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मजेदार किस्सा: कोटा कोचिंग की लड़की का बुर चोदन-2

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मेरी सेक्सी कहानी के पहले भाग कोटा कोचिंग की युवती का बुर चोदन-1 में अब तक आपने पढ़ा कि एक ईमेल के माध्यम से नूपुर जैन ने मुझे बताया कि वह मुझसे चुदवाना चाहती थी, उसने मुझे अपने पास कोटा बुला लिया था. उसके साथ सेक्स का समय आ गया था. अब आगे.. नुपूर मेरे पास आ कर बैठ गई तथा मुझसे कहने लगी- राज, मुझे ज्यादा दर्द तो नहीं होगा न? तो मैंने कहा- तुम चिंता मत करो, मैं बहुत ही आराम से करूँगा. इस पर नुपूर ने मेरा सर अपने हाथों में लेकर मेरे होंठों पर चुम्बन कर दिया. मैंने भी नुपूर को अपने ओर करीब पास खींच लिया तथा उसके रसीले नर्म होंठों को चूमने लगा. कभी वो जोर लगाकर मेरे होंठों को चूसती, तो कभी मैं उसके होंठों को पूरा मुँह में भर लेता. फिर उसके नीचे वाले होंठ को दबा कर चूसता तथा फिर छोड़ देता. फिर उसकी जीभ को मजे से चूसता रहा. ऐसे ही लगभग 20 मिनट हो गए. यह आज तक का मेरे जीवन का सबसे बड़ा तथा लंबा किस था. हम दोनों ने एक दूसरे को छोड़ा तथा मैंने उसे अपनी बांहों में भर लिया. नुपूर को कस कर गले लगा लिया. उसके नर्म नर्म चुचे मेरे सीने पर दब गए. मैं दोनों हाथों से उसकी कमर तथा गांड को सहला रहा था. फिर मैंने उसके लोवर के अन्दर हाथ डाल कर उसकी गांड को दबाना चालू कर दिया, क्या मस्त मखमली गांड थी. मैं तो उसके चूतड़ों की नर्मी के स्पर्श से ही बहुत मस्त हो गया था. मैं उसकी गांड के छेद को सहलाने लगा तथा धीरे धीरे उसकी चुत पर भी उंगली फिराने लगा. उसकी चूत रोने लगी थी. मतलब नुपूर भी गर्म हो गई थी. उसकी चूत से हल्का सा जल बहने लगा था. अब मैंने नुपूर को उठाया तथा उसकी टी-शर्ट को उतार दिया. उसकी गोरी चुचियों पर काले रंग की मनोहारी ब्रा को भी उतार दिया. फिर उसके एक चुचे को दबाने लगा. मैंने उसको अपनी गोद में बिठा लिया, जिससे उसकी गांड मेरे लंड पर आ गई. उसके चुचे मेरे दोनों हाथ में मानो दो गेंदें हों, इस प्रकार समा गई थीं. मैंने फिर से नुपूर को उसकी गर्दन पर अपने होंठों से चूमना शुरू कर दिया तथा उसकी दोनों मौसम्मियों को कस कर दबाने लगा. मैं जमकर दूध दबाते हुए उसके रसीले बोबों की मसाज करने लगा. नुपूर भी इन सबका आनन्द ले रही थी. दो मिनट में ही उसके निप्पल एकदम कड़क हो गए तथा वो मेरी तरफ को घूमी तो मैं उसके एक चुचे को मुँह में भर कर चूसने लगा तथा एक हाथ से दूसरा चूचा दबाने लगा. इसी के साथ मैंने धीरे से एक हाथ को नुपूर की लोवर में डाल कर उसकी चुत को सहलाना शुरू कर दिया. इधर मैं उसके निप्पल पर काटने लगा ओर नीचे उंगली उसकी चुत में डालने लगा. मैंने नुपूर के चूचे को पूरा मुँह में भर लिया तथा चूसने लगा. साथ ही