मेरा गुप्त जीवन- 80
टिन्नी बोली- तनीषा का काम कर दिया सोमू?
मैं घबरा कर बोला- तनीषा का कौन सा काम?
मिन्नी बोली- वही… जिसके लिए तुम पर तनीषा बार बार दाना फैंक रही थी?
मैं बोला- कौन सा दाना तथा कैसा दाना? बताओ न प्लीज?
टिन्नी बोली- तुम मेरे सामने प्लीज वलीज़ ना करो तथा सीधे से बताओ कि मेरी बारी कब की है?
मैं बोला- कौन सी बारी तथा कैसी बारी?
टिन्नी चेयर से उठी तथा मेरे बेड पर आ कर बैठ गई तथा आते ही मेरे लंड को पैंट के बाहर निकाल कर उसको घूरने लगी तथा फिर बोली- अच्छा है मोटा भी है तथा लम्बा भी है, मुझको कब चखा रहे हो यह केला?
मैं चुप रहा तथा फिर ज़ोर ज़ोर से हंसने लगा, हँसते हुए बोला- तुम दोनों बहनें कमाल की चीज़ हो। टिन्नी बोली- मैं निशा को आपका केला खाने आ रही हूँ। मैं बोला- मौसी जी तथा मौसा जी भी तो हैं क्या उनका डर नहीं है तुम को?
टिन्नी बोली- उनको मैं संभाल लूंगी वैसे भी दोनों निशा को नींद की दवाई खा कर सोते हैं सो उनको कुछ पता नहीं चलेगा। मैं बोला- मिन्नी को तो पता चल जाएगा न उसका क्या करोगी?
टिन्नी बोली- हम दोनों एक दूसरी से कुछ भी नहीं छुपाती। मैं बोला- इतना भरोसा है तो आ जाओ अभी कुछ नमूना पेश कर देते हैं!
टिन्नी बोली- ठहरो, मैं ज़रा देख कर आती हूँ कि मिन्नी क्या कर रही है। यह कह कर टिन्नी गई तथा जल्दी ही वापस आ गई तथा बोली- मिन्नी तो सो रही है तुमसे सेक्स करवाने के बाद शायद थक गई होगी। जल्दी से उसने भी अपनी साड़ी ऊपर उठा दी तथा मैं उसकी काली झांटों से भरी चूत को साफ़ देख सकता था, काफी उभरी हुई चूत थी। उसने मेरे लौड़े को पैंट से निकाला तथा झट से मेरे ऊपर बैठ गई, अपने आप ही उसने मेरे लंड को अपनी टाइट चूत में डाला तथा मेरे गले में बाहों को डाल कर ज़ोर ज़ोर से ऊपर नीचे होने लगी। मैंने उसके छोटे गोल चूतड़ों को अपने हाथ में थामा हुआ था तथा वो मज़े से झूला झूल रही थी। उसकी चूत टाइट तथा काफी ही रसीली थी तथा अपनी बड़ी बहन से वो ज़्यादा जानकार तथा चुदक्कड़ लगी। 5-6 मिन्ट में वो झड़ गई तथा मेरे जिस्म से चिपक कर हल्के से काम्पने लगी। लेकिन अभी उसका मज़ा पूरा नहीं हुआ था, मैंने उसको बेड पर लिटा दिया तथा मैं उसके ऊपर पैंट तथा शर्ट पहने ही चढ़ गया, उसके छोटे तथा गोल मुम्मों को हाथ से सहलाने लगा तथा फिर मैंने उसको ठीक ढंग से चोदना शुरू किया। तेज़ तथा धीमे धक्कों से मैं उसको फिर छूटने के कगार पर ले आया, पूरा निकाल कर पूरा अंदर डालने लगा तथा वो चंद मिनटों में फिर से झड़ गई। मैं जल्दी से उसके ऊपर से उठा तथा अपने वस्त्र ठीक ठाक करने लगा तथा वो भी साड़ी नीचे कर के कमरे के बाहर हो गई। उसके जाने के बाद कम्मो कमरे में आई तथा मुस्कराते हुए बोली- वाह छोटे मालिक, दोनों लड़कियों का काँटा खींच दिया आपने?
