मजेदार किस्सा: Leave a comment
यकीन मानिए, पिछला भाग पढ़े:- पड़ोसी लड़कों की हवस का शिकार हुई छोटी बहन-9 आशा है कि आप लोगों ने पिछली सेक्स कहानी को पढ़ लिया होगा, कि कैसे सभी मिल कर मेरी छोटी बहन स्वाति को जम कर चोदते हैं तथा फिर विराट स्वाति को अपने प्रेम के जाल में फंसा कर चुदाई करता है। तथा जब दोनों अपनी चुदाई में मस्त थे, तो मैंने देखा कि विकास तथा अमर दोनों चुपके से चाॅकलेट खा रहे थे। मैंने जब उनसे पूछा तो वो बोले कि, “इससे एनर्जी मिलेगी तो स्वाति के साथ ज्यादा देर मजे करेंगे हम दोनों तथा स्वाति को खुश कर देंगे। ” दूसरी तरफ स्वाति तथा विराट एक-दूसरे से खुश थे। दोनों ने चुदाई का पूरा सुख भोग लिया था। विराट स्वाति से बात करते हुए बोलता है कि, “अभी से कुछ घंटे पहले हम दोनों एक-दूसरे से अंजान थे, तथा किस्मत तो देखो अब हम दोनों एक-दूसरे को अपना दिल दे चुके हैं। ” विराट: मैंने ये कभी नही सोचा था कि मैं उस लड़की को कभी चोद पाऊंगा, जिसको मैं कालेज जाते वक्त देख कर अपने लंड को मसलता रह जाता था। पर देखो आज भगवान भी मेहरबान थे। यकीन मानिए, इसलिए मैं अचानक से आपके पास आया तथा फिर हम दोनों ने अच्छा वक्त बिताया। स्वाति (चौंकते हुए): क्या? आप मुझे पहले से जानते हो, मुझे पहले भी देख चुके हो? विराट: हां मेरी जान, हम सब तुम्हें पिछले दो साल से देख रहे हैं। पर कभी सोचा नहीं था कि हम तुम्हें चोद पाएंगे। आपको बता दूं कि, इसलिए सुबह-शाम जब तुम्हें कालेज आते-जाते देखता, तो हम सब तुम्हारे नाम की मुट्ठी लगा लेते थे। स्वाति: तुम सब मतलब, तुम्हारे अलावा भी तथा कोई था क्या? विराट: हां, मेरे अलावा चार लड़के थे, जिसमें से एक विकास भी था। स्वाति (थोड़ा उत्सुकता के साथ): तथा कौन कौन था? विराट: मेरे अलावा विकास, सागर, आरव तथा विराज थे। सच कहूं तो, सब तुम्हे सोच सोच कर मुट्ठी मारते थे एक साथ। स्वाति: सच्ची में तुम सब एक साथ मुट्ठी मारते थे? एक-दूसरे का देख शर्माते नही थे? मतलब छोटा या बड़ा होने पर? विराट: दोस्तों में कैसी शरम? वैसे विराज तथा सागर का सबसे मोटा, लम्बा तथा तगड़ा था, जिसे तुम शायद झेल भी ना पाओ, तथा आरव का सबसे लम्बा था पर उसका पतला था। बाकी विकास तथा मेरा तो तुम देख ही चुकी हो। स्वाति: अच्छा, हो सकता है बड़ा रहा हो, मुझे क्या? विराट: बेबी अगर तुम चाहो तो मैं तुम्हे सभी का दिला सकता हूं। पर तुम्हारा अपना रिस्क रहेगा। क्यूंकि उनका मोटा तगड़ा है, तो दर्द शायद ही झेल पाओ। क्यूंकि सागर तथा विराज ने जिसको भी चोदा है, वो दो रोज तक विस्तर से उठ भी नही पाई है। सच कहूं तो, स्वाति (उत्सुकता के साथ): ऐसा क्या, ये सब कहने की बात होती है। विराट: तो कहो तो तुम्हें उनसे मिला दूं। सच कहूं तो, फिर बताना बाद में कैसे हैं उनके लंड। ये सब आपस में विराट तथा स्वाति एक दूसरे से लेटे हुए बात कर ही रहे थे। तभी वहां विकास आ गया। विकास: अरे भाई, अब बस भी कर। अब मुझे भी लेने दे ना, तथा तुम सब क्या बात कर रहे थे इतनी देर से? विराट: विकास भाई स्वाति को अपने दोस्तों से मिलवाना है, विराज, सागर तथा आरव से। ये विश्वास ही नही कर रही कि वो सब जिसे चोदते हैं, वो दो रोज तक बिस्तर से ही नहीं उठती। विकास: भाई लाईव