एक अनसुनी दास्तान: पिंकी की चूत, मेरा नौसिखिया लण्ड -2
अब तक आपने पढ़ा…
मैंने एक मैमोरी कार्ड ख़रीदा.. जिसमें एक दुकान से कुछेक ब्लू-फ़िल्म डलवाईं। फिर अपने पिता जी का मोबाइल लेकर निशा में उसमें अपना मैमोरी कार्ड डालकर ब्लू-फ़िल्म देखने लगे.. तो देखते-देखते लंड खड़ा हो गया। मेरी तो हालत ख़राब हो गई.. एक तो खड़े-खड़े लंड में दर्द होने लगा था.. ऊपर से मुझे तब तक मुठ्ठ मारने के बारे में भी ज्यादा पता नहीं था.. न ही ब्लू-फ़िल्म में कुछ सिखाया गया था। किसी तरह मैंने निशा काटी तथा ये सारी बात स्कूल में जाकर अपने दोस्त को बताई.. तो उसने मुझे बताया कि मुठ्ठ कैसे मारते हैं। दोस्तो, वो पहला रोज था.. जब मैंने मुठ्ठ मारी थी.. लेकिन जो भी हो इसमें मज़ा काफी आया। अब आगे..
हाँ.. तो स्कूल में मैं हमेशा की तरह पिन्की से मिला.. तो वो हमें वहीं लेकर गई तथा चुम्बन करने लगी। इस बार मैंने भी उसका साथ दिया तथा जैसा फिल्म में देखा था.. वैसे ही उसके चूचे दबाने लगा तथा स्कर्ट के अन्दर हाथ डालकर उसकी चूत को सहलाने लगा। ध्यान देने वाली बात है कि, वो सिसकारियाँ लेने लगी तथा मेरी गर्दन पर चुम्बन करने लगी। मेरी गर्दन पर चुम्बन करते ही दोस्तों.. मुझे लगा जैसे मुझे 440 वोल्ट का करंट लगा हो तथा काफी मज़ा आया। यकीन मानिए, उसके बाद वो पैंट के ऊपर से ही मेरे लंड को सहलाने लगी.. फ़िर मैं उसकी गर्दन पर चुम्बन करने लगा.. तो वो तथा भी गर्म होने लगी तथा मेरे पैंट की ज़िप खोलकर मेरे अंडआर्यनयर में से मेरे लंड को बाहर निकाल कर हिलाने लगी। अब हम दोनों को कोई होश नहीं था.. वो बस मेरे लंड को हिला रही थी तथा मैं उसे उसकी गर्दन तथा होंठों पर चुम्बन करते हुए.. उसकी चूत में उंगली कर रहा था। दोस्तो, जब मैं मुठ्ठ मारता था तो काफ़ी देर में मेरा जल निकलता था.. लेकिन युवती के हाथ में जादू होता है.. यह बात मुझे उसी रोज पता चली.. क्योंकि थोड़ी देर में ही मेरा जल काफी जोर के झटके के साथ निकल गया तथा उस रोज काफी ज्यादा निकला.. जैसे ही मेरी पिचकारी निकलना बन्द हुई.. उसका जल भी निकल गया। यह भी मुझे उसी रोज पता चला कि युवती का भी जल निकलता है.. लेकिन मेरे जल से उसकी स्कर्ट खराब हो गई थी.. तो उसने उसे साफ़ किया तथा मुस्कुराते हुए अपनी क्लास में चली गई। अब तो हम दोनों का ये रोज का काम हो गया था। मैं तथा वो लगभग रोज ही वहाँ जाते तथा वो मेरा लंड पकड़ कर हिलाती तथा मैं उसकी चूत में उंगली करता तथा एक-दूसरे को किस करते हुए एक-दूसरे का जल निकाल कर आ जाते थे। आपको बता दूं कि, हाँ.. मैं अब इतना ध्यान जरूर रखता था कि पिन्की की स्कर्ट खराब ना हो। ध्यान देने वाली बात है कि, धीरे-धीरे हम इससे आगे बढ़ने लगे तथा मैं उसके चूचे चूसने लगा.. लेकिन वो मेरा लंड नहीं मुँह में लेती थी तथा ब्लू-फ़िल्म में ऐसा होता था.. तो मुझे उस पर गुस्सा भी आता था। मैं अब बोर हो गया था.. चुदाई तो हो ही नहीं रही थी.. लेकिन बाद में मैं जान पाया कि युवती के साथ कभी जल्दी नहीं करनी चाहिए.. क्योंकि लड़कियां काफी ही नाजुक सी होती हैं तथा उन्हें काफी प्यार से प्यार करना चाहिए। लेकिन तब तो मैं ऐसा कुछ जानता नहीं था तथा ये सब करते-करते हमें 2 या 3 महीने हो गए थे। आपको बता दूं कि, आप तो जानते ही हैं कि बचपन में हम युवा लोग कितने उतावले होते हैं तथा वो भी ऐसी चीज के लिए.. जो पहले न की हो। इसीलिए मैंने एक रोज उससे हिम्मत करके कह ही दिया- क्या हम बस किस तथा ये सब ही करते रहेंगे.. आगे कुछ नहीं करेंगे?
