एक अनसुनी दास्तान: पोर्न देख मैडम संग लेस्बियन सेक्स
मेरा नाम अंजलि है और मैं दिल्ली की रहने वाली हूं. अभी मैं 26 साल की हूं. दिल्ली यूनिवर्सिटी में पढ़ाई कर रही हूं. जहां मैं रहती हूं वह मेरा अपना घर नहीं है. मैं अपने चाचा-मैडम के घर पर रहताी हूं. मेरा कॉलेज मेरे घर से दूर था इसलिए मेरे पेरेन्ट्स ने कहा कि मैं चाचा-मैडम के घर रह लूं.
मैडम के घर में हम तीन लोग ही हैं. मेरे चाचा-मैडम को एक बेटा है. वो बेंगलुरु के इंजीनियरिंग कॉलेज में वहीं पर रहकर पढा़ई कर रहा है. वो अपने सेमेस्टर के एंड में ही घर पर आता है जब उसकी छुट्टियां होती हैं.
मेरे चाचा की किराने की दुकान है. किराने की दुकान काफी बड़ी है और उससे उनको अच्छी कमाई हो जाती है. चाचा सुबह से शाम तक दुकान पर ही रहते थे. मेरी मैडम घर के कामों में व्यस्त रहती थी. जिस रोज मेरी छुट्टी होती थी तो उस रोज मैं भी मैडम की मदद घर के कामों में करती थी.
सेक्स के बारे में मुझे पहले से ही पता था. मेरे कॉलेज की लड़कियां अक्सर अपने बॉयफ्रेंड के बारे में बातें करती रहती हैं. इसलिए मैं भी उनके साथ मजे लेती हूं. मगर मेरा अपना कोई ब्वॉयफ्रेंड नहीं बना था. मैंने कभी कोशिश भी नहीं की क्योंकि मैं अपनी पढ़ाई पर ज्यादा ध्यान देती रहती थी.
सहेलियों के ब्वॉयफ्रेंड के बारे में सुन सुन कर मुझे भी सेक्स के लिए जिज्ञासा होती थी. मैं कई बार इंटरनेट पर सेक्स साइट देख लिया करती थी. आजकल इंटरनेट पर पोर्न साइट आसानी से उपलब्ध होती हैं. जब भी मेरा मन करता था मैं पोर्न मूवी देखते हुए अपनी चूत में उंगली कर लिया करती थी.
ऐसे ही एक बार मोबाइल पोर्न साइट में पोर्न वीडियो देख रही थी. वहां पर मैंने देखा कि एक औरत दूसरी औरत के साथ सेक्स वाली क्रियाएं कर रही थी. मुझे पता था कि मर्द का लिंग जब औरत की योनि में जाता है तो उसको आनंद आता है. मगर दो औरतों के सेक्स के बारे में उस रोज मैंने पहली बार देखा था.
फिर मैंने वो वीडियो अपने फोन के मोबाइल वीडियो प्लेयर में चलाया तो मुझे लेस्बियन सेक्स के बारे में पता लगा. उससे संबंधित और भी वीडियो नीचे अपने आप ही सूचीबद्ध तरीके से दिखाई दे रहे थे. मैंने एक-एक करके वो सारे वीडियो देखे और धीरे-धीरे मैं गर्म हो गयी.
लेस्बियन पोर्न फिल्म देखते हुए मैंने अपनी चूत में उंगली करना शुरू कर दिया. मुझे काफी आनंद भी आया. फिर ऐसे ही एक रोज मेरी कॉलेज की फ्रेंड ने भी मुझे मोबाइल लेस्बियन पोर्न क्लिप दिखाई. अब मुझे यकीन हो गया था कि एक औरत भी दूसरी औरत के साथ सेक्स का आनंद ले सकती है.
