मेरा गुप्त जीवन- 89
जेनी बोली- चलेगा, अगर तुम्हारे साथ सेक्स करना पड़ेगा तो दौड़ेगा। फिर हम दोनों आँखें बंद कर के थोड़ी देर के लिए झपकी लेने लगे। हम 4 घंटे में आगरा के उस होटल में पहुँच गए जहाँ हम सबको ठहरना था। अब फिर मुझको तथा रेनू को कमरे बांटने का काम सौंप दिया गया। हम दोनों ने फिर से कमरे वैसे ही बांटे जैसे दिल्ली में तथा इस बार भी एक युवक अपने रिश्तेदारों के घर रहने चला गया मैडम से पूछ कर!
वो कमरा फिर से मैंने अपने नाम कर दिया। नहा धोकर सब आगरा घूमने के लिए तैयार हो गए तथा फिर बस में बैठ कर हम निकल पड़े। सब दर्शनीय स्थानों को देखने के बाद हम शाम को होटल लौटे। सब काफी ही थके हुए थे तथा अपने कमरों में जाकर आराम करने लगे। सच कहूं तो, मैं अकेला ही था अपने कमरे में तो थोड़ी देर के लिए लेट गया लेकिन थोड़ी बाद दरवाज़ा खटका तथा जब खोला तो पूनम खड़ी थी। मैंने कहा- अंदर आ जाओ!
जैसे ही वो अन्दर आई, मैंने उसको बाहों में भर लिया तथा ताबड़ तोड़ उसके लबों पर चुम्मियों की बौछार कर दी। असल में, मैं भूखे शेर की तरह उसके मुम्मों को ब्लाउज के बाहर से ही चूमने लगा तथा उसके चूतड़ों को साड़ी के ऊपर से ही सहलाने लगा तथा उसका हाथ अपने लौड़े पर रख दिया तथा आँखों ही आँखों में उससे पूछा- हो जाए कुछ?
उस ने भी सर हिला कर अपनी रज़ामंदी दे दी। असल में, अब मैंने अपनी पैंट के बटन खोल कर लंड को बाहर निकाल कर उसके हाथों में रख दिया तथा खुद उसकी सिल्क की साड़ी को ऊपर उठा कर उसको बेड पर हाथों के बल झुकने के लिए कहा। जैसे ही पूनम उस पोजीशन में आई, मैंने अपने अकड़े हुए लंड को चूत के निशाने पर बिठा कर ज़ोर का धक्का मारा तथा लंड फच की ध्वनि से अंदर चला गया। अब मैं थोड़ा पीछे हटा तथा उसकी गोरे चूतड़ों को हाथ से सहलाता हुआ लंड घिसाई में लग गया क्यूंकि मैंने पूनम को 2-3 दिन से नहीं चोदा था तो मेरा लौड़ा तथा मैं स्वयं उसको काफी मिस कर रहे थे। अब लंड महाशय को भी जानी पहचानी चूत में काफी आनन्द आने लगा तथा वो भी बड़े प्रेम से धक्के मारने लगा लेकिन मुझको भी ज़रा डर था कि कोई आ न जाए तथा हमारे पवित्र काम में विघ्न न डाले सो मैं तेज़ धक्केशाही में लग गया। पूनम भी 2 दिन से चुदाई की भूखी थी, वो भी जल्दी ही चरम सीमा पर पहुँचने वाली हो गई थी तथा मेरे तेज़ धक्कों का जवाब वो अपने चूतड़ों को आगे पीछे करके देने लगी। हम चुदाई में इतने मस्त थे कि हम दोनों ने देखा ही नहीं कब अंजलि दरवाज़ा खोल कर अंदर आ गई थी तथा वो मेरे तेज़ी से दौड़ते चूतड़ों को हल्के से हाथ लगाने लगी थी। पहले तो मैं चौंका कि यह कौन अंदर आ गया है तथा डर के मारे मेरी सांस ऊपर नीचे होने लगी लेकिन जब मुझको महसूस हुआ कि वो अंजलि ही है तो मैंने कुछ राहत की सांस ली तथा पूनम की चुदाई जारी रखी। लेकिन पूनम को अभी भी मालूम नहीं हुआ था कि कमरे में कोई आ गया है। मैंने अंजलि को चुप रहने का इशारा किया तथा चुदाई की स्पीड तथा तेज़ कर दी तथा जल्दी ही मुझको लगा कि पूनम कुछ देर में छूटने वाली है। फिर जब मैंने कुछ बड़े ही तेज़ तथा गहरे धक्के मारे तो पूनम का शरीर एक प्यारी से झनझनाहट के बाद एकदम ढीला पड़ गया तथा वो पलंग पर पसर गई। यकीन मानिए, मैंने लंड पूनम की चूत से निकाला तो उसको अंजलि जो मेरे पीछे खड़ी थी उसके हाथ में दे दिया। मैंने अंजलि को एक ज़ोर से जफ़्फ़ी मारी तथा उसको होटों पर गर्म चुम्मी की तथा पूछा- अभी करवाना है या बाद में?
