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मजेदार किस्सा: मौसी की लड़की की सील तोड़ी

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असल में, दोस्तो, मेरा नाम संचित है, मैं तलवाड़ा पंजाब का रहने वाला हूँ, उमर 22 साल हाइट 5’10”, देखने में सुंदर हूँ तथा सबसे ज़रूरी मेरा लंड 6.5 इंच लंबा तथा 2.5 इंच मोटा है, मुझे सेक्स करने का बड़ा शौक है शुरू से ही… पर कभी मौका नहीं मिला। 12 क्लास में मैंने काफी सारी लड़कियों के नाम पर काफी मूठ मारी थी। अब आपको ज़्यादा बोर ना करते हुए सीधा कहानी पर आता हूँ। मेरी मौसी की दो लड़कियाँ हैं, बड़ी की शादी हो चुकी है तथा छोटी अभी B.A. कर रही है उसका नाम कल्पना है, कल्पना देखने में इतनी सुंदर तथा सेक्सी है कि कोई भी उसे एक बार देख ले तो मूठ मारे बिना नहीं रह सकता। असल में, हालांकि उसके मुम्मे ज़्यादा बड़े नहीं हैं पर फिर भी वो कमाल की चीज़ है, मैंने कई बार उसके नाम से मूठ मारी थी तथा अब उसे चोदना चाहता था। ध्यान देने वाली बात है कि, दिसंबर महीने की बात है, मौसी की देवरानी के घर कोई प्रोग्राम था, हमारी फ़ैमिली को भी बुलाया गया था, पर मम्मा-पापा को किसी तथा काम से कहीं बाहर जाना था इसलिए मौसी के घर मैं चला गया। प्रोग्राम अगले रोज सुबह था, इसलिए मेरी तरह बाकी सब रिश्तेदार भी आ गये थे। रात को जब सोने की बारी आई तो जगह कम होने के कारण सबको अड्जस्ट करना पड़ा… मैंने मौका देखा तथा मैं कल्पना के रूम में जाकर सो गया तथा अंदर ही अंदर काफी खुश था कि आज मेरे सपनों की रानी मेरे साथ सोएगी। जैसा मैंने सोचा था, ठीक वैसा ही हुआ, थोड़ी देर बाद कल्पना भी आ गई तथा आकर मेरे बगल में लेट गई। कमरे में एक ही रज़ाई थी जो मैंने एक तरफ से औढ़ रखी थी। थोड़ी देर बाद जब कल्पना को भी ठंड लगने लगी तो वो भी रज़ाई में आ गई। सच कहूं तो, सब सो गये थे पर मैं कहाँ सोने वाला था। असल में, थोड़ी देर बाद मुझे लगा कि कल्पना भी सो गई है फिर मैंने बड़ी हिम्मत करके अपना एक हाथ कल्पना के पेट पर रख दिया, वो सोई थी इसलिए उसने कुछ नहीं कहा। फिर मैं धीरे धीरे हाथ उसके मुम्मों पर ले गया तथा धीरे धीरे दबाने लगा। सच कहूं तो, शायद वो सो गई थी इसलिए मैंने थोड़ी तथा हिम्मत की तथा हाथ उसके शर्ट के अंदर डाल दिया पर उसने ब्रा काफी टाइट डाली हुई थी इसलिए कोई फायदा नहीं हुआ। अपना हाथ नीचे उसकी सलवार तक ले गया तथा धीरे धीरे उसकी सलवार का नाड़ा खोल दिया, नाड़ा खोलते ही उसने थोड़ी हलचल की तथा साइड चेंज करके सो गई। मैं तो पूरा डर गया था पर मेरी किस्मत अच्छी थी कि वो फिर से सो गई थी। थोड़ी देर तथा इंतज़ार करके मैंने अपना हाथ उसकी सलवार में डाल दिया, हाथ सीधा जाकर उसकी फुद्दी के ऊपर लगा तथा मैं समझ गया कि उसने पेंटी नहीं पहनी थी। ध्यान देने वाली बात है कि, मैं काफी खुश हो गया कि आज पहली बार किसी लड़की की फुद्दी को छूने का मौका