नीचे अपनी उंगली को चुत के अन्दर करने लगा. उसको अपनी गीली चूत में मेरी उंगली का स्पर्श अच्छा लग रहा था. मैंने अचानक से नुपूर के बोबे पर काट लिया तथा ठीक उसी वक्त नीचे उसकी चूत में एकदम से अपनी पूरी उंगली डाल दी. नुपूर इस दोहरे हमले से चिल्लाने लगी. उसे दर्द चूची काटने का हो रहा था, जबकि उसकी चूत ने मेरी उंगली को पूरा लील लिया था. वो बोली- आराम से चूसो ना … काटो मत यार … मुझे दर्द होता है. इस खेल की मजेदार बात यह थी कि उसकी अनचुदी टाईट चूत, जो मेरी उंगली को भी घुसने की जगह नहीं दे रही थी. इस चूची काटने के दर्द के दौरान उसे यह नहीं पता चला कि उसकी चुत में मैंने पूरी उंगली डाल दी. फिर मैं उसे किस करने लगा तथा चुत में उंगली आगे पीछे करने लगा. फिर मैंने दो उंगली से चूत को रगड़ना शुरू कर दिया. इस बार मैंने उसके होंठों को मुँह में दबा दिया तथा एक हाथ से बोबे दबाने लग गया. साथ ही मैंने नीचे चुत में दो उंगली डालने की कोशिश की, परन्तु कसावट के कारण नहीं गईं. मैं उसके होंठों पर काटने लगा तथा एक बोबे को जोर से दबाया. उसी समय नीचे जोर लगा कर दो उंगलियों को उसकी चुत में पेल दिया. नुपूर अचानक से उछल गयी परन्तु मैंने उसको छोड़ा नहीं तथा चुत में जोर जोर से दोनों उंगलियों को अन्दर बाहर करने लगा. दो मिनट में ही नुपूर का जल निकल गया. मैंने नुपूर को बेड पर लिटा दिया तथा उसकी चुत पर मुँह लगा कर उसका रस पीने लगा. उसकी चूत का रस मस्त नमकीन स्वाद वाला था. मैं कुछ देर तक उसकी चुत पर अपनी जीभ से सहलाता रहा. वो फिर से गरमा गई. मैंने उसकी कमर के नीचे तकिया लगाया, फिर दोनों पैरों के बीच में आ गया. पैरों को कंधों पर रख कर लंड पर अच्छे से थूक लगा लिया. मैं लंड को नुपूर की चुत पर रगड़ने लगा तथा धीरे धीरे से सुपारा उसकी चुत के अन्दर डालने लगा. जैसे ही चुत के अन्दर मेरे लंड का टोपा गया कि नुपूर चिल्लाने लगी- प्लीज राज … मुझे दर्द हो रहा है. वो अपने आपको छुड़ाने में लग गई परन्तु मैंने अपनी पकड़ मजबूत रखी. मैं नुपूर को सहलाने लगा, उसके बोबे को दबाकर मसलने लगा तथा होंठों को चूमने लगा. फिर मैंने ऐसे ही उसके होंठों को चूमना चालू रखा तथा बोबे को दबाते हुए धीरे धीरे कमर को हिलाने में लग गया. नूपुर कुछ मस्त सी हुई कि अचानक से मैंने जोर का धक्का लगा दिया. इस बार मेरा मोटा लंड नुपूर की चुत में काफी अन्दर तक घुस गया. उसकी छटपटाहट एकदम से उस तरह की हो गयी थी, जैसे मछली को जल से बाहर निकाल लिया हो. उसकी एक पल के लिए तो आवाज ही बंद हो गई तथा आंखों की पुतलियां फ़ैल गईं. अगले ही झटके में मेरा 6 इंच का मोटा लंड उसकी चूत में पूरा अन्दर चला गया था. वो कसमसा रही थी परन्तु मैंने नुपूर को ढीला नहीं छोड़ा, उसके होंठों को बोबे को दबाता रहा तथा लंड को चूत में ठोके हुए पड़ा रहा. दो पल बाद