वो बोली- अभी नहीं, मैं काफी थक चुकी हूँ निशा को देखेंगे। लेकिन अभी थोड़ी किसिंग तथा हग्गिंग कर लेते हैं। फिर हम दोनों एक दूसरे को बड़ी हॉट किसिंग तथा जफ़्फ़ी मारते रहे तथा साथ में एक दूसरे के अंगों से भी खेलते रहे। ध्यान देने वाली बात है कि, जब पूनम थोड़ी संयत हुई तो अंजलि उसको लेकर जाने लगी तो मैंने उसको बताया कि आती बार बस में जेनी नाम की युवती मिली थी जो मेरे साथ वाली सीट पर बैठी थी तथा वो भी हमारे ग्रुप में शामिल होना चाहती है, मैंने उसको कहा कि आज निशा को बाकी साथियों से पूछ कर उसको भी ले लेते हैं अपने ग्रुप में! क्यों अंजलि?
अंजलि बोली- ठीक है सोमू, अगर तुम पांच गायों को हरा कर सकते हो तो हमें क्या ऐतराज़ हो सकता है। ध्यान देने वाली बात है कि, मिला देना उसको, बाकी बातें हम उससे कर लेंगे। मैं बोला- रुको तुम दोनों, वो मेरे साथ वाले कमरे में ही है मैं उसको बुला लाता हूँ। मैंने साथ वाला कमरा खटखटाया तथा जेनी ने ही दरवाज़ा खोला तथा मुझको देख कर बोली- आओ सोमू। मैंने कहा- ज़रा मेरे कमरे में आओगी? ग्रुप की हेड आई है, अगर तुम चाहो तो उससे बात कर लो। जेनी बोली- ठीक है। असल में, वो मेरे साथ चल पड़ी तथा मेरे कमरे में उसकी मुलाकात अंजलि तथा पूनम से करवा दी। मैं होटल के रेस्टोरेंट में गया तथा 6 कप चाय का आर्डर दे आया। जब चाय आई तो मैंने पूनम से कहा कि वो बाकी लड़कियों को भी बुला ले, सब मिल कर चाय पिएंगे। शाम के 7 बजे थे सो सब अपनी थकावट मिटाने की कोशिश में थे, चाय को देख कर सब बड़ी खुश हुईं। यकीन मानिए, फिर हमने साथ लाये हुए बिस्कुट तथा केक्स खाए तथा गर्म चाय पी जिसके बाद सब में थोड़ी चुस्ती आ गई। जेनी को भी सबकी रज़ामंदी से हमारे ग्रुप में शामिल कर लिया गया। अंजलि ने कहा- आज चुदाई का प्रोग्राम कैसे बनाया जाए? कैसे कुछ नयापन लाया जाए?
सब लड़कियाँ सोचने लगी फिर जस्सी बोली- क्यों न हम सब फैंसी ड्रेस पहन कर आएँ तथा सोमू जिसको पहचान लेगा उसी के साथ वो करेगा। ध्यान देने वाली बात है कि, क्यूँ कैसा है यह?