मिला है तथा वो भी अपनी मौसी की लड़की की… मैं यह सोच सोच के पागल हुया जा रहा था। थोड़ी देर ऊपर हाथ फेरने के बाद मैं अपना हाथ उसकी टाँगों के बीच ले गया तथा उसकी फुद्दी को महसूस किया जो एकदम रूई जैसी मुलायम थी, फिर मैंने फ़ुद्दी के दोनो होठों को टच किया तथा अपनी एक उंगली से उसकी फ़ुद्दी को दबा दिया.. अचानक कल्पना जाग गई, मैंने फटाफट अपना हाथ बाहर निकाला तथा दूसरी तरफ मुँह करके सोने का नाटक करने लगा। वो उठ कर बैठ गई तथा उसने इधर उधर देखा तथा फिर सो गई… इधर मेरी जान में जान आई। फिर मैं उठ कर बाथरूम गया तथा वहाँ कल्पना के नाम की मूठ मारने लगा, आज मूठ मारने में एक अलग ही मज़ा था, मुझे ऐसा लग रहा था कि जैसे मेरा लौड़ा हाथ में नहीं बल्कि कल्पना की फ़ुद्दी के अंदर बाहर हो रहा हो! फिर 10 मिनट के बाद मेरा छूट गया तथा मेरे लंड से पिचकारी सीधी दीवार पर गिरी, फिर मैंने अपना लंड साफ किया तथा जाकर सो गया, इसके बाद तथा कुछ नहीं हो पाया। फिर अगले रोज जब सोने की बारी आई तो सब निशा को 1:30 बजे तक बातें करते रहे मैं फिर से कल्पना के कमरे में ही सोया था। असल में, ज़्यादा निशा होने के कारण मुझे भी नींद आ गई थी। फिर जब मेरी नींद खुली तो मैंने देखा कि कल्पना अलग रज़ाई लेकर सोई हुई थी। असल में, उसको देख कर मेरा दिमाग़ शैतान हो गया तथा मैं उसकी रज़ाई में जाकर लेट गया, उसने लोअर तथा टी-शर्ट पहनी थी। थोड़ा इंतज़ार करने के बाद मैंने अपना हाथ सीधा उसके मुम्मों पर रख दिया तथा दबाने लगा। आज उसे कोई होश नहीं थी शायद सारा रोज काम करके वो थक गई थी, मैंने उसकी टी-शर्ट ऊपर की तथा उसके पेट पर हाथ फेरने लगा, फिर मैंने उसका लोअर थोड़ा नीचे सरका दिया, मैंने उसकी पेंटी भी नीचे सरका दी तथा जाकर उसकी टाँगों के बीच बैठ गया तथा उसकी फ़ुद्दी में अपनी जीभ देने लगा। थोड़ी देर चाटने के बाद वो हुआ जिसकी मुझे उम्मीद नहीं थी, उसके हाथ मेरे सिर पर थे, वो जागी हुई थी तथा अब वो मेरा सिर अपनी फ़ुद्दी में दबा रही थी। बस फिर क्या था मुझे तो ग्रीन सिगनल मिल गया अब मैं पूरे जोश में उसकी फ़ुद्दी चाटने लगा। आपको बता दूं कि, थोड़ी देर के बाद मैं उसके ऊपर आ गया तथा उसकी टी-शर्ट तथा पिंक ब्रा भी खोल दी, फिर मैंने उसके लबों में लब डाल दिए तथा चूसने लगा तथा एक हाथ से उसके मुम्मे दबाने लगा। अब वो भी उत्तेजित हो रही थी। थोड़ी देर लब चूसने के बाद मैंने उसके मुम्मे भी चूसे, मैंने फिर मैंने उसका लोअर तथा पेंटी पूरी उतार कर टाँगों से अलग कर दी तथा फिर खुद भी नंगा हो गया। आज मैंने पहली बार किसी लड़की को पूरा नंगी देखा था तथा वो तो एकदम जन्नत की हूर लग रही थी, उसके गोल गोल छोटे छोटे मुम्मे क्या मस्त लग रहे थे… दिल कर रहा था कि इन्हें अभी खा लूँ… मेरे नंगा होते ही वो मुझसे लिपट गई… मैं तो जैसे जन्नत में था! मेरी हूर पूरी नंगी मुझसे लिपटी हुई थी। थोड़ी देर ऐसे ही लिपटे रहने के बाद