🔞 18+ Adult Content: Strictly for Adults Only. Free Desi Romance & Erotic Novels.

मैडम को चोदा खेत में

Text Size:
यकीन मानिए, मेरी मैडम की चुदाई की कहानी में पढ़ें कि कैसे मेरी मैडम ने मूतते हुए मेरे लंड को देख कर पकड़ लिया. फिर मैंने सड़क के किनारे खेत में चुदासी मैडम को चोदा. दोस्तो, जिंदगी काफी हसीं है. कभी कभी ऐसे भी वाकये हो जाते हैं जिन पर विश्वास करना मुश्किल होता है मगर फिर भी करना पड़ता है। मैं संदीप हूं तथा बरेली का रहने वाला हूँ. मेरी उम्र इस समय 29 साल है. करीब दो साल पहले की बात है कि मेरे चाचा तथा मैडम हमारे घर से करीब एक किलोमीटर दूर रहते थे. एक बार मेरी मां ने मुझे एक काम करने के लिए कहा. दरअसल मां मुझे मैडम को मेहंदी के कार्यक्रम में ले जाने के लिए कह रही थी क्योंकि चाचा लखनऊ गये हुए थे तथा दो रोज के बाद लौटने वाले थे. मैं शाम को बाइक लेकर मैडम के घर चला गया तथा वहां से उन्हें मेहँदी के कार्यक्रम में ले गया. हमने वहां रात का खाना खाया तथा वहां से निपट कर करीब साढ़े ग्यारह बजे रात को घर के लिए वापसी चल पड़े. हम खेतों के किनारे से होते हुए जंगल के बगल से चल रहे थे, तभी मैडम ने मुझे गाड़ी रोकने के लिए कहा. मैंने मोटर साइकिल रोक दी. मैडम बोली- संदीप, जरा बाइक को किनारे लेकर किसी पगडंडी पर अंदर की तरफ ले ले, मुझे जोर से पेशाब लगी है. मैंने बाइक को आगे ले जाकर एक पगडंडी पर रोक दिया. वह रास्ता आगे जंगल की ओर जा रहा था. मैडम बोली- स्टैंड लगा ले. मैंने बाइक का स्टैंड लगा लिया तथा दूसरी तरफ मुख करके बाइक पर बैठ गया. मैडम बोली- तू भी पेशाब कर ले. अभी तो काफी दूर जाना है. ये कह कर मैडम ने अपना मुख दूसरी तरफ किया तथा अपनी साड़ी तथा पेटीकोट कमर तक उठा दिए. चांदनी रात में उनकी गोरी सुडौल गांड देख कर मेरा लण्ड कसमसाने लगा. फिर वो उकडू बैठ गयी तथा मूतने लगी. जमीं पर गिरे हुए पत्तों पर मूत की तेज धार कड़ कड़ करने लगी. मेरे से नहीं रहा गया तथा मैंने भी पैण्ट की चेन खोल कर लण्ड बाहर निकाल लिया तथा मूतने लगा. मगर तब तक मैडम उठ कर मेरे पास आकर खड़ी हो गयी. मैडम मेरे लण्ड को घूर रही थी. जैसे ही मैंने मूतना बंद किया तथा चेन बंद करने लगा तो मैडम बोली- संदीप, तेरा मन नहीं करता क्या किसी औरत को चोदने के लिए? मैडम के इस सवाल पर मैं हक्का बक्का रह गया. मैं कुछ प्रतिक्कीर्ति नहीं दे पाया तथा सुन्न सा हो गया. मेरी चेन अभी भी खुली हुई थी मेरा लंड मेरे हाथ में बाहर ही लटक रहा था. मैं चेन बंद करने लगा लेकिन मैडम ने मेरे हाथ को पकड़ लिया तथा मुझे चेन नहीं बंद करने दी. इससे पहले कि मैं कुछ कर पाता, मैडम ने मेरे लंड