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दो बहनों की चुदाई

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प्रेषक : चोदू चोदू मेरा नाम बबलू है तथा मैं आगरा का रहने वाला हूँ। मेरे घर में तीन ही लोग हैं, मैं, पिताजी तथा माँ। बात उस समय की है जब मैं पढ़ता था। मेरे पड़ोस में शर्मा जी का घर था, उनकी दो बेटियाँ थी, एक तो मेरे साथ ही पढ़ती थी। यकीन मानिए, मैं पढ़ने में काफी होशियार था इसलिए कई बच्चे मुझसे सवाल पूछा करते थे तथा मैं भी सबकी मदद कर देता था। मैं अपने मोहल्ले का काफी सीधा लड़का था। अब मैं आप लोगो को शर्मा जी की बेटियों के बारे में बताता हूँ। यकीन मानिए, बड़ी का नाम सीमा तथा छोटी का अंशु था। दोनों की जवानी उभार पर थी पर छोटी वाली तो कुछ ज्यादा आगे थी। सीमा का फिगर बड़ा मस्त था 24-36-24, पर रंग थोड़ा सांवला था। अंशु तो गजब की बाला थी, गोरा रंग तथा गजब का फिगर ! ऐसा कि देखते ही चोदने का मन करे तथा कई लड़के तो खड़े-2 मुठ मार दें ! फिर भी मैं इन सब पर ध्यान नहीं देता था। एक रोज की बात है, मैं शाम को घर के बाहर टहलने निकला, तभी अंशु दौड़ती हुई मेरे पास आई तथा कहा- तनीषा आपको बुला रही है, उन्हें कुछ पूछना है। मैं चलने को तैयार हो गया तथा उसके पीछे पीछे उसके घर चला गया। यकीन मानिए, वहाँ देखा तो सीमा कुछ पढ़ रही थी। उसके मम्मी-डैडी कहीं बाहर गए हुए थे तथा घर पर बस वही दोनों थी। अंशु ने मुझे एक सोफे पर बैठाया तथा जल लेने चली गई। तब तक सीमा अपनी किताब लेकर मेरे पास आ गई। उसने आसमानी रंग की एकदम पतली नाइटी पहन रखी थी जिसमें से उसकी काली रंग की ब्रा-पैंटी साफ़ झलक रही थी। पहले तो मैं थोड़ा शरमाया पर सब सही हो गया। वो मेरे सामने वाली कुर्सी पर बैठ गई तथा सवाल पूछने लगी। असल में, सवाल पूछते-2 वो कुछ ऐसा कर रही थी कि उसके स्तन मुझे दिख जाएँ। मेरी नजरें उसके वक्ष पर अटक गई। वह अपनी सफलता पर थोड़ा मुस्कुराई तथा फिर आगे पूछने लगी। तब तक अंशु जल लेकर आ गई। वह आगे बढ़ी तथा एक कुर्सी से टकरा गई तथा जल मेरी पैंट पर गिर गया। मैं घबरा गया। सीमा के स्तन देखते हुए मेरा लंड एकदम कड़क हो गया था। अंशु ने मुझसे माफ़ी मांगी तथा एक तौलिया दे दिया। मैं बाथरूम में चला गया। तभी सीमा वहाँ आ गई तथा मेरा हाथ पकड़ लिया। मैं काफी डर गया तथा अपना हाथ खींच लिया। वो अंशु को बुलाते हुए बोली- देख रे कैसा शरमा रहा है, जैसे कभी लड़की ही नहीं देखी। यकीन मानिए, अंशु भी आ गई तथा वो दोनों मुझे बेडरूम में ले गई। आपको बता दूं कि, मैं सिर्फ अंडआर्यनयर तथा शर्ट में था। मुझे देख कर सीमा बोली- हाय रे ! कातिल कहाँ छुपा था अब तक? अब उन दोनों ने मुझ पर सेक्सी कमेंट्स करने शुरु कर दिए। मैं बेचैन हो गया तथा उनसे कहा- मुझे जाने दो ! पर वो भला कहाँ मानने वाली थी। अंशु ने पीछे से मुझे पकड़ लिया तथा मेरे शर्ट के बटन खोल दिए। सीमा भी आगे से मेरे ऊपर चढ़ गई तथा अपने स्तनों को मेरे सीने पर दबाने लगी तथा मुझे बेतहाशा चूमने लगी। मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा था। तब