हम अलग हुए तथा मैंने उसे लेटने को कहा, फिर मैंने उसकी टांगें खोली तथा उसकी फ़ुद्दी चाटने लगा, अब कल्पना को भी जोश चढ़ रहा था… क्या महक थी उसकी फ़ुद्दी की… मुझे तो आनंद आ रहा था… कल्पना के मुँह से ‘आआहहह आहहह’ की आवाज़ें आ रही थी। सच कहूं तो, थोड़ी देर के बाद उसकी बॉडी अकड़ने लगी तथा उसकी फ़ुद्दी ने नमकीन जल छोड़ दिया तथा वो बोली- अब मत तड़पओ, डाल दो मेरे अंदर! मैंने उसे अपना लंड चूसने को बोला पर उसने मना कर दिया, मेरे ज़ोर देने पर वो मान गई तथा मैंने अपना पूरा लौड़ा उसके मुँह में दे दिया, वो उसे लोलीपाप की तरह चूस रही थी। ध्यान देने वाली बात है कि, उसने करीब 10 मिनट तक मेरा लण्ड चूसा तथा मेरा माल उसके मुँह में छूट गया, उसका मुँह मेरी क्रीम से भर गया था, उसने सारा अंदर कर लिया तथा मैं लेट गया। वो भी मेरी बगल में लेटी थी, मैंने बोला- अब तुम ही इसे खड़ा करो! वो बोली- कैसे? तो मैंने बोला- चूसो इसे दोबारा… वो चूसने लगी 2 मिनिट में ही मेरा लण्ड फिर से अकड़ गया तथा मैंने टाइम ना गंवाते हुए उसे नीचे लेटाया तथा उसे टांगें खोलने को कहा। उसने टांगें खोल दी तथा मैं अपना लंड उसकी फ़ुद्दी पर रगड़ने लगा, उसके मुख से ‘आह… आहह आआहहह…’ की आवाज़ें आ रही थी। मैंने एक जोरदार झटका मारा तो उसके मुँह से चीख निकल गई ‘उउउईईईई…’ तथा वो चिल्लाने लगी- बाहर निकालो इसे… मैं मर जाऊँगी! मैंने जल्दी से अपने मुँह से उसके मुँह को दबा दिया तथा फिर एक तथा झटका मारा, अबकी बार वो पहले से ज़्यादा ज़ोर से चीखी पर मेरा मुँह होने के कारण उसकी चीख दबी रह गयी। आपको बता दूं कि, फिर मैंने 2 झटके तथा मारे तथा मेरा लंड उसकी फ़ुद्दी में समा चुका था, उसकी आँखों से जल बह रहा था। फिर मैंने कुछ देर ऐसे ही रहने दिया, जब उसका दर्द थोड़ा कम हुई तो मैंने उसके मुँह से अपना मुँह अलग किया तथा देखा कि उसकी फ़ुद्दी से खून निकल रहा था जिससे बेड की चादर खराब हो गई थी। वो ये सब देख कर डर गई थी पर फिर मैंने उसे समझाया कि पहली बार ऐसा होता है। यकीन मानिए, जब उसका दर्द काफ़ी कम हो गया तो मैंने धीरे धीरे झटके लगाने चालू कर दिए, अब उसे भी आनंद आने लगा तथा वो भी ‘फक मी… फक मी…’ कर रही थी तथा उसके मुँह से ‘आहहह आआहह हहआ… आहह… आआहह…’ की आवाज़ें आ रही थी, अब वो भी नीचे से मेरा साथ दे रही थी। अचानक उसकी बॉडी अकड़ गई तथा उसने जल छोड़ दिया तथा बोली- अब बस करो… पर मेरा अभी नहीं हुया था तो मैंने झटके लगाना चालू रखा, थोड़ी देर में उसे फिर से आनंद आने लगा तथा फिर से मेरा साथ देने लगी। काफ़ी देर की चुदाई के बाद मेरा छूटने वाला था, मैंने अपनी स्पीड बढ़ा दी तथा फिर अपना सारा माल उसकी फ़ुद्दी में गिरा दिया। इस दौरान वो 3 बार झड़ चुकी थी। फिर उसी निशा हमने एक बार तथा चुदाई का आनंद लिया। आपको मेरी यह कहानी कैसी लगी, मुझे ज़रूर मेल करें। [email protected] What did you think of this story