। डॉक्टर ने चेक किया तो पता चला कि मेरा हाथ तथा पैर दोनों में फ्रैक्चर लगने वाला था। फिर उन्होंने मेरे ज़ख्म साफ किए, तथा हाथ तथा पैर दोनों में प्लास्टर लगा दिए। क्योंकि घर में सिर्फ मैं तथा पापा ही रहते है, तथा मेरे पापा की जॉब है, तो हमने मेरे हॉस्पिटल में ही रहने का फैसला किया, ताकि वहां पर मेरी ठीक से देखभाल हो सके। वहां एक रेनू नाम की नर्स को मेरी देखभाल का काम दिया गया। असल में, रेनू 28 साल की एक तलाकशुदा लड़की थी। उसका रंग सावला था, तथा फिगर 36-32-36 था। वो बड़ी हसमुख थी, तथा बड़े अच्छे से मेरा खयाल रखती थी। कुछ दिन बीत गए, तथा अब रेनू मेरी सहेली बन चुकी थी। हम दोनों काफी बातें करते थे, तथा खूब मजाक चलता था। अब मेरे हाथ तथा पैर भी काफी ठीक हो चुके थे। मेरे हाथ का प्लास्टर तो उतर गया था, परन्तु पैर का बाकी था। मुझे 15 दिन हो चुके थे हॉस्पिटल में, तथा मैं अब बोर होने लगी थी। जब तक रेनू मेरे साथ होती थी, तब तक तो ठीक था। परन्तु जब वो नहीं होती थी, तो वक्त बीतता ही नहीं था। एक दिन निशा के 8 बज चुके थे, तथा रेनू किसी ऑपरेशन में डॉक्टर की मदद कर रही थी। मैं काफी बोर हो गई थी। मैं अपने बॉयफ्रेंड से भी नहीं मिली थी काफी दिन से, तथा मुझे उसकी याद आ रही थी। मैं अपने बॉयफ्रेंड का मुझे कामुक तरीके से छूना, मुझे किस्स करना, मेरे बूब्स को दबाना, निप्लस के आस-पास उंगली फेरना, चूत में उंगली करना, ये सब चीज़ें काफी मिस कर रही थी। फिर मैंने सोचा कि अब बॉयफ्रेंड तो वहां आ नहीं सकता था, तो क्यों ना मैं खुद ही अपनी चूत को शांत कर लूं। ये सोच कर मैंने अपने पजामे में हाथ डाला, तथा आँखें बंद करके अपनी चूत सहलाने लगी। बड़े दिनों बाद मैं अपनी चूत को छू रही थी, तथा मुझे बड़ा सुकून मिल रहा था। मेरी चूत काफी पानी छोड़ रही थी। फिर सहलाते-सहलाते मैंने अपनी चूत में उंगली डाल कर अंदर-बाहर करनी शुरू कर दी। अब मेरा आनंद तथा भी बढ़ गया। मेरा अपना रूम था, इसलिए मुझे किसी के देखने का कोई डर नहीं था। मैं पूरी तरह से मदहोश थी, तथा मुझे बिल्कुल इस बात का पता नहीं चला कि रेनू पिछले 4 मिनट से मेरे रूम में आके मेरी हरकतें देख रही थी। ध्यान देने वाली बात है कि, मुझे ये तब पता चला, जब रेनू ने मेरा हाथ पकड़ा। मैं फुल स्पीड से चूत में उंगली अन्दर-बाहर कर रही थी। तभी रेनू ने मेरे हाथ पर हाथ रख दिया। मैं एक-दम से घबरा गई, तथा अपनी आँखें खोली। सामने रेनू खड़ी थी। मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा था कि मैं क्या बोलूं। रेनू मेरी तरफ देख कर अलग तरह से मुस्कुरा रही था। इससे पहले कि मैं उसको देने के लिए कोई जवाब सोच पाती, रेनू ने मेरा पजामा तथा पैंटी एक साथ नीचे किए, तथा मेरी चूत पर अपना मुख लगा दिया। उसके ऐसा करते ही मेरे मुख से आह निकल गई। मैं कुछ समझ नहीं पा रही थी। तभी रेनू ने एक हाथ से मेरी चूत का मुख को खोला, तथा उसमें जीभ अंदर-बाहर करने लग गई। इससे मुझे काफी आनंद आने लगा। मेरे हालात कुछ ऐसे थे, कि मेरा दिमाग उसको रोकने के लिए बोल रहा था, परन्तु चूत कह रही थी कि जो हो रहा था होने दूं। फिर मैंने चूत की सुनी, तथा जो वो कर रही थी, उसको करने दिया। मैंने अपना एक हाथ उसके सर पर रखा, तथा उसके सर को अपनी चूत में दबाने लग गई। मुझे काफी आनंद आने लग गया। रेनू ने चूत चाटने की गति बढ़ा दी। मेरे मुख से आह आह की सिसकियां निकलनी शुरू हो गई। करीबन 2 से 3 मिनट में मेरी चूत ने पानी छोड़ दिया, जिसको रेनू पूरा पी गई। फिर रेनू सीधी हुई, तथा उसने मेरी तरफ देखा। मैं भी उसको देख रही थी। फिर उसने अपने होंठ मेरे होंठों से चिपका दिए, तथा मेरे होंठ चूसने लगी। मैं भी उसका किस्स में साथ देने लगी। यकीन मानिए, कुछ देर तक हम दोनों एक-दूसरे के होंठ चूसते रहे, तथा बूब्स दबाते रहे। मैं फिर से काफी उत्तेजित हो गई थी। फिर वो मुझसे दूर हुई, तथा जल्दी से जा कर दरवाजा अन्दर से बंद कर दिया। फिर वापस आते हुए वो मुझे देख कर अपने वस्त्र उतारने लगी। मैंने भी उसके मुझ तक पहुंचने तक अपने वस्त्र उतार दिए। अब हम दोनों नंगी थी। यकीन मानिए, वो मेरे ऊपर आ गई, तथा हम दोनों फिर से किस्स करने लगे। हमारे नंगे बदन एक-दूसरे की उत्तेजना बढ़ा रहे थे। कुछ देर किस्स करने के बाद हम दोनों 69 पोजीशन में आ गए। अब मेरी चूत उसके सामने थी, तथा मेरी उसके सामने। उसकी चूत से मनमोहक कोमल आ रही थी। हम दोनों ने एक-दूसरे की चूत को चाटना, चूसना, उसमें उंगली करना शुरू कर दिया। हम दोनों को ही बड़ा आनंद आ रहा था। हम लगातार 15 मिनट तक ऐसे ही करते रहे, तथा फिर आह आह करते हुए हम दोनों ने अपना-अपना पानी एक-दूसरे के मुख में निकाल दिया। फिर रेनू उठी, तथा वस्त्र पहन कर वहां से चली गई। उस दिन के बाद हमारे बीच कुछ नहीं हुआ। फिर कुछ दिनों में मैं हॉस्पिटल से वापस घर आ गई, तथा रेनू से दोबारा मुलाकात नहीं हुई। कहानी की फीडबैक [email protected] पर दें।