उसने मेरे अंडआर्यनयर में हाथ डाला तथा मेरे लिंग को दबाने लगी। सच कहूं तो, तभी अंशु ने पीछे से एक ब्लू फिल्म चला दी तथा कहा- तुम तो काफी ठंडे लगते हो, क्या पहले तुमने ये सब नहीं किया? मैंने ना में जवाब दिया। आपको बता दूं कि, ब्लू फिल्म देख कर मुझे भी जोश आने लगा तथा मेरा लिंग तनकर 8 इंच का हो गया। मैंने सीमा की नाइटी उतार दी तथा ब्रा के बाहर से ही उसके उरोजों को दबाने लगा। क्या सॉलिड बूब्स थे उसके ! मन तो कर रहा था कि काटकर खा लो। मैंने उसकी पैंटी में ऊँगली डाली तथा उसकी योनि में ऊँगली करने लगा। उसकी चूत में से जल आने लगा। मैंने उसकी ब्रा का हुक खोल दिया तथा पैंटी भी उतार दी, उसने भी मेरा अंडआर्यनयर उतार दिया। अब दोनों एकदूसरे के सामने नंगे खड़े थे। मैंने पहली बार चूत के दर्शन किए थे। उसकी गुलाबी रंग की चूत पर एक भी बाल नहीं था। उसके बड़े-2 चूतड़ उसको तथा हसीं बना रहे थे। मेरे लिंग को देखते ही वो बोली-कितने गंदे हो तुम ! कभी अपनी झांटें भी साफ़ कर लिया करो ! मैंने कहा- डर लगता है ! कहीं कट गया तो? उसने अपनी बहन अंशु से ब्लेड मंगाया तथा कहा- आओ, मैं तुम्हारी झांटें बना देती हूँ। वो मुझे बाथरूम में ले गई तथा झांटे साफ़ करने लगी तथा इस बीच मैं उसके स्तन दबाता रहा। इसके बाद उसने शॉवर चला दिया तथा हम दोनों उसके नीचे भीगने लगे। यकीन मानिए, एक तरफ जल तथा दूसरी तरफ आग, पर आज जल भी आग को नहीं बुझा पाया। उसने मेरा लिंग मुँह में ले लिया तथा चूसने लगी। मैं भी उसकी चूचियों को चूसता रहा तथा चूत में ऊँगली करता रहा। ध्यान देने वाली बात है कि, उसका बदन जलने लगा तथा कहने लगी- अब तथा न तड़पाओ मुझे। चोद दो इस चूत को। फाड़ दो इसे अपने फौलादी लंड से। मुझसे भी अब रहा नहीं जा रहा था। असल में, मैंने उसकी कमर पर हाथ लगाया तथा उसकी चूत पर निशाना लगाते हुए अपना लंड आगे दिया। पर मेरा लंड किनारे हो गया। उसकी योनि काफी कसी थी। आपको बता दूं कि, उसकी गुलाबी चूत शायद अभी तक कुंवारी थी। यकीन मानिए, मैंने २-३ बार कोशिश की पर सफल नहीं हुआ। फिर उसने मेरे लंड पर शैंपू लगाया तथा अपनी योनि पर भी। आपको बता दूं कि, अब धीरे से उसने मेरे लंड को योनि के मुख पर टिकाया तथा मुझसे धक्का लगाने को कहा, वो खुद भी धक्का लगाने लगी। शैंपू की चिकनाहट के कारण लिंग योनि में सरकता चला गया। आधा अन्दर जाते ही वो जोर से चिल्लाईई तथा बाहर निकालने के लिए कहने लगी। मैंने अपने होंठ उसके होठों पर रख दिए तथा उसके स्तन दबाने लगा। धीरे-2 उसका दर्द कम हुआ, तभी मैंने लिंग को थोड़ा बाहर खींच कर पूरी ताकत से पेल दिया। वो तड़प उठी। मैं फिर उसके होठों को चूमने लगा। धीरे-2 वो जोश में आने लगी तथा अपने चूतड़ उछाल-2 कर मजे लेने लगी। मैंने भी अपनी स्पीड बढ़ा दी। आपको बता दूं कि, करीब दस मिनट बाद वो झड़ गई तथा उसकी चूत ने जल छोड़ दिया पर मैं अभी भी लगा रहा। पाँच मिनट बाद मैंने भी वीर्य की पिचकारी उसकी चूत में छोड़ दी तथा उसके ऊपर लेट गया। तभी उसकी बहन अंशु वहाँ आ गई तथा कहने लगी- अब मेरी प्यास भी मिटा दो। मैंने देखा सीमा वहीं