को अपने हाथ में पकड़ लिया. लाज के मारे मेरा बुरा हाल हो रहा था. मगर रोमांच भी पैदा हो रहा था तथा आनंद भी आ रहा था क्योंकि उस सुनसान जंगल में केवल हम दो ही थे तथा ऐसी अंधेरी रात में कोई लंड से खुद ही खेलना चाहे तो आनंद कैसे न आये. मेरे लंड को हाथ में लेकर मैडम बोली- संदीप, तेरा हथियार तो काफी बड़ा है. अब धीरे धीरे मेरा लंड तनाव में आ रहा था. मुझे काफी ही लाज आ रही थी तथा अजीब सी शर्मिंदगी वाली फीलिंग हो रही थी. मैं अपना लंड छुड़ाने लगा. मैडम बोली- कैसा लड़का है रे तू? एक तो जवान औरत खुद ही तेरे लंड से चुदने के लिए तैयार है तथा तू है कि घबरा रहा है? मैं बोला- मगर मैडम, मैंने इस तरह से आपके बारे में कभी नहीं सोचा तथा न ही किसी के साथ ऐसा किया. वो बोली- तो अब कर ले. मैडम अपने हाथ से मेरे लंड को सहलाने लगी. इतना आनंद मुझे जिंदगी में कभी नहीं आया था. मैंने कभी भी अपनी जिंदगी में मुठ नहीं मारी थी। मेरे लण्ड का सुपारा भी आधा ही दिखता था. मैं एकदम कुंवारा था. जैसे ही मैडम ने मेरे लण्ड की खाल पीछे करने की कोशिश की, मुझे हल्का सा मीठा दर्द हुआ. मैडम नीचे उकडू बैठ गयी तथा मेरा मस्ताया हुआ लण्ड चूसने लगी. मेरे लंड से उत्तेजना में मेरा चिकना जल निकलने लगा. फिर मैडम ने मेरी पैंट तथा कच्छा दोनों को एकसाथ खींच कर नीचे कर दिया तथा मेरी टांगों से निकलवा दिया. मैं नीचे से एकदम नंगा हो गया. मैडम ने मेरा हाथ पकड़ा तथा मुझे अंदर जंगल की तरफ ले जाने लगी. मैं जैसे मैडम का गुलाम बन गया था. मेरी पैंट तथा मेरा कच्छा दोनों मोटरसाइकिल पर पड़े थे. हम दोनों एक पेड़ के नीचे आ गये जिसके नीचे काफी सारी पत्तियां गिरी हुई थीं. तभी मैडम ने अपनी साड़ी तथा पेटीकोट को हाथों से ऊपर कर लिया तथा जांघों तक नंगी होकर पेड़ के सहारे से नीचे झुक गयी. अपनी गांड मेरी ओर करके बोली- आ संदीप, मेरी चूत में अपना लंड पेल दे. मैडम काफी ही बेशर्मी से बात कर रही थी. मुझे तो यकीन नहीं हो रहा था कि ये मेरी मैडम है. मगर सच तो यही था कि वो मेरी मैडम थी तथा मेरे सामने मेरी मैडम की चूत खुली पड़ी थी. मेरा लंड भी मैडम की नंगी गांड देख कर लपलपाने लगा. मुझे डर भी लग रहा था इसलिए मैं मेरी मैडम की चुदाई के लिए आगे कदम नहीं ले पा रहा था. तभी मैडम ने मेरा हाथ पकड़ कर मुझे अपनी तरफ खींच लिया. उनके पास जाने से मेरा लंड उनके चूतड़ों से टकराया जिसने मुझे एक आनंद भरा सुखद अहसास दिला दिया. वो बोली- संदीप, ऐसे तो तू न खुद आनंद ले पायेगा तथा न ही मुझे लेने देगा. मेरी गांड को अच्छी तरह से पकड़ तथा अपना लंड पेल दे अपनी मैडम की चूत में. मेरी चूत में अपना लंड घुसेड़ कर चोद दे मुझे. अब