Mindblown: a blog about philosophy.

  • बॉस की कामुक पकड़: ऑफिस में चोरी छिपे इश्क की दास्तान

    रीमा की साँसें तेज हो जातीं जब भी विक्रम सर की नज़र उस पर पड़ती, एक अजीब सी आग उसके बदन में सुलग उठती। विक्रम सर, चालीस के करीब, मजबूत कंधों वाले और आँखों में एक ऐसी चमक लिए थे जो रीमा के अंदरूनी कोनों तक पहुँच जाती थी। रीमा, एक नई इंटर्न, अभी मुश्किल…

  • बंद दरवाज़ों की सरगोशी: ऑफिस में चोरी छिपे इश्क की दास्तान

    आज उस खाली ऑफिस में सिर्फ मैं और अर्जुन थे, और हवा में एक अजीब सी उत्तेजना घुली हुई थी। देर रात के सन्नाटे में, सिर्फ एसी की हल्की घरघराहट और हमारे दिल की धड़कनें सुनाई दे रही थीं। प्रोजेक्ट खत्म करने के बहाने हम दोनों यहीं रुक गए थे, पर सच तो यह था…

  • सहकर्मी संग वासना की रात: ऑफिस कलीग के साथ बेकाबू प्यार का ज्वार

    रीना की आँखों में एक ऐसी आग थी जो राहुल को हर पल जलाती रहती थी, और वह जानता था कि उसके लिए राहुल के दिल में एक अलग ही **ऑफिस कलीग के साथ बेकाबू प्यार** उमड़ रहा था। आज ऑफिस में देर हो चुकी थी। सिर्फ़ राहुल और रीना ही बचे थे, एक ज़रूरी…

  • ऑफिस के बंद दरवाज़ों के पीछे: कलीग संग बेकाबू वासना का खेल

    राहुल की उँगलियाँ जब प्रिया की कमर से गुज़रीं, तो एक बिजली सी उसके पूरे बदन में दौड़ गई। ऑफिस में देर रात तक चल रही प्रोजेक्ट मीटिंग खत्म हो चुकी थी, पर उनकी रात अभी शुरू होनी बाकी थी। बाकियों के जाने के बाद भी वे दोनों एक खाली कॉन्फ्रेंस रूम में रुके थे,…

  • सहकर्मी की देह में डूबा बेकाबू वासना का सागर

    उसकी रेशमी साड़ी का पल्लू जब मेरी बांह से छुआ, तो मेरी नस-नस में जैसे आग दौड़ गई। प्रिया थी, मेरी ऑफिस कलीग, जिसकी मदहोश कर देने वाली खुशबू अक्सर मुझे उसके ख्यालों में डुबो देती थी। आज देर रात तक ऑफिस में सिर्फ हम दो ही थे, और हवा में एक अजीब सी बिजली…

  • बंद ऑफिस में बेकाबू कलीग का जिस्मानी प्यार: दहकती वासना की रात

    आज ऑफिस में देर तक रुकना प्रिया को कभी इतना उत्तेजित नहीं कर पाया था। उसकी आँखें लगातार राहुल को ढूँढ रही थीं, जो आज एक प्रोजेक्ट पर उसके साथ काम कर रहा था। जैसे ही आखिरी सहकर्मी ने अलविदा कहा, दफ्तर की नीरवता में एक अजीब-सी बेचैनी घुल गई। प्रिया ने अपनी कुर्सी से…

  • दफ्तर की दीवारों से बिस्तर तक: बेकाबू प्यार का रोमांचक सफर

    आज वो रात थी जब ऑफिस की दीवारें भी हमारी दबी हुई हसरतों की गवाह बनने वाली थीं। राहुल की आँखों में मैंने वही प्यास देखी जो मेरी रगों में दौड़ रही थी। रात के दस बज चुके थे और ऑफिस में सिर्फ हम दोनों बचे थे, एक ज़रूरी प्रेजेंटेशन पर काम करते हुए। लैपटॉप…

  • ऑफिस कलीग के साथ बेकाबू प्यार: वासना का वो बेखौफ संगम

    आज ऑफिस में देर शाम तक काम करते हुए, प्रिया और राहुल की आँखों का मिलन किसी इत्तेफाक से कम नहीं था, पर उस मिलन में एक अघोषित आग धधक रही थी। राहुल ने जब देखा कि प्रिया अपनी कुर्सी पर बैठी एक फाइल में गुम है और उसके रेशमी बाल उसके कंधों पर बिखरे…

  • ऑफिस कलीग के साथ बेकाबू प्यार: जब हदों को लांघा

    शाम ढल चुकी थी, लेकिन ऑफिस में फैली सन्नाटे से ज़्यादा घना कुछ था तो वो थी राहुल की आँखें जो प्रिया पर गड़ी थीं। प्रिया, लैपटॉप पर अपनी उँगलियाँ चला रही थी, मगर उसे महसूस हो रहा था कि राहुल की साँसों की गरमाहट उसके कंधे पर पड़ रही है। आज काम खत्म होने…