अंजलि तथा डॉली बोली- हमको यह नहीं भूलना चाहिए कि हम सब एक होटल में जहाँ हमारे साथ दूसरे स्टूडेंट्स भी हैं तथा प्रोफेसर्स भी हैं। जो हम करें उसमें कम से कम शोर होना चाहिए तथा किसी का ख्वामखाह में ध्यान अपनी तथा आकर्षित नहीं करना चाहिए। मैं बोला- शाबाश डॉली तथा जस्सी, तुम दोनों बिल्कुल ठीक कह रही हो। हमको चुपचाप काम करना चाहिए तथा इसलिए हमको कोई ऐसी हरकत नहीं करनी है जिससे बाकी विद्यार्थी डिस्टर्ब हों। ध्यान देने वाली बात है कि, मैं सोचता हूँ हम अपने अपने कमरे में ही रहें तथा एक एक करके तुम सब मेरे कमरे में आ जाना तथा सरकारी सांड की पूँछ हिला कर अपना काम करवा लेना। सब बोली- यह ठीक है। मैं बोला- यह ग्रुप सेक्स हम सब लखनऊ में मेरी कोठी में भी कर सकते हैं जहाँ जैसे हम चाहें वैसे ही करने में हम को कोई नहीं रोक सकता। यकीन मानिए, सब लड़कियों ने हाँ में सर हिला दिया। आपको बता दूं कि, मैं फिर बोला- आज बारी बारी से तुम मेरा देह शोषण करना तथा अंजलि की ड्यूटी लगाई जायेगी कि वो ‘हर युवती ने कितने धक्के मेरे ऊपर बैठ कर मुझको!’ मारे इसका रिकॉर्ड रखती जाएगी। आज सबसे पहले बारी होगी जेनी की जो ग्रुप में नई है। असल में, ठीक?
सबने ज़ोर से कहा- यस सर!
खाना खाने के बाद हम में से कुछ ताजमहल को चांदनी निशा में देखने के लिए चले गए तथा बाकी सब अपने कमरों में आ गए। ध्यान देने वाली बात है कि, हमारे ग्रुप में से कोई भी ताजमहल नहीं गया निशा को!
होटल के हाल में तरह तरह की गेम्स रखी थी, सब उन को खेलने लगे तथा कुछ होटल के लॉन में घूमने लगे। यकीन मानिए, मैं तथा पूनम होटल के लॉन में बेंच पर बैठ कर बातें करने लगे। वहाँ एक अँगरेज़ जोड़ा भी बैठा था तथा वो खूब एक दूसरे को किसिंग तथा जफ़्फ़ी डाल रहे थे तथा अंग्रेज़ का एक हाथ उसकी साथी की स्कर्ट के अंदर गया हुआ था। यह मैंने पूनम को बताया तथा यह खुले आम होते देख कर दंग रह गई। तब मैंने पूछा- क्या चूत में यह देख कर कुछ हरकत हुई?
वो बोली- हो तो रही है लेकिन तुमने आज दिन को मेरी खुजली काफी मिटा दी थी। सच्ची सोमू, तुम एक दो दिन मुझको नहीं चोदते तो मैं एकदम अधूरी महसूस करती हूँ। मैं बोला- यही हाल मेरा होता है यार पूनम, तुम जब देती हो न तो दिल खोल कर देती हो, तथा ऐसा लगता है कि हम दोनों एक दूसरे के पति पत्नी हैं। फिर हम दोनों मेरे कमरे में आ गए तथा वहाँ पहुँच कर मैंने पूनम को फिर से पकड़ लिया तथा उसके होटों पर चुम्बन करने लगा। थोड़ी देर में अंजलि तथा बाकी सब भी वहाँ आ गए। सब लड़कियों ने अपनी नाईट ड्रेस पहनी हुई थी, वो वहाँ आकर बारी बारी से मुझको किस करने लगी। मैंने भी जेनी को उसके लबों पर एक ज़ोरदार किस की तथा उसके सारे शरीर पर हाथ फेरने लगा। खासतौर से उसके मुम्मों को उन्मुक्त करने की कोशिश करने लगा तथा इस काम में मुझको जस्सी भी मदद कर रही थी तथा डॉली जेनी के चूतड़ों पर हाथ फेर रही थी। सच कहूं तो, अंजलि ने आगे बढ़ कर उसकी नाईट ड्रेस को उसके सर के ऊपर से उतार दिया तथा सब लड़कियाँ इस नई युवती के शरीर के गठन देख कर हैरान हो रही थी। रंग सांवला ज़रूर था तथा शरीर का रंग भी थोड़ा मटमैला था लेकिन शरीर के हर अंग की बनावट देख कर सब लड़कियों विस्मित हो