मैंने हैरान होकर उससे पूछा- तुमको कैसे पता चला कम्मो डार्लिंग? तुम तो सारा टाइम बाहर थी ना!
कम्मो हँसते हुए बोली- मुझ से कुछ नहीं छुपा रहता, मैंने इन लड़कियों को कल ही भांप लिया था कि दोनों ही चुदक्कड़ हैं तथा फिर लंच पर आपके साथ वो जो कुछ कर रही थी उसको मैं दबी आँखों से देख रही थी। मैं बोला- वो दोनों निशा को भी आने का प्रोग्राम बनाना चाहती हैं परन्तु मुझको डर लग रहा है मौसी से, वो बड़ी ही तेज़ है। कम्मो बोली- वही तो, मेरी मानो तो इनसे दूर रहो तो अच्छा है। सच कहूं तो, मैं बोला- वो टिन्नी कह रही थी कि मौसी तथा मौसा जी निशा को सोने की दवाई खा कर सोते हैं, तो उनको कुछ पता नहीं चलता है। यकीन मानिए, कम्मो बोली- छोटे मालिक, आप की क्या मर्ज़ी है? दोनों को चोद तो बैठे हो, क्या अभी तथा चोदने की इच्छा है?
मैं बोला- वो तो जल्दी जल्दी की चुदाई थी, मज़ा नहीं आया ख़ास… तुम कहो तो निशा को उन दोनों के साथ फिर हो जाए?
कम्मो मेरी मर्ज़ी जान गई थी, बोली- ठीक है मैं उन दोनों का इंतज़ाम कर दूंगी तथा मौसा मौसी को भी संभाल लूंगी। यकीन मानिए, मैं बोला- कम्मो रानी, तुम वाकयी में हीरा हो मेरे दिल में बसे प्रेम का ज़खीरा हो। रात को पारो ने खाना इस कदर लज़ीज़ बनाया कि सबने बड़ी तारीफ की ख़ास तौर से मौसा जी ने!
खाना खाने के बाद हम बच्चे बैठक में ही बैठ कर बातें करने लगे तथा वहीं कम्मो ने उन दोनों बहनों की मर्ज़ी जानने की कोशिश की। मिन्नी बोली- 12 बजे तक मम्मी पापा गोली खाकर बड़ी गहरी नींद में सो जाते हैं, उस टाइम हम दोनों सोमू के कमरे में आने वाली हैं। यकीन मानिए, कम्मो बोली- वो तो ठीक है परन्तु अगर कहीं मौसी जाग गई तो फिर क्या होगा?
मिन्नी बोली- हम अभी उनके कमरे में जाएंगी तथा वो खुद मेरे हाथ से रोज़ की तरह अपनी दवाई खाएंगे। तब तो कोई प्रॉब्लम नहीं कम्मो तनीषा?
कम्मो मुस्कराते हुए बोली- क्या कानपुर में भी यही सिस्टम था?
टिन्नी हँसते हुए बोली- काफी अरसे से यही सिस्टम चल रहा है, आप मुस्करा क्यों रहीं हैं तनीषा?
कम्मो बोली- तभी शायद तुम्हारे मित्र घर में आते होंगे तुम दोनों का कल्याण करने। मिन्नी तथा टिन्नी भी यह सुन कर मुस्कराने लगी। सच कहूं तो, फिर हम थोड़ी देर यों हीं ही बातें करते रहे तथा फिर दोनों उठ कर अपने कमरे में चली गई तथा मौसी भी एक बार सारे घर का क्कर लगा आई। कम्मो मौसी के जाने के बाद मेरे कमरे में आ आकर बैठ गई। मैंने पूछा- कम्मो तुमको मालूम था कि मौसी घर का चक्कर लगाएगी?
