मेरी सेक्सी बिंदास आंटी ने मेरे लंड की सील तोड़ी-1
दोस्तो, एक बार फिर आप सबके सामने आपका प्यारा शरद एक नई कहानी के साथ हाजिर है। आपको बता दूं कि, दोस्तो, यह बहुत मजेदार होता है कि आप एक लेखक हो। भले ही सेक्स कहानियों के ही लेखक क्यों न हो। क्योंकि लेखन से जुड़े होने के कारण रोज नये नये मेल्स पढ़ना तथा रिक्वेस्ट को पढ़ना, जिसमें तरह-तरह की मांगें होती है। ज्यादातर मांगें तो मानी नहीं जा सकती, यह आप सभी को पता होगा। असल में, लेकिन लेखन से सम्बन्धित मांगें में प्रायः मैं मान लेता हूँ। इसी क्रम में मेरे एक चाहने वाले का मेल आया, जिसको हिन्दी टाईपिंग की जानकारी नहीं है, पर वो अपनी सच्ची घटना, जैसा कि वो बता रहा है, को लिखवाना चाहता है। उसकी कहानी सच्ची है या नहीं, मैं नहीं जानता, पर कहानी बड़े ही मजेदार है। तो इसी मजेदार कहानी में मैं अपने शब्दों का मिश्रण करते हुए कहानी लिख रहा हूँ। मुझे उम्मीद ही नहीं पूर्ण विश्वास है कि आप सभी को कहानी पसंद आयेगी तथा मुझे मेल्स के माध्यम से आपका ढेर सारा प्यार मिलेगा। तो अब मैं कहानी की शुरूआत करने जा रहा हूँ। दोस्तो, मेरा नाम अमित है, मैं अपने परिवार में सबसे छोटा युवक हूँ, मेरी हाईट लगभग 6 इंच है, मेरे लंड का आकार लगभग 9 इंच के है। ध्यान देने वाली बात है कि, लगभग इसलिये बोल रहा हूँ क्योंकि स्केल से नापने पर मेरे लंड की साईज 9 इंच से कम निकली। इस घटना से पहले मैंने कोई सेक्स नहीं किया, जबकि मेरी कई गर्लफ्रेंड थी परन्तु किसी ने मुझे अपने पुट्ठे पर हाथ भी नहीं रखने दिया या आप सभी यह कह सकते है कि मुझे किसी युवती को पटाकर चोदने का तरीका नहीं मालूम था। और ये सब शब्द जैसे लंड, लौड़ा, चुदाई, चोदना, बुर, चुत, फ़ुद्दी, गांड इन सभी शब्दों का इस्तेमाल मैंने इस घटना के बाद किया है। ऐसा नहीं है कि मैं इन शब्दों को नहीं जानता था या गाली के रूप में इसका इस्तेमाल नहीं किया। परन्तु इस घटना के बाद ये शब्द मुझे तथा हसीन लगने लगे। चलिये, मैं अपनी कहानी को आगे बढ़ा रहा हूँ। मेरे परिवार में मेरे पापा, मम्मी, सबसे बड़ा भाई सुनील, मुझसे बड़ा अनिल तथा मैं हूँ। मेरा भाई सुनील अपनी पढ़ाई खत्म करने के बाद गोवा के एक अच्छी कम्पनी में एक अच्छी जॉब पा गया। जॉब के एक साल के भीतर ही उसी की कम्पनी में कार्यरत एक बहुत ही सुंदर युवती जिसका नाम कामिनी था, से शादी हो गई। असल में, मेरा भाई तथा आंटी दोनों ही बहुत जॉली नेचर के हैं। सच कहूं तो, एक रोज भाई का फोन पापा के पास आया, बताया कि 20-25 रोज के लिये उन्हें कम्पनी के काम से लंदन जाना है तथा कामिनी आंटी इस दरम्यान घर पर अकेली होगी। अतः हम में से कोई भी आकर 20-25 दिनों के लिये गोवा आ जाये। असल में, पढ़ाई खत्म होने पर तथा समर वेकेशन होने पर मैंने पापा से गोवा जाने के जिद की। हालाँकि अनिल का मन भी गोवा जाने का था, परन्तु सबसे छोटा होने के कारण मुझे प्राथमिकता मिली। गोवा काफी सुंदर शहर है। खैर मैं सुबह सुबह गोवा पहुँचने के बाद जब घर पहुँचा तो देखा घर में केवल आंटी ही हैं। क्या सुंदर हैं आंटी… मैं ब्यान नहीं कर सकता। मेरी नजर उनके चेहरे से हट ही नहीं रही थी। शादी के बाद तो वो तथा खिल गई थी, उनके बूब्स क्या गोल-गोल थे। चूंकि वो उस समय पारदर्शी गाउन पहने हुए थी इसलिये उस गाउन के अन्दर से ही उनके सुंदर जिस्म के दीदार होने के साथ ही साथ ब्रा तथा कट पेंटी तक साफ दिखाई पड़ रही थी। उनकी बड़ी-बड़ी चूचियों से मेरी नजर हट ही नहीं रही थी तथा मेरे मुंह से लार टपकना तो लाजिमी भी था। तभी मुझे मेरी बांहों में तेज चुटकी काटे जाने का अनुभव हुआ। मैंने ‘उईईई…’ की आवाज के साथ चौंक कर उनकी तरफ देखा तो मेरे गालों को कचोटते हुए आंटी बोली- क्यों लल्ला, कहाँ खो गये?
