लुटने को बेताब जवानी-2
कहानी का पिछले भाग
लुटने को बेताब जवानी-1
से आगे:
अन्तर्वासना डॉट कॉम पर पिछले भाग में आपने पढ़ा कि मुश्ताक तथा अंजुम दोनों ने मेरा एक एक मम्मा मुख में लिया हुआ था जिससे मस्त हो कर मैं स्खलित हो गई थी तथा उनके बालों में हाथ फिराते हुए सिमटते हुए उनको अपने सीने में भींच रही थी। उन्हें भी पता चल गया कि मैं झड़ गई हूँ, मेरी सांसें तेज़ हो गई थी तथा हल्की सी आवाज़ें भी निकाल रही थी तथा जोर जोर से उनके बालों को सहलाने लगी थी। पहली बार ऐसा एहसास हुआ था, इससे पहले मैंने खुद ही अपने मम्मे सहलाये थे पर आज दो व्यक्ति एक साथ मेरे चूचियों से खेल रहे थे, चूस रहे थे, मैं जन्नत की सैर कर रही थी। अब अंजुम ने वहां से मुख हटाया तथा नीचे की तरफ ले जाने लगा। मुश्ताक ने मेरे मम्मे चूसते हुए हाथ को नीचे ला मेरी सलवार के नाड़े को खोल दिया। उसका कठोर हाथ में सलवार के अंदर मेरी पेंटी के ऊपर घूमने लगा। ध्यान देने वाली बात है कि, मेरी योनि मचलने लगी, मेरी कामवासना बढ़ने लगी, मैं फिर से गर्म होने लगी। तभी अंजुम ने मेरी सलवार नीचे खिसका दी तथा नीचे से टांगों चूमता हुआ ऊपर आने लगा। मुश्ताक पेंटी से हाथ हटा कर फिर मम्मे पर ले आया। अंजुम ने अपना मुँह मेरी पेंटी पर रख दिया। मैं अपनी हालत बता नहीं सकती!
तेज़ सांसों के साथ सिसकरियाँ भी निकलने लगी थी। एक व्यक्ति मेरे दोनों मम्मो से खेल रहा था दूसरा मेरी योनि में हलचल पैदा कर रहा था। तभी अंजुम ने अपने दांतों से मेरी पैन्टी नीचे सरका दी तथा चूत पर हाथ फिराने लगा। मैं गनगना उठी, ऊपर से नीचे तक सिहर उठी तथा कांपने लगी। सच कहूं तो, उसने एकदम से अपनी ऊँगली मेरी चूत में डाल दी, मेरी चीख निकल गई। सच कहूं तो, फिर उसने मुझसे पूछा- रीना तुमने पहले किसी से चुदवाया है?
मैंने न में सर हिला दिया। “तब तो बड़े प्यार तथा आराम से चोदना पड़ेगा!”
मुश्ताक मेरी ऊपर सरकी ब्रा का हुक खोल रहा था। ब्रा के खुलते ही उसने मेरे ऊपर के वस्त्र उतार दिए, मैं उनके सामने पूरी नंगी पड़ी हुई थी। अंजुम ने मुश्ताक से कहा- भाई, क्या करें? यह अभी कुंवारी है, कहीं पंगा न पड़ जाए?
“इसी से पूछ लो! अगर शोर न मचाये तो ले लेंगे!” मुस्ताक ने कहा। उसने मुझसे पूछा- करवाने का मन है?
मैंने कहा- तुम्हारी मर्ज़ी!
“चीखोगी तो नहीं ना?”
मैंने ना में सर हिला दिया। मुश्ताक ने कहा- हम जरा देख लें कि कितनी कसी है!
उसने अपनी ऊँगली मेरी चूत में डाल दी, मैंने होंठों को भींच लिया, मेरी चूत गीली हो गई थी पर फिर भी दर्द हुआ था। अंजुम ने अपने वस्त्र उतार दिए थे तथा अपने लिंग को मुझे दिखाता हुआ पूछने लगा- इसे ले लोगी?
मैंने हाँ में सर हिलाते हुए उसे स्वीकृति दे दी क्योंकि मै अब पूरा मज़ा लेना चाहती थी। सच कहूं तो, अब अंजुम ने मेरी टाँगें फैला दी तथा धीरे से ऊँगली डाली तथा थोड़ी देर तक उसे अंदर बाहर करता रहा। मुश्ताक ने अपना पजामा उतार दिया तथा अपने लिंग को मेरे हाथ में दे दिया। सच कहूं तो, बीच-बीच में वो मेरे मम्मे भी मसल देता था तथा चूस भी लेता था तथा फिर अपना लिंग पकड़ा देता था। मेरी आँखों में नशा सा छा गया था, मदहोश होती जा रही थी मैं!
इसी बीच अंजुम ने अपना लिंग मेरी योनि के ऊपर रखा तथा एक धीरे से झटका मार कर योनि में प्रवेश कर दिया। मैंने ध्वनि को दबाते हुए हल्की चीख मारी- आ हह हह हाय मर गई, काफी दर्द हो रहा है अंजुम! छोड़ दो!
उसने कहा- अभी ठीक हो जायेगा रानी! थोड़ा सा बर्दाश्त कर लो!