उसको कुछ सांस सी आई तथा वो मुझे लंड बाहर निकालने को कहने लगी. मैंने लंड बाहर निकाल लिया, तो देखा उस पर खून लगा हुआ था तथा नुपूर की चुत से भी खून बाहर निकल रहा था. मैंने उसकी पैंटी से चूत के खून को पौंछ दिया तथा अपने लंड को भी साफ किया. फिर मैंने नुपूर को वापस चोदना शुरू किया. इस बार मैंने जोश में आकर जोर से धक्का लगा दिया, तो नुपूर को दर्द होने लगा. परन्तु मैं तथा जोर जोर से नुपूर को चोदने लगा. कुछ ही देर बाद दर्द उम्म्ह… अहह… हय… याह… मजे में तब्दील हो गया. अब नुपूर भी अपनी कमर उठा कर मेरा साथ दे रही थी तथा मैं भी उसकी टांगें उठा कर उसे जोर से चोद रहा था. इतनी देर में नुपूर दो बार जल छोड़ चुकी थी, परन्तु मेरा जल निकलने का नाम नहीं ले रहा था. मैंने नुपूर को घोड़ी स्टाइल में किया तथा उसके पीछे से लंड लगा कर उसे चोदने लगा. मैं उस पर एकदम से सवार हो गया तथा उसकी चूचियों को मसलते हुए जोर शोर से चोदने लगा. नुपूर मजे में बोल रही थी- आह … राज तथा जोर से … आह … तथा जोर से. मैं भी दम लगाकर चोदने लगा तथा 5 मिनट बाद हम दोनों एक साथ झड़ गए. मैंने अपने लंड का सारा जल उसकी प्यारी सी चुत में छोड़ दिया तथा उसके ऊपर ही सो गया. हम दोनों को कब नींद आ गई, पता ही नहीं चला. सुबह हो गई तो नुपूर मुझसे पहले उठकर फ्रेश हो गई तथा फिर उसने मुझे उठाया. वो मेरे सर पर हाथ फेरते हुए मुझे उठा रही थी, तो मैंने उसको अपने ऊपर खींच लिया. वो बोली- बाबू, रात भर में मन नहीं भरा क्या? मैंने कहा- अभी तो नहीं भरा. मैंने उसको एक किस कर दिया, फिर मैं भी फ्रेश होकर मुँह धोकर आ गया. हम दोनों ने चाय पी, नाश्ता किया. कुछ देर बाद नुपूर नहाने जा रही थी, तो मैंने बोला- दोनों साथ में नहाएंगे. नुपूर ने कहा- ठीक है. मैं नंगा हो गया, नुपूर मेरे लंड को देख रही थी. “इतना बड़ा है तुम्हारा?” वो लंड सहलाने लगी, तो मैंने उसकी इच्छा को समझ लिया तथा उसको वही नीचे बिठा कर लंड उसके मुँह में भर दिया तथा वो भी मजे से लंड चूसने लगी. उसने दस मिनट तक मेरा लंड चूसा तथा मेरा जल पी गई. हम दोनों बाथरूम में गए तथा मैंने नुपूर को दीवार के सहारे खड़ा कर दिया. मैं उसके होंठों को चूमने लगा, एक बोबे को दबाने लगा तथा नीचे चुत में जैसे ही लंड डाला कि नुपूर दर्द से कराहने लगी. मैंने ध्यान नहीं दिया तथा जोर जोर से उसे चोदने लगा तथा उसी की चुत में झड़ गया. चुदाई के बाद हम दोनों ने रगड़ कर एक दूसरे को नहलाया तथा बाहर आकर वस्त्र पहन लिए. इसके बाद हम दोनों ने साथ में ही खाना बनाया तथा साथ में खाया. एक घंटे बाद मैं नुपूर को एक बार तथा चोदा. फिर रात की ट्रेन से सुबह घर आ गया. दोस्तो, यह थी मेरी एक सच्ची चुदाई की कहानी. आपको कैसी लगी मुझे मेल करके जरूर बताना. [email protected] धन्यवाद. What did you think of this story