रही थी। असल में, सबसे पहले अंजलि ने उसको लबों पर किस की तथा यह देख कर सब लड़कियाँ भी उसके शरीर को छूने लगी, उसके गोल तथा उन्नत उरोजों के साथ खेलने तथा उनको चूमने लगी। सच कहूं तो, यह देख कर मैंने भी अपने कपड़ों की तरफ देखा तथा जस्सी ने झट आगे बढ़ कर उनको उतारना शुरू कर दिया। जब मेरे लौड़ा पैंट की गिरफ़्त से आज़ाद हुआ तो उसका मुंह सिर्फ जेनी की तरफ ही था। मैंने अंजलि की तरफ देखा तथा उसने हामी में सर हिला दिया तथा फिर मैंने जेनी को अपनी बाहों में भर लिया उसके गर्म गर्म होटों पर एक काफी ही गहरी चुम्मी जड़ दी। मैंने जेनी को अपनी बाँहों में उठा लिया, उसको लेकर मैं बिस्तर पर आ गया। अंजलि ने बाकी लड़कियों को इशारा किया तथा वो एक दूसरी के साथ शुरू हो गईं। मैंने जेनी को लिटा दिया तथा उसके मुम्मों को चूसने लगा तथा उसके गले के नीचे भी चूमना शुरू कर दिया। जस्सी जेनी की चूत के साथ खेल रही थी तथा डॉली जस्सी के मम्मों को चूस रही थी तथा उधर डॉली तथा अंजलि आपस में लगी हुई थी। मैंने जेनी की गोल तथा गुदाज़ जांघों को खोला तथा उनके बीच बैठ गया, लंड को जेनी की चूत के ऊपर रख कर धीरे धीरे उसको अंदर धकेलने लगा। यकीन मानिए, जब वो पूरा अंदर चला गया तो मैं जेनी की टाइट चूत में लंड को धीरे से अंदर बाहर करने लगा। ध्यान देने वाली बात है कि, जेनी की चूत एकदम गीली हो चुकी थी तथा वो सुबह वाली चूत से दोगुना गीली तथा लचकीली थी। मेरा लंड एक बिगड़े हुए घोड़े के समान चुदाई में लगा था तथा बगैर किसी की परवाह किये धक्के पे धक्के मार रहा था। जेनी एक बार छूट चुकी थी तथा दूसरी बार भी छूटने की कगार पर थी। असल में, वो नीचे से बराबर मेरे धक्कों का जवाब दे रही थी लेकिन जब मैंने फुल स्पीड धक्कों की रेलगाड़ी चलाई तो उसके धक्के थम गए तथा सिर्फ मेरे लंड का अंदर बाहर होना ही दिख रहा था, पूनम मेरे चूतड़ों को दबा दबा कर पूरा अंदर जाने का इशारा कर रही थी। कुछ तथा धक्कों के बाद ही जेनी की दोनों टांगें मेरी कमर के इर्दगिर्द फ़ैल गई थी तथा मुझको अपने गिरफ्त में जकड़ लिया था। असल में, जेनी का जब दुबारा छूटा तो वो एकदम से कांप उठी तथा बड़ी देर तक उसका शरीर कंपकंपी करता रहा। अब मैं पलंग पर लेट गया तथा अंजलि को इशारा किया कि वो सब बारी बारी मेरा चोदन करने के लिए तैयार हो जाएँ। जेनी की हॉट चुदाई के बाद सारी लड़कियाँ चुदने के लिए काफी ही अधिक उतावली हो रहीं थी, सबसे पहले डॉली उतरी मैदान में तथा पूनम तथा जस्सी उसको तैयार करने में लग गई, एक उसके मुम्मों को चूसने में लग गई तथा दूसरी उसके चूतड़ों के साथ खेलने लगी। जब वो काफी गीली हो गई तो उसको मेरे ऊपर बिठा दिया दोनों ने मिल कर। मैंने अंजलि को इशारा किया कि वो सब वस्त्र पहन कर बैठें ताकि अगर मैडम चेकिंग पर आती है तो उसको सब नार्मल मिले तथा मेरे बैग से ताश का पैकेट भी निकाल लें तथा उसको खेलने के लिए तैयार रहें। इधर डॉली मेरे ऊपर बैठ कर ऊपर से धक्के मारने लगी लेकिन उसकी कोशिश नाकाम हो रही थी क्यूंकि उसने पहले कभी ऐसे किया नहीं था तो मैंने उसकी मदद करने के लिए नीचे से खुद ही अपना चोदन शुरू कर दिया यानि ज़्यादा धक्के मैंने नीचे से मारने लगा। थोड़ी देर में डॉली ऊपर से