मैंने उनके कहने पर वैसा ही किया. मैडम की गांड को दोनों हाथों से थाम लिया. मैडम बोली- तू भी निपट चूतिया है, एक बार अपनी मैडम की चूत पर हाथ तो फेर कर देख ले कि तेरी मैडम कितनी जवान है? उन्होंने ये कह कर मेरा दायाँ हाथ अपनी कमर से हटाया तथा अपनी जांघों के बीच में लगा दिया. आह…. क्या गुदगुदा मांस था। मुझे चांदनी रात में उनकी जांघों के बीच में छोटे छोटे काले घने बाल नजर आये. ऐसा लग रहा था जैसे उन्होंने दो हफ्ते पहले ही झाँटें साफ की हों। यकीन मानिए, मैंने अपनी हथेली फैला कर अपना अंगूठा उनकी गांड के छेद पर टिकाया तथा बाकी चार उँगलियों से नीचे तक हाथ फेरा. मुझे ऐसा लगा कि बीच में कोई गीली दरार है. मेरी उंगलियां आपस में चिपकने लगीं. उँगलियों में चिकनाई लग गई थी। मैडम सी … सी … करने लगी. अब मेरी भी लाज जा चुकी थी. मैडम की चूत को छूने के बाद अब मेरे से नहीं रहा गया तथा पता नहीं क्यों मैंने अपना लण्ड उस दरार पर टिका दिया तथा मेरे चूतड़ अपने आप हरकत करने लगे। वो जैसे उत्साहित होते हुए बोली- हाँ … हाँ … यहीं … यहीं डाल जल्दी … घुसा दे अंदर तक। मुझे लगा कि मेरा सुपारा किसी गर्म छेद पर टिक गया था तथा मैंने हल्का सा जोर लगाया मगर लंड का टोपा अंदर नहीं गया. मगर एक काफी अच्छी फीलिंग आयी क्योंकि मेरे लण्ड की खाल थोड़ा सा पीछे हो गयी तथा फिर वापिस सुपारे पर ही चढ़ गयी. मैडम ने कहा- संदीप … अरे तथा जोर लगा ना … थोड़ा ताकत लगा तथा अंदर पूरा पेल दे इसे. अब रहा नहीं जा रहा है मुझसे. मुझे तेरा लंड चाहिए, जल्दी डाल दे अंदर। इस बार मैंने थोड़ा तेज धक्का मारा तथा फक्क की आवाज के साथ मेरा लंड अन्दर चला गया. वो मांस का छेद ज्यादा बड़ा नहीं रहा होगा परंतु ज्यादा रोशनी न होने के कारण सही पता नहीं लगा कि कितना बड़ा था. लंड अंदर घुसते ही फिर मेरे चूतड़ सटासट हिलने लगे. मेरे लण्ड की खाल शायद पीछे आ गयी थी। मुझे धक्के मारते हुए मुश्किल से तीन मिनट हुए होंगे कि मेरे लौड़े ने मैडम की चूत में अपना जल झाड़ दिया. मैडम की चुदाई 2-3 मिनट में ही निपट जाने से मुझे बेहद शर्मिंदगी महसूस होने लगी. मैंने जल्दी से मैडम की चूत में से लण्ड बाहर निकाला तथा मैडम की कमर पर से हाथ हटा लिए. मैडम जल्दी से खड़ी हुई तथा मुझे कहा- अरे शर्मा गया? धत्त तेरी की। ध्यान देने वाली बात है कि, पहली बार चूत ली है न औरत की? घबरा मत, थोड़ा आराम कर ले. मगर ये बता कि तुझे तेरी मैडम की चूत तुझे कैसी लगी? मेरे मुख से बस इतना ही निकला- मैडम, किसी को पता तो नहीं लगेगा न? उन्होंने कहा- अरे नहीं रे पगले। किसी को भी नहीं पता चलेगा. चल दोबारा से हिम्मत कर. देख मैं कह रही हूँ न … अब नहीं निकलेगा तेरा जल जल्दी से, ले आ … तथा खूब मजे ले अपनी मैडम चूत की चुदाई करके। उन्होंने मेरा लण्ड फिर से पकड़ा तथा मुश्किल से एक मिनट हिलाया तथा इस बार मेरा लौड़ा तथा ज्यादा कड़क तथा मोटा हो गया. इस बार मेरे अंदर काफी आत्मविश्वास आ गया था. बस फिर हम दोनों उसी पोजीशन में आ गए. मैंने लण्ड को उनकी चूत में डाल दिया तथा धीरे धीरे उनकी चूत की गहराई नापने लगा. मैडम उई … उई … करने लगी. मुझे लगा कि उन्हें दर्द हो रहा है. जैसे ही मैं धीरे हुआ उन्होंने कहा- संदीप … तू जितनी जोर से मार सकता है मेरी मार ले … मजे के कारण ही मेरी ऐसी आवाजें आ रही हैं। तू जितनी जोर से ताकत लगायेगा मुझे उतना ही आनंद आयेगा. मेरी कराहटों पर ध्यान मत दे. मुझे तेरा लंड लेकर जन्नत मिल रही है. चोद मुझे, जोर से चोद दे. बस फिर क्या था? मैंने उनकी गांड कस कर जकड़ ली तथा मैं मैडम की चुदाई से अपना कुंवारापन उतारने लग गया. मैडम का जूड़ा खुल गया था तथा मैडम के तथा मेरे पैर पत्तियों पर फिसल रहे थे. मैडम काफी ही कामुक आवाजें करने लगी थी- आह्ह … आईई … ईईई … आह्ह … सी … सी … ऊईई … आह्ह। बीच बीच में वो अपनी हथेली मेरे पेट पर टिका कर मुझे रोकने की कोशिश करती. उन्होंने पेड़ के तने को पकड़ रखा था तथा कई बार तो ऐसा हुआ कि जब मैंने थोड़ा नीचे झुक कर लण्ड को ऊपर की तरफ उठाया तो उनकी टाँगें हवा में झूल गयीं तथा एक समय तो ऐसा आया कि जिसकी मैंने कल्पना भी नहीं की थी। मैडम बोली- संदीप, मुझे अपनी मर्दानगी का अहसास दिला. मुझे इतना जोर से रगड़ कि मेरी चूत की आग तथा जिस्म की प्यास शांत हो जाये. अपनी मैडम की चूत को खूब चोद, फाड़ कर रख दे इसे आज। आज तेरे लंड का इम्तिहान है. बस फिर मैंने इतनी जोर जोर से लौड़े को पेलना शुरू किया कि मेरे पेट पर अचानक गर्म जल की तीन बार बौछारें पड़ीं. मैंने तुरंत लौड़ा बाहर निकाल लिया। असल में मैडम की पेशाब निकल गयी थी. मैंने कहा- अरे मैडम, ये क्या किया? मैडम ने कहा- अरे मेरे से सहन ही नहीं हुआ तथा मेरी पेशाब निकल गयी. मैंने फिर से लौड़ा पेल दिया। ये तो अच्छा हुआ था कि हम दोनों जंगल में कुछ अंदर थे. हमें इस बीच मुख्य सड़क पर मोटर साइकिल की आवाजें सुनाई दीं, मगर हम दोनों अपनी काम-वासना शांत करने में लगे हुए थे. उनके चूतड़ों तथा मेरी जांघों के बीच से फत्त .. फत्त .. फत्त … की सुखद आवाजें आ रही थी। मेरा मन हो रहा था कि अब मैडम की चुदाई रुकनी नहीं चाहिए. हमें आपस में जुड़े हुए लगभग 15 मिनट होने वाले थे. मैं स्वर्ग लोक में तैर रहा था. ऐसा लग रहा था जैसे मैं किसी मखमली रबर की थैली में अपना लौड़ा बार बार घुसेड़ रहा हूँ. फिर अचानक मुझे ऐसा