और उसके तीन चार झटकों ने ही मुझे फिर चरमसीमा पर ला दिया। मैंने मुश्ताक का लिंग जोर से भींच दिया तथा सिमटती चली गई पर अंजुम मेरी लिए जा रहा था, मेरा दर्द पहले से हल्का हो गया था पर इस दर्द में भी काफी मज़ा आया। अंजुम के झटके भी पहले से तेज़ हो गए थे। कुछ देर में उसने मेरी चूत को कुछ गर्म सा एहसास करवाया यानि कि उसने अपना वीर्य मेरी योनि में उड़ेल दिया। थोड़ी देर मेरे ऊपर लेटने के बाद वो हटा, मैं भी उठ कर बैठ गई। तभी मेरी नज़र उसके लिंग पर पड़ी जिस पर खून लगा हुआ था। मैंने कहा- अंजुम देखो, तुम्हारे वहाँ से खून बह रहा है!
वो बोला- रानी, यह मेरा नहीं है, तुम्हारी चूत से बह रहा है, तुम्हारी सील टूट गई है!
मैं यह देख कर रोने लगी तो दोनों मुझे समझाने लगे- बेबी, पहली बार सब के साथ होता है! घबराओ मत!
मुश्ताक मुझे प्यार करने लगा, पहले मेरे बालों को सहलाया फिर मुझे लिटा दिया। अंजुम बगल में लेट गया, मुश्ताक मेरे नंगे बदन पर हाथ फेरता मुझे गर्म कर रहा था। रह रह कर वो मेरे गालों को, गले को, मम्मों को चूसता जा रहा था। अंजुम बगल में लेटा रहा, मुश्ताक ने तो मेरे मम्मे चूस चूस कर लाल कर दिए थे, मेरे चुचूक तन गए थे जिससे मुश्ताक को एहसास हो गया कि लड़की गर्म है। अब उसकी बारी थी मेरी लेने की, उसने कहा- मेरे ऊपर आओगी?
मैंने कहा- जैसी तुम्हारी मर्ज़ी!
उसने मुझे उठा दिया तथा नीचे लेट गया। फिर अपने लिंग की तथा इशारा कर के कहने लगा- बेबी इसको थोड़ी देर के मुँह में डाल लो तथा चूसो!
मैंने मना किया तो कहने लगा- इससे अंदर डालने पर तुम्हें कम दर्द होगा!
इसका लिंग अंजुम से ज्यादा बड़ा लग रहा था, मैंने फिर उसका लिंग मुँह में डाल लिया कुछ देर तक चूसती रही। फिर उसने कहा- अब इसे अपनी फुद्दी में ले लो!
उसने मुझे अपनी टांगों पर बिठाया तथा लिंग मेरी योनि में डाल दिया। असल में, मैं चीख पड़ी, इसमें ज्यादा दर्द हुआ था क्योंकि एक ही बार में सारा का सारा लंड मेरी चूत में समां गया था। पर थोड़ी देर में मैं दर्द के साथ मजे भी लेने लगी थी। रात के ढाई बज चुके थे, ऊपर से चुदते हुए मैंने कहा- अब मुझे जाने दो, काफी समय हो गया है!
बस थोड़ी देर! मेरा हो लेने दो!
मैं मस्ती से भरी हुई थी, हल्की आवाज़ें निकालती हुई फिर झड़ने वाली थी। मुश्ताक ने तो बुरा हाल कर दिया था। मैं झड़ गई, उसके सीने पर गिर गई तथा लिपट गई पर उसके झटके नीचे से चालू थे। फिर उसने मुझे नीचे गिरा लिया तथा मेरी टाँगें फैला कर ऊपर से मेरी लेने लगा। यह काफी बुरी तरह से मुझे चोद रहा था। सच कहूं तो, अंजुम साथ में लेटा सब कुछ देख रहा था। सच कहूं तो, अब उसने भी मेरी चूचियों के साथ छेड़छाड़ शुरू कर दी थी। तीन बजने वाले थे पर वो झड़ने का नाम ही नहीं ले रहा था। असल में, मैं एक बार फिर स्खलित हो गई तब कही थोड़ी देर में जाकर उसने तेज़ झटको के साथ मेरी चूत में फव्वारा मारा तथा निढाल हो कर मुझसे लिपट गया। मैंने कहा- अब मुझे जाने दो! घरवालों के जागने का समय हो गया है। दर्द काफी हो रहा था, मुश्ताक से ब्रा की हुक लगवाई तथा किसी तरह सलवार कमीज़ पहनकर लंगड़ाती हुई नीचे अपने कमरे में आ गई। कमरे में आकर मैंने देखा कि मेरी योनि से अभी भी खून निकल रहा था। उसके कुछ रोज बाद तक यानि कि 3-4 रोज तक मैंने उनसे बात भी नहीं की। वो नज़रें मिलाने की कोशिश करते रहे। लेकिन चौथे रोज मेरा मन फिर मचलने लगा तथा इशारों में रात का आमंत्रण दे दिया। यकीन मानिए, करीब दो महीने वो हमारे यहाँ रहे तथा मैं हर दूसरे-तीसरे रोज उनसे चुदवाने चली जाती थी। जाने से पहले वो कह कर गए कि हम अगले साल भी आपके यहाँ आयेंगे पर वो फिर कभी नहीं आये। मेरी फ्री सेक्स स्टोरी कैसी लगी? मुझे मेल करें!
आपके ढेर सारे प्यार के लिए धन्यवाद!
आपकी रीना!
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