दोस्त की बुआ के घर में तीन चूत-4
आरती चुद चुकी थी, अब मेरी नजर दिव्या की चूत पर थी, पूरी उम्मीद थी कि आज निशा दिव्या की चूत भी चुदने वाली थी। पर अभी काम जरूरी था, मैंने अपना बैग उठाया तथा क्लाइंट से मिलने चल पड़ा। कब निशा के दस बज गए क्लाइंट से मीटिंग करते करते, पता ही नहीं चला। मीटिंग से फ्री होते ही जब मैंने अपना मोबाइल देखा तो लगभग बीस मिस कॉल तो अकेले आरती की ही थी। क्लाइंट ने डिनर करके जाने का काफी अनुरोध किया पर उसे कैसे बताता कि आज मुझे एक कमसिन कुँवारी चूत का डिनर करना है तथा मुझे खाने से ज्यादा चूत की भूख लगी है। खैर जल्दी जल्दी घर आया पर फिर भी ग्यारह बज गए थे पहुँचते पहुँचते। बेल बजाने की जरुरत ही नहीं पड़ी क्यूंकि जैसे ही मैं दरवाजे पर पहुँचा दरवाजा एकदम से खुल गया तथा सामने आरती तथा दिव्या दोनों खड़ी थी। मैंने देर से आने के लिए सॉरी बोला तथा अपने कमरे में चला गया तथा जितना जल्दी हो सकता था अपने कपड़े बदल कर वापिस कमरे में आ गया। आरती ने खाने के लिए पूछा पर मेरा मन नहीं था खाना खाने का तो मना कर दिया, भूख तो चूत की लगी थी। तभी दिव्या उठ कर चली गई। मैंने आरती से निशा के प्रोग्राम का पूछा तो आरती शर्मा गई तथा बोली- बस दिव्या के सोने का इंतज़ार है…
‘आरती… कल मैंने सुना दिव्या भी चुदवाने के मूड में है… तो उसको भी शामिल कर लो ना… वैसे भी वो तुमसे पहले ही खुली हुई है। ’
‘अरे नहीं… ऐसे कामों में कुछ तो पर्दादारी जरूरी है। ’
अब मैं क्या कहता… आरती ने मुझे अपने कमरे में जाने को कहा, वो बोली- मैं दिव्या के सोने के बाद आती हूँ तुम्हारे कमरे में। मैं उठ कर जाने लगा तो आरती मेरे पास आई तथा उसने एक जोरदार किस मेरे होंठों पर कर दिया, साथ ही एक हाथ से मेरे लंड को मसल दिया जो आरती के किस करने से अपनी औकात में आने लगा था। चुपचाप मैं अपने कमरे में चला गया। यकीन मानिए, नींद तो कहाँ आनी थी सो बेड पर लेट कर लैपटॉप चला कर काम करने लगा। पर मन तो अभी भी आरती की चूत पर ही अटका हुआ था। रात को करीब दो बजे आरती मेरे कमरे में आई तथा फिर चुदाई का खेल शुरू हो गया। मैंने उस निशा आरती की दो बार चुदाई की तथा फिर पाँच बजे वो उठ कर अपने कमरे में जाकर सो गई। सारी निशा जागने की वजह से सुबह नींद नहीं खुली, करीब दस बजे दिव्या चाय लेकर कमरे में आई। रात को आरती की चुदाई के बाद मैंने कपड़े नहीं पहने थे, मैं ऐसे ही चादर ओढ़ कर सोया हुआ था। दिव्या ने मुझे आवाज दी तो मेरी आँख खुली। यकीन मानिए, दिव्या ने अचानक मेरी चादर पकड़ कर खींच ली- उठो राज जी… दिन चढ़ आया…
वो बस इतना ही बोल पाई थी क्योंकि जैसे ही उसने मेरी चादर खींची तो उसकी नजर मेरे नंगे बदन पर पड़ी तो वो चौंक गई। उसने शर्मा कर अपना मुँह घुमा लिया। मुझे भी अपने नंगेपन का एहसास हुआ तो मैंने जल्दी से चादर अपने ऊपर ले ली। ‘सॉरी!’ मैंने दिव्या से माफ़ी मांगते हुए कहा। आपको बता दूं कि, ‘आप क्या ऐसे ही सोते हो..’
‘ऐसे ही मतलब?’
‘ऐसे ही मतलब नंगे..’
‘अरे नहीं वो तो निशा को गर्मी लग रही थी तो कपड़े उतार दिए थे। ’
‘अंडआर्यनयर भी…’ दिव्या ने मेरी तरफ मुड़ते हुए कहा। उसके होंठो पर मुस्कान तैर रही थी। उसको मुस्कुराते देख मैंने भी सहज महसूस किया, मैं कुछ बोल नहीं पाया बस मुस्कुरा कर रह गया। आपको बता दूं कि, वो मुझे चाय पकड़ा कर बोली– जल्दी से नहा लो.. काफी देर हो गई है। मैंने उसके हाथ से चाय ले ली। जैसे ही वापिस मुड़कर जाने लगी मुझे ना जाने क्या सूझी मैंने उसका हाथ पकड़ लिया। ‘राज जी… मेरा हाथ छोड़ी प्लीज..’