‘कुछ नहीं, बस आंटी, आपके चेहरे से नजर ही नहीं हट रही थी!’ मुझे मालूम नहीं कि मेरे मुंह से कैसे ये शब्द निकल गए। आंटी हंसी तथा बोली- केवल मेरा चेहरा ही था या कुछ तथा भी जगह से तुम्हारी नजर नहीं हट रही थी?
‘आंटी आप भी न…’ कहकर मैंने अपनी बात खत्म की। फिर मैंने घर के अन्दर प्रवेश किया। वास्तव में 3-बेडरूम सेट को क्या मेनटेन किया। मैं एक-एक कमरे का निरीक्षण करते-करते साहिल-आंटी के बेड रूम में पहुँचा, वहाँ उनके रूम में चारों तरफ दोनों की फोटो लगी थी तथा हर फोटो में दोनों एक दूसरे से बहुत ही उत्तेजक तरीके से चिपके हुए थे। मैं बड़े ध्यान से फोटो के देखने में लगा हुआ था कि तभी पीछे से एक चपत सर पर लगी तथा कानों में आवाज सुनाई पड़ी- क्या बे… इतने ध्यान से क्या देख रहा है?
देखा तो पीछे भाई खड़े थे। असल में, मैंने तुरन्त ही पैर छुए तथा उनकी तरफ देखते हुए बोला- कुछ नहीं साहिल, आपका बेडरूम बहुत ही शानदार है। मैं फिर सकपाकते हुए जल्दी से उनके कमरे से बाहर निकल आया। फिर थोड़ी देर बात करने के बाद साहिल नहाने की बात बोल कर चले गये तथा आंटी रसोई में चली गई तथा मैं ड्राइंगरूम में बैठ कर आंटी के बारे में सोचने लगा। मेरे दिमाग से सुबह की पहली मुलाकात निकल नहीं रही थी। थोड़ी देर बीती होगी कि भाई की आवाज आई- क्या लौड़े की सामान नहीं मिल रहा है?
भाई के मुंह से ये शब्द खत्म ही हुए थे कि आंटी की आवाज आई- इसमें लौड़े की क्या बात है, देखो तो तुम्हारा सामान तो तुम्हारे पास ही है। ‘हेएएएएए… कमिनी, यह क्या कर रही हो? तौलिया क्यों खींच रही हो?’
उनकी बात सुनकर मैं चुपचाप उनके बेडरूम के बाहर पर्दे के पीछे खड़े होकर देखने लगा। वाकयी में आंटी ने भाई जो तौलिया लपेटे हुए थे, उसको खींच चुकी थी तथा भाई की बातों का जवाब देते हुए बोली- जानू, मैं कामिनी हूँ, कमीनी नहीं, अगर मैं अपने कमीनेपन पर आ गई तो नंगे ही ऑफिस जाना पड़ेगा तथा तुम्हीं तो कह रहे थे कि लौड़े का सामान नहीं मिल रहा है। तो वही दिखा रही थी कि तुम्हारा सामान तुम्हारे पास ही है। ध्यान देने वाली बात है कि, अगर तुम्हारा सामान तुम्हारे पास नहीं होगा तो मेरी चूत क्या बाहर जाकर चुदवाकर आयेगी। तभी भाई आंटी को चिपकाते हुए बोले- जानू धीरे से बोलो, अमित हमारी बातों को सुन रहा होगा। ‘हाँ… तो बोलने से पहले ही सोचना चाहिये था!
