रोमांचक कहानी: मेरी बहन स्नेहा दी की चुदाई-2
ध्यान देने वाली बात है कि, पिछला भाग पढ़े:- मेरी बहन स्नेहा दी की चुदाई-1 सुबह 8 बजे स्नेहा दी का कॉल आया। मैं फ़ोन उठाया- मैं: हैलो दी। स्नेहा दी: भाई कल मार्केट में जहां तू मुझे छोड़ कर गया था, वहीं आजा लेने। मैं अभी आ रही हूं। मैं: ओके दी, मैं अभी आता हूं। मैं भी सेज से उठा, तथा जल्दी से मुंह धो कर गाड़ी लेकर मार्केट पहुंच गया, जहां कल स्नेहा दी को हैदर अपने साथ ले गया था। असल में, जब मैं वहां पहुंचा तो दी वहां नहीं आयी थी। मैं 2 मिनट वेट किया, तभी हैदर की गाड़ी मेरे बगल में ही रूकती है। सामने सलीम ड्राइव कर रहा था। बगल में हैदर बैठा था। पीछे वाली सीट पर क़ासिम स्नेहा दी को अपनी गोद में बिठाए था, तथा उसके साथ मस्ती करने में लगा था। ध्यान देने वाली बात है कि, फिर सलीम तथा हैदर भी दी की चूचियों के साथ खेलने लगे। मुझे गाड़ी के शीशे से दिख रहा था सब। करीब 5 मिनट तक वो लोग मेरी बहन के साथ मस्ती किये, फिर स्नेहा दी गाड़ी से बाहर आयी। हैदर: स्नेहा टाइम मिलेगा तो जरूर कॉल करना। तुझे फिर हम लोग ले जायेंगे। सलीम तथा क़ासिम भी बोले: हां स्नेहा जरूर कॉल करना। तुम्हारे साथ काफी मज़ा आया पूरी रात। स्नेहा दी: बिल्कुल यॉर, मुझे भी आप लोगों के साथ काफी मज़ा आया। फिर वो लोग गाड़ी लेकर निकल जाते है। मैं भी दी को बिठाता हूं, तथा घर निकल जाता हूं। थोड़ी ही देर में मैं दी को लेकर घर पहुंच जाता हूं। मैं गाड़ी को पार्किंग में लगाता हूं, फिर हम दोनों घर की तरफ जाने लगते है। स्नेहा दी मेरे आगे चलती है, तथा मैं उनके पीछे जाता हूं। सच कहूं तो, मैं देखता हूं स्नेहा दी के चलने की स्टाइल थोड़ी बदल गयी थी। मैं: क्या बात है दी, लगता है चारों ने जम कर चोदा है आपको। आपके तो चलने का स्टाइल ही बदल गया है। स्नेहा दी (शरमाते हुए): नहीं भाई, ऐसी बात नहीं है। तुम मेरा मज़ा ना लो। मैं: ओह तो चुदाई अच्छी नहीं हुई आपकी कल रात? स्नेहा दी: ऐसी बात नहीं है भाई। यकीन मानिए, मैं ये नहीं बोली मेरी चुदाई अच्छे से नहीं हुई। आपको बता दूं कि, चुदाई तो पूछो मत कैसे हुई तेरी बहन की। मैं: अच्छा तो कैसे हुई चुदाई मेरी प्यारी बहन की? स्नेहा दी: भाई चारों ने मुझे पूरी निशा सोने नहीं दिया। चारों तुम्हारी बहन को पूरी निशा रंडी की तरह चोदे। सच कहूं तो, मैं: वॉव दी, तब तो आप पूरी निशा मज़े की। स्नेहा दी: मज़े की बात मत कर भाई, मुझे काफी मज़ा आया उन लोगों के साथ। असल में, तब तक हम दोनों रूम में आ गये थे। स्नेहा दी: भाई मेरे लिए कॉफ़ी लाओ प्लीज, पूरी निशा की थकी हूं। मैं: बिल्कुल दी, आप आराम करो, मैं अभी आपके लिए कॉफ़ी लाता हूं। मैं तुरंत कॉफ़ी लाने चला गया, किचन में कॉफ़ी बनाया, तथा दी के रूम में ले गया। असल में, स्नेहा दी बेड पर ड्रेस चेंज करके लेटी हुई थी। मैं: दी आपकी कॉफ़ी। स्नेहा दी: ओह थैंक यू मेरे प्यारे भाई। दी कॉफ़ी पीने लगी। यकीन मानिए, मैं वही बैठ गया दी की क्लीवेज दिख रहा था। सच कहूं तो, दी की चूचियां लाल हो गयी थी स्नेहा दी: क्या देख रहे हो भाई इतना ध्यान से? मैं: दी आपकी चूचियां देख रहा था, पूरी लाल हो गयी है। स्नेहा दी (मेरे तरफ मुस्कुरा कर): भाई सब ने मिल कर तेरी बहन की चूचियों को खूब नोच-नोच के मसला है मैं: आखिर मेरी बहन की चूचियां है भी तो नोच-नोच के मसलने लायक। असल में, इतनी बड़ी-बड़ी चूचियां है, किसी का भी मन होगा इसको मसलने के लिए। फिर दोनों जोर-जोर से हसने लगे। स्नेहा दी: तुम भी ना भाई काफी शरारती हो. मैं: आखिर स्नेहा सिंह का भाई हूं, तो शरारती तो रहूंगा ही। स्नेहा दी कॉफ़ी पीने के बाद: भाई अब मैं सोने जा रही हूं। मुझे काफी तेज़ नींद आ रही है। मैं: बिल्कुल दी, आप सो जाओ। मैं फिर अपने रूम में आ गया। फिर मैं कॉलेज चला गया। कॉलेज से 2 बजे वापस आया तो देखा दी अभी सो रही थी। मैंने ड्रेस चेंज किया, फिर दी के रूम में गया, दी को उठाया तथा बोला- मैं: दी चलो खाना खा लेते है। स्नेहा दी भी उठी तथा मेरे साथ खाना खाई। दी भी सुबह से खाना नहीं खाई थी, इसलिए उसको भी भूख लगी थी। हम दोनों खाना खाये, फिर हसीं मज़ाक हुआ। शाम को हम दोनों घूमने भी गए। वापस आये तो मैं तथा दी रूम में बैठ कर बात कर रहे थे कि मम्मी आ गयी। ध्यान देने वाली बात है कि, मम्मी: स्नेहा मैं कल मुंबई जा रही हूं तेरे पापा के यहां कुछ दिनों के लिए। मैं: कल कितने बजे आपकी ट्रैन है मम्मी? मम्मी: सुबह 7 बजे ही ट्रैन है बेटा। ध्यान देने वाली बात है कि, स्नेहा दी: कोई बात नहीं मम्मी, हम लोग कल सुबह जल्दी उठ कर आपको स्टेशन पहुंचा देंगे। मम्मी: हम्म बेटा। सच कहूं तो, फिर मैं तथा दी मम्मी साथ में खाना खाये, तथा सो गए। क्यूंकी मम्मी को कल सुबह स्टेशन ले जाना था। ध्यान देने वाली बात है कि, कल सुबह 6 बजे दी मेरे रूम में आ गयी- स्नेहा दी: भाई उठ, मम्मी को स्टेशन छोड़ना है। मैं भी उठा, फ्रैश हुआ, गाड़ी निकाली। फिर मैं दी तथा मम्मी को बैठा कर हम स्टेशन पहुंच गए। कुछ ही देर में ट्रैन आ गयी। यकीन मानिए, मैं तथा दी सामान लेकर ट्रैन में रखे, तथा मम्मी को उनकी सीट पर बिठाया। ट्रैन जाने के बाद मैं तथा दी घर वापस आये। हम दोनों नाश्ता किये। मैं हाल में ही बैठा था। आपको