तो वो बोली- आगे क्या?
तो मेरे मुँह से निकल गया- चुदाई..
वो बोली- साले.. मैं तो तुझे सीधा समझती थी.. लेकिन तू तो काफी तेज़ निकला। यकीन मानिए, मैंने बोल तो दिया था.. लेकिन मेरी गाण्ड फट रही थी कि ये एक तो मेरी सीनियर है.. ऊपर से मैंने इससे चुदाई के लिए बोल दिया है। सच कहूं तो, वास्तव में वो मुझे हमेशा जताती रहती थी कि वो मेरी सीनियर है तथा मैं उसका जूनियर.. इसलिए मेरी उससे फटती भी थी, लेकिन उसने कुछ नहीं कहा.. तो मैं खुश हो गया। ध्यान देने वाली बात है कि, वो बोली- ‘वो’.. भी करेंगे.. लेकिन मेरे घर पर करेंगे.. जब कोई नहीं होगा। सच कहूं तो, अब चुम्बन तो मैं रोज ही करता था तथा ब्लू-फ़िल्म देख-देख कर चुदाई भी सीख गया था। बस प्रैक्टिकल करना बाकी था। आपको बता दूं कि, कुछ रोज बाद उसने बताया- मेरे घर पर कोई नहीं है आज.. तू आ जा..
उसने मुझे अपने घर बुलाया। स्कूल की छुट्टी होने के बाद मैं अपने घर पहुँचा तथा मम्मी से बोला- मैं खेलने जा रहा हूँ मेरा मैच है…
मैं उसके घर अपनी चुदाई का मैच खेलने पहुँच गया। जैसे ही मैं उसके घर पहुँचा तो देखा उसका घर काफी बड़ा था, मैंने उसके दरवाजे की घन्टी बजाई तो पिन्की ने ही दरवाजा खोला। मैं तो उसे देखता रह गया.. उसने जीन्स तथा टॉप पहन रखा था तथा होंठों पर एकदम सुर्ख लाल रंग की लिपिस्टिक लगा रखी थी तथा एकदम माल लग रही थी। मेरा तो मन किया कि इसे यहीं पकड़ कर चोद दूँ.. लेकिन मैंने अपनी भावनाओं पर काबू किया तथा उसके घर के अन्दर गया। सच कहूं तो, उसने बैठने के लिए बोला तथा खुद जल लाने चली गई। जब जल लेकर आई तो मैंने जल पिया तथा उसे अपने पास ही बिठा लिया। असल में, अब मैंने उसे वहीं पर चुम्बन करना शुरू कर दिया तथा कम से कम 10 मिनट तक लम्बा चुम्बन किया होगा। जैसे ही मैं उसकी चूत में उंगली डालने लगा..
वो बोली- चलो कमरे में चलते हैं.. वहाँ खुल कर खेल करेंगे..
तो मैं छोटे बच्चे की तरह उसके पीछे-पीछे चल दिया तथा उसके कमरे में पहुँच कर उसे चुम्बन करने लगा। असल में, मेरा ज्यादा ध्यान चुम्बन करने में नहीं था.. मेरा ध्यान तो उसे गर्म करने में था। हम करीब 10 मिनट तक एक-दूसरे को चुम्बन करते रहे। चुम्बन करते-करते मैं उसके चूचे उसके कपड़ों के ऊपर से ही दबा रहा था। आपको बता दूं कि, दबा क्या रहा था.. खूब जोर-जोर से मसल रहा था.. जो पहले से ही काफ़ी बड़े थे तथा मेरे दबाने तथा मसलने तथा ज्यादा बड़े हो गए थे। थोड़ी देर बाद मैं उसकी गर्दन पर चुम्बन करते हुए उसके चूचों को चुम्बन करने लगा। सच कहूं तो, मैंने एक हाथ से उसकी जींस का बटन खोल दिया तथा उसके अन्दर हाथ डाल कर पैंटी के ऊपर से ही उसकी चूत को सहलाने लगा। कुछ देर बाद मैंने उसकी जींस नीचे की तथा उसकी चूत को सहलाने लगा तथा ऊँगली डालने लगा। इस सच्ची कहानी में आप सभी को पूरा रस देने के साथ-साथ मैं आप सभी को अपने साथ हुई घटना को पूरे मुकाम तक पहुँचाऊँगा। इसके साथ ही आपको विश्वास दिलाता हूँ कि मेरी यह कहानी.. मात्र एक कहानी नहीं है सत्य घटना है। सच कहूं तो, दोस्तो, मेरे नौसिखिया लण्ड की काम-कथा अभी जारी है। [email protected]
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