मैंने चाय का कप साइड में मेज पर रखा तथा दिव्या को अपनी तरफ खींचा तो वो थोड़ा कसमसाते हुए मेरी तरफ खिंचती चली गई। मैंने उसको किस करने की कोशिश की तो उसने हल्का सा प्रतिरोध किया तथा मेरी पकड़ से छुट कर जाने लगी। असल में, उसको पकड़ने के चक्कर में मेरे बदन की चादर भी मेरे बदन से उतर गई, मैंने नंगे बदन ही दिव्या को पकड़ कर अपनी बाहों में जकड़ लिया तथा उसके चेहरे को अपने हाथों में लेकर उसके नाजुक नाजुक होंठों पर अपने होंठ टिका दिए। एक जोरदार किस के बाद जैसे ही मैंने पकड़ थोड़ी ढीली की उसने मुझे धक्का दे दिया तथा हँसती हुए कमरे से बाहर चली गई। मैं उठा तथा बनियान लोअर पहना, तौलिया उठा कर नहाने के लिए बाथरूम की तरफ बढ़ गया। यकीन मानिए, कमरे से बाहर निकला तो सिर्फ दिव्या ही नजर आई। असल में, मैंने जब उससे आरती के बारे में पूछा तो वो बोली की आरती की तबियत कुछ ठीक नहीं है। इसीलिए वो अभी सो रही है अपने कमरे में। ध्यान देने वाली बात है कि, मैंने दिव्या को अपने पास आने को कहा तो वो मुझे ठेंगा दिखा कर रसोई में चली गई। मैंने भी तौलिया कपड़े सोफे पर फेंके तथा दिव्या के पीछे पीछे रसोई में घुस गया। दिव्या मुझे रसोई में देख कर हड़बड़ा गई। इससे पहले वो कोई प्रतिक्रिया करती, मैंने उसको अपनी बाहों में भर लिया। वो थोड़ा छटपटाई- राज… क्या करते हो… छोड़ो मुझे… आंटी आ जायेगी..
‘पर आरती तो सो रही है… अभी तो तुमने बताया..’
‘प्लीज छोड़ो ना…’ दिव्या ने मिन्नत करते हुए कहा। ‘ओके… छोड़ दूंगा… पर उस से पहले तुम्हें एक किस करनी पड़ेगी मेरे होंठों पर..’
‘नहीं.. मुझे लाज आती है…’
‘ठीक है तो आ जाने दो आरती को… जब तक किस नहीं करोगी मैं तुम्हे छोड़ने वाला नहीं..’
‘बस एक किस… वादा करो उसके बाद तुम मुझे छोड़ दोगे..’
कहकर दिव्या ने मुझे किस करने की कोशिश की पर उसकी लम्बाई कम होने के कारण वो कर नहीं पा रही थी। मैंने उसको गोद में उठाकर रसोई की स्लैब पर बैठाया तथा अपने होंठ उसके सामने कर दिए। दिव्या ने थोड़ा शर्माते हुए मेरे होंठों पर अपने होंठ रख दिए। सच कहूं तो, मैंने भी एक हाथ उसकी कमर पर रखा तथा उसको किस करते हुए दूसरे हाथ से उसकी कड़क चूची को पकड़ कर हल्के से मसल दिया। चूची पर हाथ लगते ही दिव्या को जैसे करंट सा लगा, उसने मेरी पकड़ से छूटने की कोशिश की पर मैंने उसकी चूची को मसलते हुए ही दोबारा अपने होंठ उसके होंठों से जोड़ दिए। दिव्या मदहोश होने लगी थी मेरी बाहों में… मैंने धीरे धीरे उसके टॉप को ऊपर उठाना शुरू किया। दिव्या इतनी मस्त हो चुकी थी कि उसको पता ही नहीं लगा कि कब उसकी चूची नंगी हो गई थी। मैंने उसके होंठ छोड़े तथा झुक कर जब उसकी चूची को अपने होंठों में दबाया तो दिव्या मस्ती के मारे सीत्कार उठी। यकीन मानिए, आज पहली बार उसकी चूची को किसी मर्द ने स्पर्श किया था। तभी बाहर कुछ हलचल हुई तो हम दोनों जल्दी से एक दूसरे से अलग हुए तथा दोनों ने अपने कपड़े ठीक किये। बाहर वाले कमरे में कोई नहीं था। मैं कपड़े उठाकर सीधा बाथरूम में घुस गया। जब नहाकर बाहर आया तो आरती सामने ही बैठी थी नाईट सूट में। ‘क्या बात आरती… आज तो काफी देर तक सोई..’
‘सब तुम्हारी ही मेहरबानी है जनाब… सारी निशा तो सोने नहीं दिया.. अब नींद तो देर से खुलनी ही थी। ’
तभी दिव्या कमरे में आ गई तो मैं अपने कमरे में घुस गया तैयार होने के लिए। क्लाइंट के फ़ोन आने शुरू हो गए थे तो मैं जल्दी से तैयार होकर बाहर आया। दिव्या ने टेबल पर नाश्ता लगा दिया था, मैंने जल्दी से नाश्ता किया तथा क्लाइंट से मिलने चल पड़ा। आपको बता दूं कि, अभी क्लाइंट के पास पहुंचा भी नहीं था कि फ़ोन बज पड़ा। कहानी जारी रहेगी!
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