बता दूं कि, दी अपने रूम में जाकर किसी लड़के से बात करने लगी। असल में, जब कॉलेज का टाइम हुआ तो मैं रेडी होने के लिया चला गया। जब रेडी हो गया, सोचा देखूं दी अभी रेडी हुई थी कि नहीं। जब मैं दी के रूम में गया, तो देखा दी अपनी क्लीवेज की पिक ले रही थी, तथा किसी को व्हाट्सप्प पर भेज रही थी। मैं: दी कॉलेज चलोगी? स्नेहा दी (अपनी क्लीवेज सही करते हुए): नहीं भाई, आज कॉलेज जाने का मन नहीं है। अच्छा हुआ तू आ गया, तुझे मैं बुलाने ही वाली थी। मैं: क्यूं क्या हुआ दी? बोलो क्या बात है? स्नेहा दी: भाई एक वीडियो बनानी है मेरी। मैं: हां दी बिल्कुल बना दूंगा वीडियो। कैसी वीडियो बनानी है बताओ? स्नेहा दी: ये लो मेरी मोबाइल, मैं डांस करूंगी तुम वीडियो बनाना। मैं: ठीक है दी, मैं आपके डांस का वीडियो बना देता हूं। मैंने वीडियो बनानी स्टार्ट की। गाना था हाय रे गर्मी। स्नेहा दी अपनी बड़ी-बड़ी गांड मटका-मटका कर अपनी क्लीवेज दिखा कर डांस करने लगी। स्नेहा दी की आधी चूचियां दिख रही थी। बहन की इतनी बड़ी मटकती गांड देख कर मज़ा आ गया। 2 मिनट की ही वीडियो बनाई। फिर दी मुझसे मोबाइल ली, तथा अपने डांस का वीडियो देखने लगी। स्नेहा दी: भाई कैसा लगा मेरा? मैं: काफी हॉट डांस है दी। फिर दी उस वीडियो को एक व्हाट्सप्प ग्रुप में भेजी। उस ग्रुप का नाम था पठान ग्रुप। वो वीडियो जाते ही लड़कों की तारीफे आना शुरू हो गयी। इब्राहिम पठान नाम के एक लड़के का मैसेज आया, “क्या गांड है स्नेहा तेरी, तुझे ऐसे मटका-मटका कर चोदूंगा”। तभी अब्दुल का मैंसेज आया, “वाह स्नेहा, तेरी चूचियों में डूब जाने का मन कर रहा है”। मानो मैसेज की लाइन लग गयी। मैं: वाह दी, आपकी तो तारीफ करते-करते थक नहीं रहे है ये लोग। स्नेहा दी: मैं हूं ही तारीफ के काबिल भाई। मैं: वो तो हो दी। आपको बता दूं कि, दी इस ग्रुप में कितने लड़के होंगे? स्नेहा दी: ज्यादा नहीं है भाई, बस 58 लोग ही है। मैं: तो ये वीडियो किसी तथा लोगों को भेज दिए तो? स्नेहा दी: अपने खास दोस्तों को ही भेजते है भाई। सब को नहीं भेजते है ये लोग। मैं: तथा कोई काम है दी मेरे लिए? स्नेहा दी: नहीं बस यही काम था। थैंक यू सो मच भाई, लव यू। मैं: लव यू टू दी। अच्छा दी अब मैं कॉलेज जा रहा हूं स्नेहा दी: ओके भाई, बाय। मैं: बाय दी। मैं कॉलेज चला गया। आगे की स्टोरी अब नेक्स्ट पार्ट में। स्टोरी कैसी लगी [email protected] पर जरूर मैंल्स करके बताइयेगा। कमैंटस जरूर करिये आप लोग। कोई सुझाव देना है तो जरूर दे सकते है। धन्यवाद, लव यू एवरीवन। यकीन मानिए, अगला भाग पढ़े:- मेरी बहन स्नेहा दी की चुदाई-3