शो दिखा दिया जाए क्या? प्लान बनाओ कहीं घूमने का तथा वहीं पर दोस्तों का दर्शन करा दो स्वाति को। यकीन मानिए, विराट: ठीक है ना स्वाति बेबी? अगले महीने में कहीं घूमने चलते हैं। फिर वहीं हो जाएगा दूध का दूध जल का पानी। स्वाति मन ही मन मुस्कुराती है तथा बोलती है कि: ठीक है, देखा जाएगा। विकास: ठीक है बेबी, बाद का बाद में देखा जाएगा। पहले अभी आओ मेरे लंड को शान्त करो। स्वाति बेबी, अब आ भी जाओ। कहते हुए स्वाति को पकड़ कर अपनी गोद में बिठाता है, तथा फिर विनय को बुलाता है कि भाई तू भी आजा। स्वाति: ओह यार तुम दो-दो लोग क्यूं मारना चाहते हो एक साथ? अकेले करो ना। विकास: चुप कर रंडी साली, हमें मजा आता है। (और फिर विनय को बोलता है) आ जा भाई देर मत कर। यकीन मानिए, विनय (मुस्कुराते हुए): थैंक्यू भाई, मुझे लगा अब तो ठोंकने को ही नहीं मिलेगा साली को। विकास: अरे भाई तू मेरा भाई है। अब चल इसकी गांड में घुसा दे। इतना सुनते ही विनय अपने लंड को स्वाति की गांड के छेद पर रख कर धीरे से दबाता है। तो स्वाति चीख उठती है। पर विनय बिना रुके ही स्वाति को बोलता है, “चुप हो जा साली, मेरे से चुद ले अच्छे से रंडी। ” इतना कहते हुए जोर का धक्का मारता है तो स्वाति विकास के ऊपर गिर जाती है। विकास तुरन्त स्वाति को अपनी बाहों में जकड़ लेता है, तथा उसको चूमने लगता है। वो विनय को जोर-जोर से झटके मारने को कहता है। विनय के हर झटके में स्वाति आह आह अआआआहहहहह आह की आवाज निकालती है। विकास स्वाति की चूचियों को चाट-चाट कर उसके निप्प्ल के चारो ओर दांत से काटता है। स्वाति विनय के हर झटके में उहआह उहआह की आवाज निकालती है तो कभी-कभी विकास के काटने की वजह से सी सी सी सी की आवाज निकालती है। ये सब चल ही रहा होता है, तब तक विनय ने अपनी स्पीड बढ़ा दी। वो जोर-जोर से झटके मारने लगा, जो देख सब चौंक गये। फिर विकास तथा विराट बोले, “विनय भाई बस कर यार। तू तो हलक तक पहुंचा देगा। आपको बता दूं कि, रंडी की चूत फट जाएगी भाई, धीरे कर। ” पर विनय कहां रुकने वाला था। वो जल्दी-जल्दी झटके मारते हुए स्वाति को अपनी गोद में उठा लिया तथा फिर स्वाति की कमर पकड़ कर अपनी कमर में फंसा लिया तथा फिर फट फट फट फट झटके मारने लगा। स्वाति की आह निकल रही थी, पर फिर भी वो मजे से चुद रही थी। वो बोल रही थी। स्वाति: ओह वाव बेबी, तथा तेज, तथा तेज चोदो मुझे। फाड़ दो मेरी चूत, बहन के लौड़े, अपने मित्र की बहन की चूत चोद डाल। विनय: ओह बेबी, तू मेरी रंडी है साली लौड़ी। असल में, सरसो के खेत में जो कसर बच गयी थी, अब यहां पूरी कर देता हूं बहन की लौड़ी। अब तो मैं हर होली में आऊंगा तेरी जवानी का रस चूसने, तथा तेरे साथ चुदाई भरी होली खेलूंगा मेरी रंडी। स्वाति: ओह नो बेबी, यू आर फकिंग टू हार्ड बेबी, प्लीज स्लो डाउन, उहहहहहफक पेन हो रहा। निकाल लो बेबी। स्वाति की इतनी बात सुन कर अमर दौड़ कर स्वाति के पास आ गया तथा स्वाति को बोला- अमर: ओह बेबी, तुझे तो अभी मेरा भी लंड खाना है। चल शुरू हो जा लौड़ी तथा चुप-चाप अपनी गांड में मेरा लंड ले। असल में, इतना कहते हुए अमर अपने लंड को स्वाति की गांड में पेलने लगा। तो अमर का लंड फिसल गया। तथा फिर विनय रुका तो, अमर ने अपना लंड स्वाति