लगा कि मेरा लौड़ा तथा ज्यादा फूलने लगा है. काफी अच्छा बैकअप मिल रहा था. मेरे अण्डों से कमर के निचले हिस्से तक एक तेज सनसनाहट हुई तथा मैंने पूरी ताकत झोंक दी. मेरे लौड़े का मुख किसी सख्त फूली हुई गांठ पर था. मैडम के चूतड़ों तथा मेरे पेट के बीच में हवा जाने तक का रास्ता नहीं बचा था तथा तभी मेरे चूतड़ हिलने बंद हो गए। फिर एक के बाद एक वीर्य की 10-12 गर्म पिचकारी मैडम की चूत में समाती चली गयीं. मैडम बिल्कुल शांत होकर झुकी हुई थी. अब मेरा लौड़ा शांत हो गया था. मेरी अब जरा सी भी इच्छा नहीं हो रही थी कि मैं कुछ तथा धक्के मारूं. फिर भी मैंने दिखाने को 5-6 धक्के मारे मगर अब लौड़े में वैसा तनाव नहीं था जैसा वीर्य छूटने के पहले तक था. फिर मेरा लौड़ा मैडम की चूत से खुद ही बाहर आकर हवा में झूल गया. मेरा लौड़ा मुरझा गया था. अब भी लम्बा लगभग उतना ही था पर अब मुझे अच्छा लग रहा था क्योंकि मेरा बदन हमेशा ऐंठा ऐंठा रहता था. मैडम की चुदाई करने के बाद आज मेरी तबियत खुश हो गयी थी. मैडम नीचे बैठी तथा उसने फिर मूतना शुरू कर दिया. इसके बाद मैडम ने अपने वस्त्र सही किये तथा जूड़ा दोबारा से बांधा तथा मेरे सीने से लिपट गयी. उसने मेरे सीने पर अपना सीना टिका दिया था. मैडम ने मुझे कई बार चूमा तथा मैंने भी बदले में उन्हें कई बार चूमा। मैडम की चुदाई के बाद हम दोनों काफी खुश थे. हम दोनों मोटरसाइकिल के पास आ गए. मैंने भी जल्दी से कपडे़ पहने. फिर हम दोनों मैडम के घर की तरफ चल पड़े. रात करीब डेढ़ बजे हम घर पहुंचे. घर पर चाचा तो थे ही नहीं. उनकी एक 18-19 साल की बेटी थी जो तीन रोज से अपनी मौसी के घर गई हुई थी. हम दोनों एक ही कमरे में एक ही बेड पर एक दूसरे की बाँहों में फिर से समा गए. मैडम ने तब मुझे कहा- संदीप, काफी दिनों से मेरी इच्छा हो रही थी लेकिन कभी तुझसे ये कहने की हिम्मत नहीं हुई. असल में तेरे चाचा किसी औरत के मतलब के अब रह नहीं गये हैं. इस उम्र में उनका ठीक ढंग से खड़ा भी नहीं हो पाता है. मैं प्यासी ही रहती हूं. आज तूने मेरी प्यास मिटा दी. वो बोली- ये बात तेरे तथा मेरे बीच में ही रहेगी. तू अपने दोस्तों से भी इस बात का जिक्र नहीं करेगा. मैं तेरे लंड से ही चुदना चाहती हूं. तेरे चाचा तो 8-10 धक्कों में ही पस्त हो जाते हैं. तेरे जैसा मर्द मुझे पहली बार मिला है. जब भी तेरी इच्छा हो तो आकर अपनी मैडम की चूत चुदाई कर लिया कर। असल में, मैं बोला- मगर मैडम, मधु भी तो है घर में! वो बोली- अरे मूरख, रोज में तो मैं अकेली ही रहती हूं न। रोज में आकर चोद लिया कर। उनकी बात पर मैंने पूछा- तथा अगर किसी रोज मधु ने हम दोनों को चुदाई करते हुए देख लिया