शॉवर के नीचे पड़ी है तथा उसकी चूत से जल तथा खून निकल रहा है। मैंने सीमा को वहीं छोड़ा तथा अंशु के पास पहुँच गया। जैसा मैंने पहले ही बताया था कि अंशु सीमा से भी ज्यादा सेक्सी माल थी तथा ऊपर से उसका गोरा रंग तथा गजब ढा रहा था। मुझे ऐसा लगा की कोई परी मेरे सामने खडी है तथा कह रही है- आओ, मुझे चोद दो, मेरी चूत की प्यास बुझा दो। मैंने उसे उठाया तथा बेड पर लिटा दिया तथा खुद उसके ऊपर लेट गया। उसने कसकर मुझे पकड़ लिया तथा उसकी चूचियों का नरम-2 एहसास मुझे अपने सीने पर होने लगा। मैंने उसके होंठों पर अपने होंठ रख दिए तथा चूसने लगा, धीरे से मैंने उसके होंठों को थोड़ा काट लिया। उसके पूरे बदन में आग लग गई, उसने भी मुझे चूमना शुरु कर दिया। फिर मैंने उसे थोड़ा अलग किया तथा उसके स्तन दबाने लगा। वो भी मेरा लिंग दबाने लगी तथा लिंग को चूसना शुरु कर दिया। मेरा लंड फिर खड़ा हो गया। मैं भी उसकी चूत में ऊँगली डालने लगा तथा उसके स्तनों को चूसने लगा। यकीन मानिए, अंशु की योनि तो सीमा से भी मस्त तथा कसी थी। उसको देख कर ऐसा लगता था मानो भगवान् ने फुर्सत में उसे बनाया है। तभी उसकी चूत ने जल छोड़ दिया तथा मैंने भी अपना वीर्य उसके मुँह में भर दिया, उसने पूरा वीर्य पी लिया तथा लिंग को चाट-2 कर साफ़ करने लगी। मेरा लिंग एक बार फिर मैदान में आ गया तथा इस बार उसका निशाना सिर्फ अंशु की चूत थी। अंशु भी उत्तेजित हो गई थी तथा बार-2 मुझे छोड़ने का निमंत्रण दे रही थी। मैंने उसकी गांड के नीचे तकिया लगाया तथा उसकी टांगों को अपने कंधे पर रख लिया। मुझे पता था कि अंशु की चूत भी अभी कुंवारी है इसलिए मैंने धीरे से उसकी योनि का मुँह फैलाया तथा उस पर लंड का सुपारा टिका दिया। मैं उसके होंठों को चूमता रहा तथा एक उसके पुष्ट उरोजों को दबाते हुए हल्का सा झटका दिया तथा मेरा लंड आधा अंशु की चूत में पंहुच गया। आपको बता दूं कि, वो दर्द से चीख पड़ी पर मैंने उसे ज्यादा मौका नहीं दिया तथा उसके होंठों को चूसता रहा। उसकी झिल्ली फट चुकी थी, मैंने उसका कौमार्य भंग कर दिया था। यकीन मानिए, मैंने थोड़ा पीछे होते हुए पूरी ताकत से लंड उसकी चूत में डाल दिया। वो तड़प उठी पर थोड़ी ही देर में उसे आनंद आने लगा तथा वो चूतड़ उछाल-2 कर साथ देने लगी। करीब 15 मिनट बाद वो झड़ गई। मैंने अपना लंड बाहर निकाला तथा उसे कुतिया की पोजिशन में कर दिया तथा फिर उसी तरह करीब आधे घंटे चलता रहा। तभी उसने कहा- बबलू, अब मैं झड़ने वाली हूँ। मैं भी झड़ने वाला था, मैंने अपनी स्पीड बढ़ा दी तथा हम दोनों एक साथ स्खलित हो गए। वो मुझसे चिपक गई तथा निढाल हो गई। उस निशा हम तीनों ने चुदाई के कई राउंड चलाये। जिसमें दो बार मैंने उन दोनों की गांड मारी तथा चूत को फाड़ कर भोंसड़ा कर दिया। उसके बाद भी हमे जब भी मौका मिलता हम पूरा फायदा उठाते। अंशु की चूत तो अब भी वैसी ही टाइट लगती है। कई बार मैंने उनकी सहेलियों के साथ भी सम्बंध बनाए। पर यह अगली बार। यह कहानी आप लोगों को कैसी लगी, जरूर बतायें, मुझे ईमेल करें ! 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