की गांड में फंसाया, तथा जोर का झटका मारा। अमर का लंड सनसनाते हुए स्वाति की गांड को चीरता हुआ अन्दर दाखिल हो गया। स्वाति तुरन्त उछल पड़ी। पर अमर ने स्वाति का मुख बन्द कर दिया, तथा फिर विनय तथा अमर दोनों मिल कर स्वाति की गांड तथा चूत में फटाफट लंड पेलने लगे, तथा गांड पर चमाट मारने लगे। दस पन्द्रह झटके लगातार मारने तथा चमाट लगाने के बाद स्वाति की गांड एक-दम लाल हो गयी थी। असल में, पर वो दोनों रुकने का नाम नही ले रहे थे। तभी समर आ गया तथा स्वाति की चूचियों से खेलने लगा। वो बोला, “स्वाति रानी कैसी लगी आज तुम्हारी चुदाई? देख लो ना, आज हम सब ने तुम्हें चोद ही लिया। अब आना छत पर अपनी जवानी दिखाने, तब बताता हूं। सब के सामने चोदूंगा तुम्हें, पर कुछ भी कहो तुम्हारी गांड काफी भार भरकम है। मजा आ गया। ” ये सब समर बोल ही रहा था तब तक विनय ओहहहहहह की आवाज करते हुए स्वाति की चूत में झड़ गया। तथा जब उसने लंड बाहर निकाला, तो गाढ़ा माल स्वाति की चूत से टपकने लगा। सच कहूं तो, विनय का गाढ़ा माल स्वाति की चूत में होने से स्वाति की चूत में फिसलन बढ़ गयी थी तथा इसी का फायदा उठाते हुए समर भी अन्त में अमर के साथ धीरे-धीरे अपने लंड को स्वाति की चूत में अन्दर-बाहर करने लगा। ध्यान देने वाली बात है कि, अमर स्वाति की गांड में अपना मोटा लौड़ा देकर धक्कम-पेल ठोंक रहा था। असल में, स्वाति की उह आह की आवाज बाहर ना निकले, इसलिए विराट अपना लौड़ा स्वाति के मुख में डाल कर लौड़ा चुसा रहा था, तथा विकास स्वाति की चूचियों को मसल रहा था। ध्यान देने वाली बात है कि, मैं तथा विनय ये सब देख रहे थे, कि कैसे इन चारो ने आज मेरी छोटी बहन स्वाति को रंडी बना दिया था। उसकी चूत सूज चुकी थी। उसकी चूचियां मसलते-मसलते लाल हो चुकी थी। फिर कुछ ही देर में अमर तथा समर तेज तेज लंड अन्दर पेलने लगे, तथा कुछ ही झटकों बाद वो स्वाति की चूत तथा गांड में झड़ गए। फिर जल्दी से स्वाति को घुटनों पर बैठने को बोला। सच कहूं तो, जैसा स्वाति अपने घुटनों पर बैठी, विराट ने अपने लंड की पिचकारी उसके चेहरे पर फेंक दी। जिससे स्वाति के मुख पर विराट का गरम-गरम माल फैल गया। फिर विकास स्वाति की चूचियों पर अपना पिचकारी मार दिया। सच कहूं तो, अमर तथा समर ने स्वाति की चूत तथा गांड को भर ही दिया था, इधर विनय तथा मैं भी अपने लंड को लगातार हिला ही रहे थे। तो हम दोनों ने स्वाति की चूचियों तथा पेट पर अपना माल गिरा दिया। रात के करीब 3 बज चुके थे। स्वाति की लगातार 5 घंटे चुदाई हुई थी। उसका जिस्म सबके माल से चिपचिपा रहा था। फिर सब ने स्वाति को बारी-बारी से किस्स किया तथा बोला कि, “ये रात हमेशा याद रहेगी मेरी रानी। ” तथा फिर वो चारों स्वाति को आंख मारते हुए बोले कि, “फिर से तैयार रहना। तुम्हारे भाई के जाने के बाद भी हम तुम्हारा ख्याल रखेंगे मेरी जान। ” स्वाति चुप-चाप सुन लेती है, तथा फिर हल्की सी मुस्कान देती है। तो मैं समझ जाता हूं कि अब ये इन सबसे खूब चुदेगी। इसलिए मैं यही सोचता हूं कि जल्द से जल्द इसका कालेज खत्म हो तथा इसको यहां से निकालूं। पर अभी तो कालेज का 2 महीना बचा था। क्या हुआ अगले 2 महीने में, जानने के लिए बने रहें अपने भाई राजू के साथ, धन्यवाद !