कम्मो बोली- मालूम तो नहीं था परन्तु ऐसा अंदाजा था कि शायद मौसी घर का चक्कर लगाएगी। इतने में दोनों बहनें अपनी अपनी अपनी नाइटी पहन कर आ गई मेरे कमरे में तथा वहाँ कम्मो को देख कर चकरा गई। मैंने कहा- कम्मो तनीषा से आप लोग घबराओ नहीं, वो हमारे साथ ही रहेंगी तथा हम सबकी मदद भी करेंगी। पहले कमरे का दरवाज़ा तो बंद कर आओ प्लीज। मिन्नी जा कर दरवाज़ा बंद कर आई। मैं उठा तथा सबसे पहले मिन्नी तथा टिन्नी को होटों पर एक एक किस की तथा दोनों को बारी बारी से जफ़्फ़ी भी डाली। कम्मो उठ कर आ गई तथा मिन्नी की नाइटी उतारने लगी तथा उसके बाद उसने टिन्नी की भी नाइटी उतार दी। फिर उसने मेरा पजामा तथा कुरता भी उतार दिया। जब हम तीनो नंगे हो गए तो वो खुद भी अपने वस्त्र उतारने लगी। अब हम सब एक दूसरे को देखने लगे। मिन्नी का जिस्म थोड़ा मोटापा लिए हुए था तथा टिन्नी का जिस्म एक कच्ची कली की तरह लग रहा था। दोनों की चूतें काले तथा घने बालों से ढकी हुई थी, मिन्नी के मुम्मे काफी सुन्दर लग रहे थे, एकदम सफ़ेद तथा मुलायम!
टिन्नी के मुम्मे अभी काफी छोटे परन्तु सॉलिड लग रहे थे। आपको बता दूं कि, ऐसा लगता था कि दोनों बहनों के मुम्मों की चुसाई ज़्यादा नहीं हुई थी। टिन्नी तथा मिन्नी ने जब कम्मो को नग्न देखा तो उनके मुख से अपने आप ही ऊऊह्ह्ह निकल गया। दोनों कम्मो के पास गईं तथा उसके बदन के साथ खेलने लगी, उसके मुम्मों, चूतड़ों से वो काफी ही प्रभावित हुई थी। यकीन मानिए, कम्मो ने भी उसके मुम्मों को हाथ लगा कर देखा कि कैसे हैं। कम्मो पहले मिन्नी को ले आई मेरे पास, उसने आते ही प्रगाढ़ आलिंगन किया मुझको तथा फिर मैं उसके लबों को चूसने लगा। मिन्नी से मैंने पूछा- तुम मुझ से काफी बड़ी हो इसलिए पूछता हूँ कि कैसे मुझसे चुदना पसंद करोगी?
मिन्नी ने मेरे लौड़े को देखा तथा उसको हाथ में लिया तथा फिर झुक कर उसको मुख में लिया तथा थोड़ा सा चूसा तथा फिर खड़ी हो गई तथा बोली- लगता तो है कि यह लम्बी दौड़ का घोड़ा है, सबसे पहले मैं इस घोड़े पर खुद सवारी करूंगी। सच कहूं तो, कम्मो ने कहा- ठीक है आ जाओ मैदान में!
मैं जा कर बेड में लेट गया, मिन्नी आई मेरे दोनों तरफ टांगें रख कर बैठ गई तथा मेरा खड़ा लंड अपनी चूत में डाल लिया। मैं बड़े शांत भाव से लेटा रहा तथा उसको अपने घुड़सवारी के अहंकार को मिटाने के उपाय सोचता रहा। मिन्नी ने लंड अंदर डालने की कारवाई पूरी की तथा अपनी कमर को ऊपर नीचे करने लगी, उसकी चूत काफी टाइट थी तथा गीली भी कुछ कम थी, तो रगड़ ज्यादा रही थी। मैं उसके मुम्मों को छूने लगा तथा चूचियों के साथ गोलम गोलाई का खेल खलने लगा। मिन्नी ने धीरे से शुरू करके अब अपनी स्पीड बढ़ा दी थी तथा आँखें बंद कर के ऊपर नीचे हो रही थी तथा उसके हर धक्के का असर उसके मोटे मुम्मों पर पड़ रहा था जो उछल रहे थे बेरोकटोक!
