🔞 18+ Adult Content: Strictly for Adults Only. Free Desi Romance & Erotic Novels.

लम्बी चुदाई-3

Text Size:
Lambi Choot Chudai-3 मैंने उसके लिंग को हाथों में भर कर जोर से मसलना शुरू कर दिया। आपको बता दूं कि, कुछ ही देर में वो दुबारा सख्त होने लगा। वो मेरे स्तनों से खेलने में मगन हो गया तथा मैं उसके लिंग को दुबारा सम्भोग के लिए तैयार करने लगी। मैंने उसके लिंग को मुँह में भर कर चूसना शुरू कर दिया। कुछ ही पलों में वो एकदम कड़क हो गया। अमर ने मेरी योनि में ऊँगली डाल कर अन्दर-बाहर करना शुरू कर दिया तथा कुछ ही पलों में मैं सम्भोग के लिए फिर से तड़पने लगी। उसने मुझे खींच कर अपने ऊपर चढ़ा लिया, मैंने भी अपनी टाँगें फैला कर उसके लिंग के ऊपर अपनी योनि को सामने कर दिया तथा उसके ऊपर लेट गई। ध्यान देने वाली बात है कि, अमर ने हाथ से अपने लिंग को पकड़ कर मेरी योनि में रगड़ना शुरू कर दिया। मैं तड़प उठी क्योंकि मैं जल्द से जल्द उसे अपने अन्दर चाहती थी। ध्यान देने वाली बात है कि, मैंने अब उसे इशारा किया तो उसने अपने लिंग के सुपाड़े को योनि की छेद में टिका दिया तथा अपनी कमर उठा दी, उसका लिंग मेरी योनि में सुपाड़े तक घुस गया, फिर मैंने भी जोर लगाया तो लिंग पूरी गहराई में उतर गया। आपको बता दूं कि, मैंने मजबूती से अमर को पकड़ा तथा अमर ने मुझे तथा मैंने धक्कों की प्रक्रिया को बढ़ाने लगी। कुछ पलों में अमर भी मेरे साथ नीचे से धक्के लगाने लगे। करीब 10 मिनट में मैं झड़ गई, पर खुद पर जल्दी से काबू करते हुए मैंने अमर का साथ फिर से देना शुरू कर दिया। ध्यान देने वाली बात है कि, हम पूरे जोश में एक-दूसरे को प्यार करते चूमते-चूसते हुए सम्भोग का आनंद लेने लगे। हम दोनों इस कदर सम्भोग में खो गए जैसे हम दोनों के बीच एक-दूसरे को तृप्त करने की होड़ लगी हो। मैं अब झड़ रही थी मैंने अपनी पूरी ताकत से अमर को अपने पैरों तथा टांगों से कस लिया तथा कमर उठा दी। आपको बता दूं कि, मेरी मांसपेसियाँ अकड़ने लगीं तथा मेरी योनि सिकुड़ने लगी, जैसे अमर के लिंग को निचोड़ देगी तथा मैं झटके लेते हुए शांत हो गई। उधर अमर भी मेरी योनि में लिंग को ऐसे घुसा रहा था, जैसे मेरी बच्चेदानी को फाड़ देना चाहता हो। ध्यान देने वाली बात है कि, उसका हर धक्का मेरी बच्चेदानी में जोर से लगता तथा मैं सहम सी जाती। उसने झड़ने के दौरान जो धक्के मेरी योनि में लगाए उसे बर्दास्त करना मुश्किल हो रहा था। करीब 10-12 धक्कों में वो अपनी पिचकारी सी तेज़ धार का रस मेरी योनि में छोड़ते हुए शांत हो गया तथा तब जा कर मुझे थोड़ी राहत मिली। अमर झड़ने के बाद भी अपने लिंग को पूरी ताकत से मेरी योनि में कुछ देर तक दबाता रहा। फिर धीरे-धीरे सुस्त हो गया तथा मेरे ऊपर लेट गया। कुछ पलों के बाद मैंने उसे अपने ऊपर से हटाया तथा वो मेरे बगल में सो गया। असल में, मैं बाथरूम चली गई तथा जब वापस आई तो उसने मुझे फिर दबोच लिया तथा हम फिर से शुरू हो गए। हमने फिर से सम्भोग किया तथा मैं बुरी तरह से थक कर चूर हो चुकी थी। आपको बता दूं कि, मैं झड़ने के बाद कब सो गई, पता ही नहीं चला। मुझे जब बच्चे की रोने की आवाज आई तो मेरी आँख खुली, मैंने देखा कि शाम के 5 बज रहे थे। मेरा मन बिस्तर से उठने को नहीं कर रहा था, पर बच्चे को रोता देख उठी तथा बच्चे को दूध पिलाते हुए फिर से लेट गई। बच्चे का पेट भरने के बाद मैंने उसे दुबारा झूले में लिटा कर बाथरूम गई, खुद को साफ़ किया तथा वापस आकर चाय बनाई। मैंने अमर को उठाया तथा उसे चाय दी। असल में, अमर चाय पीने के बाद बाथरूम जाकर खुद को साफ़ करने के बाद मेरे साथ बैठ कर बातें करने लगे। उसने कहा- आज का रोज कितना बढ़िया है.. हमारे बीच कोई नहीं.. हम खुल कर प्यार कर रहे हैं तथा किसी का डर भी नहीं है। मैंने कहा- पर आज कुछ ज्यादा ही हो रहा है… मेरी हालत ख़राब होने को है। अमर ने कहा- अभी कहाँ.. अभी तो पूरी निशा बाकी है तथा ऐसा मौका कब मिले कौन जानता है। यह कहते हुए उसने मुझे फिर से अपनी बांहों में