तो? वो बोली- तू उस बात की चिंता मत कर, अगर कभी ऐसा हुआ भी तो उसका इलाज मैंने ढूंढ लिया है. मैं बोला- क्या इलाज? वो बोली- पहली बात तो ऐसी नौबत आयेगी ही नहीं. अगर कभी आ भी गयी तो तू उसको अच्छे से पेल देना. जवान तो वो है ही, उसकी चूत को लंड का चस्का लगा देना. फिर वो अपना मुख बंद रखेगी. बाकी सब बाद में मैं देख लूंगी. मैडम बोली- अगर वो हमें देख ले तो तू मेरा इंतजार मत करना. मौका लगते ही उसको बेड पर पटक कर पेल देना. तेरा लंड तो वैसे ही इतना कड़क है. तेरा लंड लेकर वो मस्त हो जायेगी. मैं घर में दरवाजे के पीछे छुप जाऊंगी तथा तुम दोनों की चुदाई का वीडियो बना लूंगी. उसके बाद तू उसको रिश्तेदारी में बदनाम करने की धमकी दे देना. अगर वो ज्यादा उछलेगी तो हमारे पास वीडियो का सबूत हो जायेगा. यदि एक बार मधु की सील टूट गयी तो मैं गारंटी के साथ कह सकती हूं कि वो हम दोनों के बीच के इस रिश्ते के बारे में कभी अपना मुख नहीं खोलेगी. जब तू अपने मोटे कड़क लंड से उसकी चूत को चुदाई का सुख देगा तो वो तेरी गुलाम हो जायेगी, जैसे कि मैं हो गयी हूं. इसके बाद मैडम ने कमरे की सारी खड़कियाँ बंद कर दीं. उन्होंने पर्दे खींच दिये. फिर अपनी साड़ी उतार दी तथा ब्लाउज भी निकाल दिया. अब वो अपने सिल्की से पेटीकोट में थी. ऊपर उसने काली ब्रा पहनी हुई थी जो उसकी गोरी छाती पर कमाल की लग रही थी.. मैडम मेरे सामने तन कर खड़ी हो गयी. मेरी हाइट मैडम से करीब 5-6 इंच ज्यादा थी. मैंने उनको अपनी बांहों में जकड़ लिया. उसने काफी ही कामुक अंदाज में मेरे चेहरे की ओर देखा तथा कहा- पता नहीं ये रात फिर कभी आयेगी या नहीं, तू मुझे दिखा दे कि तू एक असली मर्द है, मुझे गंदी गंदी गालियां देकर पेल दे. जैसे किसी रंडी को चोदा जाता है. मैं तेरे लंड से अपने अंग अंग को लील देना चाहती हूं. मैं एक जवान तंदुरुस्त मर्द का सुख भोगना चाहती हूं. ये कह कर वो मेरे कंधे पर अपने दाँत हल्के हल्के गड़ाने लगी. उस समय मैडम एक कामुक कुतिया लग रही थी. साली की बड़ी बड़ी नशीली आँखें तथा गोरे गाल देख कर मेरा मन चंचल हो उठा तथा मैंने उसके पेटीकोट का नेफ़ा पकड़ कर एक तगड़ा झटका मारा तथा नाड़ा टूट गया. पेटीकोट सरसरा कर नीचे गिर गया। यकीन मानिए, वो नाभि ने नीचे तक साक्षात् रति लग रही थी. उसने कहा- संदीप मेरी पिटाई कर. मैंने उसका मुँह घुमाया तथा उसके गोरे गोरे चूतड़ों पर 7 -8 बार ऐसी हथेलियां मारीं कि साली के मोटे मोटे चूतड़ लाल टमाटर हो गये. वो चिल्लाने लगी मगर मैं रुका नहीं. बस फिर मैंने मैडम को उठाया तथा सेज पर औंधा कर दिया. मैंने उसे कहा- साली चल घुटनों पर … झुक … आज तेरी चूत का भोसड़ा बनाता हूँ. मेरे