वे सेक्स वीडियो क्लिप देख कर मैं काफी गर्म हो जाती थी. अब मेरा भी मन करने लगा था कि मैं भी किसी के साथ लेस्बियन सेक्स करने के लिए ट्राई करूं. ब्वायफ्रेंड के साथ तो सेक्स नहीं हो सकता था क्योंकि मेरा कोई ब्वायफ्रेंड बना ही नहीं था. हां मगर लेस्बियन सेक्स तो मैं ट्राई कर ही सकती थी.
एक रोज जब मैं कॉलेज से घर आई तो मैंने मैडम को एक स्लीवलेस नाइटी पहने हुए देखा. उसमें मैडम के बूब्स भी दिखाई दे रहे थे. ऊपर से देखने पर मैडम की चूचियां आंधी नंगी दिखाई दे रही थीं. उनकी चूचियों को देख कर मैं थोड़ा एक्साइटेड हो रही थी.
मैंने देखा कि मैडम ने अपनी आर्मपिट शेव कर रखी थी. उनकी बिना बालों वाली चिकनी सी आर्मपिट देख कर मेरा मन उनको चाटने के लिए करने लग गया. यह सोच कर ही मेरी चूत गीली होना शुरू हो गयी थी. उस रोज के बाद से मैडम को देखने का मेरा नजरिया बदल गया था.
मैडम के साथ मैं लेस्बियन सेक्स करते हुए उनको चोदने का मन बना चुकी थी. अब मेरी कोशिश रहती थी कि मैं किसी न किसी बहाने से मैडम के करीब आऊं. इसके लिए मुझे मैडम की सेक्स लाइफ को भी देखना था. मैं जानना चाहती थी कि वो अपनी सेक्स लाइफ को कितना इंजॉय कर रही है.
इसके लिए मैंने चाचा-मैडम की चुदाई देखने का फैसला किया. जब चाचा घर आते थे तो मैं उनके रूम के आस-पास ही घूमने लग जाती थी. वो घर आकर खाना खाते थे और फिर उनके रूम का दरवाजा बंद हो जाता था.
एक रोज की बात है कि उनके रूम का दरवाजा बंद होते ही मैं उनके कमरे के पास आ गयी. मुझे खिड़की से कुछ दिखाई नहीं दे रहा था. खिड़की पर पर्दा लगा हुआ था. फिर मैंने उनके रूम डोर के चाबी वाले छेद से झांक कर देखा.
मैंने देखा कि चाचा अपने कपड़े उतार रहे थे. जब वो अपने कपड़े उतार रहे थे तो मैंने देखा कि चाचा की बॉडी देखने में कुछ खास नहीं लग रही थी. वो थोड़े से मोटे थे और उनका पेट काफी निकला हुआ था.
फिर उन्होंने अपनी पैंट को उतारा. मैडम बेड पर लेटी हुई थी. चाचा ने अपना अंडआर्यनयर नीचे किया और मुझे उनकी गांड दिखाई दी. उन्होंने अंडआर्यनयर को नीचे करके मैडम की नाइटी को ऊपर उठा दिया. चाचा का लंड भी छोटा ही लग रहा था.
चाचा का लंड खड़ा हुआ था और उन्होंने मैडम की नाइटी को उठाकर उनकी चूत को नंगी कर दिया. मैडम ने नीचे से कच्छी भी नहीं पहनी थी. फिर चाचा ने उनकी टांगों को चौड़ी किया और मैडम की चूत में लंड डाल कर हिलने लगे. उनसे ठीक तरह से धक्के भी नहीं लगाये जा रहे थे.
टांगों को पकड़ कर मैडम की चूत में तीन-चार धक्के लगाने के बाद ही वो रुक गये और एक तरफ गिर गये. फिर मैं भी वहां से आ गयी. अपने रूम में आकर मैं सोचने लगी कि इतनी देर में मैडम की चूत को क्या आनंद आया होगा!
मगर चाचा-मैडम की चुदाई देख कर मैंने अपने मोबाइल में पोर्न साइट खोल ली. मैं अब लेस्बियन पोर्न वीडियो ही ज्यादा देखती थी. मैंने एक लेस्बियन सेक्स साइट खोली और लेस्बिनय वीडियो देखते हुए मैं अपनी चूत को सहलाने लगी.