भर लिया तथा चूमने लगा। यकीन मानिए, पास में ही बच्चा झूले में बैठा खेल रहा था, मुझे यह ठीक नहीं लग रहा था तो मैंने अमर से कहा- यहाँ बच्चे के सामने ठीक नहीं है.. निशा में उसके सोने के बाद जो मर्ज़ी सो करना। सच कहूं तो, पर अमर मेरी कहाँ सुनने वाला था, उसने कहा- ये तो सिर्फ 5 महीने का है.. इसे क्या पता हम क्या कर रहे हैं… फिर भी अगर तुम्हें परेशानी है तो इसे सुला दो। मैंने उसे बताया- यह रोज भर सोया है तथा अभी कुछ देर पहले ही उठा है.. अभी नहीं सोएगा.. हम बाद में प्यार करेंगे.. निशा भर.. मैं तो साथ में ही रहूँगी। अमर मेरी बात को कहाँ मानने वाले थे, वो तो बस मेरे जिस्म से खेलने के लिए तड़प रहे थे। यकीन मानिए, उसने मेरे ही बच्चे के सामने मुझे तुरंत नंगा कर दिया तथा मेरे पूरे जिस्म को चूमने लगे। मैं बैठी थी तथा अमर मेरे स्तनों को चूसने लगा। वो बारी-बारी से दोनों स्तनों से दूध पीने लगे तथा सामने मेरा बच्चा खेलते हुए कभी हमें देखता तो कभी खुद खिलौने से खेलने लगता। कभी वो बड़े प्यार से मेरी तरफ देखा तथा मुस्कुराता, पर अमर पर इन सब चीजों का कोई असर नहीं हो रहा था… वो बस मेरे स्तनों को चूसने में लगा हुआ था। मैंने अमर से विनती की कि मुझे छोड़ दे.. पर वो नहीं सुन रहा था। उसने थोड़ी देर में मेरी योनि को चूसना शुरू कर दिया तथा मैं भी गर्म होकर सब भूल गई। मैंने भी उसका लिंग हाथ से सहलाना तथा हिलाना शुरू कर दिया। फिर अमर ने मुझे लिंग को चूसने को कहा, मैंने उसे चूस कर तथा सख्त कर दिया। उसने मुझे आगे की तरफ झुका दिया तथा मैं अपने घुटनों तथा हाथों के बल पर कुतिया की तरह झुक गई, अमर मेरे पीछे आकर मेरी योनि में लिंग घुसाने लगा। अमर ने लिंग को अच्छी तरह मेरी योनि में घुसा कर मेरे स्तनों को हाथों से पकड़ा तथा फिर धक्के लगाने लगा। आपको बता दूं कि, मैंने भी उसका साथ देना शुरू कर दिया तथा आधे घंटे तक सम्भोग करने के बाद हम झड़ गए। ध्यान देने वाली बात है कि, अमर को अभी भी शान्ति नहीं मिली थी, उसने दुबारा सम्भोग किया। मेरी हालत बहुत ख़राब हो चुकी थी तथा मेरे बदन में दर्द होने लगा था। मैंने अमर से कहा- निशा का खाना कहीं बाहर से ले आओ.. क्योंकि मैं अब खाना नहीं बना सकती… बहुत थक चुकी हूँ। असल में, अमर बाहर चले गए तथा मैं फिर से सो गई, मैं बहुत थक चुकी थी। हमने अब तक 6 बार सम्भोग किया था, पर अभी तो पूरी निशा बाकी थी। सच कहूं तो, कहते हैं कि हर आने वाला तूफ़ान आने से पहले कुछ इशारा करता है। शायद यह भी एक इशारा ही था कि हम रोज दुनिया भूल कर बस एक-दूसरे के जिस्मों को बेरहमी से कुचलने में लगे थे। लगभग 9 बजे के आस-पास अमर वापस आए फिर हमने बिस्तर पर ही खाना खाया तथा टीवी देखने लगे। मैंने अपने बच्चे को दूध पिलाया तथा सुला दिया। रात के करीब 11 बजे मैंने अमर से कहा- मैं सोने जा रही हूँ। अमर ने कहा- ठीक है.. मैं थोड़ी देर टीवी देख कर सोऊँगा। मैं अभी हल्की नींद में ही थी, तब मेरे बदन पर कुछ रेंगने सा मैंने महसूस किया। मैंने आँख खोल कर देखा तो अमर का हाथ मेरे बदन पर रेंग रहा था। मैंने कहा- अब बस करो.. कितना करोगे.. मार डालोगे क्या? अमर ने कहा- अगर प्यार करने से कोई मर जाता, तो पता नहीं कितने लोग अब तक मर गए होते, एक अकेले हम दोनों ही नहीं हैं इस दुनिया में.. जो प्यार करते हैं। फिर उसने मेरे बदन से खेलना शुरू कर दिया, हम वापस एक-दूसरे से लिपट गए। हम दोनों ऐसे एक-दूसरे को चूमने-चूसने लगे जैसे कि एक-दूसरे में कोई खजाना ढूँढ रहे हों। काफी देर एक-दूसरे को चूमने-चूसने तथा अंगों से खेलने के बाद अमर ने मेरी योनि में लिंग घुसा दिया। अमर जब लिंग घुसा रहे थे तो मुझे दर्द हो रहा था, पर मैं बर्दास्त करने के अलावा कुछ नहीं कर सकती थी। काफी देर सम्भोग के बाद अमर शांत हुए, पर तब मैंने दो बार जल छोड़ दिया था। बिस्तर जहाँ-तहाँ गीला हो चुका था तथा अजीब सी गंध आनी शुरू हो गई थी। कहानी जारी रहेगी। अपने प्यारे ईमेल मुझे लिखें। What did you think of this story