चुदाई को समझ गई तथा वो अब अपने आप मुझको चोदने लगी तथा मैं भी नीचे से तेज़ धक्के मारने लगा था। सच कहूं तो, साथ ही मैं उसकी चूत में ऊँगली, उसकी भग को रगड़ने लगा था तथा इस दोतरफा अटैक को डॉली जो वैसे भी कॅाफ़ी गर्म हो चुकी थी ज़्यादा देर बर्दाश्त नहीं कर सकी तथा जल्दी ही स्खलित हो कर मेरे ऊपर ही लेट गई। असल में, थोड़ी देर विश्राम के बाद मैं उठा तथा अपने वस्त्र पहन कर बैठ गया तथा लड़कियों को कहा- नीचे एक चादर बिछा लो, हम सब बैठ कर ताश खेलते हैं। अंजलि ने सवालिया नज़र से मुझको देखा तो मैंने उसको बताया- मुझको ऐसा लगता है आज शायद मैडम कमरों की चेकिंग के लिए आ जाएँ तो तैयार रहना चाहिए। मुझको एक दो कमरे खुलने तथा बंद होने की ध्वनि आई थी तो एहितयात के तौर पर हम ऐसा कर लेते हैं तथा बाद में चुदाई प्रोग्राम फिर शुरू कर देंगे। मैंने कहा- ताश खेलने के साथ हम बातें भी करते जाते हैं। आपको बता दूं कि, तो चलो यह बताओ कि सबसे पहले सेक्स किस के साथ तथा कब किया अगर आपको कोई ऐतराज़ न हो तो? जेनी तुम सबसे पहले बताओ। जेनी बोली- सबसे पहले मेरे साथ एक दूर के एक कजिन ने सेक्स किया। वो ऐसे हुआ कि मेरा कजिन बॉम्बे से अल्मोड़ा घूमने आया हुआ था तथा हमारे घर ही ठहरा हुआ था, देखने में काफी हैंडसम तथा तेज़ तरार युवक लग रहा था लेकिन मुझ पर रोज़ ही लाइन मारता था तथा मैं उसको अक्सर ज़्यादा भाव नहीं देती थी। लेकिन एक दिन जब मैं बाथरूम में नहाने गई तो मुझसे बाथरूम का दरवाज़ा लॉक करना छूट गया तथा जब मैं शरीर में साबुन लगा रही थी वो दरवाज़ा खोल कर अंदर आ गया तथा मुझको अपनी बाहों में उठा कर बेड रूम में ले आया। इससे पहले मैं सम्भल पाती, वो मेरे ऊपर चढ़ बैठा तथा मेरी कौमार्य की झिल्ली तोड़ कर मुझको चोद डाला साले ने!
यह कह कर वो उदास हो गई लेकिन हम सबने उसको तसल्ली दी कि यह तो होना ही था एक दिन!
इतने में मेरे कमरे का दरवाज़ा खटका तथा मैंने फ़ौरन उठ कर दरवाज़ा खोल दिया तो बाहर दोनों मैडम खड़ी थी। मैंने कहा- आइये मैडम जी!
दोनों धड़धड़ाती हुई कमरे में आ गई तथा लड़कियों तथा मुझको देख कर हंस पड़ी तथा बोली- यह चांडाल चोकड़ी क्या कर रही है?
मैं बोला- कुछ नहीं, ताश खेल रहे थे तथा और गपशप मार रहे थे। निर्मल मैडम बोली- कहीं जुआ तो नहीं खेल रहे थे तुम सब?
मैं बोला- यस मैडम, जुआ तो चल रहा है, जो हारेगा या फिर हारेगी उसको एक एक कोका कोला की बोतल देनी होगी हम सबको!
मैंने टेबल पर पड़ी 10-12 बोतलों की तरफ इशारा कर दिया। आपको बता दूं कि, दोनों मैडम बोतलों को देख कर हंसने लगी.
मैंने कहा- क्यों मैडम जी, एक एक कोकाकोला हो जाए दोनों के लिए?
दोनों मैडम हंस पड़ी तथा वापस जाते हुए बोली- वेरी गुड सोमू, तुम एक अच्छे लीडर तथा मित्र भी हो! कैरी ऑन!
मैं उनको दरवाज़े तक छोड़ कर दरवाज़ा बंद कर के वापस वहीं बैठ गया तथा मेरे साथ बैठी पूनम को मैंने एक गहरी जफी मारी तथा उसके होटों को चूम लिया तथा बोला- पून्नो, बाल बाल बचे आज तो! नहीं तो हम सब की बेइज़्ज़ती हो जाती। चलो आओ चुदाई करें। यह सुन कर सब लड़कियाँ खूब हंस पड़ी तथा मैंने अब जस्सी को घेर लिया तथा कहा- ड्रेस मत उतारो, वैसे ही तुम्हारी ले लेते हैं, ले लूँ क्या तुम्हारी?