उस लेस्बियन वीडियो में दो नंगी जवान लड़की थी. दोनों ही काफी सुन्दर थीं. उन दोनों ने एक दूसरे के कपड़े उतारने शुरू किये. पहली ने दूसरी की ब्रा के ऊपर से ही उसकी चूचियों को दबाया. उसको लिप किस करते हुए उसकी ब्रा को खोलने लगी. उसने फिर उसकी चूचियों को नंगी कर दिया.
नंगी चूचियां होते ही वो उसकी चूचियों को मुख में लेकर पीने लगी. अब दूसरी वाली नंगी लड़की ने भी अपने हाथों से पहली वाली की चूचियों को दबाना शुरू कर दिया. फिर वो दोनों पूरी की पूरी नंगी हो गईं.
दोनों एक दूसरे के जिस्मों को चूमने लगीं. कभी पहली वाली दूसरी की चूचियों को पी रही थी. ऐसे ही दूसरी वाली पहली वाली नंगी लड़की की चूचियां चूस रही थी. मुझे ये सब देख कर अपनी चूत में उंगली करते हुए काफी आनंद आ रहा था.
फिर एक लड़की ने अपनी चूत पर डिल्डो बांध लिया और वो दूसरी की चूत में उस डिल्डो से चोदने लगी. उनको देख कर ऐसा लग रहा था कि मर्द और औरत की चुदाई चल रही हो.
मैं भी अपनी चूत को तेजी के साथ सहलाने लगी और मेरी चूत ने भी जल छोड़ दिया.
उसके बाद मैं सो गयी. अब मैंने दूसरे रोज भी चाचा-मैडम की चुदाई देखी. फिर तीसरे रोज भी चाचा मेरी मैडम की चूत में तीन-चार धक्के लगाने के बाद ही झड़ गये. मैंने देखा कि चाचा बेड पर आते और मैडम की नाइटी उठा कर उनकी बुर में अपना लंड डाल कर तीन-चार धक्के लगाते और फिर झड़ जाते. फिर उसके बाद सो जाते.
मुझे यकीन हो गया था कि मैडम ठीक तरह से सेटिस्फाई नहीं हो पा रही है.
अब तक मेरे सेमेस्टर एग्जाम शुरू हो गये थे. मैंने पढ़ाई में ध्यान देना शुरू किया. एग्जाम खत्म होने के बाद मेरी छुट्टियां हो गईं. अब मैं घर पर ही रह रही थी.
अब मेरा मकसद एक ही था कि मैं किसी तरह मैडम के साथ लेस्बियन सेक्स का आनंद लूं. मैं हर संभव प्रयास कर रही थी कि मैडम को चोद सकूं. जब भी मैडम नहाने के लिए जाती थी तो मैं उनको छिप कर देखा करती थी.
मैडम बाथरूम का दरवाजा खोल कर नहाया करती थी. घर में मेरे और मैडम के सिवा कोई होता नहीं था. मैडम को भी शक नहीं हो सकता था क्योंकि घर में कोई मर्द तो रहता ही नहीं था. इसलिए वो निश्चिंत होकर बाथरूम के दरवाजे को खुला छोड़ देती थी. मैं इसी बात का फायदा उठा रही थी.
एक रोज मैं मैडम के नंगे बदन को देखने की फिराक में थी. मुझे पता था कि मैडम किस टाइम पर बाथरूम में नहाने के लिए जाती है. मैं उनके रूम पर नजर लगाए हुए थी. मगर वो उस रोज अपने रूम से नहीं निकल रही थी. मैंने धीरे से उनके रूम में झांक कर देखा.
अंदर का नजारा देख कर मैं दंग रह गई. मैंने देखा कि मैडम अपने रूम में बेड पर लेटी हुई थी. उसने अपनी मैक्सी को ऊपर किया हुआ था. अपनी टांगें फैला कर वो अपनी चूत में कुछ घुसा रही थी. मैंने ध्यान से देखा तो पता लगा कि वो पेंसिल टॉर्च को अपनी चूत में दे रही थी.