‘ओ.के. अब ध्यान दूंगा। ’
अचानक भाई आंटी को अपने से दूर करते हुए बोले- कामिनी, यह क्या कमीनापन कर गई?
‘अब क्या हुआ मेरी जान, मैंने कौन सा कमीनापन कर दिया? तथा हर बार तुम मेरा नाम लेते हो तथा उसके साथ कमीना शब्द जोड़ देते हो?’
‘अबे लौड़े की, देख तो मैक्सी ऐसी पहनी हो कि तुम्हारी चूत तथा चूची सब दिख रही है। इसी तरह तुम उसके आने पर दरवाजा खोलने चली गई थी?’
‘नहीं जानू, उस समय तो मैं पेंटी तथा ब्रा पहने हुए थी। अभी तो मैं तुम्हारे लिये उतारकर आई हूँ, तुम्हारे लंड को जो शांत करना है, क्योंकि 20-25 रोज हम दोनों को एक-दूसरे का लंड तथा चूत नसीब नहीं होगा। ’
आंटी से इतना सुनते ही भाई फिर से आंटी को चिपकाते हुए बोले- जान, इसलिये तो मैं तुम्हें कमीनी कहता हूँ। तुम जब चाहती हो मुझसे भी कमीनापन करवा लेती हो। यह हिंदी सेक्स स्टोरी आप अन्तर्वासना सेक्स स्टोरीज डॉट कॉम पर पढ़ रहे हैं!
‘तो ठीक है!’ आंटी अपने को भाई से छुड़ाते हुए बोली- तो मत करो कमीनापन, मैं जा रही हूँ रसोई में तुम्हारे लिये नाश्ता बनाने! मुझे भी ऑफिस के लिये देर हो रही है। ’ कहकर वो पैर पटकते हुए कमरे से बाहर निकलने लगी। मैं जल्दी से अपने कमरे में आकर लेट गया तथा अपनी आँखें मूंद ली। यकीन मानिए, मुझे अहसास हो रहा था कि कोई मेरे कमरे में झांक रहा है। तभी ‘अरे कामिनी सुनो तो…’ कहते हुए भाई भी शायद आंटी के पीछे-पीछे जा रहे थे। जैसे ही दोनों की आवाज मुझसे दूर हुई, मैं एक बार फिर उठा तथा दबे पांव कमरे से बाहर निकला, कमरे से बाहर झांक कर देखा तो मेरी नजर रसोई की तरफ गई। भाई आंटी को पीछे से पकड़े हुए थे। यकीन मानिए, मैं थोड़ा आड़ लेते हुए तथा पास गया तो देखा आंटी झुकी हुई हैं तथा भाई आंटी को चोद रहे थे। दोनों दबी आवाज में बोले जा रहे थे- आह उम्म्ह… अहह… हय… याह… हो आह…
तभी आंटी बोली- जरा जोर से पेलो, मजा नहीं आ रहा है। ‘हाँ यार, मजा तो मुझे भी नहीं आ रहा है। चुदाई में जब तक आवाज तेज न हो, हम दोनों को ही मजा नहीं आता। अमित की वजह से थोड़ा धीमी आवाज के साथ तुम्हारी चूत मारनी पड़ रही है। ’
‘आवाज मत निकालो मादरचोद, परन्तु चोद तो तेज-तेज सकते हो?’
‘ले बहन की लौड़ी…’ कहते हुए भाई तथा तेज-तेज धक्के लगाने लगे तथा आंटी ‘आ मेरे शेर, इसी तरह चोदो। ’ बोलने लगी। थोड़ी देर बाद दोनों हाँफने लगे, फिर भाई आंटी से अलग हुए, मैं एक बार फिर तेज चाल से अपने कमरे में पहुंच गया। असल में, कुछ देर बाद भाई मुझे जागने आये तथा बोले- आओ अमित, चल कर नाश्ता कर लो। चल जल्दी आ, उसके बाद मुझे निकलना भी है। तथा अब लंदन से वापसी पर ही मेरी तुम्हारी मुलाकात होगी। मैंने तथा भाई ने साथ-साथ नाश्ता किया, उसके बाद मैंने तथा आंटी दोनों ने भाई को बॉय किया तथा उसके बाद मैं आकर लेट गया, मुझे कब नींद आई पता ही नहीं चला। कहानी जारी रहेगी। [email protected]
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