जस्सी भी बनती हुई बोली- क्या लेना चाहते हो मेरी सोमू राजा?
मैं भी शरारत के लहजे में बोला- वही जो तुम आगे चल कर अपने हसबंड को दोगी, उसमें से थोड़ी सी मुझको दे दो ना प्लीज?
सब लड़कियाँ जस्सी के पीछे पड़ गई तथा हंस कर कहने लगी- दे दो ना ज़ालिम जस्सी, जो सोमू मांग रहा है, नहीं तो हम दे देंगी अपनी उसको!
जस्सी ने मुंह बनाते हुए अपनी ड्रेस को ऊपर किया तथा पलंग के ऊपर झुक गई तथा मैंने उसके पीछे खड़ा होकर अपने खड़े लंड को उसकी चूत में डाल दिया तथा शुरू में धीरे तथा फिर तेज़ तेज़ धक्के मारने लगा। आपको बता दूं कि, उसके चूतड़ों पर हलकी हल्की थपकी मारते हुए मैंने उसको चरम सीमा पर पहुंचा दिया तथा जब वो झड़ी तो मैंने उसको कस कर अपनी बाहों में जकड़ लिया तथा उसकी कम्कम्पी महसूस करने लगा। उसके बाद अंजलि का नंबर लगा तथा उसको भी उसी पोजीशन में मैंने प्रेम से तथा पूरे अख्तयार से ज़ोरदार चोदा। जब वो घुड़सवार भी गिर गई तो बारी पूनम की आई तथा वो कहने लगी- मैं तो घोड़ी चोदन पोजीशन में चुदवाऊँगी। भला मुझको क्या ऐतराज़ हो सकता था, वो फ़ौरन बेड पर घोड़ी बन गई तथा बाकी लड़कियाँ मुझको दूल्हे के रूप में सजाने की कोशिश करने लगी तथा जस्सी की नकली चोटी को मेरे माथे में बाँध कर वो बाकायदा नकली बैंड बजाती हुए मुझको घोड़ी तक ले गई लेकिन तब तक घोड़ी खुद हंसी के मारे लोटपोट हो रही थी तो कहाँ तथा कौन सी घोड़ी पर चढ़ना है, यह भी समझ नहीं आ रहा था। सच कहूं तो, वहाँ एक पुरानी माला पड़ी थी, जेनी ने उसको मेरे खड़े लंड के ऊपर डाल दी तथा क्यूंकि घोड़ी अभी भी हंस रही थी, तो वो सब मुझको पकड़ कर कमरे का एक तथा चक्कर लगाने लगी। जब वापस पहुँचे तो घोड़ी नार्मल हो चुकी थी, 4 लड़कियों ने मुझको उसके ऊपर बैठाने की कोशिश की लेकिन मैंने कहा- मैं खुद बैठ जाऊँगा, अब मेरी सुहागरात शुरू हो रही है, सब मेहमान घर जाएँ। पूनम की सवारी करते हुए मैंने दो बार गिरने का नाटक किया तथा फिर लंड को चूत के मुंह पर रख कर ज़ोर का धक्का मार तथा जस्सी के मुंह से ध्वनि निकली- मार डाला साले ने उफ्फ्फ मेरी माँ!
मैं भी मज़ाक में बोला- अगर दर्द हो रहा हो तो निकाल लूँ क्या?
अब अंजलि को कहा- धक्कों की गिनती करती जाओ ताकि पूनम की डिग्री में यह स्वर्ण अक्षरों में लिखा जाए कि- यह छात्रा 101 नंबरों से पास हुई। तब सब लड़कियाँ धीरे धीरे धक्कों की गिनती बोलती रही तथा जब मेरी स्पीड काफी तेज़ हो गई तो धक्कों की गिनती कर पाना मुश्किल हो गया तथा जस्सी अब पूनम के चूतड़ों पर ज़ोर ज़ोर से हाथों की थपकी भी मार रही थी। थोड़ी देर में 110 की गिनती के बाद पूनम धराशयी हो गई तथा उसकी चूत ने अपनी हार मान ली। इस तरह आगरा की वो निशा समाप्त हुई तथा अगले दिन का प्रोग्राम केवल आगरा शहर घूमने का था तो जल्दी उठने की कोई बंदिश नहीं थी। मैं लड़कियों को उनके कमरों में छोड़ कर वापस आकर गहरी नींद में सो गया। कहानी जारी रहेगी। यकीन मानिए, [email protected]
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