मैडम के मुख से सिसकारियां निकल रही थीं मगर दबी सी आवाज में. वो अपनी चूत को शांत करने की कोशिश कर रही थी.
ये नजारा देख कर मैं वहीं पर ठहर गई. उनको ऐसा करते हुए देख कर मेरी चूत में भी जल आना शुरू हो गया. उस रोज मैंने किसी तरह खुद को कंट्रोल किया. फिर मैडम नहाने के लिए चली गई.
मैं समझ गयी थी कि मैडम भी प्यासी है. अब मैडम की चूत तक पहुंचने का रास्ता मुझे साफ दिखाई दे रहा था. एक रोज दोबारा से मैंने मैडम को हाथ से अपनी चूत की मैथुन करते हुए देखा. उस रोज मुझसे रहा नहीं गया.
अपने कपड़े उतार कर मैं पूरी नंगी हो गयी. तब तक मैडम ने अपनी चूत में वो टॉर्च डाल ली थी. वो आंखें बंद किये हुए अपनी चूत में टॉर्च को घुसा कर आनंद ले रही थी. मैं चुपके से उनके रूम में अंदर घुस गयी और मैडम के पास पहुंच गयी.
बेड पर जाकर मैंने एकदम से मैडम की टांगों को पकड़ लिया. इससे पहले कि मैडम कुछ समझ पाती मैंने उनकी चूत से टॉर्च हटाई और अपनी जीभ को उनकी चूत में लगा दिया. मैं तेजी के साथ मैडम की चूत को चाटने लगी.
वो पहले से ही काफी उत्तेजित थी इसलिए उसने मुझे रोकने या हटाने की कोशिश नहीं की. मैं भी मैडम की चूत चाट कर उनकी चूत को चूसने का आनंद लेने लगी. मैडम की चूत से नमकीन सा जल निकल रहा था जिसका टेस्ट मुझे काफी अच्छा लग रहा था. मैडम भी मेरी जीभ से चूत को चटवाने का आनंद लेने लगी.
अब मैंने मैडम को पूरी नंगी कर दिया. मैं भी नंगी थी और मैडम भी पूरी नंगी थी. मैंने उनके हाथों को ऊपर कर दिया और मैं उसकी बगलों (आर्मपिट) को चाटने लगी. मैडम मेरा पूरा साथ दे रही थी. मुझे बड़ा आनंद आ रहा था. मैं उनकी बगलों को चाटते हुए सूंघ रही थी.
उसके बाद मैंने मैडम को बेड पर चित लेटा दिया. मैंने उनकी दोनों टांगों को चौड़ी कर दिया. अब तक मेरी चूत से भी गीला पदार्थ निकलना शुरू हो गया था. मैंने अपनी गीली चूत को मैडम की चूत से सटा कर रगड़ना शुरू कर दिया.
मैडम की चूत पर अपनी चूत को रगड़ते हुए मुझे काफी आनंद आ रहा था. मैं जोर से अपनी चूत को उनकी चूत पर रगड़ रही थी. अब मैडम भी सिसकारियां ले रही थी. उनको भी अपनी चूत पर एक जवान लड़की की चूत के घर्षण में काफी आनंद आ रहा था.
अब मुझसे भी रुका नहीं जा रहा था. मगर पहले मैडम को आनंद देना चाह रही थी मैं. मैंने मैडम की चूत में उंगली करनी शुरू कर दी. मैडम की चूत में पांच मिनट तक उंगली की मैंने और उनकी चूत ने जल छोड़ दिया.
मैडम ने भी मेरी चूत को रगड़ा और फिर उसमें अपनी उंगली चलाने लगी. मुझे भी काफी आनंद मिल रहा था. मैंने मैडम के होंठों को चूस लिया. उनकी चूचियों को पीने लगी मैं. मैडम मेरी चूत में तेजी के साथ उंगली कर रही थी.