मैं तथा कम्मो उसके मुम्मों का नाटक देख रहे थे। लेकिन कम्मो अपने हाथ से टिन्नी की चूत को गर्म कर रही थी तथा हल्के से उसकी भग को रगड़ रही थी। यकीन मानिए, मिन्नी 5 मिन्ट ऐसे ही मुझको चोदती रही तथा फिर उसके मुख से यह शब्द निकल रहे थे- मार दूंगी साले, तुझ को छोडूंगी नहीं, हर बार बीच में छोड़ जाता है भड़वे। यकीन मानिए, ऐसी बातों के साथ वो पागलों की तरह चोद रही थी मुझको!
मैं तथा कम्मो थोड़ी हैरानी से उसके इस अजीब रवैये को देख रहे थे। असल में, यह कहानी आप अन्तर्वासना डॉट कॉम पर पढ़ रहे हैं !
फुल स्पीड से ऊपर नीचे होते हुए वो एक ज़ोर की चीख मार कर मेरे ऊपर पसर गई तथा उसका जिस्म ज़ोर ज़ोर से काम्पने लगा। यकीन मानिए, मैंने उसको एक कस के जफ़्फ़ी भी डाली हुई थी फिर भी वो बेहद कांप रही थी। सच कहूं तो, कम्मो टिन्नी को बुला लाई तथा उससे कहने लगी- यह देख यह क्या हो रहा है तेरी बहन को?
टिन्नी बड़े आराम से बोली- तनीषा को ऐसे ही होता है जब इसका छूट जाता है। आप फ़िक्र ना करें, अभी ठीक हो जायेगी। मैं भी उठ कर कम्मो के पीछे खड़ा हो गया तथा मेरा मोटा खड़ा लंड कम्मो की गांड में घुसने की कोशिश कर रहा था। यह देख कर टिन्नी जल्दी से आई तथा कम्मो को हटा कर खुद खड़ी हो गई। मेरी नज़र तो मिन्नी के नज़ारे पर लगी हुई थी तो मैंने ध्यान नहीं दिया। आपको बता दूं कि, टिन्नी अब मेरे लौड़े को पकड़ कर आगे पीछे करने लगी तथा उसको अपनी चूत पर भी रगड़ने लगी। मैंने कम्मो की तरफ देखा तो उसने आँख से इशारा किया कि मैं टिन्नी के साथ शुरू हो जाऊँ। टिन्नी से पूछा- कैसे चुदवाना है?
तो वो बोली- घोड़ी बन कर यार सोमू!
उधर कम्मो मिन्नी को होश में लाने की कोशिश कर रही थी तथा उसके गले तथा मुख पर जल के छींटे मर रही थी। थोड़ी देर में वो कुछ संयत हुई। टिन्नी अपनी बहन की बीमारी की परवाह किये बगैर चुदाई के लिए घोड़ी बन गई थी तथा मुझको जल्दी घोड़ी पर चढ़ने के लिए उकसा रही थी। ध्यान देने वाली बात है कि, मैं बड़ी बेदिली से टिन्नी पर चढ़ा तथा बगैर कुछ सोचे समझे चुदाई की स्पीड तेज़ कर दी। यकीन मानिए, जितनी तेज़ी से मैं उसको चोद रहा था वो तथा भी तेज़ी के लिए मुझको उकसा रही थी। मैंने उसकी कमर को अपने दोनों हाथो में कस कर पकड़ा तथा अंधाधुंध चुदाई शुरू कर दी, टिन्नी ज़ोर से चिल्लाने लगी- तेज़ तथा तेज़!