इतना कहते ही वो कामुक कुतिया की तरह हो गयी तथा उसने अपनी चौड़ी सुडौल गांड उठा दी. मैं नीचे फर्श पर ही खड़ा था. मैंने अपना फनफनाता हुआ लौड़ा हाथ में लिया तथा धीरे से उसकी लम्बी दरार पर घिसना शुरू कर दिया. वो सी … सी … करने लगी. मेरे लौड़े का बड़ा सा सुपारा उसकी मांस की बंद दरार को नीचे से ऊपर तथा ऊपर से नीचे चौड़ा करता हुआ जा रहा था. मैंने मस्ती में आकर अपनी उंगली थूक में गीली की तथा उसकी गांड में सरका दी. वो चिहुंक उठी. मेरी उंगली पर उसकी गांड का रिम एकदम मजबूत पकड़ बनाये हुआ था. इधर मैं लौड़े के सुपारे को मैडम की चूत के छेद में धँसाने में लगा हुआ था. मैंने जैसे ही झटका मारा, उसने बीच से अपनी कमर गोल कर ली तथा दुहरी हो गयी. मैंने उसके बड़े चूतड़ कस कर पकड़ रखे थे. वो चीखती जा रही थी तथा मेरा लौड़ा हथौड़े की तरह बरस रहा था. मैडम कुतिया की तरह कीं-कीं कर रही थी. उसके मुख से कामुक आवाजें निकल रही थी- ईह.. इह.. ईह.. उईई। हम दोनों का मांस बुरी तरह से छित रहा था. अचानक उसने कहा- हां हां … मार बहनचोद तथा मार मेरी। बस अब तो मेरे ऊपर एक जुनून सवार हो गया था तथा मैंने काफी सख्त धक्के मारने शुरू कर दिए। ये खेल करीब 15 मिनट तक चला तथा फिर वही हुआ. मैं भी कब तक मैडम के सामने टिक पाता तथा मैंने पूरा जोर लगाते हुए सारा माल मैडम की प्यासी चूत में उड़ेल दिया। अब मेरा लौड़ा ढीला पड़ चुका था. मैंने लौड़ा बाहर निकाल लिया. और मैडम की चूत से एकदम सफ़ेद मांड जैसा गाढ़ा पदार्थ निकलने लगा तथा नीचे फर्श पर गिरने लगा. मैडम की चूत किसी भैंस की चूत के समान ऊपर नीचे हो रही थी. ऐसा लग रहा था जैसे किसी मोटी गुलाबी शकरकंद का रस निकल रहा हो. इसके बाद मैडम सीधी खड़ी हो गयी तथा फिर हम दोनों काफी जोर से खिलखिला कर हंस पड़े. रात काफी हो चुकी थी, लिहाजा हम दोनों एक ही सेज में सो गए। हमारा ये खेल काफी दिनों तक यानि कि करीब छह महीने तक चलता रहा. कभी रोज में तथा कभी रात में … जब भी हम अकेले होते तो एक दूसरे को चूसने लगते तथा फिर जोशीली चुदाई का आनंद लेते. एक रोज वही हुआ जिसका मुझे डर था. मधु ने मुझे मेरी मैडम की चुदाई करते हुए देख लिया. उसके बाद मधु की बोलती हम दोनों ने कैसे बंद की, उसके बारे में विस्तार से मैं अपनी आगे आने वाली कहानी में बताऊंगा. फिलहाल आप मेरी मैडम की चुदाई की कहानी के बारे में अपनी राय जरूर भेजें कि आपको ये स्टोरी कैसी लगी? मैडम की चूत की कहानी पर कमेंट्स के द्वारा भी आप अपनी राय जाहिर कर सकते हैं अथवा मुझे नीचे दी गयी ईमेल पर संपर्क कर सकते हैं. धन्यवाद। [email protected] लेखक की पिछली कहानी: मेरी चुदक्कड़ मां को चोदा