दस मिनट तक मैडम ने मेरी चूत को सहलाया और अपनी उंगलियों से मेरी चूत को चोद दिया. मैं भी एकाएक सिसकारी लेते हुए झड़ गयी. अब हम दोनों शांत हो गयीं. कुछ देर तक हम लेटी रहीं.
उसके बाद मैडम ने कहा- अंजलि, तुम मेरी सबसे अच्छी मित्र हो. तुमने मुझे आज खुश कर दिया. मैं रोज अपनी प्यासी चूत को शांत करने के लिए इसमें टॉर्च डाला करती थी.
मैंने कहा- मैं जानती हूं मैडम कि आप चाचा के लंड से चुदाई के बाद भी प्यासी रह जाती हो. मैंने कई बार झांक कर उनको आपकी चूत चोदते हुए देखा था. इसलिए मैंने आपकी मदद करने की सोची.
वो बोली- तूने कब देखा?
मैंने कहा- जब चाचा घर आते थे तो मैं बाहर से छिप कर आप दोनों की चुदाई देखा करती थी.
मेरी बात सुनकर मैडम थोड़ी हैरान हुई मगर फिर खुश हो गई और मुझे गले से लगा लिया.
वो बोली- ठीक है, तो फिर अब ये बात तुम्हारे और मेरे बीच में रहेगी. तेरे चाचा मुझे ठीक तरह से संतुष्ट नहीं कर पाते हैं. मैं भी उनको कुछ नहीं कहती हूं. मगर हम दोनों एक दूसरे को रोज ऐसे ही संतुष्ट किया करेंगीं.
मैंने कहा- ठीक है मैडम.
उस रोज के बाद से मैं और मैडम दोनों एक साथ ही नहाने लगीं. बाथरूम में मैं मैडम की चूत को चाटती थी और वो मेरी चूत को चाटा करती थी. वो मेरी चूत में उंगली करती थी और मैं मैडम की चूत में उंगली करती थी.
इस तरह से हम दोनों एक दूसरे की चूत को चोद कर आपस में एक दूसरे को खुश रखने लगी. हम दोनों में अब काफी मस्ती होती थी. उनको मैं रोज एक नयी पोर्न क्लिप दिखाया करती थी.
पोर्न वीडियो देखने में मैडम को भी काफी आनंद आता था. वो जल्दी ही गर्म हो जाती थी. फिर हम दोनों रोज एक नयी पोजीशन ट्राई करते थे. मैडम की चूत को मैं दांतों से काट लेती थी. उनकी चूत पर मैंने दांतों से काट कर लव-बाइट का निशान भी कर दिया था.
एक निशा को मैं चाचा और मैडम की चुदाई देख रही थी. चाचा ने उनकी चूत पर वो निशान देख लिया. वो पूछने लगे तो मैडम ने बहाना बना दिया कि चूत के झांट साफ करते हुए उनको लग गयी थी. फिर चाचा ने कुछ नहीं पूछा.
अब मैडम भी जानती थी कि मैं उन दोनों की चुदाई को छिप कर देखा करती हूं. मुझे लाइव चुदाई देखने का चस्का सा लग गया था. मगर मैडम को इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता था. इसलिए वो कई बार दरवाजा भी खुला छोड़ देती थी.
एक बार तो मैडम ने मेरे कहने पर खुद मुझे उनके रूम में छिपा दिया था. उस रोज मैंने चाचा और मैडम की चुदाई काफी करीब से देखी. चाचा का लंड वाकई में काफी छोटा था. वो काफी जल्दी झड़ जाते थे. उनका लंड पूरी तरह से खड़ा भी नहीं हो पाता था.
इसलिए मैडम और मैं एक दूसरे की जरूरत बन गये.
आपको मेरी स्टोरी के बारे में कुछ कहना हो तो मुझे नीचे दी गई मेल आइडी पर मैसेज करें. मैं आप सबके रेस्पोन्स का इंतजार करूंगी.
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