कम्मो उठी तथा और टिन्नी के मुख पर हाथ रख दिया तथा कहा- साली सबको जगा देगी, धीरे बोल!
पर उस पर कोई असर नहीं पड़ा तथा वो अपने चूतड़ तेज़ी से मेरे लंड की स्पीड के साथ मैच करते हुई चुदवा रही थी। मैंने अब गहरे तथा तेज़ धक्के शुरू किए तथा साथ में उसके भग को भी हाथ से मसलना शुरू किया। भग का मसलना जैसे निशाने पर तीर लगाना था, वो कुछ ही क्षण में ‘यह जा वो जा’ हो गई तथा वहीं ढेर हो गई। कम्मो ने दोनों को कोकाकोला पिलाया तथा उनके कमरे में छोड़ आई। मैंने कहा- कम्मो रानी वो तो दोनों बेकार निकली। अब क्या होगा?
कम्मो मुस्कराते हुए बोली- मैं हूँ न छोटे मालिक, चलो जी भर के चोदते हैं एक दूसरे को!
कम्मो गई तथा दरवाज़ा बंद कर आई तथा फिर शुरू हुई गुरु तथा शिष्य की जंग-ऐ-आज़म!
अगले दिन जब मैं कॉलेज से वापस आया तथा बैठक में गया तो पता चला कि मौसा मौसी कल कानपुर वापस जा रहे हैं। असल में, उनसे पूछा तो उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया। मैंने मिन्नी से पूछा तो वो बोली- सगाई वाली बात पूरी नहीं हो सकी है तो हम वापस जा रहे हैं। मिन्नी ने मुझको बैठक में अकेले देखा तो मेरे पास आकर बोली- आज निशा एक बार फिर से मेरी चूत चुदाई दो ना सोमू। मैं बोला- मिन्नी, कभी नहीं, तुम को चोदना तो काफी ही खतरनाक साबित हुआ, तुमको तो अपने ऊपर कंट्रोल ही नहीं। मिन्नी बोली- नहीं, ऐसा है तुमने मेरे साथ काफी अरसे के बाद सैक्स किया बल्कि किसी पुरुष ने मेरे साथ काफी अरसे बाद सैक्स किया था तो उस कारण मैं अपना आपा खो बैठी थी। मैं बोला- बिलकुल नहीं, तुम्हारे साथ चुदाई करना काफी ही महंगा पड़ सकता है। मिन्नी बोली- प्लीज सोमू, सिर्फ एक बार कर दो ना?
मैं बोला- क्या कर दूँ? बोलो तो सही, क्या चाहती हो तुम मुझसे?
मिन्नी बेशरम हो कर बोली- तुम्हारा लंड चाहिए मुझको। यह शोर सुन कर कम्मो भी आ गई वहाँ- क्या बात है? क्यों शोर मचा रही हो तुम?
मैं बोला- इसको मेरा लंड चाहिए तथा आज ही!
कम्मो बोली- चुप रहो छोटे मालिक, मैं बात कर रहीं हूँ ना, आप जाओ न यहाँ से!
कम्मो मिन्नी को लेकर दूसरे कमरे में चली गई। और फिर थोड़ी देर बाद मेरे कमरे में आ कर बोली- छोटे मालिक, अब थोड़ा सब्र से काम लीजिये। सच कहूं तो, मैंने उसको समझा दिया है वो निशा को एक बार चुदाई के लिए आयेगी। उसकी इच्छा पूरी कर देना, नहीं तो ख्वामखाह में यह बवाल खड़ा कर देगी। रात को जब मौसा मौसी सो गए तो कम्मो मिन्नी को लाई तथा मैं जब गहरी नींद सोया हुआ था उसने उसको मेरे खड़े लंड से चुदवा दिया। बाद में कम्मो ने बताया कि मिन्नी आई थी तथा 3 बार अपना छूटा कर चली गई थी। कहानी जारी रहेगी। [email protected]
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